Bihar Board Class 10 Geography Solutions Chapter 1A प्राकृतिक संसाधन

Bihar Board Class 10 Social Science Solutions Geography भूगोल : भारत : संसाधन एवं उपयोग Chapter 1A प्राकृतिक संसाधन Text Book Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 10 Social Science Geography Solutions Chapter 1A प्राकृतिक संसाधन

Bihar Board Class 10 Geography प्राकृतिक संसाधन Text Book Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
पंजाब में भूमि निम्नीकरण का मुख्य कारण है ?
(क) वनोन्मूलन
(ख) गहन खेती
(ग) अतिपशुचारण
(घ) अधिक सिंचाई
उत्तर-
(क) वनोन्मूलन

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प्रश्न 2.
सोपानी कृषि किस राज्य में प्रचलित है ?
(क) हरियाणा
(ख) पंजाब
(ग) बिहार का मैदानी क्षेत्र
(घ) उत्तराखंड
उत्तर-
(ग) बिहार का मैदानी क्षेत्र

प्रश्न 3.
मरुस्थलीय मृदा का विस्तार निम्न में से कहाँ है ?
(क) उत्तर प्रदेश
(ख) राजस्थान
(ग) कर्नाटक
(घ) महाराष्ट्र
उत्तर-
(ख) राजस्थान

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प्रश्न 4.
मेढक के प्रजनन को नष्ट करने वाला रसायन कौन है ?
(क) बेंजीन
(ख) यूरिया
(ग) एड्रिन
(घ) फास्फोरस .
उत्तर-
(ग) एड्रिन

प्रश्न 5.
काली मृदा का दूसरा नाम क्या है ?
(क) बलुई मिट्टी
(ख) रेगुर मिट्टी
(ग) लाल मिट्टी
(घ) पर्वतीय मिट्टी
उत्तर-
(ख) रेगुर मिट्टी

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
जलोढ़ मिट्टी के विस्तार वाले राज्यों के नाम बतावें। इस मृदा में कौन-कौन सी फसलें लगायी जा सकती हैं ?
उत्तर-
बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक, असम, बंगाल इत्यादि राज्यों में जलोढ़ मिट्टी का विस्तार है। इस मृदा में गन्ना, चावल, गेहूँ, मक्का, दलहन इत्यादि फसलें उगाई जाती हैं।

प्रश्न 2.
समोच्च कृषि से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-
पहाड़ी ढलानों पर जल के तेज बहाव से बचने के लिए सीढ़ीनुमा ढाल बनाकर की जाने वाली खेती को समोच्च कृषि कहते हैं। इससे मृदा अपरदन को रोका जा सकता है।

प्रश्न 3.
पवन अपरदन वाले क्षेत्र में कृषि की कौन-सी पद्धति उपयोगी मानी जाती है?
उत्तर-
पवन अपरदन वाले क्षेत्रों में पट्टिका कृषि श्रेयस्कर है, जो फसलों के बीच घास की पट्टियाँ विकसित कर की जाती हैं।

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प्रश्न 4.
भारत के किन भागों में डेल्टा का विकास हुआ है ? वहाँ की मदा की क्या विशेषता है?
उत्तर-
गंगा नदी द्वारा पश्चिम बंगाल में, महानदी, कृष्णा, कावेरी और गोदावरी नदियों द्वारा पूर्वी तटीय मैदान में डेल्टा का निर्माण हुआ है।
इन क्षेत्रों में जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है। इस मिट्टी का गठन बालू, सिल्ट एवं मृतिका के विभिन्न अनुपात से होता है। इसका रंग धुंधला से लेकर लालिमा लिये भूरे रंग का होता है।

प्रश्न 5.
फसल चक्रण मृदा संरक्षण में किस प्रकार सहायक है ?
उत्तर-
दो धान्य फसलों के बीच एक दलहन की फसल को उगाना, फसल चक्रण कहलाता है। इसके द्वारा मृदा के पोषणीय स्तर को बरकरार रखा जा सकता है, क्योंकि दलहनी पौधों की जड़ों में नाइट्रोजनी स्थिरीकारक जीवाणु पाये जाते हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
जलाक्रांतता कैसे उपस्थित होता है ? मृदा अपरदन में इसकी क्या भूमिका है ?
उत्तर-
अति सिंचाई से जलाक्रांतता की समस्या पैदा होती है। पंजाब, हरियाणा और प. उत्तर प्रदेश में इससे भूमि का निम्नीकरण हुआ है।
जलाक्रांतता से मृदा में लवणीय और क्षारीय गुण बढ़ जाते हैं जो भूमि के निम्नीकरण के लिए उत्तरदायी होते हैं। इससे मृदा की उर्वरा शक्ति घटते जाती है और भूमि धीरे-धीरे बंजर हो जाती है।
जलाक्रांतता एक बड़ी समस्या है जो मृदा अपरदन में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करती है।

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प्रश्न 2.
मृदा संरक्षण पर. एक निबंध लिखिए।
उत्तर-
मृदा पारितंत्र का एक महत्वपूर्ण घटक है। यह न केवल पौधों के विकास का मध्यम है। बल्कि पृथ्वी पर विविध जीव समुदायों का पोषण भी करती है। मृदा में निहित उर्वरता मानव के आर्थिक क्रियाकलाप को प्रभावित करती है और देश की नियति का भी निर्धारण करती है। मृदा निर्माण एक लंबी अवधि में पूर्ण होने वाली जटिल प्रक्रिया है। इसके नष्ट होने के साथ संपत्ति एवं संस्कृति दोनों ध्वस्त हो जाती है।

मदा का अपने स्थान से विविध क्रियाओं द्वारा स्थानांतरित होना भ-क्षरण कहलाता है। यह मृदा की एक बहुत बड़ी समस्या है। मृदा का क्षरण कई कारणों जैसे वायु और जल के तेज बहाव से, जलक्रांतता से, अतिपशुचारण से, खनन रसायनों का अत्यधिक उपयोग जैसी मानवीय अनुक्रियाओं द्वारा होता है। – वृक्षारोपण, पट्टिका कृषि, फसलचक्रण, समोच्च कृषि इत्यादि द्वारा भू-क्षरण को रोकना मृदा संरक्षण का मुख्य तरीका है।

वृक्षारोपण मृदा संरक्षण की सबसे बड़ी शर्त है; जिससे मृदा को बाधा पहुँचती है और इनकी पत्तियों से प्राप्त ह्यूमस मृदा की गुणवत्ता को बढ़ाने में सहायक होते हैं।

रासायनिक खाद की जगह जैविक खाद का उपयोग मृदा संरक्षण में सहायक होता है।

प्रश्न 3.
भारत में अत्यधिक पशुधन होने के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था में इसका योगदान लगभग नगण्य है। स्पष्ट करें।
उत्तर-
भारत में पशुधन के मामले में विश्व के अग्रणी देशों में शामिल किया जाता है। किन्तु स्थायी चारागाह के लिए बहुत कम भूमि उपलब्ध है जो पशुधन के लिए पर्याप्त नहीं है। अतः पशुपालन पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। वर्तमान में परती के अतिरिक्त अन्य परती भूमि अनुपजाऊ है। ऐसी भूमि में दो तीन वर्ष में अधिक से अधिक दो बार बोया जा सकता है। अगर ऐसी भूमि को भी शुद्ध बोया गया क्षेत्र में शामिल कर लिया जाय तब भी वर्तमान उपलब्ध क्षेत्रफल का मात्र 54% भूमि ही कृषि योग्य है।

भारतीय अर्थव्यवस्था में पशुधन का नगण्य योगदान का कारण निम्न है-

  • उन्नत पशुनस्लों की अपर्याप्तता।
  • चारागाह के लिए भूमि की कमी।
  • वैज्ञानिक प्रणाली एवं तकनीकी ज्ञान का अभाव।
  • बढ़ती जनसंख्या का अति दबाव।
  • पूँजी का अभाव इत्यादि।

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परियोजना कार्य

प्रश्न 1.
अपने आस-पास के क्षेत्र में उपलब्ध मृदा संसाधन के उपयोग एवं संरक्षण हेतु एक परियोजना तैयार करें।
उत्तर-
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 2.
ग्राम प्रतिनिधि, विद्यालय प्रधान से मिलकर संसाधन संरक्षण एवं प्रबंधन पर एक संगोष्ठी का आयोजन करें।
उत्तर-
छात्र स्वयं करें।

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Bihar Board Class 10 Geography प्राकृतिक संसाधन Additional Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
इनमें काली मिट्टी का क्षेत्र कौन है ?
(क) छोटानागपुर
(ख) महाराष्ट्र
(ग) गंगाघाटी
(घ) अरूणाचल प्रदेश
उत्तर-
(क) छोटानागपुर

प्रश्न 2.
प्रायद्वीपीय भारत की नदीघाटियों में कौन-सी मिट्टी मिलती है ?
(क) काली
(ख) लाल
(ग) रेतीली
(घ) जलोढ़
उत्तर-
(घ) जलोढ़

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प्रश्न 3.
भारत में चारागाह के अन्तर्गत कितनी भूमि है ?
(क) 4%
(ख) 12%
(ग) 19%
(घ) 26%
उत्तर-
(क) 4%

प्रश्न 4.
इनमें कौन उपाय भूमि-हास के संरक्षण में उपयुक्त हो सकता है ?
(क) भूमि को जलमग्न बनाए रखना
(ख) बाढ़ नियंत्रण
(ग) जनसंख्या वृद्धि की दर में तेजी लाना
(घ) इनमें कोई नहीं
उत्तर-
(ख) बाढ़ नियंत्रण

प्रश्न 5.
भारत में पहाड़ों से भरी भूमि का प्रतिशत क्या है ?
(क) 10
(ख) 27
(ग) 30
(घ) 48
उत्तर-
(ख) 27

अतिलघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
भारत के राष्ट्रीय उत्पादन में कृषि-क्षेत्र का योगदान कितना प्रतिशत है ?
उत्तर-
भारत के राष्ट्रीय उत्पादन में कृषि-क्षेत्र का योगदान लगभग 22 प्रतिशत है।

प्रश्न 2.
भारत की प्रमुख भू-आकृतियों के नाम लिखें।
उत्तर-
भारत की प्रमुख भू-आकृतियों के नाम ये हैं (i) पर्वतीय क्षेत्र – 30% (ii) मैदानी क्षेत्र – 43% (iii) पठारी क्षेत्र – 27%।

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प्रश्न 3.
एक वर्ष से भी कम समय तक जिस खेत से फसल-उत्पादन न हो रहा हो उसका क्या नाम है?
उत्तर-
एक वर्ष से भी कम समय तक जिस खेत से फसल-उत्पादन न हो रहा हो उसे ‘वर्तमान परती’ कहते हैं।

प्रश्न 4.
किन दो राज्यों में सबसे अधिक व्यर्थ भूमि पायी जाती है ?
उत्तर-
जम्मू कश्मीर (60%) और राजस्थान (30%) में सबसे अधिक व्यर्थ भूमि पायी जाती है।

प्रश्न 5.
क्षारीय मिट्टी का pH मान 7 से अधिक होता है या कम?
उत्तर-
क्षारीय मिट्टी का pH मान 7 से अधिक होता है।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
भूमि किस प्रकार महत्वपूर्ण संसाधन है ?
उत्तर-
भूमि एक महत्वपूर्ण संसाधन है। भूमि पर ही मिट्टी मिलती है जिसमें कृषि-कार्य की जाती है। भूमि पर कृषि-कार्य करने से मनुष्यों को अन्न की प्राप्ति होती है। भूमि पर ही मानव-आवास मिलता है, गाँव-नगर बसते हैं। भूमि पर ही मनुष्य अपना मकान बनाकर उसमें रहते हैं। जो जंगली और खतरनाक पशुओं से उनकी रक्षा करता है। भूमि पर ही पशुपालन होता है। भूमि पर ही मनुष्य पालतू पशुओं को दूध, ऊन, चमरे, मांस इत्यादि की प्राप्ति के लिए पालते हैं। पशु मनुष्य के लिए बहुत उपयोगी होते हैं, जो मनुष्य के कृषि-कार्य करने में सहायक होते हैं, भूमि पर ही मनुष्य द्वारा वाणिज्य-व्यवसाय किया जाता है, व्यवसाय करने से मनुष्य को अन्न की प्राप्ति होती है। भूमि पर ही मनुष्यों द्वारा तरह-तरह के उद्योग-धन्धे चलाए जाते हैं। उद्योग-धन्धे करने से मनुष्य को आर्थिक लाभ होता है, आर्थिक लाभ होने से मनुष्य का आर्थिक विकास होता है और मनुष्य के आय में वृद्धि होती है। मनुष्य के आय में वृद्धि होने से देश के राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है, अत: इस प्रकार यह स्पष्ट है कि भूमि एक महत्वपूर्ण संसाधन है।

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प्रश्न 2.
किन सुविधाओं के कारण भारत में गहन कृषि की जाती है?
उत्तर-
भारत में तेजी से बढ़ती जनसंख्या का दबाव और सीमित कृषि योग्य भूमि के कारण गहन कृषि की जाती है।
भारत मॉनसूनी वर्षा वाला देश है। वर्षा एक विशेष मौसम में होती है और अनियमित रूप से होती है वहीं बाढ़ जैसी समस्या उत्पन्न हो जाती है और वर्षा का अभाव देखने को मिलता है। ऐसे क्षेत्रों में सिंचाई का सहारा लिया जाता है। हिमालय से निकलने वाली नदियाँ सदा जलपूरित रहती हैं। उन नदियों पर बाँध बनाकर नहरें निकाली जाती हैं और उससे जलाभाव क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा प्रदान की जाती है। भारत के मैदानी भागों में जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है जो अत्यन्त उपजाऊ है। इन्हीं कारणों से भारत में गहन कृषि की जाती है।

प्रश्न 3.
भौतिक गुणों के आधार पर मिट्टी के तीन वर्ग कौन-कौन हैं ? गंगा के मैदान में सामान्यतः इनमें से कौन मिट्टी पायी जाती है ?
उत्तर-
भौतिक गुणों के आधार पर मिट्टी के तीन वर्ग ये हैं ।

  • बलुई मिट्टी (Sandy Soil)-इसमें पंक (मृत्तिका, चिकनी मिट्टी) की अपेक्षा बालू का प्रतिशत अधिक रहता है, यह मिट्टी जल की बड़ी भूखी होती है, अर्थात बहुत जल सोखती है।
  • (चीका या चिकनी मिट्टी (Clayey Soil)- इसमें पंक या गाद (Silt) का प्रतिशत अधिक रहता है। यह मिट्टी सूखने पर बहुत कड़ी और दरार युक्त होती है तथा गीली होने पर चिपचिपी और अभेद्य हो जाती है। इस मिट्टी की जुतायी कठिन होती है।
  • दुमटी मिट्री (Loamy Soil)-इसमें बालू और पंक दोनों का मिश्रण लगभग बराबर रहता है। कृषि के लिए यह मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है। क्योंकि इसमें गहरी जुताई हो सकती है।
    गंगा के मैदान में सामान्यतः दुमटी मिट्टी पायी जाती है।

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प्रश्न 4.
स्थानबद्ध और वाहित मिट्टी में क्या अन्तर है?
उत्तर-
स्थानबद्ध मिट्टी वह है जो ऋतुक्षरण के ही क्षेत्र में पायी जाती है। यह पर्शिवका मिट्टी होती है। इसमें आधारभूत चट्टान और मिट्टी के खनिज कणों में समरूपता होती है। काली मिट्टी, लाल मिट्टी तथा लैटेराइट मिट्टी इसके उदाहरण हैं।

वाहित मिट्टी वह है जिसका ऋतुक्षरण तथा विकास किसी दूसरे प्रदेश में हुआ है किन्तु अपरदन दूतों द्वारा उसे किसी दूसरे प्रदेश में निक्षेपित किया गया है। चूँकि इसका परिवहन होता है, इसलिए इसे वाहित मिट्टी कहते हैं। ये मिट्टियाँ मौलिक चट्टानों से विसंगति रखती हैं। जलोढ़ मिट्टी इसका सर्वोत्तम उदाहरण है। भारत का वृहद् जलोढ़ मैदान उस मिट्टी का बना है जिसका ” निक्षेप गंगा और उसकी सहायक नदियों तथा पठारी भारत के उत्तर बहने वाली नदियों से हुआ है। भारत के तटीय मैदान में भी वाहित जलोढ़ मिट्टी ही पायी जाती है।

प्रश्न 5.
भारत में लाल मिट्टी और काली मिट्टी के प्रमुख क्षेत्र बताएँ।
उत्तर-
लाल मिट्टी के प्रमुख क्षेत्र-यह मिट्टी दक्कन पठार, पूर्वी और दक्षिणी भागों के 100 सेमी से कम वर्षा के क्षेत्रों में पायी जाती है।
काली मिट्टी के प्रमुख क्षेत्र यह मिट्टी महाराष्ट्र का बड़ा भाग, गुजरात का सौराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, आन्ध्र प्रदेश में कृष्णा और गोदावरी घाटी, तमिलनाडु उत्तर प्रदेश, राजस्थान के मालवा खण्ड में पायी जाती है।

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दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
भारतीय मिटियों के तीन प्रमुख प्रकार कौन-कौन हैं ? उनका निर्माण किस प्रकार हुआ है ?
उत्तर-
भारतीय मिट्टियों के तीन प्रमुख प्रकार ये हैं (i) जलोढ़ मिट्टी, (ii) काली मिट्टी, (iii) लाल मिट्टी।
इन तीनों प्रकार की मिट्टियों से संबंधित निर्माण की प्रक्रिया को निम्नलिखित विचार-बिंदुओं द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है

(i) जलोढ़ मिट्टी भारत में यह मिट्टी विस्तृत रूप से फैली हुयी है और उपजाऊ होने के कारण कृषि कार्य के लिए यह अधिक महत्वपूर्ण है। नदियों द्वारा बहाकर लायी गयी मिट्टी बाढ़ में उसके बेसिन में जमा हो जाती है। साथ ही समुद्री लहरें अपने तटों पर ऐसी ही मिट्टी की परत जमा कर देती हैं जिससे जलोढ़ मिट्टी का निर्माण होता है। मिट्टी की आयु के आधार पर जलोढ़ मिट्टी को बांगर और खादर कहा जाता है। बिहार में बालू मिश्रित जलोढ़ मिट्टी को दियारा की मिट्टी कहा जाता है।

(ii) काली मिट्टी स्थानीय स्तर पर काली मिट्टी को रेगुढ़ भी कहा जाता है। काली मिट्टी का निर्माण दक्षिणी क्षेत्र के लावा (बेसाल्ट क्षेत्र) वाले भागों में हुआ है जहाँ अर्द्धशद्ध भागों में इसका रंग काला पाया जाता है। इसमें लोहा, ऐलुमिनियमयुक्त पदार्थ टाइटैनोमैग्नेटाइट के साथ जीवांश तथा ऐलुमिनियम के सिलिकेट मिलने के कारण इसका रंग काला होता है। इसमें पोटाश, चूना, ऐलुमिनियम, कैल्सियम और मैग्नीशियम के कार्बोनेट प्रचुर मात्रा में होते हैं।

(iii) लाल मिट्टी भारत के विस्तृत क्षेत्र में भी यह मिट्टी पायी जाती है। इसका निर्माण लोहे और मैग्नीशियम के खनिजों से युक्त रवेदार और रूपांतरित आग्नेय चट्टानों के द्वारा होता है। इसका रंग लोहे की उपस्थिति के कारण लाल होता है, अधिक नम होने पर इसका रंग पीला भी हो जाता है। यह मिट्टी ग्रेनाइट चट्टाने के टूटने से बनी मिट्टी है। इसकी बनावट हल्की रंध्रमय और मुलायम है।

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प्रश्न 2.
काली मिट्टी और लाल मिट्टी की अलग-अलग विशेषताओं पर प्रकाश डालें। भारत में उनके अलग-अलग क्षेत्रों का उल्लेख करें।
उत्तर-
भारत में काली मिट्टी और लाल मिट्टी प्रचुर मात्रा में पायी जाती है। इन मिट्टियों की विशेषताओं और पाए जाने वाले क्षेत्रों का अलग-अलग वर्णन निम्नलिखित है
(i) काली मिट्टी की विशेषताएं निम्न हैं

  • इनमें ममी बनाए रखने की क्षमता होती है।
  • काली मिट्टी सूखने पर बहुत कड़ी हो जाती है।
  • इसका रंग काला होता है, क्योंकि इसमें लोहा, ऐलुमिनियमयुक्त पदार्थ टाइटैनोमैग्नेटाइट के साथ जीवांश तथा ऐलुमिनियम के सिलिकेट मिलते हैं।
  • काली मिट्टी कपास और गन्ने की खेती के लिए बहुत सर्वोत्तम है।
  • भींगने पर यह मिट्टी चिपचिपी हो जाती है। परन्तु सूखने पर इसमें गहरी दरारें पड़ती। हैं। इससे हवा का नाइट्रोजन इसे प्राप्त होता है।

काली मिट्टी महाराष्ट्र, गुजरात का सौराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, आन्ध्र प्रदेश, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, राजस्थान इत्यादि क्षेत्रों में पायी जाती है।

(ii) लाल मिट्टी की विशेषताएँ निम्न हैं-

  • इस मिट्टी का रंग लोहे की उपस्थिति के कारण लाल होता है। साथ ही अधिक नमी होने पर इसका रंग पीला भी हो जाता है।
  • इस मिट्टी की बनावट हल्की रंध्रमय और मुलायम होती है।
  • इसमें खनिजों की मात्रा कम है, कार्बोनेटों का अभाव है, साथ ही नाइट्रोजन और फॉस्फोरस भी नहीं होता है। जीवांश तथा चूना भी कम मात्रा में उपलब्ध होता है।
  • इस मिट्टी में हवा मिली होती है, अत: बुआई के बाद सिंचाई करना आवश्यक है जिससे बीज अंकुरित हो सके।
  • इस मिट्टी में सिंचाई की अधिक आवश्यकता पड़ती है क्योंकि यह मिट्टी कम उपजाऊ होती है।

लाल मिट्टी दक्कन पठार, पूर्वी और दक्षिणी भागों के 100 सेमी. से कम वर्षा के क्षेत्रों में पायी जाती है। तमिलनाडु के दो-तिहाई भाग में यह मिट्टी पायी जाती है। इसका विस्तार पूरब में राजमहल का पहाड़ी क्षेत्र, उत्तर में झाँसी, पश्चिम में कच्छ तथा पश्चिमी घाट के पर्वतीय ढालों तक है।

प्रश्न 3.
भारत में जलोढ़ मिट्टी कहाँ-कहाँ पायी जाती है ? इनमें सबसे बड़ा क्षेत्र कौन है ? इस मिट्टी की विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर-
जलोढ़ मिट्टी-भारत में यह मिट्टी नदियों द्वारा बहाकर लाई गई और नदियों के बेसीन में जमा की गई मिट्टी है। समुद्री लहरों के द्वारा भी ऐसी मिट्टी तटों पर जमा की जाती है।

भारत में जलोढ़ मिट्टी के निम्नलिखित मुख्य क्षेत्र हैं-

  • सतलज, गंगा और ब्रह्मपुत्र की घाटियों का क्षेत्र,
  • नर्मदा और ताप्ती घाटियों का क्षेत्र
  • महानदी, गोदावरी, कावेरी, कावेरी का डेल्टाई क्षेत्र। भारत में जलोढ मिट्टी का सबसे बडा क्षेत्र सतलज, गंगा और ब्रह्मपत्र की घाटियों का क्षेत्र है।

इस मिट्टी की विशेषता यह है कि इसमें सभी प्रकार के खाद्यान्न, दलहन, तेलहन, कपास, गन्ना, जूट और सब्जियाँ ऊगाई जाती हैं। इसमें नाइट्रोजन और फास्फोरस की कमी पाई जाती है जिसके लिए उर्वरक का सहारा लेना पड़ता है। आयु के आधार पर इसे बांगर और खादर के रूप में बांटा जाता है।

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Bihar Board Class 10 Geography प्राकृतिक संसाधन Notes

  • भारत में कुल उपलब्ध भूमि का लगभग 43 प्रतिशत भाग पर मैदान का विस्तार है, जो बारहमासी नदियों को सुनिश्चित करता है। 27 प्रतिशत भूभाग पठार के रूप में विस्तृत है, जहाँ खनिज, जीवाश्म, ईंधन एवं वन सम्पदा के कोष संचित हैं।
  • भारत में छः प्रमुख प्रकार की मृदा पाई जाती है (i) जलोढ़ मृदा (ii) काली मृदा (iii) लाल एवं पीली मृदा (iv) लैटेराइट मृदा (v) मरुस्थलीय मृदा (vi) पर्वतीय मृदा।
  • भूक्षरण के कारण निम्न हैं-वनोन्मूलन, अतिपशुचारण, खनन, रसायनों का अत्यधिक उपयोग इत्यादि।
  • भूक्षरण रोकने या मृदा संरक्षण के उपाय निम्न हैं-
    वृक्षारोपण, फसलचक्रण, समोच्च कृषि, पट्टिका कृषि, जैविक खाद का उपयोग इत्यादि।
  • भूमि एक प्रकृति-प्रदत्त संसाधन है, क्योंकि प्रकृति ने ही भूमि की सृष्टि की है।
  • मनुष्य भूमि-संतान है, क्योंकि भूमि पर ही मनुष्य अपनी सारी आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए क्रियाकलाप करता है।
  • भूमि एक महत्वपूर्ण प्रकृति-प्रदत्त संसाधन है। भूमि पर ही मिट्टी मिलती है जिसमें कृषि की जाती है। साथ ही भूमि पर ही मानव आवास मिलता है। गाँव-नगर बसते हैं। पशुपालन का काम होता है और वाणिज्य-व्यवसाय, उद्योग-धन्धे चलते हैं।
  • भूमि पर ही आने-जाने के लिए मार्ग उपलब्ध होते हैं।
  • भूमि के गर्भ में ही सभी खनिज-पदार्थ के भण्डार पाए जाते हैं जिन्हें आधुनिक तकनीक  के आधार पर उन्हें भूमि से निकाला जाता है।
  •  विश्व-स्तर पर कृषि-भूमि का 11.9 प्रतिशत भाग भारत के पास है जिसका समुचित उपयोग करके खाद्यान्न फसलों तथा व्यावसायिक फसलों को उपजाया जाता है।
  • भूमि मनुष्य के आर्थिक विकास का आधार है। क्योंकि भूमि पर ही कृषि-कार्य किए जाते हैं, उद्योग के क्षेत्र और व्यापार-केंद्र भी भूमि पर ही अवस्थित हैं। खनिज क्षेत्र भूमि पर ही पाए जाते हैं।
  • विश्व में 1137 करोड़ हेक्टेयर भूमि कृषि-कार्य के लिए उपयुक्त है जो कि विश्व के विभिन्न देशों में उपलब्ध है।
  • भारत के भू-भाग का क्षेत्रफल 32.87 करोड़ हेक्टेयर है। इसमें 47% भूमि पर कृषि कार्य की जाती है।
  • भूमि की उर्वरा-शक्ति बनाए रखने के लिए उसका संरक्षण करना भी आवश्यक है। भूमि का संरक्षण होने से सृष्टि की इस अनमोल देन को सुरक्षित रखा जा सकता है।
  • उपयोग के आधार पर भूमि को पाँच वर्गों में बाँटा जा सकता है-(i) वन-क्षेत्र (ii) निवल ‘बोई भूमि (iii) परती भूमि के अतिरिक्त अन्य बिना जोती जानेवाली भूमि (v) अकृषीय भूमि।
  • भारत के राष्ट्रीय उत्पादन में कृषि का योगदान 22% है तथा रोजमार के अवसर में इसका योगदान 65% है।
  • भारत के चार राज्यों मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश का क्षेत्रफल बहुत अधिक है और इनकी अधिकांश भूमि पर खेती की जाती है।
  • जलवायु की दशायें भूमि उपयोग को प्रभावित करती हैं। मैदानी भूमि पर भी अनुकूल जलवायु न मिले तो कृषि-कार्य सुचारु रूप से नहीं किया जा सकता है।
  • छोटे राज्यों पंजाब और हरियाणा की प्रायः 80% भूमि पर फसलें उगायी जाती हैं।
  • उत्तराखण्ड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, नागालैण्ड तथा अण्डमान निकोबार द्वीप समूह में 10% भूमि पर ही कृषि-कार्य की जाती है।
  • पहाड़ी भूमि की अपेक्षा मैदानी भूमि का उपयोग अधिक होता है। मैदानी भूमि में लोग अधिक रहते हैं।
  • नेशनल रिमोट सेंसिग एजेंसी (NRSA) हैदराबाद के अनुसार भारत में 533 लाख हेक्टेयर भूमि व्यर्थ है।
  • भारत में कुल भौगोलिक क्षेत्र का 20.60% वन क्षेत्र हैं।
  • भारत सरकार की वन नीति के अनुसार कम-से-कम 33% भू-भाग वनाछादित रहना चाहिए।
  • भूमि उपयोग का प्रारूप भू-आकृतिक स्वरूप जलवायु मिट्टी और मानव प्रश्नों के अन्तसंबंधों का परिणाम होता है।
  • पारिस्थितिक संतुलन के दृष्टिकोण से एक-तिहाई भूमि पर वनों का वितरण होना चाहिए। लेकिन भारत के कितने ही राज्य में नाममात्र के वन हैं। इसलिए वन-क्षेत्र के भूमि को बढ़ाना चाहिए। यानी वन-क्षेत्र को बढ़ाना चाहिए।
  • भूमि पर बढ़ते हुए जनसंख्या के दबाव को देखते हुए भूमि उपयोग की योजना बनाना आवश्यक है।
  • प्रति वर्ष भारत की जनसंख्या बढ़ जाने के कारण प्रति व्यक्ति भूमि की कमी होती जा रही है। कल-कारखानों के बढ़ने तथा नगरों के विकास से भी भूमि का ह्रास हुआ है। इसलिए भूमि के बढ़ते ह्रास को रोकना आवश्यक है।
  • भारत में लगभग 13 करोड़ हेक्टेयर भूमि का निम्नीकरण हुआ है। इससे भूमि के ह्रास की स्थिति उत्पन्न हुयी है।
  • भारत की क्षतिग्रस्त भूमि लगभग 13 करोड़ हेक्टेयर है। इसका 28% वन भूमिक्षरण से, 10% पवन अपरदन से, 56% जल से और शेष 6% लवण तथा क्षारीय निक्षेपों से प्रभावित है।
  • भारत में भूमि के ह्रास को रोकने के लिए कुछ उपाय करना चाहिए, जैसे-उपजाऊ भूमि पर कल-कारखाने और मकान नहीं बनाना चाहिए, जनसंख्या की वृद्धि दर में कमी लाना चाहिए, भूमि के कटाव को रोकना चाहिए, प्राकृतिक आपदाओं से भूमि की रक्षा करनी चाहिए पहाड़ी क्षेत्रों में सीढ़ीनुमा खेत बनाकर और पेड़ लगाकर भूमि के ह्रास को रोका जा सकता है।
  • पृथ्वी की ऊपरी सतह जिस पर वनस्पतियाँ उगती हैं, कृषि-कार्य किया जाता है, उसे मिट्टी कहा जाता है।
  • मृदा एक सजीव पदार्थ है, क्योंकि इसमें अनेक जैविक पदार्थों का निवास है।
  • मृदा पृथ्वी का नैसर्गिक आवरण है जिसमें चट्टानों और खनिजों के सूक्ष्म कण, नष्ट हुयी वनस्पतियाँ, अनेक जीवित सूक्ष्म पदार्थ, छोटे जीव और कार्बनिक पदार्थ उपस्थित रहते हैं।
  • मिट्टी के कई वर्ग हैं जो उत्पत्ति और गुणों के आधार पर प्रस्तुत किए जाते हैं।
  • मृदा निर्माण के विभिन्न कारक होते हैं, जैसे-खनिजों का छोटे कण में बदलना, रासायनिक प्रक्रिया इत्यादि।
  • मृदा निर्माण के पाँच मुख्य घटक हैं (i) स्थानीय जलवायु, (ii) पूर्ववर्ती चट्टानें और खनिज कण (iii) वनस्पति और जीव (iv) भू-आकृति और ऊँचाई (v) मिट्टी बनने का समय।

