Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 15 तरंगें

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 15 तरंगें Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 15 तरंगें

Bihar Board Class 11 Physics तरंगें Text Book Questions and Answers

अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उतर

प्रश्न 15.1
2.50 kg द्रव्यमान की 20 cm लंबी तानित डोरी पर 200 N बल का तनाव है। यदि इस डोरी के एक सिरे को अनुप्रस्थ झटका दिया जाए तो उत्पन्न विक्षोभ कितने समय में दूसरे सिरे तक पहुँचेगा?
उत्तर:
दिया है:
तनाव T = 200 N, डोरी की लम्बाई, l – 20 मी,
डोरी का द्रव्यमान M = 2.50 kg
∴ डोरी का द्रव्यमान प्रति एकांक लम्बाई
m = \(\frac{M}{l}\) = \(\frac{2.50}{20.0}\) = 0.125 kg m-1
हम जानते हैं कि अनुप्रस्थ तरंगों का वेग,
v = \(\sqrt{\frac{T}{m}}\) = \(\sqrt{\frac{200}{0.125}}\) = 40 ms-1
माना अनुप्रस्थ तरंगों द्वारा एक सिरे से दूसरे सिरे तक पहुँचने में लिया गया समय t है।
∴ सूत्र t = डोरी की ल०/डोरी का वेग,
∴ t = \(\frac{1}{v}\) = \(\frac{20}{40}\) = 0.5 s

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प्रश्न 15.2
300 m ऊँची मीनार के शीर्ष से गिराया गया पत्थर मीनार के आधार पर बने तालाब के पानी से टकराता है। यदि वायु में ध्वनि की चाल 340 ms-1 है तो पत्थर के टकराने की ध्वनि मीनार के शीर्ष पर पत्थर गिराने के कितनी देर बाद सुनाई देगी? (g = 9.8 ms-2)
उत्तर:
दिया है:
पत्थर का प्रारम्भिक वेग u = 0
त्वरण a = g = 9.8 मीटर/से०2
मीनार की ऊँचाई h = 300 m,
वायु में ध्वनि की चाल v = 340 ms-1
माना t1 = पत्थर द्वारा गिरने में लिया गया समय
व t2 = ध्वनि द्वारा मीनार के आधार से शीर्ष तक पहुँचने में लिया गया समय
माना t = शीर्ष पर ध्वनि सुनाई देने का समय है।
अतः t = t1 + t2 …………….. (i)
गति के समी० से
s = ut + \(\frac{1}{2}\) at2
दिया है: s = h, u = 0, a = g, t = t1
∴ h = 0 + \(\frac{1}{2}\) gt12
या t1 = \(\sqrt{\frac{2h}{g}}\)
या t1 = \(\sqrt{\frac{2 \times 300}{9.8}}\) = 7.82 s …………………. (ii)
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∴ समी० (i), (ii) व (iii) से,
t = 7.82 + 0.88 = 8.7s

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प्रश्न 15.3
12.0 m लंबे स्टील के तार का द्रव्यमान 2.10 kg है। तार में तनाव कितना होना चाहिए ताकि उस तार पर किसी अनुप्रस्थ तरंग की चाल 20°C पर शुष्क वायु में ध्वनि की चाल (343 ms-1) के बराबर हो।
उत्तर:
दिया है:
l = 12 मीटर, M = 2.10 किग्रा
माना कि तार में तनाव = T
तथा तार की द्रव्यमान प्रति एकांक लम्बाई m है।
∴ m = \(\frac{M_{s}}{l}\) = \(\frac{2.10}{12}\)
= 0.175 किग्रा प्रति मीटर
तार में अनुप्रस्थ तरंग की चाल = 20°C
शुष्क वायु में ध्वनि की चाल = 343 मीटर/सेकण्ड
हम जानते हैं कि तार में अनुप्रस्थ तरंग की चाल
v = \(\sqrt{\frac{T}{m}}\)
या v2 = \(\frac{T}{m}\)
∴ T = mv2 = 0.175 × (343)2
= 20588.6 किग्रा मीटर/सेकण्डर
= 2.06 × 104 न्यूटन।