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण

Bihar Board Class 11 Economics आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
दंड-आरेख –
उत्तर:
एक विमीय आरेख है।

प्रश्न 2.
आयत चित्र के माध्यम से प्रस्तुत किए गए आँकड़ों द्वारा हम आलेखी रूप में निम्नलिखित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं –
उत्तर:
मध्यिका

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प्रश्न 3.
तोरणों के द्वारा आलेखी रूप में निम्न की स्थिति जानी जा सकती है –
उत्तर:
माध्यिका

प्रश्न 4.
अंकगणितीय रेखाचित्र के द्वारा प्रस्तुत आँकड़ों से निम्न को समझने में मदद मिलती है
उत्तर:
दीर्घकालिक प्रवृत्ति

प्रश्न 5.
दंड-आरेख के दंडों की चौड़ाई का एक समान होना जरूरी नहीं है।
उत्तर:
सही

प्रश्न 6.
आयत चित्र में आयतों की चौड़ाई अवश्य एक समान होनी चाहिए।
उत्तर:
गलत

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प्रश्न 7.
आयत चित्र की रचना केवल आँकड़ों के सतत वर्गीकरण के लिए की जा सकती है।
उत्तर:
सही

प्रश्न 8.
आयत चित्र एवं स्तंभ आरेख आँकड़ों को प्रस्तुत करने के लिए एक जैसी: विधियाँ है।
उत्तर:
सही

प्रश्न 9.
आयत चित्र की मदद से बारंबारता वितरण के बहुलक को आलेखी रूप में राज्य जा सकता है।
उत्तर:
सही

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प्रश्न 10.
तोरणों में बारम्बारता वितरण की माध्यिका को नहीं जाना जा सकता है।
उत्तर:
गलत

प्रश्न 11.
निम्नलिखित को प्रस्तुत करने के लिए किस प्रकार का आरेख प्रभावी होता है?
(क) वर्ष विशेष की मासिक वर्षा
(ख) धर्म के अनुसार दिल्ली की जनसंख्या का संघटन
(ग) एक कारखाने में लागत घटक
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 1

प्रश्न 12.
मान लीजिए आप भारत में शहरी गैर-कामगारों की संख्या में वृद्धि तथा भारत में शहरीकरण के निम्न स्तर पर बल देना चाहते हैं, जैसा कि उदाहरण 4.2 में दिखाया गया है, तो आप उसका सारणीयन कैसे करेंगे? उत्तर:
भारत में शहरी गैर-कामगारों की संख्या –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 2

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प्रश्न 13.
यदि किसी बारम्बारता सारणी में समान वर्ग अन्तरालों की तुलना में वर्ग अंतराल असमान हों, तो आयत चित्र बनाने की प्रक्रिया किस प्रकार भिन्न होगी?
उत्तर:
आवृत्ति तालिका में वर्गान्तर समान भी हो सकते हैं और असमान भी। दोनों प्रकार के वर्गान्तर से आयत चित्र बनाने के विधि कुछ भिन्न है। जब सभी वर्गान्तर समान हैं तो सभी आयतों की चौड़ाई समान रहती है, परंतु आयतों की ऊँचाई वर्गों की आवृत्तियों पर निर्भर करती है। जितनी आवृत्तियाँ अधिक होंगी आयतों की ऊँचाई भी उतनी ही अधिक होगी। इसके अतिरिक्त वर्गान्तर समान होने पर आवृत्तियों में कोई फेरबदल नहीं हो जाती, आवृत्तियों को मौलिक रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

इसके विपरीत जब वर्गान्तर समान नहीं होते तो वर्गान्तरों की ऊँचाई करने के लिए आवृत्तियों का संशोधन किया जाता है। मान लो न्यूनतम वर्गान्तर 10 है और वर्ग 20-40 का वर्गान्तर 20 है जो न्यूनतम वर्गान्तर का दोगुना है। अतः वर्ग की संशोधित आवृत्ति 20 के स्थान पर 10 (20 ÷ 2) होगी। मान लो 40-70 वर्गान्तर की आवृत्तियाँ 15 हैं। यह वर्गान्तर न्यूनतम वर्गान्तर का तीन गुना है। अतः इसकी संशोधित आवृत्ति 5(15 ÷ 2) होगी।

प्रश्न 14.
भारतीय चीनी उद्योग संघ ने बताया कि दिसम्बर 2001 से पहले 15 दिन चीनी का उत्पादन लगभग 3,87,000 टन था जबकि पिछले वर्ष 2000 में उन्हीं 15 दिनों का उत्पादन 3,78,000 टन था।
दिसम्बर 2001 के पहले 15 दिनों में आन्तरिक उपभोग के लिये 2,83,000 टन चीनी खरीदी गई और निर्यात के लिए 41,000 टन जबकि पिछले वर्ष इन्हीं दिनों में 1,54,000 टन चीनी आन्तरिक उपभोग के लिए ली गई थी।

  1. आँकड़ों को तालिका में प्रस्तुत करें।
  2. यदि अपने इन आँकड़ों को आरेख में प्रदर्शित करना है तो आप किस प्रकार का आरेख प्रयोग करेंगे और क्यों?
  3. इन आँकड़ों को आरेख में प्रकट करें।

उत्तर:
1. भारत में चीनी उत्पादन (Production of Sugar in India):
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 3

2. यदि हमें इनको आँकड़ों में प्रदर्शित करना है तो बहु दंड आरेख में प्रदर्शित करेंगे, क्योंकि यह आरेख दो या दो से अधिक तथ्यों का तुलनात्मक अध्ययन करने के लिए सबसे अधिक उपयोगी है।
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प्रश्न 15.
निम्नलिखित तालिका अनुमानित क्षेत्रीय वास्तविक वृद्धि दरों को प्रतिशत में प्रदर्शित करती है। इन आँकड़ों को बहु समय श्रृंखला ग्राफ में प्रदर्शित करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 5
उपर्युक्त आंकड़ों को बहु काल-श्रेणी आरेख द्वारा प्रस्तुत करें।
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Bihar Board Class 11 Economics आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
सारणीयन के कोई दो उद्देश्य लिखिए।
उत्तर:

  1. आँकड़ों को क्रमबद्ध और सुव्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करना।
  2. आँकड़ों का सरलीकरण करना।

प्रश्न 2.
वर्गीकरण तथा सारणीयन में कोई एक अंतर बताएँ।
उत्तर:
वर्गीकरण सांख्यिकी विश्लेषण की एक विधि है जब कि सारणीयन समंकों को प्रस्तुत करने की एक विधि है।

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प्रश्न 3.
सारणी के कोई पाँच प्रमुख अंग लिखें।
उत्तर:

  1. सारणीयन संख्या
  2. शीर्षक
  3. शीर्ष टिप्पणी
  4. उप-शीर्षक व पक्तिशीर्षक
  5. सारणी का मुख्य भाग
  6. सारणी का मुख्य भाग

प्रश्न 4.
यदि सारणी में एक निश्चित संख्या को महत्त्व दिया जाना है तो क्या करना चाहिए?
उत्तर:
विशेष महत्त्व वाले समंकों को मोटे अंकों में लिखा जाना चाहिए।

प्रश्न 5.
सरल सारणी से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
सरल सारणी वह सारणी है जो सांख्यिकीय आंकड़ों की किसी एक विशेषता अथवा गुण को प्रदर्शित करती है।

प्रश्न 6.
जटिल सारणी किसे कहते हैं?
उत्तर:
जटिल सारणी उस सारणी को कहते हैं जो कि एक से अधिक विशेषताओं को दर्शाती है।

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प्रश्न 7.
स्तंभों के शीर्षक को क्या कहा जाता है?
उत्तर:
स्तंभों के शीर्षक को उप-शीर्षक कहते हैं।

प्रश्न 8.
आरेखीय प्रदर्शन से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
आरेखीय प्रदर्शन वह विधि है जिसके द्वारा आंकड़ों को आरेखों (दंड आरेख, आयत चित्र, वृत्तीय आरेख) द्वारा प्रस्तुत किया जाता है।

प्रश्न 9.
आरेखों की कोई दो सीमाएं लिखो।
उत्तर:

  1. आरेख अनुमानों पर आधारित होते हैं
  2. ये विस्तृत जानकारी नहीं देते।

प्रश्न 10.
आरेखों के कोई दो लाभ लिखें।
उत्तर:

  1. गोखों द्वारा आंकड़ों की प्रस्तुति मिनची होती है।
  2. इनका व्यापक प्रयोग होता है।

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प्रश्न 11.
सरल दंड आरेख पर टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
सरल दंड आरेखों में मूल्यों को दंडों की ऊंचाई द्वारा दिखाया जाता है। दण्डों की पीटाई तथा उनके बीच की दूरी एक समान रखी जाती है। ये आरेख जनसंख्या, उत्पादन तथा भौगोलिक आँकड़ों को प्रदर्शित करने में उपयोगी होते हैं।

प्रश्न 12.
सूचना के स्रोत से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
सूचना के स्रोत से अभिप्राय उस स्रोत से है जिससे आँकड़े लिए गए हैं।

प्रश्न 13.
बहुभुजी सारणी किसे कहते हैं?
उत्तर:
दो गुणों से अधिक विशेषताओं के आधार पर निर्मित की गई सारणी को बहुभुजी सारणी कहते हैं।

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प्रश्न 14.
एक अच्छी सांख्यिकीय सारणी की कोई तीन विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:

  1. यह सरल तथा संक्षिप्त होनी चाहिए
  2. स्पष्ट तथा देखने में आकर्षक होनी चाहिए
  3. विश्वसनीय होनी चाहिए।

प्रश्न 15.
सारणीयन में प्रयोग किया जाने वाला वर्गीकरण कितने प्रकार का होता हैं?
उत्तर:
चार प्रकार का –

  1. परिमाणात्मक
  2. गुणात्मक
  3. समय संबंधी तथा
  4. स्थान संबंधी।

प्रश्न 16.
परिमाणात्मक या मात्रात्मक वर्गीकरण किसे कहते हैं?
उत्तर:
परिमाणात्मक वर्गीरण उस वर्गीकरण को कहते हैं, जिसमें वर्गीकरण का आधार ‘परिमाणात्मक विशेषताएं हैं। दूसरे शब्दों में इन विशेषताओं को मात्रा में मापा जा सकता है। उदाहरण के लिए आयु, ऊँचाई, उत्पादन, आय आदि मात्रात्मक विशेषताएं हैं।

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प्रश्न 17.
सारणी का मुख्य भाग कौन-सा है?
उत्तर:
सारणी का मुख्य भाग कलेवर (Body) है।

प्रश्न 18.
आँकड़ों को दर्शाने के लिए. मुख्य आरेख निम्नलिखित हैं –
उत्तर:

  1. ज्यामितीय आरेख (Geometric diagram)। जैसे-दंडभुज।
  2. आवृत्ति आरेख (Frequency diagram)।
  3. गणितीय रेखा आरेख (Arithmatic Line graph)।

प्रश्न 19.
सांख्यिकीय सारणी क्या है?
उत्तर:
सांख्यिकीय सारणी एक संयंत्र है जिसमें आँकड़ों को पंक्तियों और स्तम्भों में . व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत किया जाता है।

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प्रश्न 20.
सारणीयन किसे कहते हैं?
उत्तर:
सांख्यिकीय आंकड़ों को सारणी के रूप में अर्थात् पंक्तियों तथा स्तंभों के रूप में प्रकट करने को सारणीयंन कहते हैं।

प्रश्न 21.
आयत चित्र का अर्थ बताएँ।
उत्तर:
यह वह चित्र है जो अखंडित श्रृंखलाओं से जुड़ी हुई आयातों (adjacent rectangles) द्वारा प्रदर्शित करता है।

प्रश्न 22.
यदि सभी वर्ग अंतराल (Class Intervals) समान हैं तो आयत चित्र की चौड़ाई समान होगी या असमान?
उत्तर:
समान होगी।

प्रश्न 23.
आवृत्ति बहुभुज कैसे बनाया जाता है?
उत्तर:
आवृत्ति बहुभुज को आयत चित्र के सिरे के मध्य बिन्दुओं को जोड़कर बनाया जाता है।

प्रश्न 24.
श्रम पर खर्च कुल खर्चे का 30% है। इसकी कोण की डिग्री बताएँ।
उत्तर:
कोण की डिग्री = 30 × 3.6 = 108°

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प्रश्न 25.
102 मजदूरों में मुख्य मजदूर 31 हैं। मुख्य मजदूरों की कोण की डिग्री बताएँ।
उत्तर:
कोण की डिग्री = \(\frac{31}{102}\) × 360 = 1090

प्रश्न 26.
दो तोरण (Ogive) से कम और ‘से अधिक’ एक दूसरे को M बिन्दु पर काटते हैं। माध्यिका (Meidan) निकालने के लिए क्या करना चाहिए?
उत्तर:
माध्यिका निकालने के लिए M बिन्दु से आधार रेखा पर लंब डालना चाहिए। आधार बिन्दु आधार रेखा को जिस बिन्दु पर काटेगा, वह बिन्दु माध्यिका प्रदर्शित करेगा।

प्रश्न 27.
निम्नलिखित को प्रस्तुत करने के लिए किस प्रकार का आरेख अधिक प्रभावशली है?

  1. वर्ष विशेष की मासिक वर्षा।
  2. धर्म के अनुसार दिल्ली की जनसंख्या का संघटन।
  3. एक कारखाने में लागत-घटक।

उत्तर:

  1. काल श्रेणी आरेख।
  2. सरल दण्ड आरेख तथा
  3. वृत्त आरेख।

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प्रश्न 28.
जब वर्गान्तर असमान हैं तो आयत चित्र की ऊँचाई कैसे निर्धारित की जाती है?
उत्तर:
सबसे कम वर्गान्तर से वर्गान्तर जितना अधिक होगा, आयत की ऊँचाई के लिए उस वर्गान्तर की आवृत्ति उसी अनुपात से कम कर दी जाती है। मान लो एक वर्गान्तर न्यूनतम वर्गान्तर का दोगुना है तो ऐसी अवस्था में उसके आयत की ऊँचाई कर दी जाएगी। अर्थात् उसकी आवृत्तियाँ 6 हैं तो वह 3(6 ÷ 2) होंगी।

प्रश्न 29.
संचयी आवृत्ति के कितने रूप हो सकते हैं?
उत्तर:
संचयी आवृत्ति के दो रूप हो सकते हैं –
से कम’ तथा ‘से अधिक’। ‘से कम’ ओजाइन नीचे से ऊपर दाईं ओर उठती है और ‘से अधिक’ ओजाइब ऊपर से नीचे की ओर दाईं ओर ढालू होती है।

प्रश्न 30.
आयत चित्र बनाने के लिए समावेशी पर आधारित श्रृंखला को अपवर्ती वर्ग पर आधारित श्रृंखला में क्यों परिवर्तित करते हैं?
उत्तर:
समावेशी वर्ग पर आधारित शृंखला में अंतर होता है और आवृत्ति चित्र बनाने के लिये निरंतरता चाहिए। अतः निरन्तरता प्राप्त करने के लिए हम समावेशी वर्ग पर आधारित श्रृंखला को अपवर्जी वर्ग पर आधारित श्रृंखला में परिवर्तित करते हैं।

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प्रश्न 31.
ओजाइब का दूसरा नाम क्या है?
उत्तर:
ओजाइब का दूसरा नाम संचयी आवृत्ति वक्र या तोरण है।

प्रश्न 32.
दोनों ओजाइब की विशेष विशेषता क्या है?
उत्तर”
दोनों ओजाइब जिस बिन्दु पर एक दूसरे को काटते हैं उस बिन्दु से हमें माध्यिका प्राप्त होती है।

प्रश्न 33.
सरल दंड आरेख द्वारा कितने चरों को प्रदर्शित किया जा सकता है?
उत्तर:
सरल दंड आरेख द्वारा केवल एक ही चर को प्रदर्शित किया जा सकता है।

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प्रश्न 34.
किस प्रकार के दंड आरेख का हमें प्रयोग करना होगा, यदि हमें विभिन्न वर्षों के एक से अधिक चरों के मूल को प्रदर्शित करना हो तो?
उत्तर:
बहुदंड आरेख को।

प्रश्न 35.
हमें एक देश के आयात तथा निर्यात के मूल्यों को दंड आरेख द्वारा प्रदर्शित करना है। इसके लिये हम किस प्रकार के दंड आरेख का प्रयोग करेंगे?
उत्तर:
बहुदंड आरेख का।

प्रश्न 36.
एक उदाहरण दीजिए जहाँ सरल दंड आरेख का प्रयोग किया जा सकता है।
उत्तर:
जब विभिन्न जनगणना वर्षों में एक ही राज्य की जनसंख्या प्रदर्शित करनी हो।

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प्रश्न 37.
सरल दंड आरेख तथा बहुदंड आरेख में एक अंतर बताएँ।
उत्तर:
सरल दंड आरेख में एक ही चर के मूल्यों को विभिन्न वर्षों में व्यक्त किया जाता है। जबकि बहु दंड आरेख में एक से अधिक चर के मूल्यों को प्रदर्शित किया जाता है।

प्रश्न 38.
समय कालिक श्रृंखला किसे कहते हैं?
उत्तर:
समय कालिक श्रृंखला वह श्रृंखला है जहाँ किसी चर का मूल्य समयानुसार दिया हो, जैसे-विभिन्न वर्षों के कृषि उत्पादन के आँकड़े।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
आंकड़ों के आरेखीय प्रस्तुतीकरण के लाभ लिखें।
उत्तर:
आँकड़ों के आरेखीय प्रस्तुतीकरण के लाभ (Avantages of diagrammatic presentation of data)

  1. आरेख आँकड़ों को प्रस्तुत करने का एक प्रभावशाली साधन हैं, क्योंकि आरेख रोचक तथा आकर्षक होते हैं।
  2. आरेख आँकड़ों को सरल तथा बोधगम्य बनाते हैं।
  3. ये समंकों के तुलनात्मक अध्ययन में सहायक होते हैं।
  4. इनका प्रयोग उत्पादन, व्यापार, वाणिज्य, परिवहन आदि के क्षेत्र में बहुत उपयोगी है।

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प्रश्न 2.
दंड आरेख की विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:
विशेषताएँ (Features) –

  1. दंड आरेख एकपक्षीय (One Dimensional) होते हैं।
  2. दंड क्षैतिज (Horizontal) तथा शीर्ष (Vertical) दोनों रूप में हो सकते हैं।
  3. दंड आरेखों को आकर्षक बनाने के लिए सभी दंडों में रंग भर दिया जाता है।
  4. दंड आरेख कई प्रकार के होते हैं-जैसे सरल दंड आरेख, बहु दंड आरेख, घटक दंड आरेख, प्रतिशत घटक दंड आरेख आदि।

प्रश्न 3.
परिमाणात्मक वर्गीकरण का एक उदाहरण दें।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 7

प्रश्न 4.
गुणात्मक वर्गीकरण का एक उदाहरण दें।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 8

प्रश्न 5.
समयानुसार या कालिक वर्गीकरण का एक उदाहरण दें।
उत्तर:
1995-2000 में एक चाय की दुकान की वार्षिक बिक्री –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 9

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प्रश्न 6.
वृत्त आरेख बनाने की विधि लिखें।
उत्तर:
वृत्त आरेख बनाने की विधि (Method of constructing a piediagram) –

  1. प्रत्येक दिए गए मूल्य को कुल मूल्य के प्रतिशत रूप में परिवर्तित किया जाता है। यदि मूल्य पहले से ही प्रतिशत में दिया गया है तो यह चरण छोड़ दिया जाता है।
  2. प्रतिशत मूल्य को.3.6 से गुणा करके उस मूल्य का कोण ज्ञात किया जाता है।
  3. पेंसिल और परकार की सहायता से एक उचित वृत्त बनाया जाता है।
  4. वृत्त में प्रत्येक मद का कोण बनाया जाता है।
  5. वृत्त आरेख के प्रत्येक खंड में अलग-अलग रंग भरे जाते हैं।
  6. वृक्त आरेख के प्रत्येक खंड में अलग-अलग रंग भरा जाता है।

प्रश्न 7.
तिशत घटक दंड आरेख तथा घटक दंड आरेख में अंतर बताएँ।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 10

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प्रश्न 8.
प्रतिशत घटक दंड आरेख बनाने की विधि में निहित चरण लिखें।
उत्तर:
प्रतिशत घटक दंड आरेख बनाने की विधि में निम्नलिखित चरण होते हैं –

  1. इन्हें बनाने के लिए पहले सभी समय (वर्षों आदि) से सम्बन्धित जोड़ को 100 मान लिया जाता है।
  2. दूसरे, सभी विभागों को प्रतिशत रूप में बदल दिया जाता है।
  3. चौथे, अलग-अलग समय (वर्षों) के अलग-अलग दंड बनाए जाते हैं, जिनकी ऊँचाई समान अथवा 100 होती है। फिर बाद में संचयी प्रतिशत के बराबर विभिन्न विभागों को काट दिया जाता है और उनमें अलग-अलग रंग भर दिया जाता है।

प्रश्न 9.
वृत्त आरेख बनाने की विधि लिखें।
उत्तर:
वृत्त आरेख की विधि के चरण इस प्रकार हैं –

  1. प्रत्येक दिए गए मूल्य को कुल मूल्य के प्रतिशत में परिवर्तित किया जाता है। यदि मूल्य पहले से ही प्रतिशत में हो तब यह चरण छोड़ दिया जाता है।
  2. प्रतिशत मूल्य को 3.6 से गुण करके उस मूल्य का कोण ज्ञात किया जाता है।
  3. पेंसिल और परकार की सहायता से एक उचित वृत्त का निर्माण किया जाता है।
  4. वृत्त में प्रत्येक मद का कोण बनाया जाता है।
  5. वृत्त आरेख. के प्रत्येक खंड में अलग-अलग रंग भरे जाते हैं।

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प्रश्न 10.
सामान्य प्रयोग में लाए जाने वाले आरेखों के विभिन्न रूप लिखें।
उत्तर:
सामान्य प्रयोग में लाए जानेवाले आरेखों के विभिन्न रूप निम्नलिखित हैं –
1. ज्यामितीय आरेख (Geometric diagrams):

  • दंड आरेख
  • बहुदंड आरेख
  • वृत्तीय आरेख

2. आवृत्ति आरेख (Frequency diagrams):

  • आयत चित्र
  • आवृत्ति बहुभुज
  • आवृत्ति वक्र तथा
  • तोरण

3. गणितीय समय ग्राफ (Arithmetic Time Graph):
काल श्रेणी आरेख।

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प्रश्न 11.
सामान्य उद्देश्य सारणी तथा विशेष उद्देश्य सारणी में अंतर बताएँ।
उत्तर:
सामान्य उद्देश्य सारणी का कोई महत्त्व नहीं होता। ये सामान्यतः प्रकाशित प्रतिवेदनों (Report) के पीछे दी जाती है। विभिन्न व्यक्ति इसका प्रयोग अपने ढंग से करते हैं। इसके विपरीत विशेष उद्देश्य सारणी किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए बनाई गई होती है। यह प्रायः संक्षिप्त होती है।

प्रश्न 12.
स्थानिक वर्गीकरण का एक उदाहरण दें।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 11

प्रश्न 13.
घटक दण्ड आरेख का प्रयोग कब किया जाता है? इस आरेख को बनाने की विधि लिखें।
उत्तर:
जब तथ्यों के जोड़ और उसके विभिन्न विभागों (जैसे-कॉलेज के विद्यार्थियों और उसके विभिन्न घटकों की संख्या जैसे लड़के तथा लड़कियों आदि) का प्रदर्शन करना हो तो घटक दण्ड आरेख का प्रयोग किया जाता है।

बनाने की विधि (Method of preparing):
पहले समय अथवा स्थान के आधार पर, तथ्यों के जोड़ के आधार दंड बनाए जाते हैं। बाद में प्रत्येक खंड के विभिन्न भागों में अलग-अलग रंग भरा जाता है परंतु एक वस्तु से संबंधित सभी दंडों के भागों में एक ही रंग भरा जाता है।

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प्रश्न 14.
निम्नलिखित आवृत्ति वितरण से हम एक आयत चित्र बनाना चाहते हैं। ऐसा करने के लिए हम वर्गान्तर में क्या परिवर्तन करेंगे?
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 12
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 13

प्रश्न 15.
सांख्यिकी में जनसंख्या (समग्र) का क्या अभिप्राय है? एकल, द्वि तथा बहु जनसंख्या समझाएँ।
उत्तर:
सांख्यिकी में जनसंख्या (समग्र) से अभिप्राय अनुसंधान क्षेत्र की सभी इकाइयों से होता है। उदाहरण के लिए यदि किसी पाठशाला में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के मानसिक स्तर का अध्ययन करना चाहते हैं तो पाठशाला के सभी विद्यार्थी सांख्यिकी की दृष्टि से ‘जनसंख्या’ कहलाते हैं। जनसंख्या को समग्र भी कहते हैं। रोसन्दर (Rosander) के अनुसार, “समग्र विचाराधीन विषय इकाइयों का योग होता है।”

एकल समग्र से अभिप्राय है समग्र से सम्बन्धित केवल एक चर। जैसे जनसंख्या केवल आय। द्वि-समग्र से अभिप्राय है समग्र से सम्बन्धित दो चर। उदाहरण के लिए एक कक्षा के सभी छात्रों की ऊँचाई तथा वजन। बहु जनसंख्या से अभिप्राय समग्र के विषय से सम्बन्धित बहुत सारी जानकारी के आँकड़े। उदाहरण के लिए सभी परिवारों के उपभोग की सभी मदों का व्यय।

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प्रश्न 16.
अविछिन्न तथा खंडित (विछिन्न) चरों में अंतर बताएँ। उदाहरण देकर समझाइएँ।
उत्तर:
अविछिन्न तथा विछिन्न चरों में अंतर (Difference between Continuous Series):
एक चर को विभिन्न चर उस समय कहा जाता है जब वह विस्तार में कोई भी मूल्य ले सकता है। उसका मूल्य 1, 2, 3 भी हो सकता है और = \(\frac{1}{2}\), \(\frac{1}{3}\), \(\frac{3}{4}\), \(\frac{7}{8}\) अथवा \(\sqrt{2}\) या 1 414 …..। उदाहरण के लिए वस्तुओं की कीमतों, व्यक्तियों की ऊंचाई व भार तथा उनकी आय को अविछिन्न चर कहा जा सकता है तो इसे विछिन्न चर कहेंगे जैसे पूर्ण संख्या (whole number) को विछिन्न चर कहते हैं। जैसे-एक श्रेणी में विद्यार्थियों की संख्या आदि।

प्रश्न 17.
एक आदर्श वर्गीकरण के आवश्यक तत्त्वों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
एक आदर्श वर्गीकरण के आवश्यक तत्त्व निम्नलिखित हैं –

  1. वर्गीकरण निरंतर का आकार उचित होना चाहिए।
  2. वर्गीकरण सरल होना चाहिए।
  3. उसमें निरन्तरता का गुण होना चाहिए।
  4. वह शुद्ध होना चाहिए।
  5. वह उद्देश्य के अनुकूल होना चाहिए।
  6. वह लोचदार होना चाहिए।
  7. उसमें व्यापकता का गुण होना। चाहिए।
  8. उसमें सजातीयता का गुण होना चाहिए।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित आँकड़ों का आयत आरेख बनाएँ तथा बहुलक ज्ञात करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 14
उत्तर:
आँकड़ों का आवृत्ति आरेख बनाने से पहले हम संशोधित वर्ग बनाएँगे।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 15
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प्रश्न 2.
नीचे दी गई आवृत्ति वितरण के आधार पर ‘से कम’ संचयी आवृत्ति वक्र बनाएँ।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 17
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 18
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 19

प्रश्न 3.
नीचे दी गई आवृत्ति वितरण के आधार पेर ‘से अधिक’ संचयी आवृत्ति वक्र बनाएँ।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 20
उत्तर:
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Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण

प्रश्न 4.
नीचे दी गई सूचना के आधार पर आरेखीय विधि द्वारा माध्यिका का निर्धारण करें। (Calculate median graphically with the help of following date)
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उत्तर:
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प्रश्न 5.
निम्नलिखित सूचना को एक वृत्त आरेख में दिखाएँ –
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उत्तर:
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प्रश्न 6.
एक सारणी के मख्य भागों का वर्णन करें।
उत्तर:
एक सारणी के मुख्य भाग (Main parts ofa Table):
एक सांख्यिकी सारणी के मुख्य भाग इस प्रकार हैं –
1. सारणी की संख्या (Table Number):
सारणी को सबसे पहले एक संख्या (सारणी संख्या) अर्थात 1, 2, 3 …. आदि की जानी चाहिए। एक अध्ययन में तालिकाएं जिस क्रम में बनाई जाती हैं उसी के अनुसार उनकी संख्या दी जानी चाहिए। सारणी संख्या से उन्हें ढूँढ़ने में सहायता मिलती है तथा उनका उल्लेख सरलता से किया जा सकता है।

2. शीर्षक (Title):
प्रत्येक सारणी में संख्या के बाद सबसे ऊपर उसका शीर्षक दिया जाना चाहिए। शीर्षक मोटे अक्षरों में लिखा जाना चाहिए ताकि तुरंत ही ध्यान आकर्षित कर सके। शीर्षक सरल, स्पष्ट और छोटा होना चाहिए। शीर्षक इतना स्पष्ट होना चाहिए कि उसे पढ़ते ही ज्ञात हो जाए कि –

  • आँकड़े किस समस्या (What) से संबंधित हैं।
  • ऑकड़े किस समय (When) से संबंधित हैं।
  • ऑकड़े किस स्थान (Where) से संबंधित हैं।
  • आँकड़ों का वर्गीकरण किस प्रकार किया गया है। एक अच्छा शीर्षक छोटा, परंतु पूर्ण होता है।

3. शीर्ष टिप्पणी (Head Note):
यदि शीर्षक से पूरी सूचना प्रकट नहीं होती तो उसके तुरंत नीचे शीर्ष टिप्पणी (Head Note) दी जाती है। इसमें एक अतिरिक्त सूचना दी जाती है जो शीर्षक में नहीं दी जा सकी। उदाहरण के लिए शीर्षक टिप्पणी में यह बताया जाता है कि आँकड़े किस इकाई में व्यक्त किए गए हैं। उन्हें कोष्ठक (Brackets) में लिखा जाना चाहिए।

4. पंक्ति शीर्षक (Stubs):
सारणी की पंक्तियों (Rows) के शीर्षक को पंक्ति शीर्षक कहा जाता है। इसके द्वारा सरल भाषा में ज्ञात होता है कि पंक्तियों द्वारा क्या दिखाया जा रहा है।

5. उपशीर्षक (Caption):
सारणी के स्तंभों (Columns) के शीर्षक को उपशीर्षक कहा जाता है। इसके शीर्षक से यह ज्ञात होता है कि कॉलम मद की किस विशेषता को बता रहे हैं।

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प्रश्न 7.
अंतर बताएँ।

  1. दंड आरेख तथा (Bar diagram)
  2. आयत चित्र (Histogram)

उत्तर:
दंड आरेख तथा आयत चित्र में अंतर (Difference between bar diagram and histogram):
दंड ओरख वह आरेख है जिसमें आँकड़ों को दंडों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। दंडों की ऊँचाई चरों के मूल्यों पर निर्भर करती है जबकि इनकी चौड़ाई केवल आरेख को आकर्षक बनाने के लिए ली जाती है। दंडों के बीच दूरी समान होती है।

ये सामान्यतः व्यक्तिगत मूल्यों, कालश्रेणियों, भौगोलिक श्रेणियों को प्रदर्शित करने में प्रयोग में लाई जाती हैं। इसके विपरीत आयत चित्र आवृत्ति वितरण को प्रस्तुत करता है। इसमें वर्ग अन्तरालों को आवृत्तियों के समीपवर्ती (Adjacent) आयतों में प्रकट किया जाता है। इसमें वर्ग अन्तरालों को X अक्ष पर लेते हैं तथा आवृत्तियों को Y अक्ष पर लेते हैं।
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प्रश्न 8.
आरेखों द्वारा सांख्यिकीय आँकड़ों के प्रदर्शन लाभों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आरेखों के लाभ (Advantages of Diagrams):
यह सर्वविदित है कि जैसे-जैसे समंकों का जमघट अधिक होता जाता है, उन्हें समझने में असुविधा होती है तथा समय लगता है। जनसाधारण अंकों में रुचि नहीं रखते हैं। यदि हम अपनी बातों को अंकों के द्वारा समझने की बजाय किसी अन्य सरल साधन द्वारा समझाने का प्रयत्न करें, जहाँ अंकों का कम-से-कम प्रयोग किया गया हो, तो हमारी बात जनसाधारण के लिए सरल, समझने तथा याद करने के योग्य हो जाती है। आरेखों के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं –

1. सरल (Simple):
आरेखों की सहायता से जटिल आँकड़ों को सरल तथा सुबोध बनाया जा सकता है।

2. समझने में सुगमता (Easy to understand):
आरेखों को समझने के लिए विशेष शिक्षा या ज्ञान की आवश्यकता नहीं होती।

3. समय व श्रम की बचत (Saving of time and labour):
आरेखों की सहायता से आँकड़ों को समझने में बहुत कम समय लगता है।

4. अधिक समय तक स्मरणीय (Memorable for a long time):
अंकों को कुछ समय बाद भूल जाना स्वाभाविक है, लेकिन आरेखों द्वारा आँकड़ों की एक ऐसी छाप मस्तिष्क पर पड़ जाती है कि आँकड़े बहुत दिनों तक याद रहते हैं।

5. आरेख आकर्षक होते हैं (Diagrams are attractive):
अंकों की अपेक्षा रेखाचित्र अधिक आकर्षक होते हैं। इसलिए मेलों, प्रदर्शनियों आदि में जनता को प्रभावित करने के आरेखों का प्रयोग अधिक उपयोगी होता है।

6. तुलना में सहायक (Easy to comprison):
रेखाचित्रों की सहायता से सांख्यिकी सामग्री में तुलना बहुत सरल हो जाती है। उदाहरणार्थ दिल्ली विश्वविद्यालय के पिछले वर्ष और इस वर्ष के परीक्षा परिणामों की तुलना रेखाचित्रों द्वारा बड़े सुचारु रूप से की जा सकती है।

7. सूचना प्रसार में सहायक (Publicity):
रेखाचित्रों द्वारा सूचना प्रसार आसानी से किया जा सकता है।

8. सृजनात्मक मनोरंजन (Creative entertainment):
रेखाचित्र सूचना प्रदान करने के साथ-साथ मनोरंजन भी करते हैं। अंकों को देखने से जहाँ आँखें तिलमिला जाती हैं, वहाँ आरेखों को देखने से रुचि बढ़ती है और मनोरंजन भी हो जाता है।

9. सार्वभौमिक उपयोगिता (Universal Utility):
विभिन्न लाभों के कारण अनेक क्षेत्रों में सांख्यिकी रेखाचित्रों का बहुत प्रयोग होता है। व्यापार, वाणिज्य तथा विज्ञापन के क्षेत्र में से बहुत उपयोगी और महत्त्वपूर्ण होते हैं। इस प्रकार रेखाचित्रों की उपयोगिता सार्वभौमिक है। ये सभी क्षेत्रों में नवजीवन प्रदान करते हैं।

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प्रश्न 9.
सारणीयन के लाभ लिखें।
उत्तर:
सारणीयन के लाभ (Advantages of tabulation):

1. समझने में सरलता (Easy to understand):
सारणी से आंकड़ों को सरलता से समझा जा सकता है, क्योंकि सारणी आंकड़ों को व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करती है।

2. संक्षिप्त (Simple):
सारणी द्वारा अव्यवस्थित आंकड़ें कम-से-कम स्थान में इस प्रकार संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत किए जाते हैं कि उनसे अधिक-से-अधिक सूचना प्राप्त हो सके।

3. तुलना में सुविधा (Convenient in comparision):
सारणी द्वारा आंकड़ों को विभिन्न वर्गों में प्रस्तुत किया जाता है। अतः उनकी तुलना करना सुविधाजनक हो जाता है।

4. प्रस्तुतीकरण में सहायक (Helpful Presentation):
सारणी की सहायता से ही आँकड़ों को आरेखों तथा रेखा-आरेखों द्वारा आकर्षक ढंग से प्रस्तुत कराना संभव हो जाता है।

5. विश्लेषण में सहायक (Helpful in Analysis):
सारणी द्वारा आँकड़ों के विश्लेषण में सहायता मिलती है। आँकड़ों को सारणी के रूप में व्यवस्थित करके ही माध्य (Mean), उपकिरण (Dispersion) आदि ज्ञात किए जाते हैं।

6. आँकड़ों की मुख्य विशेषताएँ स्पष्ट हो जाती हैं (Clarifies the Chief Charactetistic of Data):
सारणी द्वारा आकड़ों की मुख्य विशेषताएँ स्पष्ट हो जाती हैं। आँकड़ों को याद रखना भी सरल हो जाता है।

7. बचत (Economic):
सारणी द्वारा आँकड़ों को कम स्थान में प्रस्तुत किया जा सकता है। इसके फलस्वरूप समय तथा कागज की बचत होती है। आवश्यक आँकड़ों को आसानी से ज्ञान किया जा सकता है।

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प्रश्न 10.
आँकड़ों के प्रस्तुतीकरण में विवरणात्मक तथा सारणीयन विधियों की तुलना करें।
उत्तर:
आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण कई विधियों से किया जा सकता है। उनमें दो विधियाँ विवरणात्मक विधि तथा सारणीयन विधि है। विवरणात्मक विधि से आँकड़ों का विवरण दिया जाता है जैसा कि आर्थिक सर्वेक्षण 2002 के अनुसार भारत में 2000-2001 में खाद्यान्नों का उत्पादन 2000 मिलियन टेन था। जिसमें चावल, गेहूँ और अन्य फसलों का उत्पादन क्रमशः 85.5, 69.0 और 45.5 मिलियन टन था। कुल उत्पादन में इनका प्रतिशत योगदान क्रमशः मिलियन टन था। कुल उत्पादन में इनका प्रतिशत योगदान क्रमशः 42.75%, 34.50% और 22.75% था।

सारणीयन विधि में ऊपर दिए आँकड़ों को एक सारणी में प्रस्तुत किया जाता है ताकि आंकड़ों को सरलता से समझे जा सके। ऊपर दिए गए तथ्यों को सारणी में निम्न प्रकार प्रस्तुत कर सकते है –
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प्रश्न 11.
निम्नलिखित को संक्षेप में समझाइए। (Write short notes on)
(अ) विवतर्मुखी वर्ग
(ब) असमान वर्गान्तर
(स) संचयी आवृत्ति वितरण।
उत्तर:
(अ) विवतर्मुखी वर्ग-विवतर्मुखी वर्ग वह है जिसमें या तो निम्नतम वर्ग की निम्न सीमा या उच्चतम वर्ग की ऊपरी सीमा को छोड़ा है। इस प्रकार के वर्गों का प्रयोग बहुत कम होता है, क्योंकि विवतर्मुखी वर्ग का मध्य मूल्य नहीं ज्ञात कर सकते। उदाहरणार्थ – 10 से कम, 10-20, 20-30, 30-40, 40 और अधिक।

(ब) असमान वर्गान्तर-असमान वर्गान्तर से अभिप्राय ऐसी अखंडित श्रृंखला से है जिसमें वर्गों के बीच का अंतर एक समान नहीं होता। हम ऐसे वर्गों की आवृत्ति की तुलना नहीं कर सकते। आवृत्तियों की तुलना करने के लिए हम वर्गान्तरों को समान मानकर आवृत्तियों की पुनर्गणना द्वारा प्रत्येक वर्ग की आवृत्तियाँ ज्ञात करके तुलना करते हैं।

(स) संचयी आवृत्ति वितरण-जब विभिन्न मूल्यों की आवृत्तियों को क्रमशः जोड़कर रखा जाता है तो उसे संचयी आवृत्ति वितरण कहते हैं। स्पष्ट है कि अंतिम वर्ग की संचयी आवृत्ति सब वर्गों की आवृत्तियों का योगफल होता है। संचयी आवृत्ति वितरण को दो रूपों में व्यक्त किया जाता है –

  • से कम (Less than type)
  • से अधिक (More than type)।

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प्रश्न 12.
संचयी आवृत्ति वितरण किसे कहते हैं? इसका क्या महत्त्व है?
उत्तर:
संचयी आवृत्ति वितरण (Cumulative frequency distribution):
संचयी आवृत्ति वितरण उस आवृत्ति वितरण को कहते हैं, जिसमें आवृत्तियों को सरल विधि से वर्गानुसार अलग-अलग न लिखकर संचयी रूप में लिखा जाता है। इस प्रकार के आवृत्ति वितरण के अन्तर्गत केवल एक सीमा (निचली, ऊपरी) दी जाती है। यदि वर्ग समूह में निचली सीमा के आधार पर संचयी आवृत्ति दी गई है तो ‘से कम’ शब्दों का प्रयोग लिख कर किया जाता है। दोनों पर की गई संचयी आवृत्तियों के उदाहरण नीचे दिए गए हैं।
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संचयी आवृत्ति वितरण का महत्त्व निम्नलिखित बातों से स्पष्ट हो जाता है:

  1. संचयी आवृत्ति वितरण की सहायता से हम किसी दिए गए चर से कम या अधिक मूल्य ज्ञात कर सकते हैं।
  2. विभाजन मूल्यों को ज्ञात करने के लिए इसका प्रयोग किया जा सकता है।
  3. किसी वर्गान्तर विशेष में सम्मिलित मदों की संख्या भी ज्ञात की जा सकती है।

प्रश्न 13.
आयत बहुभुज बनाने के लिए असमान वर्गान्तर पर आवृत्तियों का संशोधन क्यों किया जाता है? आवृत्तियों को संशोधित करने की विधि लिखो।
उत्तर:
बड़े वर्गान्तर को न्यूनतम वर्गान्तर के बराबर लाने के लिए आवृत्तियों में संशोधन किया जाता हैं। मान लो न्यूनतम वर्गान्तर 10 है और उच्च वर्ग (40 – 70) में वर्गान्तर 30 है और उसकी आवृत्ति 15 है। अत: 40 – 70 वर्ग के तीन वर्ग 40 – 50, 50 – 60 तथा 60 – 70 बनते हैं और उनकी आवृत्तियाँ 15 तीन वर्गों में बँट जाती हैं और प्रत्येक वर्ग की आवृत्ति 5(5 + 5 + 5) होती है। आवृत्तियों में संशोधन करने के लिए न्यूनतम वर्गान्तर लेते हैं। कोई वर्गान्तर न्यूनतम वर्गान्तर किया जाता है –
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प्रश्न 14.
निम्नलिखित आँकड़ों को एक आयत चित्र द्वारा प्रस्तुत कीजिए –
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उत्तर:
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प्रश्न 15.
निम्नलिखित आँकड़ों से एक आयत चित्र बनाइए।
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उत्तर:
प्रश्न में वर्गान्तर समावेशी विधि (Inclusive method) द्वारा दिए गए हैं। अतः इनमें पहले संशोधन करना आवश्यक होगा ताकि समीपवर्ती आयतें बन जाएँ।
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प्रश्न 16.
भारत सरकार को पिछली तीन वर्षों के दौरान करों से प्राप्त आगम के बारे में निम्न जानकारी उपलब्ध है –
वर्ष 1997 – 98 में सरकार को कर-आगम के रूप में कुल 77,693 करोड़ रुपए की प्राप्ति हुई। इसमें से 11,165 करोड़ रुपए प्रत्यक्ष करों तथा 66,528 करोड़ रुपए परोक्ष करों के रूप में प्राप्त हुए। वर्ष 1998-99 में यह राशि क्रमशः 89,303 करोड़ रुपए, 13,397 करोड़ रुपए तथा 75,906 करोड़ रुपए थी। 1999-2000 में कुल राशि। 1.02,896 करोड़ रुपए तथा प्रत्यक्ष तथा परोक्ष करों का योगदान क्रमशः 15,338 करोड़ रुपए तथा 87,558 करोड़ रुपए था।
उत्तर:
भारत सरकार को करों से प्राप्त आगम
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प्रश्न 17.
भारत में चीनी निर्यात से आय के आँकड़े नीचे दिए गए हैं। इन्हें निरपेक्ष कालिक आरेख में प्रस्तुत कीजिए –
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उत्तर:
X अक्ष पर वर्ष और Y अक्ष पर आय (करोड़ रुपए में) प्रस्तुत करते हुए प्रत्येक वर्ष के सामने आय के चिह्नों को लगाइए, फिर चिह्नों को छूती हुई रेखा बनाइए। इस आरेख को निरपेक्ष कालिक आरेख कहते हैं, जैसा कि नीचे आरेख में दिखलाया गया है।
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प्रश्न 18.
द्विवीय आरेख (Two dimentional) किसे कहते हैं? नीचे दो परिवारों के आय-व्यय सम्बन्धी आँकड़ें दिए गए हैं। उन्हें द्विवीम आरेख द्वारा निरपेक्ष (Absolute) तथा सापेक्ष रूप में दिखाएँ।
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उत्तर:
द्वितीय आरेख उस रेखाचित्र को कहते हैं जिसमें लम्बाई के साथ-साथ चौड़ाई को भी दिखाया जाता है। चौड़ाई कुल मूल्यों के अनुपात में होती है। इन्हें निरपेक्ष (Absolute) तथा सापेक्ष (Relative) दो रूपों में दिखाया जा सकता है। निरपेक्ष में दिए गए मूल्यों को आरेख में प्रदर्शित करते हैं जबकि सापेक्ष द्विविम आरेख के मूल्यों को प्रतिशत में बदलकर प्रतिशत खंड़ों में काटकर लिखते हैं।

सापेक्ष द्विविम आरेख (Relative Two Dimensional):
तुलनात्मक अध्ययन के लिए मूल्यों को प्रतिशत में बदल लेते है। इस प्रकार ऊँचाई समान हो जाती है और चौड़ाई कुल व्यय के अनुपात में रखी जाती है।
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निरपेक्ष द्विविम आरेख (Absolute Two Dimensional):
आय का अनुपात 500:1000 = 1:2
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प्रश्न 19.
भारत में 1951, 1961, 1971, 1981 और 1991 तथा 2001 की जनगणना में कुल जनसंख्या क्रमशः 361, 38, 439, 23, 548, 16, 683.3, 843.9 तथा 1020 मिलियन थी। कुल जनसंख्या में पुरुषों की संख्या क्रमश: 185.68, 226.29, 284.05, 353.9, 441.8 तथा 530 मिलियन थी तथा स्त्रियों की संख्या क्रमशः 175.70, 212.94, 264.11, 329, 4, 402.1 तथा 490 मिलियन थी। इन आँकड़ों को उपयुक्त सारणी में प्रस्तुत करें।
उत्तर:
भारत की जनसंख्या (Population of India) दस लाख में।
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प्रश्न 20.
भारत में 2004 – 2005 में खाद्यान्नों का उत्पादन 172.25 मिलियन टन था, जिसमें चावल, गेहूँ और अन्य फसलों का उत्पादन क्रमश: 70, 76, 53.99 और 45.0 मिलियन टन था। कुल उत्पादन में इनका प्रतिशत योगदान क्रमशः 42, 0, 32.0 तथा 26.0 था। दी गई सूचना को एक उपयुक्त सारणी में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
2004 – 2005 में खाद्यान्नों का उत्पादन
(Production of Food-grain during 2004 – 2005):
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प्रश्न 21.
निम्नलिखित विवरण को एक तालिका में प्रदर्शित करें भारत की जनगणना 2001 के अनुसार भारत की जनसंख्या बढ़कर 102 करोड़ हो गई, जिसमें 49 करोड़ महिलाएँ हैं और 53 करोड़ पुरुष हैं। 74 करोड़ लोग ग्रामीण भारत में रहते हैं और केवल 28 करोड़ लोग शहरों में रहते हैं। सम्पूर्ण भारत में 62 करोड़ लोग काम करने वाले व्यक्ति नहीं हैं और 47 करोड़ लोग काम करने वाले हैं। शहरी जनसंख्या में 19 करोड़ काम करने वाले कर्मचारी नहीं हैं और 9 करोड़ काम करने वाले कर्मचारी हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में 74 करोड़ लोगों में 31 करोड़ काम पर लगे हुए हैं। इस सूचना को एक तालिका द्वारा दिखाएँ।
उत्तर:
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वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
समंकों को खानों एवं पंक्तियों में व्यवस्थित करने को कहते हैं –
(a) वर्गीकरण
(b) सारणीयन
(c) चित्रमय प्रदर्शन
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) सारणीयन

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प्रश्न 2.
एक अच्छी सारणी की विशेषता है –
(a) सुन्दर
(b) स्वर्य परिचायक
(c) संक्षिप्त
(d) ये सभी
उत्तर:
(d) ये सभी

प्रश्न 3.
निम्न में कौन अधिक प्रभावशाली होती/होता है –
(a) सारणी
(b) त्रिमय प्रदर्शन
(c) वर्गीकरण
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) त्रिमय प्रदर्शन

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प्रश्न 4.
दो या अधिक चरों के मूल्यों को दर्शाने के लिए प्रयोग किया जाता है –
(a) दण्ड चित्र
(b) बहुगुणी दण्ड चित्र
(c) अन्तर्विभक्त दण्ड चित्र
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) बहुगुणी दण्ड चित्र

प्रश्न 5.
चित्रमय प्रदर्शन की उपयोगिता है –
(a) सार्वभौमिक
(b) राष्ट्रीय
(c) स्थानीय
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) सार्वभौमिक

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प्रश्न 6.
सारणी स्रोत लिखा जाता है –
(a) कलेवर में
(b) सारणी के ऊपर
(c) सारणी के नीचे
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) सारणी के नीचे

प्रश्न 7.
सारणी शीर्षक को प्रायः लिखा जाता है –
(a) कलेवर में
(b) सारणी के ऊपर
(c) सारणी के नीचे
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) सारणी के ऊपर

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प्रश्न 8.
चित्रमय प्रदर्शन का सबसे सरल रूप है –
(a) सरल दण्ड चित्र
(b) वृत्त चित्र
(c) चित्र व लेख
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) सरल दण्ड चित्र

प्रश्न 9.
कालिक चित्र में आँकड़ों को दर्शाया जाता है –
(a) यथातथ्य रूप में
(b) प्रतिशत में
(c) अनुपात में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) प्रतिशत में

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प्रश्न 10.
आवृत्ति वितरण आयत चित्र बनाए जाते हैं –
(a) व्यक्तिगत श्रृंखला में
(b) अखण्डित श्रृंखला में
(c) खण्डित श्रृंखला में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) अखण्डित श्रृंखला में

प्रश्न 11.
आवृत्ति आयत चित्र में आवृत्तियों का दर्शाया जाता है –
(a) x – अक्ष पर
(b) y – अक्ष पर
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) y – अक्ष पर

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प्रश्न 12.
आवृत्ति आयत चित्र में वर्गान्तराल दर्शाए जाते हैं –
(a) x – अक्ष पर
(b) y – अक्ष पर
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) y – अक्ष पर

प्रश्न 13.
आवृत्ति आयत चित्र बनाते समय ध्यान रखा जाता है –
(a) उपयुक्त शीर्षक
(b) पैमाना
(c) कृत्रिम आधार रेखा
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(d) उपरोक्त सभी

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प्रश्न 14.
आवृत्ति आयत चित्र बनाते समय x – अक्ष पर दर्शाते हैं –
(a) वर्ग अंतराल
(b) आवृत्ति
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) वर्ग अंतराल

प्रश्न 15.
आवृत्ति वक्र के अंदर क्षेत्र समानुपाती है –
(a) आवृत्तियों के
(b) वर्ग अंतरालों के
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) आवृत्तियों के

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प्रश्न 16.
काल श्रेणी आरेख के x-अक्ष पर दर्शाया जाता है –
(a) चर मूल्य
(b) समय
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) समय

प्रश्न 17.
समावेशी श्रृंखला से आयत चित्र बनाने के लिए इस श्रृंखला को दिलाते हैं –
(a) अपवर्जी श्रृंखला में
(b) खंडित श्रृंखला में
(c) व्यक्तिगत श्रृंखला में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) अपवर्जी श्रृंखला में

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प्रश्न 18.
‘से अधिक’ आवृत्ति वक्र का ढाल होता है –
(a) धनात्मक
(b) ऋणात्मक
(c) x – अक्ष के समांतर
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) ऋणात्मक

प्रश्न 19.
‘से कम’ आवृत्ति वक्र का ढाल होता है –
(a) धनात्मक
(b) ऋणात्मक
(c) x – अक्ष के समांतर
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) धनात्मक

Bihar Board Class 8 Sanskrit Solutions Chapter 2 संघे शक्तिः

Bihar Board Class 8 Sanskrit Book Solutions Amrita Bhag 3 Chapter 2 संघे शक्तिः Text Book Questions and Answers, Summary.

BSEB Bihar Board Class 8 Sanskrit Solutions Chapter 2 संघे शक्तिः

Bihar Board Class 8 Sanskrit संघे शक्तिः Text Book Questions and Answers

अस्ति गङ्गायाः रमणीये तीरे पुष्कलनामको ग्रामः । तत्र बहुधनसम्पन्न: हरिहरो नाम कृषिकः । कृषिकर्मणा तेन प्रभूता सम्पत्तिरर्जिता । ग्रामे तत्परिसरे च तेन महती प्रतिष्ठा सम्प्राप्ता । तस्य चत्वारः पुत्राः अभवन्। पितुः कार्ये सहायतां नाकुर्वन्, प्रत्युत परस्परं नित्यं कलहायन्ते । एकः कथयति-त्वामेव पिता अधिकं मन्यते । त्वमेव तस्य विपुलां सम्पत्ति प्राप्यसि । अपरः वदति-त्वम् अतीव अलसः । कदापि किमपि हितकरम् उपयोगि कार्य न करोषि । तृतीयः तथैव विद्याध्ययनस्य निन्दा करोति, चतुर्थः विद्याध्ययनाय पितुः धनयाचना करोति तदा तृतीयः पितरं वारयति । एवमेव किमपि समाश्रित्य चतुर्ष भ्रातष कलहः प्रवर्तते स्म । अनेन ‘बुद्धिमान् पिता सततं चिन्तितस्तिष्ठति ।

अर्थ – गंगा के रमणीय तीर पर पुष्कल नामक गाँव है । वहाँ बहुत धन सम्पन्न हरिहर नामक किसान था। उसने खेती से खूब सम्पत्ति अर्जित की। गाँव और उसके चारों ओर के गाँवों में उसकी खूब प्रतिष्ठा थी। उसके चार पुत्र हुए। वे सब पिता के काम में सहायता नहीं करते थे । बल्कि चारों परस्पर : झगड़ते रहते थे। एक कहता था-तुझे ही पिता अधिक मानते हैं। तुम ही उनके विपुल धन (सब धन) को प्राप्त करोगे । दूसरा कहता था-तुम बहुत आलसी हो । कभी कुछ भी हितकर उपयोगी कार्य नहीं करते हो । तीसरा उसी. प्रकार विद्याध्ययन की निन्दा करता था। चौथा पढ़ाई के लिए पिता से पैसा माँगता था तो तीसरा पिता को मना करता था। इस प्रकार किसी भी कारण को लेकर चारों भाईयों में झगड़ा होता रहता था। इससे बुद्धिमान पिता सदैव चिन्तित रहा करता था।

Bihar Board Class 8 Sanskrit Solutions Chapter 2 संघे शक्ति

वृद्धः पिता स्वपुत्रान् कृषिकर्मणः संचालनाय भूयो भूयः प्रेरयति किन्तु सर्वेऽपि अलसा: न शृण्वन्ति । एकदा स वार्धक्यजनितेन रोगेण ग्रस्तः शय्यासीनो जातः। स कलहायमानेषु पुत्रेषु संघबद्धतायाः महत्त्वस्य बोधनाय उपायमचिन्तयत्। सर्वानपि पुत्रानाहूय स एकस्मै सुबद्धं दण्डचतुष्टयं दत्वा प्राह-त्वमेनं भञ्जय । स कथमपि भक्तुं नाशक्नोत् । तदा अपरः पुत्रः तथैव आदिष्टः ।

अर्थ-बूढ़ा बाप अपने पुत्रों को खेती के लिए बार-बार प्रेरित करता था। किन्तु सभी आलसी नहीं सुनते (समझते) थे। एक बार वह बुढ़ापा रोग से ग्रस्त होकर बिछावन पकड़ लिया। वह झगड़ते हुए पुत्रों में एकता का महत्व समझाने का उपाय सोचा । सभी पुत्रों को बुलाकर चार डण्डा जो एक जगह कसकर बँधा था उठाकर एक पुत्र को देकर बोला–तुम इसको तोड़ दो। वह किसी भी प्रकार से तोड़ नहीं सका। इसके बाद दूसरे पुत्र को उसी प्रकार आदेश दिया।

सोपि तद् दण्डचतुष्टयं भक्तुं न समर्थो जातः। इयमेव दशा अपरयोरपि पुत्रयोरभवत् । तदा वृद्धः पिता दण्डचतुष्टयं निर्बध्य एकैकं. दण्डम् एकैकस्मै पुत्राय दत्तवान् । किञ्च तं दण्डं बोटयितुं पुन: आदिष्टवान् । सर्वे पुत्राः स्व-स्व हस्तस्थं दण्डं भक्तुं समर्थाः जाताः । तदा पिता कथितवान्-पुत्रा ! एवमेव बुध्यध्वम् । यदि यूयं पृथक्-पृथक् तिष्ठथ, तदा कश्चित् शत्रुः युष्मान् एकैकान् विनाशयिष्यति । यदि पुनः यूयं सर्वे मिलित्वा सुबद्धाः तिष्ठथ, तदा कोऽपि बाह्यजनः युष्मान् विनाशयितुं न समर्थः । अयमुपदेश:-संहतिः श्रेयसी पुंसाम् ।

अर्थ – वह भी बँधे चारों डण्डों को तोड़ नहीं सका। यही दशा अन्य दो पुत्रों की भी हुई। इसके बाद बूढा बाप ने चारों डण्डों को खोलकर एक-एक डण्डा एक-एक पुत्रों को दिया। उसके बाद उस डण्डे को फिर से तोड़ने का आदेश दिया। सभी पुत्र अपने-अपने हाथ का डण्डा को तोड़ने में सफल हो गये । तब पिता ने कहा-पुत्रो ! ऐसा ही तुमलोग समझो । यदि तुम सब अलग-अलग रहोगे तो कोई भी शत्र तम सबको एक-एक कर विनाश

कर सकता है। फिर यदि तुम लोग सभी मिलकर एकता में बंधे रहोगे तो कोई – भी बाहरी लोग तुम सबों का विनाश करने में समर्थ नहीं हो सकता है । यही उपदेश है कि.-मनुष्य के लिए सबसे अच्छी एकता है।

तस्माद् दिवसात् प्रभृति सर्वेऽपि चत्वारः पुत्राः स्व-स्व दुष्टविचारन् त्यक्त्वा परस्पर मेलनेन गृहेऽवर्तन्त पितुश्च सेवया तम् अरोगं कृतवन्तः ।
अर्थ – उसी दिन से सभी चारों पुत्र अपने-अपने बुरे विचारों को त्याग कर परस्पर मेल से घर में रहने लगे और पिता की सेवा करके उसे नीरोग कर दिया।