प्रश्न 15.4
सूत्र v = \(\sqrt{\frac{\gamma P}{\rho}}\) का उपयोग करके स्पष्ट कीजिए कि वायु में ध्वनि की चाल क्यों –
(a) दाब पर निर्भर नहीं करती
(b) ताप के साथ बढ़ जाती है, तथा
(c) आर्द्रता के साथ बढ़ जाती है?
उत्तर:
(a) वायु में ध्वनि की चाल पर दाब का प्रभाव-वायु में ध्वनि की चाल सूत्र v = \(\sqrt{\frac{v P}{d}}\) से प्रतीत होता है कि दाब P के बदलने पर ध्वनि की चाल (y) का मान भी बदल जाता है। लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं होता है। माना कि परमताप T पर किसी गैस के 1 ग्राम-अणु द्रव्यमान का आयतन V व दाब P है। माना कि गैस का अणुभार तथा घनत्व क्रमश: M व d है।
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∴ गैस का आयतन, PV = RT से
\(\frac{pm}{d}\) = RT
या \(\frac{P}{d}\) = \(\frac{RT}{m}\) = (ताप के नियत होने पर)
अतः ताप (T) के नियत रहने पर, यदि दाब P का मान बदलेगा तब उसके साथ घनत्व (d) का मान भी बदलेगा लेकिन P/d का मान नियत रहेगा। इससे ध्वनि की चाल का मान समान रहेगा।
अतः वायु या गैस का ताप नियत रहे तो ध्वनि की चाल पर दाब परिवर्तन का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

(b) वायु में ध्वनि की चाल पर ताप का प्रभाव – किसी गैस के लिए P/d का मान गैस के ताप पर निर्भर करता है। किसी गैस को गर्म करने पर,
(i) ताप बढ़ने पर यदि गैस फैलने के लिए स्वतन्त्र है, तो उसका घनत्व कम हो जाता है। जिससे P/d का मान बढ़ेगा।
(ii) यदि गैस किसी.बर्तन में बंद है तो उसका घनत्व (d) वही रहेगा लेकिन दाब बढ़ जायेगा जिससे P/d का मान बढ़ेगा।
अर्थात गैस का ताप बढ़ने पर उसमें ध्वनि की चाल बढ़ती है। जब किसी गैस के एक ग्राम अणु, घनत्व व आयतन क्रमश: M, d व v है तब V = \(\frac{m}{d}\)
यदि गैस का दाब P व परमताप T हो तो गैस समीकरण PV = RT से,
\(\frac{PM}{d}\) = RT
या \(\frac{P}{m}\) = \(\frac{RT}{m}\)
∴ गैस में ध्वनि की चाल v = \(\sqrt{\frac{V P}{d}}\)
= \(\sqrt{\frac{\gamma R T}{M}}\)
अतः किसी गैस में ध्वनि की चाल उसके परमताप के वर्गमूल के समानुपाती होती है।
∴ v ∝ \(\sqrt{T}\)

(c) वायु में ध्वनि की चाल पर आवृत्ति का प्रभाव – आर्द्र वायु का घनत्व शुष्क वायु के घनत्व की तुलना में कम होता है। अतः आर्द्र वायु में ध्वनि की चाल शुष्क वायु की तुलना में बढ़ जाती है।

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प्रश्न 15.5
आपने यह सीखा है कि एक विमा में कोई प्रगामी तरंग फलन y = f(x,t) द्वारा निरूपित की जाती है जिसमें x तथा t को x – vt अथवा x + vt अर्थात् y = f(x ± vt) संयोजन में प्रकट होना चाहिए। क्या इसका प्रतिलोम भी सत्य है? नीचे दिए गए y के प्रत्येक फलन का परीक्षण करके यह बताइए कि वह किसी प्रगामी तरंग को निरूपित कर सकता है:
(a) (x – vt)2
(b) log (x + vt) x0
(c) 1/(x + vt)
उत्तर:
इसका विलोम असत्य है। चूंकि किसी प्रगामी तरंग के स्वीकार करने योग्य फलन के लिए एक प्रत्यक्ष आवश्यकता यह है कि यह हर समय व हर स्थान पर परिमित होनी चाहिए। दिए गए फलनों में से सिर्फ फलन (c) ही इस प्रतिबन्ध को सन्तुष्ट करता है। शेष फलन सम्भवतया किसी प्रगामी तरंग को व्यक्त नहीं कर सकते हैं।

प्रश्न 15.6
कोई चमगादड़ वायु में 1000 kHz आवृत्ति की पराश्रव्य ध्वनि उत्सर्जित करता है। यदि यह ध्वनि जल के पृष्ठ से टकराती है, तो (a) परावर्तित ध्वनि तथा (b) पारगमित ध्वनि की तरंगदैर्ध्य ज्ञात कीजिए। वायु तथा जल में ध्वनि की चाल क्रमशः 340 ms-1 तथा 1486 ms-1 है।
उत्तर:
दिया है:
v = 1000 kHz =106 Hz
वायु में ध्वनि की चाल v1 = 340 ms-1
व जल में ध्वनि की चाल v2 = 1486 ms-1
सूत्र, λ = \(\frac{v}{v}\) से

(a) परावर्तित ध्वनि की तरंगदैर्ध्य
λ1 = \(\frac{v_{1}}{v}=\frac{340}{10^{6}}\)
= 0.34 मिमी