शब्दार्थ

रमणीये = सुन्दर (सप्तमी विभक्ति) । ग्रामः = गाँव । तत्र = वहाँ । बहुधनसम्पन्नः = बहुत सम्पत्ति से युक्त, धनी । कृषिकः = किसान । प्रभूता = बहुत, पर्याप्त । सम्पत्तिः = धन । अर्जिता = कमायी गयी। परिसरे = प्रांगण में/आस-पास । महती = बहुत, बड़ी । सम्प्राप्ता = प्राप्त हुई । चत्वारः = चार । अभवन् = हुए । अकुर्वन् = किये । प्रत्युत = अपितु, बल्कि । परस्परम् = आपस में । कलहायन्ते = लड़ते हैं। अपरम् = दूसरे को । कथयति = कहता है। त्वाम् = तुम्हें । एव = ही । मन्यते = मानता है। विपुलाम् = बहुत । प्रापयसि = पाओगे । अतीव = बहुत । अलसः = आलसी। किमपि = कुछ भी। हितकरम् = भला । करोषि = करते हो । तथैव = वैसे ही । धनयाचनाम् = धन की मांग । तदा = तब । पितरम् = पिता को । वारयति = रोकता है, मना करता है। एवम् = इस प्रकार । समाश्रित्य = आश्रय लेकर ।

Bihar Board Class 8 Sanskrit Solutions Chapter 2 संघे शक्ति

कलहः = लड़ाई । प्रवर्तते स्म = होती थी। सततम् + लगातार । तिष्ठति = रहता है । कृषिकर्मणः = खेती के काम के । संचालनाय = करने के लिए । भूयो भूयः = बार-बार । प्रेरयति = प्रेरित करता है। शृण्वन्ति = सुनते हैं। एकदा = एक बार । वार्धक्यजनितेन = बुढ़ापे से उत्पन्न । शय्यासीनः = बिछावन पर लेटा हुआ। जातः = हुआ । संघबद्धतायाः = मिलकर रहने के । बोधनाय = समझने के लिए। अचिन्तयत् = सोचा, विचार किया। आहूय = बुलाकर । सुबद्धम् = अच्छी तरह बंधा : हुआ। दण्डचतुष्टयम् = चार दण्डों को (दण्डम् = डण्डा)। दत्वा = देकर । प्राह = कहा । एनम् = इसको, इसे । भञ्जय = तोड़ो। भक्तम् = तोड़ने के लिए/में । नाशक्नोत् = (न + अशक्नोत्) समर्थ नहीं हुआ । तदा = तब । आदिष्टः = आदेश दिया । निर्बध्य = बन्धनरहित करके, खोलकर । एकैकम् = एक-एक को । दत्तवान् = दिया। त्रोटयितुम् = तोड़ने के लिए। किञ्च = तदनन्तर । पुनः = फिर । आदिष्टवान् = आदेश दिया । हस्तस्थम्

संचालनाय = करने के लिए । भूयो भूयः = बार-बार । प्रेरयति = प्रेरित करता है। शृण्वन्ति = सुनते हैं। एकदा = एक बार । वार्धक्यजनितेन = बुढ़ापे से उत्पन्न । शय्यासीनः = बिछावन पर लेटा हुआ । जातः = हुआ। संघबद्धतायाः = मिलकर रहने के । बोधनाय = समझने के लिए । अचिन्तयत् = सोचा, विचार किया। आहूय = बुलाकर । सुबद्धम् = अच्छी तरह बंधा हुआ। दण्डचतुष्टयम् = चार दण्डों को (दण्डम् = डण्डा) । दत्वा = देकर । प्राह = कहा । एनम् = इसको, इसे । भञ्जय = तोड़ो । भङ्क्तुम् = तोड़ने के लिए/में । नाशक्नोत् = (न + अशक्नोत्) समर्थ नहीं हुआ । तदा = तब । आदिष्टः = आदेश दिया । निर्बध्य = बन्धनरहित करके, खोलकर । एकैकम् = एक-एक को । दत्तवान् = दिया । त्रोटयितुम् = तोड़ने के लिए। . किञ्च = तदनन्तर । पुनः = फिर । आदिष्टवान् = आदेश दिया । हस्तस्थम् = हाथ में स्थित, हाथ में रहने वाले । बुध्यध्वम् = तुमलोग समझो । तिष्ठथ = रहते हो । कश्चित् = कोई । एकैकान् = एक-एक को । विनाशयिष्यति = नष्ट कर देगा। मिलित्वा = मिलकर । बाह्यजनः = बाहरी मनुष्य । विनाशयितुम् = नष्ट करने के लिए में । संहतिः = एकता । श्रेयसी = अधिक अच्छी । पुंसाम् = मनुष्यों का/की/के । प्रभृति = से लेकर इत्यादि । सर्वे = सभी । त्यक्त्वा = छोड़कर । परस्परम् = आपस में । मेलनेन = मेल-मिलाप से । अवर्तन्त = थे, रहते थे। अरोगम् = रोगरहित । कृतवन्तः = किये।

व्याकरणम् 

सन्धिविच्छेद

  1. सम्पत्तिरर्जिता = सम्पत्तिः + अर्जिता (विसर्ग-सन्धिः)
  2. त्वामेव = त्वाम् + एव ।
  3. त्वमेव = त्वम् + एव
  4. किमपि = किम् + अपि
  5. कदापि = कदा + अपि (दीर्घ – सन्धिः)
  6. तथैव = तथा + एव (वृद्धि – सन्धिः )
  7. विद्याध्ययनस्य = विद्या + अध्ययनस्य (दीर्घ-सन्धिः)
  8. एवमेव = एवम् + एव
  9. चिन्तितस्तिष्ठति = चिन्तितः + तिष्ठति (विसर्ग-सन्धिः)
  10. सर्वेपि = सर्वे + अपि (पूर्वरूप एकादेश)
  11. कथमपि = कथम् + अपि
  12. सोपि = सः + अपि (विसर्ग-सन्धिः )
  13. इयमेव = इयम् + एव
  14. अपरयोरपि = अपरयोः + अपि (विसर्ग-सन्धिः )
  15. पुत्रयोरभवत् = पुत्रयोः + अभवत् (विसर्ग-सन्धिः )
  16. एकैकम् = एक + एकम् (वृद्धि-सन्धिः )
  17. किञ्च = किम् + च (व्यञ्जन-सन्धिः )
  18. कश्चित् = कः + चित् (विसर्ग-सन्धिः )
  19. कोऽपि . = कः + अपि (विसर्ग-सन्धिः )
  20. अयमुपदेशः = अयम् + उपदेशः
  21. गृहेऽवर्तन्त = गृहे + अवर्तन्त (पूर्वरूप-सन्धिः ) ।
  22. पितुश्च = पितुः + च (विसर्ग-सन्धिः )

Bihar Board Class 8 Sanskrit Solutions Chapter 2 संघे शक्ति

प्रकृति-प्रत्यय-विभाग

Bihar Board Class 8 Sanskrit Solutions Chapter 2 संघे शक्ति 1

अभ्यास

मौखिक

प्रश्न 1.
निम्नलिखितानां शब्दानाम् उच्चारणं कुरुत (निम्नलिखित शब्दों का उच्चारण करो):
उत्तरम्:
कृषिकर्मणा, सम्पत्तिरर्जिता, समाश्रित्य, चिन्तितस्तिष्ठति, शृण्वन्ति, दण्डचतुष्टयम्, एकैकस्मै, सर्वेपि, गृहेऽवर्तन्त

प्रश्न 2.
‘संघे शक्तिः भवति’-इति विषयम् आश्रित्य संस्कृतभाषायां द्वे वाक्ये वदत।
उत्तरम्:

  1. एकतां ऋते सफलतां न मिलति ।
  2. संघे शक्तिः कलियुगे।

प्रश्न 3.
निम्नलिखितानां शब्दानाम् अर्थं वदत् : तथैव, विपुलाम्, कदापि, एवमेव, सततम्, एकदा, कथमपि, तदा, किञ्च।
उत्तरम्:
तथैव = उसी प्रकार । विपुलाम् = बहुत । कदापि = कभी भी। एवमेव = इसी प्रकार ही। सततम् = सदैव । एकदा = एक बार । कथमपि = कोई भी। तदा = तब । किञ्च = इसके बाद ।।

लिखित

Bihar Board Class 8 Sanskrit Solutions Chapter 2 संघे शक्ति

प्रश्न 4.
वाक्यनिर्माणं कुरुत :

पितरम्, ग्रामः, कृषिकः, करोषि, एकदा, पिता, त्यक्त्वा ।
उत्तरम्:

  1. पितरम् = सः पितरम् प्रति अपश्यत् ।
  2. ग्रामः = पुष्कलो नामः एकः ग्रामः अस्ति।
  3. कृषिकः = तत्र हरिहर: नाम कृषिक: वसति ।
  4. करोषि = त्वं किम् करोषि ।
  5. एकदा = एकदा सः अत्र आगच्छत् ।
  6. पिता = पिता पुत्रेण सह गच्छति ।।
  7. त्यक्त्वा = जनाः धनं त्यक्त्वा न सुखी भवेत।

प्रश्न 5.
सन्धिविच्छेदं कुरुत :
तथैव, चिन्तितस्तिष्ठति, सर्वेऽपि, सोपि, सम्पत्तिरर्जिता।
उत्तरम्:
तथैव = तथा. + एव ।
चिन्तितास्तष्ठति = चिन्तितः + तिष्ठति ।
सर्वेपि = सर्वे + अपि ।
सोपि = स: + अपि ।
सम्पत्तिरर्जिता = सम्पत्तिः + अर्जिता।

प्रश्न 6.
मञ्जूषातः शब्दं चित्वा रिक्त स्थानानि पूरयत् :

(संहतिः, गङ्गयाः, चत्वारः, ग्रामे, शृण्वन्ति, कृषिकः)
उत्तरम्:

  1. अस्ति गङ्गायाः तीरे पुष्कल नामको ग्रामः ।
  2. तत्र बहुधनसम्पन्नः हरिहरो नाम कृषिकः ।
  3. ग्रामे तेन महती प्रतिष्ठा सम्प्राप्ता ।
  4. तस्य चत्वारः पुत्राः अभवन् ।
  5. सर्वेऽपि अलसा: न शृण्वन्ति ।।
  6. संहतिः श्रेयसी पुंसाम् ।

प्रश्न 7.
प्रकृति-प्रत्यय-विभागं कुरुत :
दत्वा, जातः, समाश्रित्य, आहूय, आदिष्टः।
उत्तरम्:

Bihar Board Class 8 Sanskrit Solutions Chapter 2 संघे शक्ति 2

प्रश्न 8.
अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तरं पूर्णवाक्येन लिखत

(क) पुष्कलनामको ग्रामः कुत्र अस्ति ?
उत्तरम्:
पुष्कलो नामको ग्राम: गंगायाः तीरे अस्ति ।

(ख) कृषिकर्मणा केन प्रभूता सम्पत्तिरर्जिता?
उत्तरम्:
कृषिकर्मणा हरिहरेन प्रभूता सम्पत्तिरर्जिता ।

(ग) हरिहरस्य कति पुत्राः आसन् ?
उत्तरम्:
हरिहरस्य चत्वारः पुत्राः आसन् ।

Bihar Board Class 8 Sanskrit Solutions Chapter 2 संघे शक्ति

(घ) के अति अलसा: आसन् ?
उत्तरम्:
चत्वारो पुत्राः अलसाः आसन् ।

(च) सर्वे पुत्राः सेवया कम् अरोगं कृतवन्तः ?
उत्तरम्:
सर्वे पुत्राः सेवया पितरं अरोगं कृतवन्तः ।

प्रश्न 9.
सुमेलनं कुरुत: अ

Bihar Board Class 8 Sanskrit Solutions Chapter 2 संघे शक्ति 3
उत्तरम्:
(क) – (6)
(ख) – (1)
(ग) – (5)
(घ) – (3)
(ङ) – (4)
(च) – (2)

प्रश्न 10.
उदाहरणानुसारम् अव्ययपदानि चिनुत 

यथा – सः अद्य पाटलिपुत्रं गच्छति । अद्य

प्रश्नोत्तरं :

  1. त्वम् अत्र किं करोषि ? अत्र
  2. सः कदा गृहं गमिष्यति ? कदा
  3. शीला करीना वा चित्रं द्रक्ष्यति ? वा
  4. असत्यं मा वद ।… मा
  5. शकीलेन साकं सः अगच्छत् । साकं

प्रश्न 11.
अधोलिखितानां निर्देशानुसारं रूपाणि लिखत

यथा-मातृ – (द्वितीया-एकवचने) – मातरम्

  1. पुत्र – (सप्तमी एकवचने) – पुत्रे
  2. फल – (षष्ठी बहुवचने) – फलानाम् ।
  3. नदी – (चतुर्थी द्विवचने) – नदीभ्यां।
  4. लता – (सप्तमौ बहुवचने) – लतासु ।
  5. युष्मद् – (पंचमी द्विवचने) – युवाभ्याम् ।

Bihar Board Class 8 Sanskrit Solutions Chapter 2 संघे शक्ति

प्रश्न 12.
अधोलिखित-वाक्यानि घटनाक्रमानुसारं लिखत

  1. तत्र हरिहरो नाम कृषिकः वर्तते ।
  2. एकदा हरिहरः रोगग्रस्तः अभवत् ।
  3. गङ्गायाः तीरे पुष्कलो नामको ग्रामः अस्ति।
  4. हरिहरस्य चत्वारः पुत्राः आसान् ।
  5. सर्वे पुत्राः अतीव अलसां: आसन् ।
  6. हरिहरः पुत्रान् आहूय अवदत् ।
  7. सर्वे पुत्राः दुष्ट विचारान् अत्यजन् ।

उत्तरम्:

  1. गङ्गायाः तीरे पुष्कलो नामको ग्रामः अस्ति ।
  2. तत्र हरिहरो नाम कृषिकः वर्तते ।
  3. हरिहरस्य चत्वारः पुत्राः आसन् ।
  4. सर्वे पुत्राः अतीव अलसाः आसन् ।
  5. एकदा हरिहरः रोगग्रस्तः अभवत् ।
  6. हरिहरः पुत्रान् आहूय अवदत् ।
  7. सर्वे पुत्राः दुष्ट विचारान् अत्यजन् ।

प्रश्न 13.
मञ्जूषायाः उचितानि पदानि योजयित्वा वाक्य निर्माणं कुरुत

  1. सः – गच्छतः
  2. त्वम् – गच्छामि
  3. अहम् – गच्छन्ति
  4. ते – गच्छसि
  5. वयम् – गृहम्
  6. तौ – गच्छति
  7. आवाम – गच्छाम

गच्छावः

  1. प्रश्नोत्तरम्
  2. स: गच्छति ।
  3. त्वम् गच्छसि।
  4. अहम् गच्छामि।
  5. ते गच्छन्ति ।
  6. वयम् गृहम् गच्छामः।
  7. यूयम् गच्छथ।
  8. तौ गच्छतः।
  9. आवाम् गच्छावः।

Bihar Board Class 10 English Grammar Translation

Bihar Board Class 10th English Book Solutions Grammar Translation.

Bihar Board Class 10 English Grammar Translation

Question 1.
Translate into English:

  1. मेरा बड़ा भाई पटना में रहता है।
  2. पटना बिहार की राजधानी है।
  3. यह गंगा नदी के किनारे बसा हुआ है।
  4. यहाँ की सड़कें पक्की एवं चौड़ी हैं।
  5. यह एक पुराना शहर है।
  6. प्राचीन काल में यह शहर पाटलिपुत्र के नाम से जाना जाता था।
  7. यहाँ अनेकों दर्शनीय स्थल हैं।
  8. पटना का महावीर मंदिर प्रसिद्ध है।

Answers:

  1. I am writing my name on the blackboard.
  2. I have bought a few books.
  3. Why did you come late? Or Why are you late?
  4. I leave for Bombay tomorrow.
  5. Sita is more beautiful than Lila.
  6. What he says is right.
  7. When the teacher comes (enters) to the class, the students stand up.
  8. Mohan is so fat that he cannot run.

Bihar Board Class 10 English Grammar Translation

Question 2.
Translate into English:

  1. हमारा देश महान है।
  2. महात्मा गाँधी अहिंसा में विश्वास करते थे।
  3. हमें सफलता के लिए कठिन परिश्रम करना चाहिए।
  4. क्या आप मेरी मदद कर सकते हैं?
  5. मेरा मित्र इन दिनों बीमार है।
  6. सोमवार की शाम से ही वह अनुपस्थित है।
  7. अजय इतना कमजोर है कि वह परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं हो सकता।
  8. वह नौकरी की खोज में दिल्ली जायेगा।

Answers:

  1. Our country is great.
  2. Mahatama Gandhi believed in non-violence.
  3. We should labour hard for success.
  4. Can you help me?
  5. These days my friend is ill.
  6. He has been absent since Monday evening.
  7. Ajay is so weak that he cannot pass the examination.
  8. He will go to Delhi in search of a job.

Question 3.
Translate into English:

  1. शिक्षक वर्ग में आ चुके हैं।
  2. वह शाम को अपनी किताब पढ़ता रहेगा।
  3. उसके स्टेशन पहुँचने के पहले गाड़ी खुल चुकी थी।
  4. क्या वह गरीब नहीं है?
  5. जब मैं उसके घर गया, वह पढ़ रहा था।
  6. गोपाल हरि से लम्बा है।
  7. यदि तुम्हें रुपये की जरूरत हो, अपने पिता के पास पत्र लिखें।
  8. मैं खाता तो हूँ।

Answers:

  1. The teacher has come in the class.
  2. He shall have been reading his book in the evening.
  3. The train had started before he reached the station.
  4. Is he not poor?
  5. When I went to his house, he was reading.
  6. Gopal is taller than Hari.
  7. If you are in need of money, write a letter to your father.
  8. I do eat.

Bihar Board Class 10 English Grammar Translation

Question 4.
Translate into English:

  1. श्री लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री हैं।
  2. वे गरीबों के एकमात्र नेता हैं।
  3. वे निर्भीक एवं ईमानदार हैं।
  4. इनके नेतृत्व में बिहार आगे बढ़ेगा।
  5. उषा इन्दु से अधिक सुन्दर है।
  6. वह कल कलकत्ता जानेवाला है।
  7. क्या आप मेरी मदद कर सकते हैं?
  8. हमारा देश महान है।

Answers:

  1. Sree Lalu Prasad Yadav is the Chief Minister of Bihar.
  2. He is the only leader of the poor.
  3. He is bold and honest.
  4. Bihar will go ahead under his leadership.
  5. Usha is more beautiful than Indu.
  6. He is to go to Calcutta tomorrow.
  7. Can you help me?
  8. Our country is great.

Question 5.
Translate into English:

  1. मैं सुबह से आपकी प्रतीक्षा कर रहा हूँ।
  2. शिक्षक ने विद्यार्थियों को अंग्रेजी पढ़ाई।
  3. आप किसको खोजते हैं?
  4. एक शहर में दो दोस्त रहते थे।
  5. आप जितने दयालु हैं उतना कोई नहीं है?
  6. मैं आपकी सफलता की कामना करता हूँ।
  7. स्नान करने के बाद वह चाय पीती है।
  8. वह आयेगा तो मैं जाऊँगा।

Answers:

  1. I have been waiting for you since morning.
  2. The teacher taught the students English.
  3. Whom do you search for?
  4. There lived two friends in any town.
  5. Nobody is so kind as you are.
  6. I wish your success.
  7. She takes tea after having a bath.
  8. I shall go if he comes.

Bihar Board Class 10 English Grammar Translation

Question 6.
Translate into English:

  1. लाल बहादुर शास्त्री जी को कौन नहीं जानता?
  2. वे एक गरीब परिवार से आते हैं।
  3. वे गरीबों के प्रतीक हैं।
  4. मैं उतना ही जानता हूँ जितना तुम।
  5. हमें अपनी माँ की सेवा अवश्य करनी चाहिए।
  6. किसी गाँव में एक भिखारी रहता था।
  7. क्या आपने हरि को देखा है?
  8. कृपया जरा दरवाजा बन्द कर दें।

Answers:

  1. Who desn’t know Lal Bahadur Shashtrijce?
  2. He comes of a poor family.
  3. He is the symbol of the poor.
  4. I know as much as you.
  5. We must serve our mother.
  6. There lived a beggar in a village.
  7. Have you seen Hari?
  8. Please, shut the door.

Question 7.
Translate into English:

  1. हमलोग फुटबॉल खेलते हैं।
  2. राजा अपनी प्रजा को प्यार करते थे।
  3. हमें अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए।
  4. क्या मैं घर जा सकता हूँ?
  5. मुझे बताओ कि तुम कहाँ रहते हो।
  6. 1947 से हमारा देश स्वतन्त्र है।
  7. वह इतना गरीब है कि विद्यालय शुल्क नहीं दे सकता।
  8. श्याम परीक्षा में प्रथम आएगा।

Answers:

  1. We play football.
  2. The king loved his subject.
  3. We should take care of our health.
  4. May I go home?
  5. Tell me where you live.
  6. Our country has been free since 1947.
  7. He is so poor that he can’t pay the school fee.
  8. Shyam will stand first at the examination.

Question 8.
Translate into English:

  1. गाय एक चौपाया जानवर है।
  2. गाय हरी घास एवं पुआल खाती है।
  3. गाय हमें दूध देती है।
  4. इसका दूध मीठा होता है।
  5. यह हमें बछड़ा देती है।
  6. बछड़ा गाड़ी खींचता एवं हल जोतता है।
  7. हलवाई इसके दूध से मिठाइयाँ बनाता है।
  8. हिन्दू गाय को पूजते हैं।

Answers:

  1. The cow is a four-footed animal.
  2. She eats green grass and straw.
  3. The cow gives us milk.
  4. Her milk is sweet.
  5. She gives us a calf.
  6. The calf carries cart and ploughs the field.
  7. Confectioner makes sweets from her milk.
  8. Hindus worship the cow.

Bihar Board Class 10 English Grammar Translation

Question 9.
Translate into English:

  1. भारतीय किसान परिश्रमी होते हैं।
  2. वे प्रात:काल उठते हैं।
  3. सर्वप्रथम वे अपने मवेशियों को खिलाते हैं।
  4. उसके बाद वे खेत जाते हैं।
  5. वे दिनभर खेत में काम करते हैं।
  6. दोपहर में वे थोड़ा आराम करते हैं।
  7. शाम को वे घर लौटते हैं।
  8. भारतीय किसान की स्थिति दयनीय है।

Answers:

  1. Indian farmers are laborious.
  2. They get up early in the morning.
  3. First of all, they feed their cattle.
  4. After that, they go to their field.
  5. They work in the field throughout the day.
  6. They take rest for a while at noon.
  7. They return their home in the evening.
  8. The condition of the Indian farmer is miserable.

Question 10.
Translate into English:

  1. राम मेरा अग्रज है
  2. वह ग्यारहवीं कक्षा का छात्र है।
  3. वह सदा अपने वर्ग में प्रथम आता है।
  4. कल वह पटना जायेगा।
  5. पटना बिहार की राजधानी है।
  6. वह गंगा नदी के किनारे अवस्थित है।
  7. बिहार में प्रथम बार एक महिला मुख्यमंत्री हुई है।
  8. बिहार की धरती खनिज से भरी-पूरी है।

Answers:

  1. Ram is my elder borther.
  2. He is a student of class XI.
  3. He always stands first in his class.
  4. He will go to Patna tomorrow.
  5. Patna is the capital of Bihar.
  6. It stands on the bank of the river ‘Ganga’.
  7. For the first time in Bihar, a female has become the Chief Minister.
  8. The land of Bihar is full of minerals.

Question 11.
Translate into English:

  1. मानवता सबसे बड़ा धर्म है।
  2. वह खाना खा चुका था।
  3. तुम आज क्या कर रहे हो?
  4. सीता गीता से अधिक सुन्दर है।
  5. वह कल स्कूल नही गया था।
  6. परीक्षा दो घंटे तक चलेगी।
  7. गाय एक उपयोगी पशु है।
  8. मोहन एकाएक बीमार हो गया था।

Answers:

  1. Humanity is the greatest religion.
  2. He had taken his meal.
  3. What are you doing today?
  4. Sita is more beautiful than Geeta.
  5. He didn’t go to school yesterday.
  6. The examination will be of two hours duration.
  7. The cow is a useful animal.
  8. Mohan fell ill all of a sudden.

Bihar Board Class 10 English Grammar Translation

Question 12.
Translate into English:

  1. आदमी और कुत्ता में क्या फर्क है?
  2. बड़ों का आदर करना चाहिए।
  3. हिमालय पहाड़ों में सबसे ऊँचा है।
  4. राम पढ़ने में श्याम से अच्छा है।
  5. कल से मूसलाधार वर्षा हो रही है।
  6. राम के स्टेशन पहुँचने के पहले गाड़ी खुल चुकी थी।
  7. चुनाव प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता है।
  8. ईमानदारी सबसे अच्छी नीति है।

Answers:

  1. What is the difference between a man and a dog?
  2. We ought to respect our elders.
  3. The Himalyas is the highest Mountain.
  4. Ram is more intelligent than Shyam.
  5. It has been raining cats and dogs since yesterday.
  6. The train had steamed off before Ram reached the station.
  7. There is need of some changes in Election Process.
  8. Honesty is the best Policy.

Question 13.
Translate into English:

  1. राजगीर एक बड़ा ही रमणीय स्थान है।
  2. वैशाली एक दर्शनीय ऐतिहासिक स्थल है।
  3. विद्यार्थियों को चरित्र पर ध्यान देना चाहिए।
  4. आज बच्चों को शिक्षक की नहीं गुरु की जरूरत है।
  5. खेल का जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है।
  6. वह कल पटना गया था।
  7. अगर वह मन से पढ़ता, तब जरूर पास होता।
  8. बाग में मेला लगेगा।

Answers:

  1. Rajgir is a very charming place.
  2. Vaishali is a worth seeing historical place.
  3. Students should pay heed to their character.
  4. These days children need preceptor not a teacher.
  5. Games and sports have important place in our life.
  6. He went Patna yesterday.
  7. Had he read attentively, he must have passed.
  8. A fair will be organised in the orchard.

Bihar Board Class 10 English Grammar Translation

Question 14.
Translate into English:

  1. गंगा भारत की पवित्र नदियों में एक है।
  2. इसके किनारे अनेक बड़े-बड़े शहर स्थित हैं।
  3. हमलोग गंगा को माँ की तरह पूजते हैं।
  4. भारत में अनेक ध र्मों के लोग रहते हैं।
  5. भारत एक प्रजातंत्रात्मक देश है।
  6. यहाँ का संविधान लचीला है।
  7. यह निश्चित है कि भारत तरक्की करेगा।
  8. भारत की एकता को कोई भी तोड़ नहीं सकता है।

Answers:

  1. The Ganga is one of the holiest rivers of India.
  2. Several cities stand on tis bank.
  3. We worship the Ganga like our mother.
  4. People of different religions live in India.
  5. India is a democratic country.
  6. Our constitution is flexible.
  7. It is certain that India will progress.
  8. No one can break the unity of India.

Question 15.
Translate into English:

  1. राम ने मुझे एक चिट्ठी लिखी।
  2. सीता प्रत्येक दिन स्कूल जाती है।
  3. जोरदार वर्षा हो रही है।
  4. तुम्हें अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिये।
  5. क्या तुम कभी आगरा गये हो?
  6. मेरा भाई कल पटना से वापस आयेगा।
  7. तुम्हें मेरी सहायता करनी चाहिये।
  8. आप कहाँ से आये हैं?

Answers:

  1. Ram wrote me a letter.
  2. Sita goes to school daily.
  3. It is raining heavily.
  4. You should take care of your health.
  5. Have you ever gon Agra?
  6. My brother will come back from Patna tomorrow.
  7. You should help me.
  8. Where have you come from?

Bihar Board Class 10 English Grammar Translation

Question 16.
Translate into English:

  1. मैं कल पटना जाऊँगा।
  2. मैं दवा खा रहा हूँ।
  3. वह यहाँ नहीं आया।
  4. क्या तुमने अपना काम समाप्त कर लिया है।
  5. चार दिनों से वर्षा हो रही है।
  6. वह गरीबों की सहायता करता है।
  7. वह अपने पिता के साथ रहना चाहता है।
  8. तुम कब यहाँ आये?

Answers:

  1. shall go to Patna tomorrow.
  2. I am taking medicine.
  3. He did not come here.
  4. Have you finished your work?
  5. It has been raining for four days.
  6. He helps the poor.
  7. He wants to live with his father.
  8. When did you come here?

Question 17.
Translate into English:

  1. महात्मा गाँधी को कौन नहीं जानता है?
  2. जय प्रकाश नारायण एक महान व्यक्ति थे।
  3. मैंने उसे एक पत्र लिखा।
  4. वह सोमवार से बीमार है।
  5. वह तैरना जानता है।
  6. आज बहुत गर्म है।
  7. ज्योंही शिक्षक वर्ग में आये, विद्यार्थी खड़े हो गये।
  8. यदि तुम कठिन परिश्रम नहीं करोगे, तुम सफलता प्राप्त नहीं करोगे।

Answers:

  1. Who does not know Mahatma Gandhi?
  2. Jai Prakash Narayan was a great man.
  3. I wrote a letter to him.
  4. He has been ill since Monday.
  5. He knows to swim.
  6. It is too hot today or It is very hot today.
  7. As soon as the teacher entered the class, the students stood up.
  8. Unless you labour hard, you will not succeed.

Bihar Board Class 10 English Grammar Translation

Question 18.
Translate into English:

  1. विनोबा भावे एक संत थे।
  2. भारत एक कृषि प्रधान देश है।
  3. हिन्दी हमारी मातृ-भाषा है।
  4. कल वह जायेगा।
  5. आप कहाँ से आये हैं?
  6. हमलोग गंगा को माँ की तरह पूजते हैं।
  7. तुम्हें मेरी सहायता करनी चाहिये।
  8. राम मुझे एका चिट्ठी लिखेगा।

Answers:

  1. Vinova Bhave was a saint.
  2. India is an agricultural country.
  3. Hindi is our mother tongue.
  4. He will go tomorrow.
  5. Where have you come from?
  6. We worship the Ganges as a mother.
  7. You should help me.
  8. Ram will write a letter to me.

Question 19.
Translate into English:

  1. गरीब ईमानदार होते हैं।
  2. उसे कल पटना जाना है।
  3. राम मोहन से अधिक तेज है।
  4. सभी विद्यार्थियों को पुरस्कार दिया गया।
  5. आज वर्षा होगी।
  6. उसने अपने पिता को पत्र लिखा है।
  7. मैं अकेले वहाँ नहीं जा सकता।
  8. यदि तुम्हें मेरी सहायता की जरूरत हो, मुझे पत्र लिखो।

Answers:

  1. The poor are honest.
  2. He has to go to Patna tomorrow.
  3. Ram is more intelligent than Mohan.
  4. Every student got prizes.
  5. It will rain today.
  6. He has written a letter to his father.
  7. I cannot go alone there.
  8. If you need my help, write a letter to me.

Question 20.
Translate into English:

  1. लोकनायक जयप्रकाश गाँधीजी के अनुयायी थे।
  2. उनकी पत्नी का नाम प्रभावती था।
  3. वह अपने पिता के साथ रहना चाहता है।
  4. परीक्षा चल रही है।
  5. आप कहाँ से आये हैं?
  6. सदा सच बोलो।
  7. मैं कल पटना जाऊँआ।
  8. मेरी परीक्षा समीप है।

Answers:

  1. Loknayak Jai Prakash was the follower of Gandhijee.
  2. His wife’s name was Prabhawati.
  3. He wants to live with his father.
  4. The examination is going on.
  5. Where have you come from?
  6. Always speak the truth.
  7. I will go to Patna tomorrow.
  8. My examination is at hand.

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Question 21.
Translate into English:

  1. वह आज दिल्ली से आया है।
  2. मैं उसे नहीं जानता हूँ।
  3. क्या आप उन्हें जानते हैं?
  4. यह कलम मेरे भाई ने मुझे दी है।
  5. भारत एक कृषि प्रध न देश है।
  6. सुबह का टहलना स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है।
  7. राम श्याम से ज्यादा ईमानदार है।
  8. मैं दो वर्षों से इस शहर में रह रहा हूँ।

Answers:

  1. He has come from Delhi today.
  2. I don’t know him.
  3. Do you know him?
  4. My brother has given me this pen.
  5. India is an agricultural country.
  6. Walking in the morning is good for health.
  7. Ram is more honest than Shyam.
  8. I have been living in this city for two years.

Question 22.
Translate into English:

  1. मेरा बड़ा भाई पटना में रहता है।
  2. पटना बिहार की राजधानी है।
  3. यह गंगा नदी के किनारे बसा हुआ है।
  4. यहाँ की सड़कें पक्की एवं चौड़ी हैं।
  5. यह एक पुराना शहर है।
  6. प्राचीन काल में यह शहर पाटलिपुत्र के नाम से जाना जाता था।
  7. यहाँ अनेकों दर्शनीय स्थल हैं।
  8. पटना का महावीर मंदिर प्रसिद्ध है।

Answers:

  1. My elder brother lives at Patna.
  2. Patna is the capital of Bihar.
  3. It is situated at the bank of river Ganga.
  4. There are pitched and wide roads here.
  5. It is an old city.
  6. It was known as Patliputra in ancient times.
  7. There are many worth-seeing places here.
  8. The Mahavir Temple of Patna is famous.

Bihar Board Class 10 English Grammar Translation

Question 23.
Translate into English:

  1. धनी सुखी है।
  2. खेलना लाभदायक है।
  3. मैंने कोई पुस्तक नहीं लिखी थी।
  4. क्या उन्होंने मुझे नहीं देखा था?
  5. आज बहुत गर्मी है।
  6. आज वर्षा हो रही है।
  7. हीमेश आज पटना गया है।
  8. मेरा भाई कल दिल्ली से आयेगा।

Answers:

  1. The rich are happy.
  2. Playing is useful. or To play is useful.
  3. I wrote no book. or, I did not write any book.
  4. Did he not see me?
  5. It is very hot today.
  6. It is raining today.
  7. Himesh went to Patna today.
  8. My brother will come here from Delhi tomorrow.

Question 24.
Translate into English:

  1. मैं सीखने के लिए उत्सुक हूँ।
  2. तुम खुद कोशिश करो।
  3. भगवान तेरी मदद करें।
  4. तुम कौन कलम पसंद करते हो?
  5. वे सेवा निवृत्त पदाधिकारी हैं।
  6. मैंने एक भुंकता हुआ कुत्ता पाया।
  7. वह वहाँ जाने से डरता है।

Answers:

  1. I am anxious to learn.
  2. Try yourself.
  3. May God help you!
  4. Which pen do you like?
  5. He is a retired officer.
  6. I found a barking dog.
  7. He fears to go there.

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Question 25.
Translate into English:

  1. मैं सुबह जल्दी उठता हूँ।
  2. वह कल दिल्ली जाएगा।
  3. हमें बाजार जाना है।
  4. आज स्कूल बन्द है।
  5. मैं इस शहर में पाँच साल से रह रहा हूँ।
  6. यह मेरी कलम है।
  7. बिहार की राजधानी पटना है।

Answers:

  1. I get up early in the morning.
  2. He will go to Delhi tomorrow.
  3. I have to go to the market.
  4. The school is closed today.
  5. I have been living in this city for the last five years.
  6. This is my pen.
  7. Patna is the capital of Bihar.

Question 26.
Translate into English:

  1. हमलोग रात्रि में सोते हैं।
  2. मैं डाक्टर से कल भेट करूँगा।
  3. शिक्षक ने उससे कहा कि खड़े हो जाओ।
  4. मुझे अभी अवश्य वहाँ जाना चाहिए।
  5. हमलोगों को अपने माँ-बाप की आज्ञा माननी चाहिए।
  6. हमलोग मैच जीत सकते हैं।
  7. वह विद्यार्थी बहुत ईमानदार है।

Answers:

  1. We sleep at night.
  2. I shall meet the doctor tomorrow.
  3. The teacher asked him to stand up.
  4. I must go there now.
  5. We should obey our parents.
  6. We can win the match.
  7. That student is very honest.

Question 27.
Translate into English:

  1. वह राजा अत्यधिक कठोर है।
  2. रेखा यहाँ सबसे सुन्दर लड़की है।
  3. उसे इस विद्यालय में दाखिल किया गया है।
  4. राजीव एक धनी व्यक्ति बनेगा।
  5. उसे जाने दो।
  6. किताब लेने के लिए आओ।
  7. कक्षा में लड़के-लड़कियों से अधिक हैं।

Answers:

  1. That king was very cruel.
  2. Rekha is the most beautiful girl here.
  3. He has been admitted to the school.
  4. Rajiv will become a rich man.
  5. Let him go.
  6. Go to bring the book.
  7. Boys are more in numbers than the girls in the class.

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Question 28.
Translate into English:

  1. वह अपने पिता के साथ रहता है।
  2. मेरा भाई कल पटना आयेगा।
  3. यहाँ अनेक दर्शनीय स्थान हैं।
  4. पटना गंगा नदी के किनारे बसा है।
  5. खेलना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।
  6. क्या तुमने सीता को देखा है?
  7. सभी विद्यार्थियों को पुरस्कार दिया जाएगा।

Answers:

  1. He lives with his father.
  2. My brother will come to Patna tomorrow.
  3. There are many worth-seeing places here.
  4. Patna is situated at the bank of river Ganga.
  5. Playing (to play) is useful for health.
  6. Have you seen Şita?
  7. Every student will get a prize. or, Prize will be given to all (every) student.

Question 29.
Translate into English:

  1. आदमी और कुत्ता में क्या फर्क है?
  2. मानवता सबसे बड़ा धर्म है।
  3. परीक्षा दो घंटे तक चलेगी।
  4. वह कल पटना जायेगा।
  5. खेल का जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है।
  6. छात्रों को चरित्र पर ध्यान देना चाहिए।
  7. भारतीय किसान की स्थिति दयनीय है।

Answers:

  1. What is the difference between a man and a dog?
  2. Humanity is the greatest religion.
  3. The examination will be of two hours duration.
  4. He will go to Patna tomorrow.
  5. Sports and games have an important place in our life.
  6. The student should pay heed to their character.
  7. The condition of the Indian farmer is miserable.

Bihar Board Class 8 Social Science History Solutions Chapter 3 ग्रामीण ज़ीवन और समाज

Bihar Board Class 8 Social Science Solutions History Aatit Se Vartman Bhag 3 Chapter 3 ग्रामीण ज़ीवन और समाज Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 8 Social Science History Solutions Chapter 3 ग्रामीण ज़ीवन और समाज

Bihar Board Class 8 Social Science ग्रामीण ज़ीवन और समाज Text Book Questions and Answers

पाठ्गत प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कल्पना करें लगान वसूली का अधिकार मिलने से गाँवों में क्या परिवर्तन आया होगा, आपकी नजर में अब भूमि का मालिक कौन हो गया ?
उत्तर-
अंग्रेजों को लगान वसूली का अधिकार मिलने से गाँवों में असंतोष उत्पन्न हो गया। किसानों की दशा खराब होती चली गयी । भूमि का मालिक अब राजा से जमींदार हो गये थे।

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प्रश्न 2.
गतिविधि-रिकार्डो के मत के अनुसार बड़े एवं सम्पन्न किसानों की . आय पर आज कर लगाना क्या उचित होगा? सोचें।
उत्तर-
हाँ, ऐसा करना उचित होगा । बड़े एवं सम्पन्न किसानों की आय पर कर लगाना उचित ही होगा।

प्रश्न 3.
गतिविधि-महालवारी व्यवस्था में पूरे गाँव से एक परिवार द्वारा लगान वसूलने में किस प्रकार की कठिनाई आती होगी ? विचार कर अपना मत दें।
उत्तर-
एक परिवार द्वारा पूरे गाँव से लगान वसूल करने में बहुत समस्या आती होगी। प्रत्येक किसान की उपज का हिसाब-किताब रखना व उनकी बचत का अनुमान लगाना किसी एक परिवार के लिए संभव नहीं हो सकता है। अत: वे किसी प्रकार इस काम को निपटा देते होंगे।

प्रश्न 4.
नकदी फसल किसे कहा जाता था?
उत्तर-
नकदी फसल ऐसा कृषि उत्पाद होता है जिसे खेतों से सीधे व्यापारियों द्वारा खरीद लिया जाता था । जैसे – गन्ना, नील, तम्बाकू, अफीम । इत्यादि।

अभ्यास-प्रश्न

आइये फिर से याद करें-

प्रश्न 1.
सही विकल्प को चुनें

प्रश्न (i)
बिहार में अंग्रेजों के समय किस तरह की भूमि व्यवस्था अपनाई गई?
(क) स्थायी बंदोबस्त
(ख) रैयतवारी व्यवस्था
(ग) महालवारी व्यवस्था
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(क) स्थायी बंदोबस्त

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प्रश्न (ii)
अंग्रेजों के आने के पहले भूमिका मालिक कौन होता था ?
(क) जमींदार
(ख) व्यापारी
(ग) किसान
(घ) राजा
उत्तर-
(घ) राजा

प्रश्न (iii)
रैयतवारी व्यवस्था में जमीन का मालिक किसे माना गया ?
(क) किसान
(ख) जमींदार
(ग) गाँव
(घ) व्यापारी
उत्तर-
(क) किसान

प्रश्न (iv)
अंग्रेजी शासन द्वारा भारत में अपनाई गई भूमि व्यवस्थाओं का प्रमुख उद्देश्य क्या था?
(क) अपनी आय बढाना
(ख) भारतीय गाँवों पर अपने शासन को मजबूत करना
(ग) व्यापारिक लाभ प्राप्त करना
(घ) किसानों का समर्थन प्राप्त करना
उत्तर-
(iv) (क) अपनी आय बढ़ाना।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित के जोड़े बनाएँ-

  1. महालवारी – (क) 1793
  2. नील दर्पण – (ख) बिहार
  3. नकदी फसल – (ग) दीनबंधु मित्र
  4. स्थायी भूमि-व्यवस्था – (घ) पंजाब

उत्तर-

  1. महालवारी – (घ) पंजाब ।
  2. नील दर्पण – (ग) दीनबंधु मित्र
  3. नकदी फसल – (ख) बिहार
  4. स्थायी भूमि व्यवस्था – (क) 1793

आइए विचार करें

प्रश्न (i)
अंग्रेजी शासन के पहले भारतीय भूमि व्यवस्था एवं लगान प्रणाली के विषय में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर-
अंग्रेजी शासन के पहले राज्य की सूची जमीन का मालिक उस राज्य का राजा होता था। उस समय जमींदारों का एक प्रभावशाली वर्ग भी गाँवों में रहता था जिनके पास राजा द्वारा दी गई काफी जमीन होती थी। वे ही गाँवों से लगान (कृषि उपज पर राजा द्वारा किसानों से लिया जाने वाला कर) की वसूली करते थे। इसके एवज में या फिर राज्य के अन्य कामों को देखने के एवज में इन्हें जमीनें मिलती थीं। राजा या उसके अधिकारी गाँवों में ज्यादा दखल नहीं देते थे । बस, जमींदारों के मार्फत (द्वारा) निर्धारित लगान वसूल करते थे।

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प्रश्न (ii)
स्थायी बन्दोबस्त की विशेषताओं को बताएँ।
उत्तर-
1789 के आस-पास कंपनी सरकार ने, जमींदारों के साथ एक करार किया। इसके तहत जमींदारों के द्वारा कंपनी को दिया जाने वाला लगान 10 वर्षों के लिए तय कर दिया गया। यह राशि जमींदारों द्वारा किसानों से वसूले गए लगान का 9/10 भग तय कर दिया गया।

आगे चलकर सन् 1793 में इसी राशि को हमेशा के लिए निश्चित मान – लिया गया। इस राशि में भविष्य में कोई बढ़ोतरी नहीं होनी थी । इस व्यवस्था – को ‘स्थायी बंदोबस्त’ नाम दिया गया। – इस व्यवस्था के तहत, एक आकलन के अनुसार यदि किसानों की उपज

को 100 माना जाए तो अंग्रेजी सरकार को उसमें से लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा प्राप्त होता था। जमींदार और उसके कारिंदे अपने लिए करीब 15 प्रतिशत हिस्सा वसूलते थे और शेष 40 प्रतिशत किसानों के पास बचता था। इस राशि में कोई परिवर्तन नहीं होना था। पर, जमींदारों को लगान की त्य राशि नियमित तिथि को सुरज डूबने के पहले सरकारी कार्यालय में जमा करना अनिवार्य था । ऐसा नहीं करने पर उनकी जमींदारी नीलाम कर दी जाती थी। सरकार को इस बात की कोई परवाह नहीं थी कि अकाल या बाढ़ के कारण फसल नष्ट हो गयी है या पैदावार कम हुई है। जमींदारों को हर हाल में तय राशि नियत तिथि को जमा कराना ही था।

प्रश्न (iii)
अंग्रेजी सरकार द्वारा बार-बार भूमि राजस्व व्यवस्था में किये जाने वाले परिवर्तनों को आप किस रूप में देखते हैं ? अपने शब्दों में
बताएँ।
उत्तर-
अंग्रेजी सरकार ने गाँवों से ज्यादा से ज्यादा धन अपने साम्राज्य विस्तार के लिए होने वाले खर्चों के लिए प्राप्त करना चाहा। इसके लिए उसने पहले स्थायी बंदोबस्त व्यवस्था की । इसके तहत जमींदारों द्वारा लगान के रूप में जमा की जाने वाली राशि हमेशा के लिए तय कर दी गयी। फिर उन्हें लगा कि यह उचित नहीं था। चूँकि साल दर साल उनके खर्चे तो बढ़ते ही जाएँगे

और लगान के रूप में आने वाली आय वही रहेगी। अतः उन्होंने फिर महालवारी व्यवस्था की जिसके तहत जमींदारों के बदले गाँव के बड़े किसान या परिवार को गाँव का लगान वसूलने का अधिकार दे दिया गया इसके तहत अंग्रेजों को 50 प्रतिशत लगान मिलना था और इसे मात्र 30 वर्षों के लिए लागू किया गया। जबकि रैयतवारी व्यवस्था के तहत कंपनी सरकार ने सीधा किसानों से संपर्क किया । किसानों को जमीन का मालिक बना दिया गया ।

उनसे सीधे 50 प्रतिशत लगान जमा करने को कहा गया । पर, इस व्यवस्था ‘को स्थायी नहीं बनाया गया। प्रत्येक 30 वर्ष बाद राशि में बदलाव किया जाना तय किया गया । भूमि राजस्व व्यवस्था में अंग्रेजी सरकार ने बार-बार परिवर्तन अधिक से अधिक लाभ कमाने के दृष्टिकोण से किया था।

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प्रश्न (iv)
अंग्रेजों की भूमि राजस्व व्यवस्था आज की व्यवस्था से कैसे अलग थी, संक्षेप में बताएँ।
उत्तर-
आज, जहां सरकार किसानों से काफी कम राशि भूमि राजस्व के रूप में लेती है और कई सरकारी कर्मचारी व अधिकारी इस काम के लिए लगे होते हैं वहीं अंग्रेजी सरकार भूमि राजस्व के रूप में तब, किसानों से उनके लाभ का लगभग आधा हिस्सा हडप लेती थी। भूमि राजस्व की वसूली का काम जमींदार और उसके कारिंदे करते थे, कहीं यह काम कोई बड़ा किसान या परिवार करता था और कहीं कंपनी के लोग स्वयं यह काम करते थे। पर, उनका मकसद अधिक से अधिक शोषण करना होता था।

प्रश्न (v)
नई राजस्व नीति का भारतीय समाज पर क्या असर हुआ?
उत्तर-
नई राजस्व नीति के कारण आधे पुराने जमींदारों की जमींदारी उनके हाथ से चली गई क्योंकि उन्होंने तय समय पर लगान जमा नहीं किया था। दरअसल उनके लिए किसानों से लगान के लिए ज्यादा जोर-जबर्दस्ती करना संभव नहीं था। किसानों के साथ उनके पुराने संबंध थे। नई राजस्व व्यवस्था में जमीन का मालिक किसान या जमींदारों को बना दिया गया ।

इससे लगान समय पर जमा करने के लिए इसे बेचने या बंधक रखने का चलन शुरू हो गया। इससे गाँवों में महाजन के रूप में एक प्रभावी समूह आ गया । ये महाजन जमीन के एवज में धन दिया करते थे। किसान और जमींदार दोनों इनसे कर्ज लेते थे । अंग्रेज सरकार को केवल लगान से मतलब थी । इस नई राजस्व नीति का भारतीय समाज पर बुरा असर पड़ा । शोषण बड़ा, भारतीय किसानों की दरिद्रता बढ़ी और भारतीय समाज में असंतोष बढ़ता गया जिसके । परिणामस्वरूप जगह-जगह पर उपद्रव की स्थिति उत्पन्न हो गयी।

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प्रश्न (vi)
नील की खेती की प्रमुख समस्याओं की चर्चा करें।
उत्तर-
भारतीय किसानों के दृष्टिकोण से नील की खेती उनके लिए फायदेमंद नहीं थी। मजबूरन, उन्हें अपनी जमीन के एक बेहतर हिस्से पर इसकी खेती करनी पड़ती थी। अंग्रेज अधिकारी इसके लिए उन्हें बाध्य करते – थे। किसान तो हमेशा खाद्य फसल ही उपजाना चाहते थे। इससे उन्हें उस साल के लिए खाने का अनाज मिलता था और बुरे दिनों के लिए कुछ अनाज वे बचाकर भी रख लेते थे ।

नील की खेती धान के मौसम में ही की जाती थी इससे धान के फसल में देर हो जाती थी। साथ ही, जिस खेत में नील की खेती होती थी उसमें फसल कटने के बाद उस साल कोई और फसल नहीं उगायी जा सकती थी। इसका असर होता कि किसानों के पास अनाज की कमी हो जाती थी। जब सूखा या बाढ़ के कारण फसलों का उत्पादन कम होता था तो किसानों के पास पहले का रखा अनाज नहीं होता था। ऐसे में या तो महाजनों से कर्ज लेते थे या भूखे रहते थे।

आइए करके देखें-

प्रश्न (i)
अंग्रेजी राज के समय उत्पादित फसलों में से कौन-कौन आज भी उत्पादित होती है, वर्ग में सहपाठियों से चर्चा करें।
उत्तर-

  1. चाय
  2. आलू
  3. धान
  4. गेहूँ
  5. दाल
  6. अफीम आदि।

Bihar Board Class 8 Social Science History Solutions Chapter 3 ग्रामीण ज़ीवन और समाज

प्रश्न (ii)
खेती करने के तौर-तरीकों में पहले की अपेक्षा आज किस तरह का बदलाव आया है ? बुजुर्गों से पता करें।
उत्तर-
पहले खेती हल-बैल की सहायता से होती थी जबकि आज ट्रैक्टर से भी खेत जोतते हैं और अधिक फसल उत्पादन के लिए विभिन्न खादों की मदद ली जाती है।

Bihar Board Class 6 Social Science History Solutions Chapter 1 हमारा अतीत

Bihar Board Class 6 Social Science Solutions History Aatit Se Vartman Bhag 1 Chapter 1 हमारा अतीत Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 6 Social Science History Solutions Chapter 1 हमारा अतीत

Bihar Board Class 6 Social Science हमारा अतीत Text Book Questions and Answers

अभ्यास

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न 

प्रश्न (क)
इतिहास शब्द की उत्पत्ति किस शब्द से हुई?
(i) यूनानी
(ii) लैटिन
(iii) अंग्रेजी
(iv) हिन्दी
उत्तर-
(ii) लैटिन

Bihar Board Class 6 Social Science History Solutions Chapter 1 हमारा अतीत

प्रश्न (ख)
जिस काल का लिखिंत विवरण उपलब्ध होता है उसे क्या कहा जाता है ?
(i) प्रागैतिहासिक काल
(ii) ऐतिहासिक काल
(iii) प्राचीन काल
(iv) मध्य काल
उत्तर-
(ii) ऐतिहासिक काल

प्रश्न (ग)
अशोक ने अपने अभिलेख किस लिपि में खुदवाये ?
(i) देवनागरी
(ii) ब्राह्मी लिपि
(ii) फारसी लिपि
(iv) रोमन लिपि
उत्तर-
(ii) ब्राह्मी लिपि

Bihar Board Class 6 Social Science History Solutions Chapter 1 हमारा अतीत

II. खाली स्थान को भरें 

  1. ……………… को इतिहास का जनक मानते हैं।
  2. प्राचीन वस्तुओं के तिथि निर्धारण को ………… कहते हैं।
  3. अशोक के अभिलेख ……………. में है।
  4. मेगास्थनीज एक …………………. था।
  5. सारनाथ में …………………. स्थित है।

उत्तर-

  1. हेरोडोटस को इतिहास का जनक मानते हैं।
  2. प्राचीन वस्तुओं के तिथि निर्धारण को कार्बन-पद्धति कहते हैं।
  3. अशोक के अभिलेख ब्राह्मी लिपि में है।
  4. मेगास्थनीज एक विजेता था।
  5. सारनाथ में अशोक स्तम्भ स्थित है।

III. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें 

प्रश्न (क)
इतिहास किसे कहते हैं ?
उत्तर-
अतीत की घटनाओं का क्रमबद्ध रूप से संकलित विवरण इतिहास कहलाता है।

Bihar Board Class 6 Social Science History Solutions Chapter 1 हमारा अतीत

प्रश्न (ख)
अतीत को जानने में इतिहास किस तरह सहायक है ?
उत्तर-
इतिहास का अर्थ है जाँच-पड़ताल । अतीत की घटनाओं का क्रमबद्ध तरीकों से संकलित करना इतिहास है। जब हम अतीत की जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो “इतिहास’ ही बताता है कि किस समय की वस्तु है। जब मनुष्य को लिखना नहीं आता था उस समय की जानकारी भी हमें इतिहास से ही प्राप्त होती है। संस्कृति, सभ्यता कब, कहाँ और कैसे विकसित हुई. लोग कब खेती करना सीखे, कब चक्कों का आविष्कार किये, किस प्रकार व्यापार करते थे। नगरों और राज्यों की स्थापना कैसे हुई, सारी जानकारी जो अतीत में थी, इतिहास से ही प्राप्त होती है । कार्बन 14 (C14)जो वैज्ञानिक पद्धति है, इस माध्यम से जानकारी प्राप्त की जाती है कि वस्तु कितना पुराना है।

प्रश्न (ग)
अनेकता में एकता से आपका क्या तात्पर्य है ?
उत्तर-
अनेकता का यहाँ तात्पर्य है कि भिन्न-भिन्न जाति, धर्म, भाषा, . वेश-भूषा तथा आचार-विचार के लोग एक देश या राज्य में हैं तो कहते हैं अनेकता और इन सारी अनेकताओं के बावजूद सब साथ-साथ हैं तो एकता है। अर्थात् मानव की अनेक प्रजातियों मिलकर एक विशिष्ट संस्कृति का निर्माण करें तो इसे अनेकता में एकता कहते हैं।

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प्रश्न (घ)
अशोक ने पूरे साम्राज्य में एकता स्थापित करने के लिए क्या किया?
उत्तर-
अशोक ने अभिलेख बोल-चाल की भाषा एवं ब्राह्मी लिपि में खुदवाये, भिन्न-भिन्न धर्म और प्रजाति के लोगों से एक समान व्यवहार किया, अपने शासन काल में उच्च और निम्न वर्ग के लिए एक होन व्यवस्था. थी। के दो भाग हैं । इतिहास हमें बताता है कि भारत में सभ्यता और संस्कृति कब और कैसे, कहाँ विकसित हुई । मनुष्य ने प्राकृतिक संसाधनों की खोज कैसे की, किस प्रकार गाँव, नगर और राज्यों की स्थापना हुई । अपनी समस्याओं के निदान के लिए नये-नये आविष्कार किस प्रकार किये । वर्तमान का बदलाव अतीत की ही देन है।

प्रश्न (ङ)
अतीत के गौरव को कायम रखने के लिए हमें क्या करना चाहिए?
उत्तर-
अतीत को ठीक से समझना बहुत जरूरी है। प्राचीन काल में लोगों ने प्रत्येक क्षेत्र में किस प्रकार प्रगति और उपलब्धियाँ हासिल की। कितनी कठिनाइयों का सामना करते हुए सफलता प्राप्त की । हमें सुन्दर भविष्य के निर्माण में प्रेरणा मिलती है। हमें वर्तमान को सुखद बनाना, विकसित बनाना है तो अतीत को सही ढंग से समझना होगा। हमें अतीत के गौरव को कायम रखने के लिए अन्धविश्वास में, दुराग्रहों, जाति-प्रथा एवं सम्प्रदायवाद जैसी कुरीतियों को दूर करना होगा।

Bihar Board Class 6 Social Science हमारा अतीत Notes

पाठ का सारांश

  • इतिहास के अध्ययन से प्राचीन भारत की सभ्यता और संस्कृति की जानकारी मिलती है।
  • कृषि के विकास और मानव जीवन की स्थिरता की कहानी इतिहास में वर्णित है।
  • भारत का अतीत एक प्रकार से केन्द्रीयकरण एवं विकेन्द्रीकरण की प्रवृत्तियों के बीच निरन्तर संघर्ष की कहानी है।
  • भारतीय शासकों ने विदेशों में साम्राज्य फैलाने की कोशिश कभी नहीं की।
  • भारत में अनेकता में एकता सदैव से वर्तमान है।
  • सम्पूर्ण भारत पर शासन करने वाले राजा अपने को चक्रवर्ती की उपधि से विभूषित किया है।
  • अशोक, समुद्रगुप्त आदि कई चक्रवर्ती सम्राट हुए ।
  • सारनाथ में अशोक स्तंभ है ।
  • इतिहास शब्द की उत्पत्ति लैटिन शब्द हिस्टोरिया से हुई है, जिसका अर्थ है, जाँच पड़ताल द्वारा जानकारी प्राप्त करना ।
  • भारत ने पूरे विश्व को शिक्षा साहित्य और गणित के क्षेत्र में मार्गदर्शन दिया है।
  • यूनान के हेरोडोटस को इतिहास का जनक माना जाता है।
  • कार्बन-14 पद्धति प्राचीन अवशेषों के काल निर्धारण की वैज्ञानिक पद्धति है।

Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 2 कबीर के पद

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Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 2 कबीर के पद

 Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 2 कबीर के पद

कबीर के पद पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
कबीर ने संसार को बौराया क्यों कहा है?
उत्तर-
कबीर ने संसार को ‘बौराया हुआ’ इसलिए कहा है क्योंकि संसार के लोग सच सहन नहीं कर पाते और न उसपर विश्वास करते हैं। उन्हें झूठ पर विश्वास हो जाता है। कबीर संसार के लोगों को ईश्वर और धर्म के बारे में सत्य बातें बताता है, ये सब बातें परम्परागत ढंग से भिन्न है, अत: लोगों को अच्छी नहीं लगती। इसलिए कबीर ने ऐसा कहा है कि यह संसार बौरा गया है, अर्थात पागल-सा हो गया है।

प्रश्न 2.
“साँच कहाँ तो मारन धावै, झूठे जग पतियाना” कबीर ने यहाँ किस सच और झूठ की बात कही है?
उत्तर-
कबीर ने बाह्याडंबरों से दूर रहकर स्वयं को पहचानने की सलाह दी है। आत्मा का ज्ञान ही सच्चा ज्ञान है। कबीर संसार के लोगों को ईश्वर और धर्म के बारे में सत्य बातें बताता है, ये सब परंपरागत ढंग से भिन्न है, अत: लोगों को यह पसंद नहीं है। संसार के लोग सच को सहन न करके झूठ पर विश्वास करते हैं। इस प्रकार कबीर ने हिन्दू और मुसलमान दोनों के बाह्यडंबरों पर तीखा कटाक्ष किया है।

प्रश्न 3.
कबीर के अनुसार कैसे गुरु-शिष्य अन्तकाल में पछताते हैं? ऐसा क्यों होता है?
उत्तर-
कबीर के अनुसार इस संसार में दो तरह के गुरु और शिष्य मिलते हैं। एक कोटि है सदगुरु और सद् शिष्य की जिन्हें तत्त्व ज्ञान होता है, जो विवेकी होते हैं, जिन्हें जीव-ब्रह्म के सम्बन्ध का ज्ञान होता है, ऐसे सदगुरु और शिष्यों में सद् आचार भरते हैं। इनका अन्तर-बाह्य एक समान होता है। ये अहंकार शून्य होते हैं। गुरु-शिष्य की दूसरी कोटि है असद गुरु-और असद शिष्य की। इस सम्बन्ध में कबीर ने एक साखी में कहा है-

 Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 2 कबीर के पद

जाके गुरु अंधरा, चेला खरा निरंध,
अंधा-अधे ठेलिय, दोनों कूप पड़प।

असद् अविवेकी बनावटी गुरु सद्ग्रन्थों का केवल उच्चारण करते हैं, वाचन करते-कराते हैं, ग्रन्थों में विहित, निहित तथ्यों को अपने आचरण में उतारते और उतरवाते नहीं हैं। अपरिपक्व ज्ञान और उससे उत्पन्न अभिमान को अपनी आजीविका बना लेते हैं। समय रहते ये चेत नहीं पाते और अन्त में जब आत्मोद्धार के लिए समय नहीं बच पाता, तब ये बेचैन हो जाते हैं। किन्तु अब इनके पास पछतावे के अलावा कुछ बचता ही नहीं है।

प्रश्न 4.
“हिन्दू कहै मोहि राम पियारा, तुर्क कहै रहिमाना
आपस में दोउ लरि-लरि मुए, मर्म न काहू जाना।
इन पंक्तियों का भावार्थ लिखें।
उत्तर-
प्रस्तुत पंक्तियाँ अपने समय के और अपनी तरह के अनूठे समाज-सुधारक चिंतक कबीर रचित पद से उद्धृत है। इन पंक्तियों में परम सत्ता के एक रूप का कथन हुआ है। यही मर्म है, यही अन्तिम सत्य है कि परम ब्रह्म, अल्लाह, गॉड सभी एक ही हैं। किन्तु अज्ञानतावश अलग-अलग धर्म सम्प्रदायों में बता मानव समाज अपने-अपने भगवान से प्यार करता है, दूसरे के भगवान को हेय समझता है। अपने भगवान के लिए अन्ध-भक्ति दर्शाता है। उनकी यह कट्टरता, बद्धमूलता, इतनी प्यारी होती है कि जरा-जरा सी बात पर धार्मिक भावनाएं आहत होने लगती हैं।

दो सम्प्रदायों के बीच का सौहार्द्र वैमनस्य में बदल जाता है। हिन्दू-मुसलमान एक-दूसरे के खून के प्यासे हो जाते हैं और लड़कर कट मर जाते हैं। यदि उन्हें परम तत्त्व का, परम सत्य का, मूल-मर्म का ज्ञान होता तो पूरब-पश्चिम, मंदिर-मस्जिद, पूजा-रोजा, राम-रहीम में भेद नहीं करते। एक-दूसरे के लिए प्राणोत्सर्ग करते न कि एक-दूसरे के खून के प्यासे होते।

 Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 2 कबीर के पद

प्रश्न 5.
‘बहुत दिनन के बिछुरै माधौ, मन नहिं बांधै धीर’ यहाँ माधौ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
उत्तर-
कबीर निर्गुण-भक्ति के अनन्य उपासक थे। उन्होंने परमात्मा को कण-कण में देखा है, ज्योति रूप में स्वीकारा है तथा उसकी व्याप्ति चराचर संसार में दिखाई है। इसी व्याप्ति को अद्वैत सत्ता में देखते हुए उसकी रचनात्मक अभिव्यक्ति दी है। कबीर ने ईश्वर को “माधौ” कहकर पुकारा है।

प्रश्न 6.
कबीर ने शरीर में प्राण रहते ही मिलने की बात क्यों कही है?
उत्तर-
प्रेम में यों तो सम्पूर्ण शरीर मन, प्राण सभी सहभागी होते हैं किन्तु आँखों की भूमिका अधिक होती है। विरह की दशा में आँखें लगातार प्रेमास्पद की राह देखती रहती हैं। विरही प्रेमी की आंकुलता-व्याकुलता का अतृप्ति का ज्ञापन आँखों से ही होता है फिर इसका क्या भरोसा कि मृत्यु के बाद यही शरीर पुनः प्राप्त हो। प्रेम यदि इसी जन्म और मनुष्य योनि में हुआ है, विरह की ज्वाला में यदि यही शरीर, मन, प्राण दग्ध हो रहे हैं तो फिर प्रेम को सार्थक्य भी तभी प्राप्त होगा जब शरीर में प्राण रहते इसी जन्म में प्रभु से मिलन हो जाए। विरह मिलन में बदल जाए। यही कारण है कि कबीर ने शरीर में प्राण रहते ही मिलते ही बात कही है।

प्रश्न 7.
कबीर ईश्वर की मिलने के लिए बहुत आतुर हैं। क्यों?
उत्तर-
हिन्दी साहित्य के स्वर्ण युग भक्तिकाल के निर्गुण भक्ति की ज्ञानमार्गी शाखा के प्रतिनिधि कवि कबीरदास ने ‘काचै भांडै नीर’ स्वयं को तथा ‘धीरज’ अर्थात् धैर्य की प्रतिमूर्ति ईश्वर को कहा है। अपनी व्याकुलता तथा प्रियतम से मिलकर एकाकार होने की उनकी उत्कंट लालसा उन्हें आतुर बना देती है। तादात्म्य की उस दशा में कवि अपने जीवन को कच्ची मिट्टी का घड़ा में भरा पानी माना है। यह शरीर नश्वर है। मृत्यु शाश्वत सत्य है कवि इन लौकिक दुखों (जीवन-मृत्यु) से छुटकारा पाकर ईश्वर की असीम सत्ता में विलीन होना चाहता है। अतः कबीर की ईश्वर से मिलने की आतुरता अतीव तीव्र हो गई है।

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प्रश्न 8.
दूसरे पद के आधार पर कबीर की भक्ति-भावना का वर्णन अपने शब्दों में करें।
उत्तर-
हमारे पाठ्य पुस्तक दिगंत भाग-1 में संकलित कबीर रचित द्वितीय पद कबीर की भक्ति भावना का प्रक्षेपक है। वस्तुत: कबीर की भक्ति- भावना को एक विशिष्ट नाम दिया है-“रहस्यवाद”। यह रहस्यवाद साहित्य की एक स्पष्ट भाव धारा है, जिसका किसी रहस्य से कोई लेना-देना नहीं है। आत्मा-परमात्मा को प्रणय-व्यापार, मिलन-विरह आदि रहस्यवाद का उपजीव्य है।

इस रहस्यवाद में कवि स्वयं को स्त्री या पुरुष मानकर ईश्वर, आराध्य या परम ब्रह्म के साथ अपने विभिन्न क्रिया व्यापारों, क्षणों और उपलब्धियों का अत्यंत प्रांजल, भाव प्रवण वर्णन करती है।

सूफी संत की जहाँ आत्मा पुरुष और परमात्मा को नारी रूप में चित्रित करते हैं, वहाँ कबीर आदि संत कवियों ने स्वयं को नारी, प्रिया, प्रेयसी आदि के रूप में प्रस्तुत करते हुए परमब्रह्म, ईश्वर, . साईं, सद्गुरु, कर्त्तार आदि के साथ अपने रभस प्रसंग का स्नेहिल, क्षणों का निष्कलुष और प्रांजल वर्णन किया है।

कबीर की भक्ति भाव रहस्यवाद, प्रगल्भ इन्द्रिक बिम्बों प्रतीकों से पूर्ण है किन्तु शृंगारिक रचनाओं की तरह कामोद्दीपक नहीं है, जुगुप्सक नहीं है। “मेरी चुनरी में लग गये दाग” लिखकर भी कबीर का रहस्यवाद पुरइन के पत्र पर पानी की बून्द की तरह निर्लिप्त है, शीलगुण सम्पन्न है।

प्रश्न 9.
बलिया का प्रयोग सम्बोधन में हुआ है। इसका अर्थ क्या है?
उत्तर-
कबीर रचित पद में बलिया सम्बोधन शब्द आया है जिसका कोशगत अर्थ ‘बलवान’ है। किन्तु हमें स्मरण रखना चाहिए कि कबीर भाषा के डिक्टेटर हैं। “बाल्हा” शब्द ‘बलिया’ का विकृत रूप है जिसका प्रयोग कबीर ने एक अन्य पद में किया है बाल्हा आओ हमारे गेह रे। कबीर के मत से बलिया का अर्थ सर्वशक्ति सम्पन्न परमपुरुष, भर्तार और पति ही है।

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प्रश्न 10.
प्रथम पद में कबीर ने बाह्याचार के किन रूपों का जिक्र किया है? उन्हें अपने शब्दों में लिखें।
उत्तर-
परम्परा-भंजक; रूढ़ि-भंजक, समाज-सुधारक कबीर रचित प्रथम पद में हिन्दू-मुस्लिम दोनों ही सम्प्रदायों में व्याप्त आडम्बर पूर्ण बाह्याचारों का उल्लेख हुआ है।

तथाकथित नेमी द्वारा (नियमों का कठोरता से अनुपालन करने वाले) प्रात:काल प्रत्येक ऋतु और अवस्था में स्नान करना, पाहन (पत्थर) की पूजा करना, आसन मारकर बैठना और समाधि लगाना पितरों (पितृ) की पूजा, तीर्थाटन करना, विशेष प्रकार की टोपी, पगड़ी को धारण करना, तरह-तरह के पदार्थों की माला (तुलसी, चन्दन, रुद्राक्ष और पत्थरों की मालाएँ) माथे पर विभिन्न रंगों और रूपों में, गले में कानों के आस-पास बाहुओं पर तिलक-छापा लगाना ये सभी बाह्याडम्बर है। इनका विरोध मुखर स्वर में कबीर ने किया है।

प्रश्न 11.
कबीर धर्म उपासना के आडंबर का विरोध करते हुए किसके ध्यान पर जोर देते हैं?
उत्तर-
संत कबीर ने हिन्दू और मुसलमानों के ढोंग-आडंबरों पर करारी चोट की है। उन्होंने धर्म के बाहरी विधि विधानों, कर्मकांडों-जप, माला, मूर्तिपूजा, रोजा, नमाज आदि का विरोध किया है। उन्होंने कहा है कि हिन्दू और मुसलमान आत्म-तत्त्व और ईश्वर के वास्तविक रहस्य से अपरिचित हैं, क्योंकि मानवता के विरुद्ध धार्मिक कट्टर और आडम्बरपूर्ण कोई भी व्यक्ति अथवा : .. धर्म ईश्वर की परमसत्ता का अनुभव नहीं कर सकता।

कबीर ने स्वयं (आत्मा) को पहचानने पर बल देते हुए कहा है कि यही ईश्वर का स्वरूप है। आत्मा का ज्ञान ही सच्चा ज्ञान है।

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प्रश्न 12.
आपस में लड़ते-मरते हिन्दू और तर्क को किस मर्म पर ध्यान देने की सलाह कवि देता है?
उत्तर-
मुगल बादशाह बाबर के जमाने से हिन्दू-मुसलमान अपने पूर्वाग्रहों और दुराग्रहों के कारण लड़ते-मरते चले आ रहे हैं। साम्प्रदायिक सौहार्द्र की जगह साम्प्रदायिकता का जहर पूरे समाज में घुला हुआ है। दोनों ही सम्प्रदायों का तथाकथित पढ़ा-लिखा और अनपढ़ तबका ‘ईश्वर’ की सत्ता, अवस्थिति की वस्तु स्थिति से अनवगत है। मूल चेतना, मर्म का ज्ञान किसी को नहीं है।

वेद-पुराण, कुरान, हदीश लगभग सभी धार्मिक ग्रंथों पर ईश्वर के स्वरूप, उसके प्रभाव और सर्वव्यापी सर्वज्ञ सर्वशक्तिमान होने की बात कही गयी है। जीव और ब्रह्म में द्वैत नहीं अद्वैत का सम्बन्ध है यह भी कथित है। किन्तु द्विधा और द्वैत भाव की प्रबलता के कारण हम हिन्दू-मुसलमान लड़ते आ रहे हैं। कबीर ने स्पष्ट कहा “एकै चाम एकै मल मूदा-काको कहिए ब्राह्मण शूद्रा।”

हमें इस मर्म पर ध्यान देना है कि हम सभी एक ही ईश्वर की संतान हैं। हमारी उत्पत्ति समान रूप से हुई है। पालन समान हवा, पानी, अन्नादि से होता है और मृत्यु की प्रक्रिया भी परम सत्ता द्वारा नियत और नियंत्रित है। परोपकार करके हम ईश्वर के सन्निकट होते हैं। पाप करके बाह्योपचार के पचड़े में पड़कर हम ईश्वर से दूर होकर अपना इहलोक के साथ परलोक भी कष्टमय कर लेते हैं। सदाचरण निष्काम सेवा ही ईश्वरोपासना का मूल मर्म है। मानवता की निष्काम सेवा से बढ़कर इस अनित्य संसार में कुछ भी नहीं है।

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प्रश्न 13.
“सहजै सहज समाना” में सहज शब्द का दो बार प्रयोग हुआ है। इस प्रयोग की सार्थकता स्पष्ट करें।
उत्तर-
मध्यकालीन भारत में भक्ति की क्रांतिकारी भाव धारा को जन-जन तक पहुँचाने वाले भक्त कबीर ने ईश्वर प्राप्ति के मार्ग को ‘सहजै सहज समाना’ शब्द का दो बार प्रयोग किया है। प्रस्तुत शब्द में कबीर द्वारा बाह्याडंबरों की अपेक्षा स्वयं (आत्मा) को पहचानने की बात कही गई है। अपने शब्दों में कबीर ने ये बाह्याडंबर बताए हैं-पत्थर पूजा, कुरान पढ़ाना, शिष्य बनाना, तीर्थ-व्रत, टोपी-माला पहनना, छापा-तिल, लगाना, पीर औलिया की बातें मानना आदि।

कबीर कहते हैं ईश्वर का निवास न तो मंदिर में है, न मस्जिद में, न किसी क्रिया-कर्म में है और न योग-साधना में। उन्होंने कहा है कि बाह्याडंबरों से दूर रहकर स्वयं (आत्मा) को पहचानना चाहिए। यही ईश्वर है। आत्म-तत्व के ज्ञानी व्यक्ति ईश्वर को सहज से भी सहज रूप में प्राप्त कर सकता है। कबीर का तात्पर्य है कि ईश्वर हर साँस में समाया हुआ है। उन्हें पल भर की तालाश में ही पाया जा सकता है।

प्रश्न 14.
कबीर ने भर्म किसे कहा है?
उत्तर-
कबीर के अनुसार अज्ञानी गुरुओं की शरण में जाने पर शिष्य अज्ञानता के अंधकार में डूब जाते हैं। इनके गुरु भी अज्ञानी होते हैं; वे घर-घर जाकर मंत्र देते फिरते हैं। मिथ्याभिमान के परिणामस्वरूप लोग विषय-वासनाओं की आग से झुलस रहे हैं। कवि का कहना है कि धार्मिक आडम्बरों में हिन्दू और मुसलमान दोनों ही ईश्वर की परम सत्ता से अपरिचित हैं। इनमें कोई भी प्रभु के प्रेम का सच्चा दीवाना नहीं है।

कबीर ने इन बाह्याडम्बरों के ‘भर्म’ को भुलाकर स्वयं (आत्मा) को पहचानने की सलाह देते हुए कहा है कि आत्मा का ज्ञान की सच्चा ज्ञान है। ईश्वर हर साँस में समाया हुआ है अर्थात् सच्ची अनुभूति और आत्म-साक्षात्कार के बल पर ईश्वर को पल भर की तलाश में ही पाया जा सकता है।

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कबीर के पद भाषा की बात

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का रूप लिखें
आतम, परवान, तीरथ, पियारा, सिख्य, असनान, डिंभ, पाथर, मंतर, नर्म, अहनिस, तुमकूँ।
उत्तर-

  • आतम-आत्मा
  • परवान-पत्थर
  • तीरथ-तीर्थ
  • पियारा-प्यारा
  • सिख्य-शिष्य
  • असनान-स्नान
  • डिभ-दंभ
  • पाथर-पत्थर
  • मंतर-मंत्र
  • मर्म-भ्रम
  • अहनिश-अहर्निश
  • तुमकूँ-तुमको

प्रश्न 2.
दोनों पदों में जो विदेशज शब्द आये हैं उनकी सूची बनाएँ एवं उनका अर्थ लिखें।
उत्तर-
कबीर रचित पद द्वय में निम्नलिखित विदेशज (विदेशी) शब्द आये हैं, जिनका अर्थ अग्रोद्धत है

पीर-धर्मगुरु; औलिया-संत; कितेब-किताब, पुस्तक; कुरान-इस्लाम धर्म का पवित्र ग्रंथ; मुरीद-शिष्य, चेला, अनुयायी; तदबीर-उपाय, उद्योग, कर्मवीरता; खवरि-सूचना, ज्ञान; तुर्क-इस्लाम धर्म के अनुयायी, तुर्की देश के निवासी; रहिमाना-रहमान-रहम दया करने वाला अल्ला।

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प्रश्न 3.
पठित पदों से उन शब्दों को चुनें निम्नलिखित शब्दों के लिए आये हैं
उत्तर-
आँख-नैन; पागल-वौराना (बौराया); धार्मिक-धरमी; बर्तन-भांडे, वियोग-विरह, आग-अगिनि, रात-निस।

प्रश्न 4.
नीचे प्रथम पद से एक पंक्ति दी जा रही है, आप अपनी कल्पना से तुक मिलते हुए अन्य पंक्तियाँ जोड़ें- “साँच कहो तो मारन धावै, झूठे जग पतियाना।”
उत्तर-
साँच कहो तो मारन धावै झूठे जग पतियाना,
मर्म समझ कर चेत ले जल्दी घूटे आना-जाना,
जीवन क्या इतना भर ही है रोना हँसना खाना,
हिय को साफ तू कर ले पहले, बसे वहीं रहिमान।
छोड़ सके तो गर्व छोड़ दे राम बड़ा सुलिताना,
भाया मोह की नगरी से जाने कब पड़ जाय जाना”
चेत चेत से मूरख प्राणी पाछे क्या पछि ताना।

प्रश्न 5.
कबीर की भाषा को पंचमेल भाषा कहा गया है। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने उन्हें वाणी का डिक्टेटर कहा है। कबीर की भाषा पर अपने शिक्षक से चर्चा करें अथवा कबीर की भाषा-शैली पर एक सार्थक टिप्पणी दें।
उत्तर-
“लिखा-लिखि की है नहीं देखा देखी बात’ “की उद्घोषणा करने वाले भाषा के डिक्टेटर और वाणी के नटराज कबीर की भाषा-शैली कबीर की ही प्रतिमूर्ति है। कबीर बहु-श्रुत और परिव्राजक संत कवि थे। हिमालय से हिन्द महासागर और गुजरात से मेघालय तक फैले उनके अनुयायियों द्वारा किये गये कबीर की रचनाओं के संग्रह में प्रक्षिप्त क्षेत्रियता का निदर्शन इस बात का सबल प्रमाण है कि कबीर “जैसा देश वैसी वाणी, शैली’ के प्रयोक्ता थे।

हालांकि उन्होंने स्पष्ट कहा है “मेरी बोली पूरबी” लेकिन भोजपुरी राजस्थानी, पंजाबी, अवधी, ब्रजभाषा आदिनेक तत्कालीन प्रचलित बोलियों और भाषाओं के शब्द ही नहीं नवागत इस्लाम की भाषा अरबी, उर्दू, फारसी के शब्दों की शैलियों का उपयोग किया है। रहस्यवादी संध्याभाषा उलटबाँसी, योग की पारिभाषिक शब्दावली के साथ ही सरल वोधगम्य शब्दों के कुशल प्रयोक्ता हैं।

 Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 2 कबीर के पद

“जल में रहत कुमुदनी चन्दा बसै आकास, जो जाहि को भावता सो ताहि के पास” कहने वाले कबीर “आँषि डिया झाँई पड्या जीभड्या छाल्या पाड्या” भी कहते हैं। ये आँखियाँ अलसानि पिया हो सेज चलो “कहने वाले कबीर” कुत्ते को ले गयी बिलाई ठाढ़ा सिंह चरावै गाई”। भी कहते हैं। कबीर के सामने भाषा सचमुच निरीह हो जाती है।

प्रश्न 6.
प्रथम पद में अनुप्रास अलंकार के पाँच उदाहरण चुनें।
उत्तर-
नेमि देखा धरमी देखा-पंक्त में ‘मि’ वर्ण और देखा शब्द की आवृत्ति से अनुप्रास अलंकार। जै पखानहि पूजै में प वर्ण की आवृत्ति से अनुप्रास अलंकार पीर पढ़े कितेब कुराना में क्रमशः प और क वर्ण की आवृत्ति से अनुप्रास अलंकार। उनमें उहै में उ वर्ण की आवृत्ति से अनुप्रास अलंकार। पीतर पाथर पूजन में प वर्ण की आवृत्ति से अनुप्रास अलंकार उपस्थित है।

प्रश्न 7.
दूसरे पद में ‘विरह अगिनि’ में रूपक अलंकार है। रूपक अलंकार के चार अन्य उदाहरण दें।
उत्तर-
रूपक अलंकार के चार अन्य उदाहरण निम्नलिखित हैं ताराघाट, रघुवर-बाल-पतंग, चन्द्रमुखी, चन्द्रबदनी, मृगलोचनी।

प्रश्न 8.
कारक रूप स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
झठे-झूठ को-द्वितीय तत्पुरुष, पखानहि-पत्थर को द्वितीया तत्पुरुष; सब्दहि-शब्द को-द्वितीय-तत्पुरुष, खबरि-सूचना ही में-सम्प्रदान तत्पुरुष; कारनि-कारण से-अपादान, तत्पुरुष, भांडै-भांड में-अधिकरण तत्पुरुष।

 Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 2 कबीर के पद

प्रश्न 9.
पाठ्य-पुस्तक में संकलित कबीर रचित पद “संतौ देखो जग बौराना’ का भावार्थ लिखें।
उत्तर-
प्रथम पद का भावार्थ देखें। प्रश्न 10. पाठ्य-पुस्तक में संकलित कबीर रचित द्वितीय पद का भावार्थ प्रस्तुत करें। उत्तर-द्वितीय पद का भावार्थ देखें।

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर।

कबीर के पद लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कबीर की विरह-भावना पर प्रकाश डालें।
उत्तर-
कबीर परमात्मा से प्रेम करने वाले भक्त हैं। उनकी प्रीति पति-पत्नी भाव की है। परमात्मा रूपी पति से मिलन नहीं होने के कारण वे विरहिणी स्त्री की भाँति विरहाकुल रहते हैं। ये प्रियतम के दर्शन हेतु दिन-रात आतुर रहते हैं। उनके नेत्र उन्हें देखने के लिए सदैव आकुल रहते हैं। वे विरह की आग में सदैव जलते रहते हैं। एक वाक्य में उनकी दशा यही है कि “तलफै बिनु बालम मोर जिया। दिन नहिं चैन, रात नहिं, निंदिया तरप तरप कर भोर किया।”

कबीर के पद अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कबीर विरह की दशा में क्या अनुभव करते हैं?
उत्तर-
कबीर को विरह की अग्नि जलाती है, आतुरता और उद्वेग पैदा करती है तथा मन धैर्य से रहित हो जाता है।

 Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 2 कबीर के पद

प्रश्न 2.
कबीर परमात्मा से क्या चाहते हैं?
उत्तर-
कबीर परमात्मा का दर्शन चाहते हैं, विरह-दशा की समाप्ति और मिलन का सुख चाहते हैं।

प्रश्न 3.
कबीर के अनुसार हिन्दू-मुस्लिम किस मुद्दे पर लड़ते हैं? उत्तर-हिन्दू-मुसलमान नाम की भिन्नता और उपासना की भिन्नता को लेकर लड़ते हैं। प्रश्न 4. कबीर की दृष्टि में नकली उपासक क्या करते हैं?
उत्तर-
नकली उपासक नियम-धरम का विधिवत पालन करते हैं, माला-टोपी धारण करते हैं, आसन लगाकर उपासना करते हैं, पीपल-पत्थर पूजते हैं, तीर्थव्रत करते हैं तथा भजन-कीर्तन गाते हैं।

प्रश्न 5.
कबीर की दृष्टि में नकली गुरु लोग क्या करते हैं?
उत्तर-
नकली गुरु लोग किताबों में पढ़ें मन्त्र देकर लोगों को शिष्य बनाते हैं और ठगते हैं।

इन्हें अपने ज्ञान, महिमा तथा गुरुत्व का अभिमान रहता है लेकिन वास्तव में ये आत्मज्ञान से रहित मूर्ख, ठग और अभिमानी होते हैं।

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प्रश्न 6.
कबीर के अनुसार ईश्वर-प्राप्ति का असली मार्ग क्या है?
उत्तर-
ईश्वर-प्राप्ति का असली मार्ग है आत्मज्ञान अर्थात् अपने को पहचानता और अपनी सत्ता को ईश्वर से अभिन्न मानना तथा ईश्वर से सच्चा प्रेम करना।

प्रश्न 7.
कबीरदास ने प्रथम पद में किसकी व्यर्थता सिद्ध की है?
उत्तर-
कबीरदास ने अपने प्रथम पद में पत्थर पूजा, तीर्थाटन और छाप तिलक को व्यर्थ बताया है।

प्रश्न 8.
कबीर ने दूसरे पद में बलिध का प्रयोग किसके लिए किया है?
उत्तर-
कबीरदास ने अपने दूसरे पद में बलिध का प्रयोग परमात्मा और सर्वशक्तिमान के लिए किया है।

प्रश्न 9.
कबीर के दृष्टिकोण में सारणी या सबद गाने वाले को किसकी खबर नहीं है?
उत्तर-
कबीरदास ने दृष्टिकोण में सारणी या सबद गाने वाले को स्वयं अपनी खबर नहीं है।

कबीर के पद वस्तनिष्ठ प्रश्नोत्तर

सही उत्तर सांकेतिक चिह्न (क, ख, ग या घ) लिखें।

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प्रश्न 1.
कबीरदास किस काल के कवि हैं?
(क) आदिकाल
(ख) भक्तिकाल
(ग) रीतिकाल
(घ) वीरगाथा काल
उत्तर-
(ख)

प्रश्न 2.
कबीर किसके उपासक थे?
(क) निर्गुण ब्रह्म के
(ख) सगुण ब्रह्म के
(ग) निराकार ब्रह्म के
(घ) साकार ब्रह्म के
उत्तर-
(ग)

प्रश्न 3.
कबीर ने इस संसार को क्या कहा है?
(क) बौराया हुआ
(ख) साश्वत
(ग) क्षणभंगुर
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(क)

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प्रश्न 4.
लोग किस पर विश्वास करते हैं?
(क) सत्य पर
(ख) झूठ पर
(ग) बाह्याडम्बर पर
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(ख)

प्रश्न 5.
कबीर ने मर्म किसे कहा है?
(क) घाव को
(ख) वेदना को
(ग) रहस्य को
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(ग)

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें।

प्रश्न 1.
कबीर ने ‘साखी’, संबंद और……………की रचना की।
उत्तर-
रमैनी

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प्रश्न 2.
कबीर, कागद की लेखी’ की जगह………..को तरजीह देते थे।
उत्तर-
आँखन-देखी

प्रश्न 3.
साँच कहाँ तो मारन धावै,………….जग पतियाना।
उत्तर-
झूठे

प्रश्न 4.
साखी सब्दहि गावत भूले…………खबरि, नहि जाना।
उत्तर-
आतम।

कबीर के पद कवि परिचय – (1399-1518)

कबीर का जन्मकाल भी निश्चित प्रमाण के अभाव में विवादास्पद रहा है। फिर भी, बहुत से विद्वानों द्वारा सन् 1399 ई० को उनका जन्म और सन् 1518 ई० को उनका शरीर त्याग मा लिया गया है। इस तरह कुल एक सौ बीस वर्षों की लम्बी आयु तक जीवित रहने का सौभाग्य संत कवि कबीर को मिला था। जीवन रूपी लम्बी चादर को इन्होंने इतने लम्बे काल तक ओढा, जीया और अंत में गर्व के साथ कहा भी कि “सो चादर सुन नर मुनि ओढ़ी-ओढ़ी के मैली कीन्हीं चदरिया।

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दास कबीर जतन से ओढ़ी ज्यों की त्यों धरि दीनि चदरिया।” हिन्दी साहित्य के स्वर्णयुग भक्तिकाल के पहले भक्त कवि कबीरदास थे। भक्ति को जन-जन तक काव्य रूप में पहुँचा कर उससे सामाजिक चेतना को जोड़ने का काम भक्तिकालीन भक्त कवियों ने किया। ऐसा भक्त कवियों में पहला ही नहीं सबसे महत्वपूर्ण नाम भी कबीर का ही माना जाता है।

कहा जाता है कि एक विधवा ब्राह्मणी के गर्भ से जन्म लेने के बाद लोक-लाज के भय से माता द्वारा परित्यक्त नवजात शिशु कबीर बनारस के लहरतारा तालाब के किनारे नीरू और नीमा नामक जुलाहा दम्पति द्वारा पाये और पुत्रवत पाले गये।

कबीर रामानन्दाचार्य के ही शिष्य माने जाते हैं पर गुरु मंत्र के रूप में प्राप्त राम नाम को उन्होंने सर्वथा निर्गुण रूप में स्वीकार और अंगीकार किया। अनजाने सिद्ध और नाथ-साहित्य से भी गहरे तक प्रभावित रहे। विशेष पंथ या मठ-मंदिर के आजन्म विरोधी रहे। कहा जाता है कि उनको कमाल नामक पुत्र और कमाली नामक एक पुत्री भी थी।

सिकंदर लोदी जैसे कट्टर मुसलमान शासक के काल में भी ऐसी धर्म निरपेक्ष ही नहीं कट्टरता-विरोधी उक्तियाँ कबीर से ही संभव थीं। शायद उसके अत्याचार का वे शिकार हुए भी थे। मृत्युकाल में उन्होंने मगहर की यात्रा की थी।

कबीर के पद कविता का भावार्थ

प्रथम पद महान् निर्गुण संत, परम्परा, भंजक, एकेश्वरवादी चिंतक कवि, कबीर संतों को सम्बोधित करते हुए कहते हैं कि हे संतो ! देखो यह संसार बौरा गया है, पागल हो गया है। इसकी विवेक . बुद्धि नष्ट हो गयी है। जब भी मैं इन सांसारिक जीवों को सत्य के बारे में बताना चाहता हूँ।

ये मुझे उल्टा-सीधा कहते हैं, मुझे मारने दौड़ते हैं और जो कुछ इनके इर्द-गिर्द माया प्रपंच है उसे ये सत्य मान बैठे हैं।

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मुझे ऐसे अनेक नियम-धर्म के कठोर पालक दिखे जो हर मौसम में शरीर को कष्ट देकर स्नान करते हैं, आत्म ज्ञान से शून्य होकर पत्थर के देवी-देवताओं की पूजा करते हैं। अनेक पीर (धर्म गुरु) और औलिया (संत) मिले जो कुरान जैसे ग्रंथ की गलत तथ्यहीन व्याख्या अपने शिष्यों को समझा कर उनको भटका चुके हैं। उन्हें अपने पीर औलिया होने का घमंड हो गया है।

पितृ (मरे हुए पूर्वज) की सेवा पत्थरों की मूर्ति पूजा और तीर्थटन करने वाले धार्मिक अहंकारी हो चले हैं। स्वयं को संत, महात्मा धार्मिक दर्शन के लिए टोपी, माला, तिलक-छाप धारण किये हुए हैं और अपनी स्वाभाविक स्थिति भूल चुके हैं। सचमुच के महान् वीतरागी संतों द्वारा रचित साखी सबद आदि गाते घुमते चलते हैं। इस संसार के प्राणी अपने को हिन्दू-मुस्लिम में बाँट चुके हैं।

एक को राम प्यारा है तो दूसरे को रहमान प्यारे हैं। छोटी-छोटी बातों पर ये एक-दूसरे के रक्त के प्यासे हो लड़-मर पड़ते हैं? लेकिन अभिमान अहंकार के वशीभूत हो ये घर-घर बाह्याचरण का आडम्बर युक्त पूजा, कर्मकाण्ड का मंत्र देते चलते हैं। मुझे तो लगता है कि ये तथाकथित गुरु अपने शिष्यों सहित माया के सागर में डूब चुके हैं। अन्त में इन्हें पछताना ही पड़ेगा।

ये हिन्दू-मुसलमान, पीर औलिया सभी ईश्वर-धर्म के मूल तत्त्व और मर्म को भूल चुके हैं। कई बार इनकी मैंने समझाकर कहा कि ईश्वर को कर्मकाण्ड बाह्यचार से नहीं बल्कि सहज जीवन-यापन की पद्धति से ही प्राप्त किया जा सकता है। क्योंकि परमब्रह्म ईश्वर अल्ला अत्यंत सहज और सरल हैं।

प्रस्तुत पद में कबीर ने अपने समय के साम्प्रदायिक तनावग्रस्त माहौल का भी वर्णन किया है। पद में अनायास रूप से अनुप्रास, वीप्सा. आदि अलंकार आये हैं। पद शांत रस का अनूठा उदाहरण है।

द्वितीय पद साधना के क्षेत्र के सहज सिद्ध हठयोगी, भावना के क्षेत्र में आकर कितना कोमल प्राण, भावुक, भाव विह्वल, विदग्ध हृदय हो सकता है, यह विरोधाभास कबीर में उपलब्ध हो सकता है।

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चिर विरहिणी कबीर आत्मा विरह विदग्ध अवस्था की चरम स्थिति में चीत्कार करती हुई कहती है कि हे बलिया (बाल्हा) प्रियतम तुझे कब देवूगी तेरा प्रेम मेरे भीतर इस तरह से व्याप्त हो गया है कि दिन-रात तुम्हारे दर्शन की आतूरता आकुलता बनी रहती है। मेरी आँखें केवल तुमको देखना चाहती हैं, ये लगातार खुली रहती हैं कि तुम्हारे दीदार से वंचित न हो जाएँ।

हे मेरे भर्तार (स्वामी) तुम भी इतना सोच विचार लो कि तुम्हारे बिना शरीर में जो विरहाग्नि उत्पन्न हुई है वह शरीर को कैसे जलाती होगी। मेरी गुहार सुनो, बहरा मत बन जाओ मैं जानती हूँ कि तुम धीरता की प्रतिमूर्ति हो, शाश्वत हो लेकिन मेरी शरीर कच्चा कुम्भ है और उसने प्राण रूपी नीर है। घड़ा कभी भी फूट सकता है, मृत्यु कभी भी हो सकती है। तुमसे बिछड़े हुए भी बहुत दिन हो गये, अब मन को किसी भी प्रकार से धीरता प्राप्त नहीं हो पाती।

जब तक यह शरीर है, मेरे दु:ख का नाश करने वाले तुम एक बार मुझे अपना “दरस-परस” करा दो। मैं अतृप्ति को साथ लिये मरना नहीं चाहती। तुमसे मैंने प्रेम किया है, विरह भी भोंग रही हूँ किन्तु यदि हमारा मिलन नहीं हुआ, प्रेम का सुखान्त नहीं हुआ तो यह तुम्हारे जैसे सर्वशक्तिमान आर्तिनाशक के विरुद्ध के विरुद्ध बात होगी।

प्रस्तुत पद में कबीर ने भारतीय रहस्यवाद का सुन्दर वर्णन किया है। जहाँ जीवात्मा और परमात्मा का सम्बन्ध प्रेमी और प्रेमास्पद के रूप में चित्रित है।

रूपक और अनुप्रास अलंकार के उदाहरण यत्र-तत्र उपलब्ध है। सम्पूर्ण पद में शांत रस का पूर्ण परिपाक हुआ है।

कबीर के पद कठिन शब्दों का अर्थ

पतियाना-विश्वास करना। धावै-दौड़ना। व्यापै-अनुभव। रती-तनिक (रत्ती, रती)। नेमी-नियम का पालन करने वाला। बधीर-बहरा, जो कम सुने या न सुने। आतम-आत्मा। अगिनी-अग्नि। पखानहि-पत्थर को। दादि-विनती, स्तुति। पीर-धर्म गुरु। गुसांई-गोस्वामी, मालिक। औलिया-सन्त। जिन-मत, नहीं (निषेध सूचक)। कितेब-किताब, पुस्तक। भांडै-बर्तन। मुरीद-शिष्य, चेला, अनुयायी। छता-अक्षत, रहते हुए। तदवीर-उपाय। आरतिवंत-दुःखी। डिंभ-दंभ। रहिमाना-दयालु। पीतर-पीतल, पितर, पुरखा। महिमा-महत्त्व। मूए-मरे। बलिया-प्रियतम। अहनिस-दिन-रात।

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कबीर के पद काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या

1. संतो देखत जग बौराना…………नमें कछु नहिं ज्ञाना।
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियों में कबीरदास जी ने धार्मिक क्षेत्र में उलटी रीति और संसार के लोगों के बावलेपन का उल्लेख किया है। वे संतों अर्थात् सज्जन तथा ज्ञान-सम्पन्न लोगों को सम्बोधित करते हुए कहते हैं कि संतो! देखो, यह संसार बावला या पागल हो गया है? इसने उल्टी राह पकड़ ली है। जो सच्ची बात कहता है उसे लोग मारने दौड़ते हैं। इसके विपरीत जो लोग गलत और झूठी बातें बताते हैं उन पर वे विश्वास करते हैं। मैंने धार्मिक नियमों और विधि-विधानों का पालन करने वाले अनेक लोगों को देखा है। वे प्रातः उठकर स्नान करते हैं, तथा मंदिरों में जाकर पत्थर की मूर्ति को पूजते हैं। मगर उनके पास तनिक भी ज्ञान नहीं है। वे अपनी आत्मा को नहीं जानते हैं और उसकी आवाज को मारते हैं, अर्थात् अनसुनी करते हैं, अर्थात् अनसुनी करते हैं, सारांशतः कबीर कहना चाहते हैं कि ऐसे लोग केवल बाहरी धर्म-कर्म और नियम-आचार जानते हैं जबकि अन्त: ज्ञान से पूर्णतः शून्य हैं।

2. बहुतक देखा पीर औलिया…………..उनमें उहै जो ज्ञाना।
व्याख्या-
कबीरदास जी ने अपने पद की प्रस्तुत पंक्तियों में मुसलमानों के तथाकथित पीर और औलिया के आचरणों का परिहास किया है। वे कहते हैं कि मैंने अनेक पीर-औलिये को देखा है जो नित्य कुरान पढ़ते रहते हैं। उनके पास न तो सही ज्ञान होता है और न कोई सिद्धि होती है फिर भी वे लोगों को अपना मुरीद यानी अनुगामी या शिष्य बनाते और उन्हें उनकी समस्याओं के निदान के उपाय बताते चलते हैं। यही उनके ज्ञान की सीमा है। निष्कर्षतः कबीर कहना चाहते हैं कि ये पीर-औलिया स्वतः अयोग्य होते हैं लेकिन दूसरों को ज्ञान सिखाते फिरते हैं। इस तरह ये लोग ठगी करते हैं।

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3. आसन मारि डिंभ धरि…………….आतम खबरि न जाना।
व्याख्या-
कबीरदास जी का स्पष्ट मत है कि जिस तरह मुसलमानों के पीर औलिया ठग हैं उसी तरह हिन्दुओं के पंडित ज्ञान-शूल। वे कहते हैं कि ये नकली साधक मन में बहुत अभिमान रखते हैं और कहते हैं कि मैं ज्ञानी हूँ लेकिन होते हैं ज्ञान-शूल। ये पीपल पूजा के रूप में वृक्ष पूजते हैं, मूर्ति पूजा के रूप में पत्थर पूजते हैं। तीर्थ कर आते हैं तो गर्व से भरकर अपनी वास्तविकता भूल जाते हैं। ये अपनी अलग पहचान बताने के लिए माला, टोपी, तिलक, पहचान चिह्न आदि धारण करते हैं और कीर्तन-भजन के रूप में साखी, पद आदि गाते-गाते भावावेश में बेसुध हो जाते हैं। इन आडम्बरों से लोग इन्हें महाज्ञानी और भक्त समझते हैं। लेकिन विडम्बना यह है कि इन्हें अपनी आत्मा की कोई खबर नहीं होती है। कबीर के अनुसार वस्तुतः ये ज्ञानशून्य और ढोंगी महात्मा हैं।

4. हिन्दु कहै मोहि राम पियारा………….मरम न काहू जाना।
व्याख्या-
कबीर कहते हैं कि हिन्दू कहते हैं कि हमें राम प्यारा है। मुसलमान कहते हैं कि हमें रहमान प्यारा है। दोनों इन दोनों को अलग-अलग अपना ईश्वर मानते हैं और आपस में लड़ते तथा मार काट करते हैं। मगर, कबीर के अनुसार दोनों गलत हैं। राम और रहमान दोनों एक सत्ता के दो नाम हैं। इस तात्त्विक एकता को भूलकर नाम-भेद के कारण दोनों को भिन्न मानकर आपस में लड़ना मूर्खता है। अत: दोनों ही मूर्ख हैं जो राम-रहीम की एकता से अनभिज्ञ हैं।

5. घर घर मंत्र देत…………….सहजै सहज समाना।
व्याख्या-
कबीरदास जी इन पंक्तियों में कहते हैं कि कुछ लोग गुरु बन जाते हैं मगर मूलतः वे अज्ञानी होते हैं। गुरु बनकर वे अपने को महिमावान समझने लगते हैं। महिमा के इस अभिमान से युक्त होकर वे घर-घर घूम-घूम कर लोगों को गुरुमंत्र देकर शिष्य बनाते चलते हैं। कबीर के मतानुसार ऐसे सारे शिष्य गुरु बूड़ जाते हैं; अर्थात् पतन को प्राप्त करते हैं और अन्त समय में पछताते हैं। इसलिए कबीर संतों को सम्बोधित करने के बहाने लोगों को समझाते हैं कि ये सभी लोग भ्रमित हैं, गलत रास्ते अपनाये हुए हैं।

मैंने कितनी बार लोगों को कहा है कि आत्मज्ञान ही सही ज्ञान है लेकिन ये लोग नहीं मानते हैं। ये अपने आप में समाये हुए हैं, अर्थात् स्वयं को सही तथा दूसरों को गलत माननेवाले मूर्ख हैं। यदि आप ही आप समाज का अर्थ यह करें कि कबीर ने लोगों को कहा कि अपने आप में प्रवेश करना ही सही ज्ञान है। तब यहाँ ‘आपहि आप समान’ का अर्थ होगा-‘आत्मज्ञान प्राप्त करना’ जो कबीर का प्रतिपाद्य है।

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6. हो बलिया कब देखेंगी…………..न मानें हारि।
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियों में कबीरदास जी ने ईश्वर के दर्शन पाने की अकुलाहट भरी इच्छा व्यक्त की है। वे कहते हैं कि प्रभु मैं तुम्हें कब देखूगा? अर्थात् तुम्हें देखने की मेरी इच्छा कब पूरी होगी, तुम कब दर्शन दोगे? मैं दिन-रात तुम्हारे दर्शन के लिए आतुर रहता हूँ। यह इच्छा मुझे इस तरह व्याप्त किये हुई है कि एक पल के लिए भी इस इच्छा से मुक्त नहीं हो पाता हूँ।

मेरे नेत्र तुम्हें चाहते हैं और दिन-रात प्रतीक्षा में ताकते रहते हैं। नेत्रों की चाह इतनी प्रबल है कि ये न थकते हैं और न हार मानते हैं। अर्थात् ये नेत्र जिद्दी हैं और तुम्हारे दर्शन किये बिना हार मानकर बैठने वाले नहीं हैं। अभिप्राय यह कि जब ये नेत्र इतने जिद्दी हैं, और मन दिन-रात आतुर होते हैं तो तुम द्रवित होकर दर्शन दो और इनकी जिद पूरी कर दो।

7. “बिरह अगिनि तन……………..जिन करहू बधीर।”
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियों में कबीरदास जी अपनी दशा का वर्णन करते हुए कहते हैं कि हे स्वामी ! तुम्हारे वियोग की अग्नि में यह शरीर जल रहा है, तुम्हें पाने की लालसा आग की तरह मुझे दग्ध कर रही है। ऐसा मानकर तुम विचार कर लो कि मैं दर्शन पाने का पात्र हूँ या उपेक्षा का?

कबीरदास जी अपनी विरह-दशा को बतला कर चुप नहीं रह जाते हैं? वे एक वादी अर्थात् फरियादी करने वाले व्यक्ति के रूप में अपना वाद या पक्ष या पीड़ा निवेदित करते हैं और प्रार्थना. करते हैं कि तुम मेरी पुकार सुनो, बहरे की तरह अनसुनी मत करो। पंक्तियों की कथन-भगिमा की गहराई में जाने पर स्पष्ट ज्ञात होता है कि कबीर याचक की तरह दयनीय मुद्रा में विरह-निवेदन नहीं कर रहे हैं। उनके स्वर में विश्वास का बल है और प्रेम की वह शक्ति है जो प्रेमी पर अधिकार-बोध व्यक्त करती है।

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8. तुम्हे धीरज मैं आतुर…………….आरतिवंत कबीर।
व्याख्या-
अपने आध्यात्मिक विरह-सम्बन्धी पद की प्रस्तुत पंक्तियों में कबीर अपनी तुलना आतुरता और ईश्वर की तुलना धैर्य से करते हुए कहते हैं कि हे स्वामी ! तुम धैर्य हो और मैं आतुर। मेरी स्थिति कच्चे घड़े की तरह है। कच्चे घड़े में रखा जल शीघ्र घड़े को गला कर बाहर निकलने लगता है। उसी तरह मेरे भीतर का धैर्य शीघ्र समाप्त हो रहा है अर्थात् मेरा मन अधीर हो रहा है। आप से बहुत दिनों से बिछुड़ चुका हूँ।

मन अधीर हो रहा है तथा शरीर क्षीण हो रहा है। अपने भक्त कबीर पर कृपाकर अपने दर्शन दीजिए। आपके दर्शन से ही मेरा जीवन सफल हो सकता है। कबीरदास का मन ईश्वर से मिलने के लिए व्याकुल है। उनकी अन्तरात्मा ईश्वर के लिए आतुर है। वास्तव में, ईश्वर के दर्शन से ही कबीर का जीवन सफल हो सकता है।

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Bihar Board Class 7 Social Science Geography Solutions Chapter 12 मौसम और जलवायु

Bihar Board Class 7 Social Science Solutions Geography Hamari Duniya Bhag 2 Chapter 12 मौसम और जलवायु Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 7 Social Science Geography Solutions Chapter 12 मौसम और जलवायु

Bihar Board Class 7 Social Science मौसम और जलवायु Text Book Questions and Answers

अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें:

प्रश्न (i)
मौसम के अन्तर्गत किन-किन तत्वों का अवलोकन किया जाता है?
उत्तर-
मौसम के अन्तर्गत निम्नलिखित तत्वों का अवलोकन किया जाता है :

  1. तापमान
  2. वर्षा
  3. आर्द्रता
  4. वायु का वेग

यदि एक वाक्य में कहें तो हम कह सकते हैं कि “किसी निश्चित स्थान पर निश्चित समय में वायुमंडल की तत्कालीन दशा को मौसम कहते हैं।”

प्रश्न (ii)
जलवायु को परिभाषित करें। इसका निर्धारण कैसे होता है ?
उत्तर-
किसी क्षेत्र विशेष में लम्बे समय तक मौसम की औसत दशा को – जलवायु कहते हैं।” मौसम का निर्धारण करने के लिए एक लम्बे समय (सामान्यत: 33 वर्ष) तक वहाँ के तापमान की स्थिति, वर्षा की मात्रा, पवन की दिशा अदि का आंकड़ा एकत्र कर समय से भाग देकर उसका औसत निकाला जाता है।

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प्रश्न (iii)
जलवायु को प्रभावित करने वाले कौन-कौन से कारक हैं
उत्तर-
जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं:

  1. अक्षांश
  2. समुद्र तट से दूरी
  3. पर्वत की दिशा और अवरोध
  4. समुद्री धाराओं की दिशा
  5. पवन की दिशा
  6. समुद्र तल से ऊँचाई तथा
  7. तापमान।

प्रश्न (iv)
पृथ्वी पर विभिन्न स्थानों का तापमान अलग-अलग क्यों होता है?
उत्तर-
किसी भी स्थान का तापमान का आधार वहाँ प्राप्त होने वाली सूर्य की किरणें हैं । जहाँ सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं वहाँ का तापमान अधि’ क होता है। जहाँ-जहाँ सूर्य की किरणें तिरछी पड़ती हैं, वहाँ-वहाँ का तापमान कम होते जाता है। अतः स्पष्ट है कि सूर्य की किरणों की कमी-बेसी तथा सीधी-तिरछी पड़ने के कारण पृथ्वी पर विभिन्न स्थानों का तापमान अलग-अलग होता है।

प्रश्न (v)
“तापमान का प्रभाव मौसम पर पड़ता है ।” उचित उदाहरण सहित पुष्टि कीजिए।
उत्तर-
ऐसे तो मौसम को प्रभावित करने वाले अनेक कारक हैं लेकिन उन सभी कारकों में प्रमुख कारक तापमान है । तापमान को बढ़ाने या घटाने में प्रमुख भूमिका सौर ऊर्जा की होती है । कारण कि मुख्य रूप से सौर-ऊर्जा जिन स्थानों पर अधिक मिलती है, वहाँ का वातावरण गर्म हो जाता है । जहाँ

पर सौर ऊर्जा कम मिलती है वहाँ का वातावरण ठंडा हो जाता है । गर्म और ठंडा, वातावरण से वहाँ का मौसम प्रभावित होता है।

प्रश्न (vi)
पृथ्वी पर कितने ताप कटिबंध हैं ? इसका क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
पृथ्वी पर कुल पाँच ताप कटिबंध हैं । विषुवत रेखा के दोनों तरफ ऊष्णकटिबंध हैं। यहाँ पर सूर्य की सीधी किरणें पड़ती हैं । इससे उस रेखा के दोनों ओर का क्षेत्र उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र में आता है । इसके उत्तर में उत्तरी समशीतोष्ण कटिबंध है । इसे 239 डिग्री कर्क वृत्त के नाम से भी जाना जाता है । इसके उत्तर में उत्तर शीत कटिबंध है । इसे 66/2 डिग्री उत्तर ध्रुववृन के नाम से जानते हैं। विषुवत रेखा के दक्षिण में दक्षिण समशीतोष्ण कटिबंध है ।

इसे 2314 डिग्री मकर वृत्त कहते हैं। इसके दक्षिण में दक्षिण शीतकटिबंध है । इसे 66% डिग्री दक्षिण ध्रुव वृत्त कहते हैं। इन कटिबंधों का महत्त्व है कि विषुवत रेखा के उत्तर-दक्षिण उष्ण कटिबंध के पास तापमान अधिक रहता है । समशीतोष्ण कटिबंधों के आसपास तापमान सामान्य रहता है । उत्तर-दक्षिण शीत कटिबंधों के पास बर्फ जमी रहती है।

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प्रश्न (vii)
वायु में गति के क्या कारण हैं ?
उत्तर-
पृथ्वी पर जहाँ कहीं तापमान अधिक हो जाता है वहाँ की हवा गर्म होकर ऊपर चली जाती है । इससे वहाँ निम्न दाब का क्षेत्र बन जाता है । इस निम्न दाब को भरने के लिए उच्च दाब के क्षेत्र से हवा चल देती है। जिस चाल से हवा चलती है उसे वायु की गति कहते हैं । वायु की गति के ये ही कारण हैं।

प्रश्न (viii)
पवन के कितने प्रकार हैं ? प्रत्येक का नाम सहित वर्णन कीजिए।
उत्तर-
पवन के तीन प्रकार हैं-

  1. स्थायी पवन
  2. मौसमी पवन तथा
  3. स्थानीय पवन ।

1. स्थायी पवन-स्थायी पवन हमेशा एक निश्चित दिशा में चलता है । यह पृथ्वी की घूर्णन गति के कारण उत्पन्न होता है । स्थायी पवन अधि क दाब पेटियों से कम दाब वाली पेटियों की ओर चलता है । पछुआ, पूर्वी तथा व्यापारिक पवन स्थायी पवन के उदाहरण हैं।

2. मौसमी पवन-जिस पवन की दिशा मौसम के अनुसार बदलती रहती है, उसे मौसभी पवन कहते हैं । यह पवन ऋतु के अनुसार अपनी दिशा बदल लेता है । भारत में मौसमी पवन से ही वर्षा होती है।

3. स्थानीय पवन-वर्षा के खास समय और खास भू-खंड (स्थान) पर चलने वाली हवाएँ स्थायी पवन कहलाती है। उदाहरण है उत्तर भारत के मैदानी भाग में मई-जून महीनों में चलने वाली गर्म हवा पछुआ पवन । इस पवन के साथ कभी-कभी लू भी चलता है । लूका विभिन्न स्थानों पर विभिन्न नाम है।

प्रश्न (ix)
स्थलीय समीर एवं समुदी समीर में क्या अंतर है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
जब हवा स्थल की ओर से समुद्र की ओर चलती है तब इस हवा को स्थलीय समीर कहते हैं । ठीक इसके विपरीत जब हवा समुद्र की ओर से स्थल की ओर चलने लगती है तब इसे समुद्री समीर कहते हैं । स्थलीय समीर सदैव रात में चलता है, वहीं समुद्री समीर सदा दिन में चला करता है।

प्रश्न (x)
चक्रवात क्या है ? इसके प्रभावों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
तूफानी हवाओं के अति शक्तिशाली भंवर को चक्रवात कहते है। . चक्रवात के प्रभाव से भारी आँधी आती है और जन-जीवन को काफी कुप्रभावित करती है । हवा नाचते-नाचते काफी ऊँचाई पर चली जाती है और भारी वर्षा कराती है । चक्रवात यदि जमीन पर आते हैं तो आँधी-वर्षा लाते हैं और यदि समुद्र में आते हैं तो उसकी लहरें काफी ऊँचाई तक उठ जाती है।

Bihar Board Class 7 Social Science Geography Solutions Chapter 12 मौसम और जलवायु

प्रश्न (xi)
वर्षा कैसे होती है ? इसके कितने प्रकार हैं ?
उत्तर-
ऊँचाई पर जलवाष्प के संघनन होने से वर्षा होती है। यह सदैव चलते रहने वाली प्रक्रिया है। वर्षा होती है पृथ्वी पर पानी पहुँचता है फिर ताप प्राप्त कर पानी वाष्प बनकर ऊपर चला जाता है । संघनन होता और वर्षा होती है । सदैव चलते रहने वाले इसी प्रक्रम को ‘जलचक्र’ कहते हैं । वर्षा तीन प्रकार की होती है

  1. संताइनिक वर्षा
  2. पर्वतीय वर्षा तथा
  3. चक्रवातीय वर्षा ।

प्रश्न (xii)
अत्यधिक वर्षा से क्या-क्या नकसान हो सकते हैं?
उत्तर-
अत्यधिक वर्षा से सबसे पहले तो बाढ़ आ जाती है। बाढ़ में घर-के-घर ही क्या गाँव-के-गाँव बह जाते हैं । आदमी के साथ जीव जंतु भी ऊँचे स्थानों की ओर भागते हैं । लगी-लगाई फसल, यहाँ तक कि कभी-कभी तैयार फसल भी बह जाती है। सरकार तथा गैरसरकारी संस्थओं को आदमियों के रहने तथा खाने-पीने की व्यवस्था में जुट जाना पड़ता है।

प्रश्न (xiii)
अधिक वर्षा एवं कम वर्षा वाले क्षेत्रों के जन-जीवन में क्या-क्या अंतर होंगे?
उत्तर-
जहाँ अधिक वर्षा होती है वहाँ के लोग घर के छप्पर की ढाल अधिक रखते हैं, ताकि पानी जल्दी बह जाय । कम वर्षा वाले क्षेत्रों में घर के छप्पर की ढाल कम रहती है या रहती ही नहीं। अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में तरह-तरह के वृक्ष पाये जाते हैं और फसलें भी तरह-तरह की होती है और खूब होती हैं ।

कम वर्षा वाले क्षेत्रों में मात्र बाजरा जैसे मोटे अनाज ही उपज पाते हैं। अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में पानी की कोई किल्लत नहीं होती, जबकि कम वर्षा वाले क्षेत्र के लोगों को पीने के पानी के भी लाले पड़े रहते हैं। इन्हें दूर-दूर से पानी लाना पड़ता है। अधिक वर्षा वाले क्षेत्र के लोग अपेक्षाकृत अधिक आराम से जीवन व्यतीत करते हैं जबकि कम वर्षा वाले क्षेत्र के लोगों का जीवन मशक्कत से भरा रहता है।

प्रश्न (xiv)
यदि वर्षा कम हो तो क्या-क्या परेशानी होती है?
उत्तर-
वर्षा कम होने पर फसलें नहीं उपजतीं । अन्न की कमी हो जाती है। गर्मी आते-आते कुएँ तालाब सूख जाते हैं । नदियों में भी पानी नहीं रहता। अतः दूर-दूर से पानी लाना पड़ता है। लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

Bihar Board Class 7 Social Science Geography Solutions Chapter 12 मौसम और जलवायु

प्रश्न (xv)
हमें वर्षा जल का संरक्षण क्यों करना चाहिए?
उत्तर-
हमें वर्षा जल का संरक्षण इसलिये करना चाहिए ताकि हमें सालों भर पानी मिल सके । इस संरक्षित जल से पीने से लेकर सिंचाई तक के काम हो सकते हैं।

प्रश्न 2.
पता कीजिए कि ये पवन कहाँ बहते हैं ?
(लू, चिनूक, गरजता चालिसा, दहाड़ता पचासा, हरिकेन, टॉरनेडो, टाइफून, विलीविली, कैटरिना, काल वैशाखी।)
उत्तर-
Bihar Board Class 7 Social Science Geography Solutions Chapter 12 मौसम और जलवायु 1

प्रश्न 3.
एक माह तक प्रतिदिन मौसम का अवलोकन कर अभिलेख तैयार कर कक्षा में प्रदर्शित कीजिए ।
उत्तर-
छात्र स्वयं करें।

Bihar Board Class 7 Social Science मौसम और जलवायु Notes

पाठ का सार संक्षेप

किसी निश्चित स्थान पर निश्चित समय में वायुमंडल की तत्कालीन दशा मौसम कहलाती है । तापमान तथा वर्षा दोनों ही मौसम के अन्तर्गत आते हैं। एक ही समय में अलग-अलग स्थानों का तापमान तथा वर्षा की मात्रा अलग-अलग रह सकती है । वायुमंडलीय दशा में भी अंतर आ सकता है ।

वायुमंडलीय दशा का अर्थ है-आकाश की स्थिति । इसके तहत धूप, बादल, वर्षा, आर्द्रता, वायु वेग तथा वायु की दिशा । इन सबका विवरण अखबारों में नित्य छपता है । जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक हैं-

  1. अक्षांश
  2. समुद्र से दूरी
  3. पर्वतों की दिशा और अवरोध
  4. समुद्री धाराओं की दिशा
  5. पवन की दिशा
  6. समुद्र तल से ऊंचाई तथा
  7. तापमान ।

लेकिन इसके बावजूद जलवायु को प्रभावित करने में सौर-ऊर्जा की विशेष भूमिका होती है । जिन स्थानों पर सौर ऊर्जा कम मिलती है वह स्थान अधिक गर्म होता है और जिन स्थानों पर सौर ऊर्जा कम मिलती है वहाँ ठंड होता है । इस प्रकार हम देखते हैं कि पृथ्वी पर ताप का मुख्य स्रोत सूर्य का ताप है। सूर्य की किरणें भूमध्य रेखा पर सीधी पड़ती है । इस कारण इसके आसपास गर्मी अधिक पड़ती है। लेकिन भूमध्यरेखा के उत्तर या दक्षिण जाने पर तापमान कम होते जाता है, क्योंकि यहाँ सूर्य की किरणें क्रमश: तिरछी होती जाती है । तापमान के कम होने का यही कारण है ।

Bihar Board Class 7 Social Science Geography Solutions Chapter 12 मौसम और जलवायु

उत्तर और दक्षिण दोनों ध्रवों पर सालों भर बर्फ जमी रहती है। वायुमंडल का तापमान, सर्य की किरणों का झुकाव, दिन की लम्बाई, प्रचलित हवाओं, जल और थल के वितरण आदि के कारण भी मौसम प्रभावित होता है । पृथ्वी की सतह पर पड़नेवाले वायु के भार को वायुदाब कहते हैं। जैसे-जैसे ऊँचाई पर जाते हैं, वैसे-वैसे वायुदाब घटता जाता है। पृथ्वी पर सर्वत्र वायुदाब समान नहीं होता । हवा सदैव उच्च दाब से निम्नदाब की ओर बहती है। भूगोल की भाषा में बहने वाली हवा को पवन कहते हैं ।

पवन तीन प्रकार के होते हैं-

  1. स्थायी पवन
  2. मौसमी पवन तथा
  3. स्थानीय पवन

कुछ सामान्य मौसमी घटनाएँ हैं-

  1. चक्रवात
  2. प्रतिचक्रवात तथा
  3. वर्षा

लेकिन वर्षा भी तीन प्रकार की होती है-

  1. संवाहनिक वर्षा
  2. पर्वतीय वर्षा तथा
  3. चक्रवातीय वर्षा

Bihar Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 19 जननायक कर्पूरी ठाकुर

Bihar Board Class 8 Hindi Book Solutions Kislay Bhag 3 Chapter 19 जननायक कर्पूरी ठाकुर Text Book Questions and Answers, Summary.

BSEB Bihar Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 19 जननायक कर्पूरी ठाकुर

Bihar Board Class 8 Hindi जननायक कर्पूरी ठाकुर Text Book Questions and Answers

प्रश्न – अभ्यास

पाठ से

प्रश्न 1.
कर्पूरी ठाकुर अपने परिजनों को प्रतीक्षा करने के लिए क्यों कहते
उत्तर:
संभवतः कर्पूरी ठाकुर के परिजनों की यह आकांक्षा होगी कि कर्पूरी पढ़-लिखकर हमें गरीबी से निजात दिलायेगा। सारे सुख-साधन प्राप्त होंगे। लेकिन जननायक के लिए सम्पूर्ण देश परिवार था। उन्होंने देश की जनता को पराधीनता की बेड़ी में जकड़ा देखा जो उनके लिए असहनीय था। इसीलिए उन्होंने अपने अल्फाज में कहा था जब तक देश के प्रत्येक निवासी

को सम्मानजनक और सुविधासम्पन्न स्वाधीन जीवन-यापन का अवसर नहीं मिलेगा, तब तक मेरे परिजनों को भी प्रतीक्षा करनी पड़ेगी।

Bihar Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 19 जननायक कर्पूरी ठाकुर

प्रश्न 2.
मैट्रिक के बाद उच्च शिक्षा के लिए उन्हें कहाँ और किस प्रकार जाना पड़ता था ?
उत्तर:
मैट्रिक परीक्षा पास कर उच्च शिक्षा के लिए दरभंगा के चन्द्रधारी .मिथिला कॉलेज में दाखिला पाया जहाँ उनको प्रतिदिन पहुँचने के लिए कुछ दूर पैदल तथा 50-60 किलोमीटर दूर मुक्तापुर से दरभंगा ट्रेन से जाना-आना पड़ता था।

प्रश्न 3.
कर्पूरी ठाकुर को कौन-कौन कार्य करने में आनन्द मिलता था ?
उत्तर:
कर्पूरी ठाकुर को चरवाही करने, ग्रामीण गीत गाने, डफली बजाने तथा पीड़ितों की सेवा करने में आनन्द आता था।

प्रश्न 4.
सचिवालय स्थित कार्यालय में पहले दिन उन्होंने कैसा दृश्य देखा तथा उस पर उन्होंने क्या निर्णय लिया?
उत्तर:
1952 में जब विधायक बने थे तो कर्पूरी जी ने सचिवालय स्थित अपने कार्यालय के लिफ्ट पर लिखा देखा- “Only for Officers” यह देखकर सचिवालय में इस सामंती प्रथा को समाप्त कर आमलोगों के लिए लिफ्ट का प्रयोग करवाया।

पाठ से आगे

प्रश्न 1.
अपने अध्ययन के दौरान आपको किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है ?
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

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प्रश्न 2.
आपको दिन भर में बहुत सारे काम करने पड़ते हैं । यथा-कॉमिक्स
पढ़ना, खेलना, छोटे भाइयों की देख-रेख करना, खाना बनाने में सहयोग करना, परीक्षा की तैयारी करना, सोना आदि । आप किन
कार्यों पर कितना समय देंगे और क्यों?
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

व्याकरण-

1. अनेक शब्दों के बदले एक शब्द
भाषा की सुदृढ़ता, भावों की गंभीरता और चुस्त शैली के लिए. यह आवश्यक है कि लेखक शब्दों के प्रयोग में संयम से काम लें ताकि वह विस्तृत विचारों या भावों को थोड़े-से शब्दों में व्यक्त कर सकें। ‘गागर में सागर भरना’ कहावत यहीं चरितार्थ होती है। विस्तृत विचारों या भावों को थोड़े शब्दों में ‘अनेक शब्दों के बदले एक शब्द ”की जानकारी से प्रस्तुत की जा सकती है।
जैसे

  1. जो दीनों के बंधु हों – दीनबंधु
  2. विभिन्न विषयों पर विचार करनेवाला – विचारक ।
  3. सामाजिक कुरीतियों को दूर करने वाला – समाज-सुधारक ।
  4. बिना शुल्क का – नि:शुल्क

2. राजा का पुत्र – राजपुत्र
विद्या का आलय – विद्यालय
रसोई के लिए घर – रसोईघर

उपर्युक्त उदाहरणों में हमने देखा कि दो शब्दों के बीच एक विभक्ति का प्रयोग किया गया है। विभक्ति लोप के बाद दोनों शब्द मिलकर एक शब्द हो गए हैं। ऐसे ही संयुक्त शब्दों को समास कहते हैं।

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3. निम्नलिखित शब्दों में से विभक्ति हटाकर एक नया शब्द बनाइए।
प्रश्नोत्तर:

  1. जनों के नायक – जननायक
  2. भूमि का सुधार – भूमि सुधार
  3. गृह में प्रवेश – गृह प्रवेश
  4. शक्ति से हीन – शक्तिहीन
  5. देह से चोर – देहचोर
  6. लोगों के नायक – लोकनायक ।

गतिविधि

प्रश्न  1.
चारावाही/रोपनी के दौरान आपके क्षेत्र में गाये जानेवाले गीतों में से कोई एक गीत लिखिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

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प्रश्न 2.
अपने गाँव-जवार के किसी गायक या वादक से मिलकर उनके अनुभवों को सुनकर अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

जननायक कर्पूरी ठाकुर Summary in Hindi

जीवनी – गरीबों के मसीहा, विलक्षण व्यक्तित्व के धनी जननायक कर्पूरी ठाकुर का जन्म 24 जनवरी, 1921 को पितौझिया गाँव, जिला-समस्तीपुर, बिहार में हुआ था। . इनके पिता गोकुल ठाकुर एवं माता रामदुलारी देवी थी। गरीब परिवार के बच्चों की तरह इनका बाल्यकाल खेल-कूद तथा पशुओं के चराने में बीता ।

6 वर्ष की आयु में 1927 ई. में इनका विद्यारम्भ गाँव के पाठशाला से हुआ। पाठशाला से आने के बाद भी वे पशुओं को चराते थे। चरवाही में ग्रामीण गीतों का उपयोग भी करते थे । गीत गाने के साथ डफली बजाने का भी शौक था जो विधायक बनने के बाद भी शौक बना रहा।

1940 में मैट्रिक परीक्षा पास कर इन्टर की पढ़ाई के लिए 50-60 किलोमीटर दूर दरभंगा में नामांकन करवाया। कुछ दूरी पैदल फिर रेल से प्रतिदिन कॉलेज किया करते थे।

Bihar Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 19 जननायक कर्पूरी ठाकुर

1942 में आई. ए. परीक्षा उत्तीर्ण कर स्नातक में नामांकन करवाया लेकिन 1942 की अगस्त-क्रान्ति से वे बच नहीं सके । क्रांति में सक्रिय भागीदारी देने लगे।

उन्होंने अपने परिजनों को प्रतीक्षा करने के लिए अपने शब्दों में कहा था-“हो सकता है कि विद्याध्ययन के पश्चात् मुझे कोई पद प्राप्त हो जाय । मैं बहुत आराम और ऐश-मौज में दिन बिताऊँ। बड़ी कोठी, घोड़ी-गाड़ी, नौकर इत्यादि दिखावटी के सभी समान मुझे उपलब्ध हो । पर मुल्क का भी मुझ पर कुछ दावा है । भारत-माता स्वतंत्रता की पीड़ा से कराह रही है और मैं पढ़ाई जारी रखू यह मुमकिन नहीं । जब तक देश के प्रत्येक नागरिक को सम्मानजनक और सुविधा सम्पन्न स्वाधीन जीवन-यापन करने का अवसर नहीं मिलेगा तब तक. मेरे परिजनों को प्रतिक्षा करना होगी।

1942 में पढ़ाई छोड़ जयप्रकाश नारायण के “आजाद दास्ता” के सदस्य बन गये । आर्थिक स्थिति से निजात पाने के लिए उन्होंने 30 रुपये के वेतन पर गाँव के स्कूल में प्रधानाध्यापक के पद पर नौकरी की। दिन में नौकरी और रात में “आजाद दस्ता” के कार्य बखूबी निभाने लगे। 23 अक्टूबर, 1943 को रात्रि में गिरफ्तार होकर पहली जेल-यात्रा की। दरभंगा जेल पुनः भागलपुर जेल में भी कुछ दिनों तक जीवन बिताया।

स्वतंत्रता के बाद 1952 में जब प्रथम आम चुनाव हुआ तो कर्पूरी ठाकुर ताजपुर (समस्तीपुर) विधान सभा क्षेत्र में सोशलिस्ट पार्टी की ओर भारी बहुमत से विधायक चुने गये तथा 1988 तक विधान सभा में रहे। इस दौरान वे विधान सभा के कार्यवाहक अध्यक्ष, विरोधी दल के नेता, उप मुख्यमंत्री तथा दो बार मुख्यमंत्री बने।

जननायक को गरीब एवं पीड़ितों की सेवा में बड़ा आनन्द आता था। एक बार 1957 की बात है जब गाँवों का दौरा कर रहे थे। उसी दौरान उन्होंने देखा कि एक आदमी हैजा से पीड़ित है और मरने की स्थिति में है। अस्पताल -5-6 किलोमीटर दूर है। यातायात का कोई साधन नहीं । कर्पूरी जी ने उस

पीड़ित को अपने कंधे पर उठाकर दौड़ते हुए चलकर अस्पताल पहुँचाया था। . 1952 की ही बात है जब उन्होंने विधायक बन सचिवालय में पहुंचे तो लिफ्ट पर लिखा देखा-“Only for Officers” यह देखकर ही उन्हें सचिवालय में सामंती प्रथा की बू आ गई और वे इस प्रथा को अंत कर आम लोगों को लिफ्ट से आने-जाने के लिए प्रयोग करवाया।

Bihar Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 19 जननायक कर्पूरी ठाकुर

वे 1967 में उप मुख्यमंत्री, 1970 में और 1977 में मुख्यमंत्री पद को विभूषित किया । दलगत नीति के कारण 12 अगस्त, 1987 को विपक्ष के नेता के पद से इनको हटा दिया गया। 17 फरवरी, 1988 को हृदयाघात के कारण इनकी मृत्यु हो गई।

Bihar Board 10th English Objective Answers poem 1 God Made The Country

Bihar Board 10th English Objective Questions and Answers

BSEB Bihar Board 10th English Objective Answers poem 1 God Made The Country

Question 1.
Who wrote the poetry ‘God Made The Country’ ?
(A) William Wordsworth
(B) William Cowper
(C) Alexander Pope
(D) Durga Prasad
Answer:
(B) William Cowper

Bihar Board 10th English Objective Answers poem 1 God Made The Country

Question 2.
Panda William Cowper may be said to be giving in his poems a foretaste of the poetry of………………?
(A) Wordsworth
(B) Puran Singh
(C) Laxmi Prasad
(D) Durga Prasad Panda
Answer:
(B) Puran Singh

Question 3.
According to poetry who made the town ?
(A) God
(B) Government
(C) Man
(D) None of these
Answer:
(C) Man

Question 4.
Where do you find health and virtue ?
(A) Country
(B)Town
(C) Village
(D) Space
Answer:
(C) Village

Question 5.
What has made the man idle ?
(A) Luxurious life
(B) Comfortable devices
(C) Packed foods
(D) None of these
Answer:
(B) Comfortable devices

Bihar Board 10th English Objective Answers poem 1 God Made The Country

Question 6.
Why were groves planted ?
(A) To comfort us
(B) To provide us Loaries
(C) To provide us fuel
(D) None of these
Answer:
(A) To comfort us

Question 7.
What is the poet’s desire ?
(A) To enjoy comfortable conditions
(B) To enjoy luxury
(C) To energy green environment
(D) The pleasure of natural objects
Answer:
(D) The pleasure of natural objects

Question 8.
According to the poet, health and .virtue can be found in
(A) Towns
(B) Cities
(C) Villages
(D) Factories
Answer:
(B) Cities

Question 9.
The town people do not enjoy any real
(A) Scenery
(B) Food
(C) Drink
(D) Fun
Answer:
(A) Scenery

Bihar Board 10th English Objective Answers poem 1 God Made The Country

Question 10.
The villagers can do very well without the …………..lights of the town.
(A) Grand
(B) Dim
(C) Shining
(D) Soft
Answer:
(A) Grand

Question 11.
On hearing the songs of the towns, singing-birds like the ……………..are afraid and go away. .
(A) Parrot
(B) Thrush
(C) Cuckoo
(D) Sparrow
Answer:
(B) Thrush

Question 12.
The poet calls things like health and virtue.
(A) Gifts
(B) Prizes
(C) Curses
(D) Defects
Answer:
(A) Gifts

Question 13.
Who created the poem ‘God Made The Country’?
(A) William Cowper
(B) William Wordsworth
(C) Alexander Pope
(D) Durga Prasad Panda
Answer:
(A) William Cowper

Bihar Board 10th English Objective Answers poem 1 God Made The Country

Question 14.
William Cowper may be said to be giving in his poems a foretaste of the poetry of………………….?
(A) Wordsworth
(B) Puran Singh
(C) Laxmi Prasad
(D) Durga Prasad Panda
Answer:
(A) Wordsworth

Question 15.
According to the poet, health and virtue can be found in
(A) towns
(B) cities
(C) villages
(D) factories
Answer:
(C) villages

Question 16.
The town’s people do not enjoy any real
(A) scenery
(B) food
(C) drink
(D) fun
Answer:
(A) scenery

Bihar Board 10th English Objective Answers poem 1 God Made The Country

Question 17.
In this poem the narrator is
(A) a townsman
(B) god
(C) country
(D) a villager
Answer:
(D) a villager

Question 18.
William Cowper was born in
(A) 1721
(B) 1711
(C) 1730
(D) 1731
Answer:
(D) 1731

Question 19.
William Cowper died in
(A) 1805
(B) 1798
(C) 1800
(D) 1810
Answer:
(C) 1800

Question 20.
Like whom the poet did not hesitate in giving ciear-cut opinion about the issues of his time?
(A) William Cowper
(B) Keats
(C) Wordsworth
(D) Thooran
Answer:
(C) Wordsworth

Question 21.
A two-wheeled horse-drawn vehicle used in olden times
(A) cart
(B) chart
(C) chariot
(D) none
Answer:
(C) chariot

Bihar Board 10th English Objective Answers poem 1 God Made The Country

Question 22.
Why is the thrush scared and the nightingale offended?
(A) to hear the vice of the poet
(B) to hear the songs of village
(C) to hear the songs of town
(D) none of these
Answer:
(C) to hear the songs of town

Question 23.
Health and goodness can make our life
(A) harder
(B) Comic
(C) sweet
(D) confound
Answer:
(C) sweet

Question 24.
According to the poet who made the town?
(A) God
(B) Government
(C) Man
(D) None of these
Answer:
(C) Man

Question 26.
That……………….holds out to all, should most abound.
(A) life
(B) virtue
(C) groves
(D) town
Answer:
(A) life

Question 27.
What has made the man idle?
(A) Luxurious life
(B) Comfortable devices
(C) Packed foods
(D) None of these
Answer:
(B) Comfortable devices

Question 28.
Why were groves planted?
(A) To comfort us
(B) To provide us loaries
(C) To provide us fuel
(D) None of these
Answer:
(A) To comfort us

Bihar Board 10th English Objective Answers poem 1 God Made The Country

Question 29.
What is the poet’s desire?
(A) To enjoy comfortable conditions
(B) To enjoy luxury
(C) To energy green environment
(D) The pleasure of natural objects
Answer:
(D) The pleasure of natural objects

Question 30.
The villagers can do very well without the…………….lights of the town.
(A) grand
(B) dim
(C) soft
(D) shining
Answer:
(A) grand

Question 31.
On hearing the songs of the towns, singing-birds like the……………….are afraid and go away.
(A) parrot
(B) thrush
(C) cuckoo
(D) sparrow
Answer:
(B) thrush

Bihar Board 10th English Objective Answers poem 1 God Made The Country

Question 32.
Listening to the……………..songs the nightingale becomes mute in a town.
(A) radio
(B) television
(C) headphone
(D) gramophone
Answer:
(D) gramophone

Question 33.
Where is the life least threatened?
(A) in towns
(B) in the fiends and groves
(C) in villages
(D) none of these
Answer:
(B) in the fiends and groves

Question 34.
What are planted to console the pensive wanderer?
(A) grooves
(B) shades
(C) walls
(D) factories
Answer:
(A) grooves

Bihar Board 10th English Objective Answers poem 1 God Made The Country

Question 35.
The moonbeam slides between ……………………
(A) ‘he ho ises
(B) the sleeping leaves
(C) shades
(D) none of these
Answer:
(B) the sleeping leaves

Question 36.
The thrush departs …………….
(A) sacred
(B) gladly
(C) scared
(D) boldly
Answer:
(C) scared

Question 37.
The poet calls things like health and virtue
(A) Gifts
(B) Prizes
(C) Curses
(D) Defects
Answer:
(A) Gifts

Bihar Board 10th English Objective Answers poem 1 God Made The Country

Question 38.
Where do you find fields and groves?
(A) in villages
(B) in towns
(C) in forests
(D) in cities
Answer:
(A) in villages

Question 39.
What is the source of light in Villages in the evening?
(A) seen
(B) moon
(C) lamp
(D) none of these
Answer:
(B) moon

Bihar Board 10th English Objective Answers poem 1 God Made The Country

Question 40.
Where is life better?
(A) in towns
(B) in villages
(C) in markets
(D) in homes
Answer:
(B) in villages

 

Bihar Board Class 8 Social Science History Solutions Chapter 7 ब्रिटिश शासन एवं शिक्षा

Bihar Board Class 8 Social Science Solutions History Aatit Se Vartman Bhag 3 Chapter 7 ब्रिटिश शासन एवं शिक्षा Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 8 Social Science History Solutions Chapter 7 ब्रिटिश शासन एवं शिक्षा

Bihar Board Class 8 Social Science ब्रिटिश शासन एवं शिक्षा Text Book Questions and Answers

पाठगत प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
मदरसा से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-
अरबी भाषा में जहाँ सिखाया-पढ़ाया जाता है, उन स्थान को मदरसा कहा जाता है। यह स्कूल, कॉलेज के समान संस्था हो सकती है जहाँ बच्चे पढ़ते हैं।

Bihar Board Class 8 Social Science History Solutions Chapter 7 ब्रिटिश शासन एवं शिक्षा

प्रश्न 2.
गतिविधि-जोन्स प्राचीन भारतीय ग्रंथों को पढ़ना जरूरी क्यों समझते थे-सोचें?
उत्तर-
विलियम जोन्स मानते थे कि प्राचीन काल में भारत अपने वैभव के शिखर पर था । वे भारत के प्रति आदर और सम्मान का भाव रखते थे। उनका मानना था कि अगर भारत की श्रेष्ठता को जानना है तो भारतीय ग्रंथों को पढ़ना जरूरी है।

प्रश्न 3.
गतिविधि-कल्पना करें, अंग्रेज भारतीय लोगों के मानस को अपने
अनुसार क्यों ढालना चाहते थे?
उत्तर-
अंग्रेज भारत में शासन करने के लिए अपनी शासन व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए कई भारतीयों को अपनी सेवा में लेना चाहते थे। इसके लिए जरूरी था कि ये भारतीय अंग्रेजी भाषा के जानकार हों और यूरोपीय भारतीयों को हीन समझें और यूरोपीयों को श्रेष्ठ । इसी कारण, अंग्रेज : भारतीय लोगों के मानस को अपने अनुसार ढालना चाहते थे।

अभ्यास-प्रश्न

प्रश्न 1.
सही विकल्प को चुनें।

प्रश्न (i)
विलियम जोंस भारतीय इतिहास, दर्शन और कानून के अध्ययन को क्यों जरूरी मानते थे?
(क) भारत में बेहतर अंग्रेजी शासन स्थापित करने के लिए
(ख) प्राचीन भारतीय पुस्तकों के अनुवाद (अंग्रेजी में) के लिए
(ग) अपने भारत प्रेम के कारण।
(घ) भारतीय ज्ञान-विज्ञान को बढ़ावा देने के लिए।
उत्तर-
(ग) अपने भारत प्रेम के कारण।

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प्रश्न (ii)
आधुनिक शिक्षा की भाषा किसको बनाया गया?
(क) हिन्दी
(ख) बांगला
(ग) अंग्रेजी
(घ) मराठी
उत्तर-
(ग) अंग्रेजी

प्रश्न (iii)
एशियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल की स्थापना किसने किया? :
(क) मैकाले
(ख) विलियम जोंस
(ग) कोलब्रुक
(घ) वारेन हेस्टिंग्स
उत्तर-
(ख) विलियम जोंस

प्रश्न (iv)
औपनिवेशिक शिक्षा ने भारतीयों के मस्तिष्क में हीनता का बोध पैदा
कर दिया? गाँधीजी ऐसा क्यों मानते थे?
(क) भारतीयों द्वारा पश्चिमी सभ्यता को श्रेष्ठ मानने के कारण
(ख) अंग्रेजी भाषा में शिक्षा के कारण
(ग) पाठ्य पुस्तकों पर शिक्षा को केन्द्रित करने के कारण
(घ) भारतीयों का अंग्रेजी शसन के समर्थन करने के कारण
उत्तर-
(क) भारतीयों द्वारा पश्चिमी सभ्यता को श्रेष्ठ मानने के कारण

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित के जोड़े बनाएँ-

  1. विलियम जोंस ………… अंग्रेजी शिक्षा को प्रोत्साहन।।
  2. रवीन्द्रनाथ टैगोर …………. प्राचीन संस्कृतियों का सम्मान ।
  3. टॉमस मेकॉले ………… गुरु ।
  4. महात्मा गाँधी ……. प्राकृतिक परिवेश में शिक्षा।
  5. पाठशालाएँ ………. अंग्रेजी शिक्षा के विरुद्ध।

उत्तर-

  1. विलियम जोंस …………. प्राचीन संस्कृतियों का सम्मान ।
  2. रवीन्द्रनाथ टैगोर ………….. प्राकृतिक परिवेश में शिक्षा ।
  3. टॉमस मेकॉले …………. अंग्रेजी शिक्षा को प्रोत्साहन ।
  4. महात्मा गाँधी ………… अंग्रेजी शिक्षा के विरुद्ध ।
  5. पाठशालाएँ ………….. गुरु ।

आइए विचार करें

प्रश्न (i)
भारत के विषय में विलियम जोंस के विचार कैसे थे ? संक्षेप में बताएँ।
उत्तर-
विलियम जोन्स भारत के प्रति आदर और सम्मान का भाव अपने मन में रखते थे। वे मानते थे कि प्राचीन काल में भारत का वैभव शिखर पर था । वे भानते थे कि अगर भारत की श्रेष्ठता को जानना है तो उस समय लिखे जाने वाले महान् भारतीय ग्रन्थों जैसे वेद, उपनिषद्, स्मृति, धर्म-सूत्र को पढ़ना जरूरी है। उनका मानना था कि अगर भारत में एक बेहतर अंग्रेजी शासन कायम करना है तो इन भारतीय ग्रंथों को पढ़ना और समझना आवश्यक होगा।

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प्रश्न (ii)
टॉमस मेकॉले भारत में किस प्रकार की शिक्षा शुरू करना चाहते थे, इस सम्बन्ध में उनके क्या विचार थे?
उत्तर-
टॉमस मेकाले भारत में अंग्रेजी शिक्षा शुरू करना चाहते थे। उनका मानना था कि भारतीय शास्त्र अवैज्ञानिक और गलत सूचनाओं से भरे पड़े हैं। इसलिए पुरातन भारतीय शिक्षा पर इंग्लैंड का पैसा खर्च करना अनुचित है। उनका मानना था कि भारतीयों को व्यावहारिक जीवन की शिक्षा देनी चाहिए। उन्हें यह बताना आवश्यक है कि इंग्लैंड एवं अन्य यूरोपीय देश किस प्रकार एवं तकनीकी शिक्षा का प्रसार भारत में भी जरूरी है जो अंग्रेजी शिक्षा के माध्यम से ही मिल सकती है।

प्रश्न (iii)
भारत में अंग्रेजी शिक्षा का उद्देश्य क्या था? उसका स्वरूप कैसा था?
उत्तर-
1813 तक भारत में अंग्रेजी शासन का क्षेत्र काफी फैल चुका था। इस बड़े क्षेत्र पर शासन संचालन के लिए कर्मचारियों की एक बड़ी संख्या की आवश्यकता थी । इतने लोग इंगलैंड से नहीं आ सकते थे। सरकार को भारत में ही कर्मचारियों को तैयार करना था। अतः शासन के लायक काम के लिए उन्हें शिक्षित करना आवश्यक था । यह भारत में अभी तक प्रचलित शिक्षा से पूरा नहीं हो सकता था। इस बात ने शिक्षा के क्षेत्र में कुछ नया करने को अंग्रेजी सरकार को बाध्य किया। अत: अंग्रेजों ने अपने लिए कर्मचारियों की फौज खड़ी करने के लिए भारत में अंग्रेजी शिक्षा का प्रसार करने के उद्देश्य से शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करना शुरू किया।

प्रश्न (iv)
शिक्षा के विषय में महात्मा गाँधी एवं रवीन्द्रनाथ टैगोर के विचारों को बताएं। –
उत्तर-
महात्मा गाँधी एक ऐसी शिक्षा के पक्षधर थे जो भारतीयों के भीतर प्रतिष्ठा और स्वाभिमान का भाव पुनर्जीवित करें। उनकी दृढ़ मान्यता थी भारत में शिक्षा केवल भारतीय भाषाओं में ही दी जानी चाहिए। उनके मुताबिक, अंग्रेजी में दी जा रही शिक्षा भारतीयों को अपाहिज बना देती है अपने सामाजिक परिवेश से काट देती है और उन्हें “अपनी ही भूमि पर अजनबी” बना दे रही है।

उनकी राय में, विदेशी भाषा बोलने वाले, स्थानीय संस्कृति से घृणा करने वाले अंग्रेजी शिक्षित भारतीय अपनी जनता से जुड़ने के तौर-तरीके भूल चुके हैं। उनका मानना था कि शिक्षा मौखिक भी हो, जीवन के अनुभवों और व्यावहारिक ज्ञान भी दो । शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति का मस्तिष्क एवं और आत्मविकास होना चाहिए । केवल साक्षरता ही शिक्षा नहीं होती । हाथ से काम करना सीखना और हुनर भी सीखना जरूरी है, तभी मस्तिष्क और समझने की क्षमता, दोनों विकसित होंगे।

टैगोर का मानना था कि स्कूल मुक्त और रचनाशील हों, जहाँ विद्यार्थी अपने विचारों, और आकांक्षाओं को समझ सकें। टैगोर का मानना था कि सृजनात्मक शिक्षा को केवल प्राकृतिक परिवेश में ही प्रोत्साहित किया जा -सकता है।

टैगोर को लगता था कि बचपन का समय अपने आप सीखने का समय होना चाहिए । वह अंग्रेजों द्वारा स्थापित की गई शिक्षा व्यवस्था के कड़े और बंधनकारी अनुशासन से उसे मुक्त करना चाहते थे। उनका मानना था कि शिक्षक कल्पनाशील हों, बच्चों को समझाते हों और उनके अंदर उत्सुकता जानने की चाह विकसित करने में मदद करें। टैगोर के मुताबिक, वर्तमान स्कूल बच्चे की रचनाशीलता, कल्पनाशील होने के उसके स्वाभाविक गुण को मार देते हैं।

गांधीजी पश्चिमी सभ्यता और मशीनों व प्रौद्योगिकी की उपासना के कट्टर आलोचक थे। टैगोर आधुनिक पश्चिमी सभ्यता और भारतीय परंपरा के श्रेष्ठ तत्वों का सम्मिश्रण चाहते थे। उन्होंने शांति निकेतन में कला, संगीत और नृत्य के साथ-साथ विज्ञान और प्रौद्योगिकी की शिक्षा पर भी जोर दिया।

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प्रश्न (v)
अंग्रेज विद्वानों के बीच शिक्षा नीति के विषय में किस प्रकार के विवाद थे । इस सम्बन्ध में आप क्या सोचते हैं। बताएँ।
उत्तर-
1813 में ब्रिटिश संसद ने एक कानून बनाकर भारत में शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिवर्ष एक लाख रुपए खर्च करने का निर्देश दिया। शिक्षा के क्षेत्र में खर्च करने के लिए पैसा तो मिल गया पर अब विवाद उठा कि इस पैसे को किस रूप में खर्च किया जाए। विलियम जोन्स जैसे कुछ अन्य अंग्रेजी विद्वानों का मानना था कि इस पैसे को भारतीय विद्या और ज्ञान के प्रसार में खर्च करना चाहिए। इनका कहना था कि भारतीयों को उनकी भाषा में ही पढ़ाया जाए इससे कर्मचारियों की आपूर्ति भी हो जाएगी साथ ही भारत की परम्परा को भी अंग्रेजों को जानने में सहायता मिलेगी।

जबकि जेम्स मिल और मैकॉले जैसे अंग्रेजी विद्वानों का मत था कि भारतीयों को अंग्रेजी में शिक्षा देकर उनके मानस को यूरोपीय सांचे में ढालने की शुरूआत करनी चाहिए। इससे अंग्रेजों को अंग्रेजी भारत में दक्ष अनगिनत भारतीय कर्मचारी मिल जाएंगे।

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आइए करके देखें 

प्रश्न (i)
अपने घर या पड़ोस के बुजुर्गों से पता करें कि स्कूल में उन्होंने कौन-कौन सी चीजें पढ़ी थी ? अभी आप उसमें क्या बदलाव देखते हैं ?

प्रश्न (ii)
अंग्रेजी शासन के दौरान बिहार में आधुनिक शिक्षा के विकास के लिए जब प्रयास किया गया उसके विषय में वर्ग में शिक्षक के सहयोग – से परिचर्या करें।
उत्तर-
छात्र स्वयं करें।

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