(b) जल में तरंग की तरंगदैर्ध्य
λ2 = \(\frac{v_{2}}{v}=\frac{1486}{10^{6}}\)
= 0.149 सेमी।

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प्रश्न 15.7
किसी अस्पताल में ऊतकों में ट्यूमरों का पता लगाने के लिए पराश्रव्य स्कैनर का प्रयोग किया जाता है। उस ऊतक में ध्वनि की तरंगदैर्ध्य कितनी है जिसमें ध्वनि की चाल 1.7 kms-1 है? स्कैनर की प्रचालन आवृत्ति 4.2 MHz है।
उत्तर:
दिया है:
आवृत्ति v = 4.2 MHz = 4.2 × 106 Hz
चाल v = 1.7 kms-1
= 1700 मीटर/सेकण्ड
सूत्र तरंगदैर्ध्य λ = \(\frac{v}{v}\) से,
ध्वनि की तरंगदैर्ध्य,
λ = \(\frac{1700}{4.2 \times 10^{6}}\)
= 0.405 मिमी।

प्रश्न 15.8
किसी डोरी पर कोई अनुप्रस्थ गुणावृत्ति तरंग का वर्णन
y(x, t) = 3.0 sin (36t + 0.018x + π/4)
द्वारा किया जाता है। यहाँ x तथा y सेंटीमीटर में तथा t सेकण्ड में है।x की धनात्मक दिशा बाएँ से दाएँ है।
(a) क्या यह प्रगामी तरंग है अथवा अप्रगामी? यदि यह प्रगामी तरंग है तो इसकी चाल तथा संचरण की दिशा क्या है?
(b) इसका आयाम तथा आवृत्ति क्या है?
(c) उद्गम के समय इसकी आरंभिक कला क्या है?
(d) इस तरंग में दो क्रमागत शिखरों के बीच की न्यूनतम दूरी क्या है?
उत्तर:
दी हुई अनुप्रस्थ गुणावृत्ति तरंग का समीकरण है –
y(x, t) = 3.0 sin (36t + 0.018x + \(\frac{π}{4}\)) ………………….. (iv)
संचरित तरंग का सामान्य समीकरण निम्न है –
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(a) समी० (i) व (ii) की तुलना करने पर स्पष्ट है कि समी० (i) संचरित तरंग को व्यक्त करती है।
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समी० (iii) तथा (iv) की गुणा करने पर,
2πvλ = \(\frac{2 \pi \times 26}{0.018}\)
vλ = – 2000
v = – 2000 cms-1 = -20 ms-1
जहाँ v = vλ तरंग का वेग है। यहाँ ऋणात्मक चिह्न प्रदर्शित करता है कि तरंग बाएँ से दायीं ओर चलती है।
∴ वेग = 20 s-1

(b) A = 3.0 cm = 3.0 × 10-2 m
\(\frac{2π}{T}\) = 36
v = \(\frac{36}{2π}\) = \(\frac{36}{2×3.14}\) = 5.73 Hz

(c) प्रारम्भिक कला ϕ = \(\frac{π}{4}\) Frad

(d) तरंग में दो गर्मों के बीच न्यूनतम दूरी = तरंगदैर्ध्य
= λ = \(\frac{2π}{0.018}\)
= \(\frac{2×3.14}{0.018}\) = 348.9 cm
= 3.489 m
3.49 m = 3.5 m

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प्रश्न 15.9
प्रश्न 15.8 में वर्णित तरंग के लिए x = 0 cm, 2 cm तथा 4 cm के लिए विस्थापन (y) और समय (1) के बीच ग्राफ आलेखित कीजिए। इन ग्राफों की आकृति क्या है? आयाम, आवृत्ति अथवा कला में से किन पहलुओं में प्रगामी तरंग में दोलनी गति एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु पर भिन्न है?
उत्तर:
दी हुई तरंग समीकरण है –
y (x, t) = 3.0 sin (36t + 0.018x + \(\frac{π}{4}\)) ………….. (i)
माना x = 0, 2 व 4 सेमी के लिए तरंग के विस्थापन क्रमशः y1, y2 व y3 हैं।
∴ y1 = (0, t) = 3.0 sin (36t + \(\frac{π}{4}\)) …………….. (ii)
y2 (2, t) = 3.0 sin (36t + 0.036 + \(\frac{π}{4}\)) ……………………. (iii)
तथा y3 (4, t) = 3.0 sin (36t + 0.072 + \(\frac{π}{4}\)) ………………….. (iv)
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समी० (ii), (iii) व (iv) से स्पष्ट है कि ये वक्र ज्यावक्रीय हैं। जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। तरंग संचरण में दोलनी गति, एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक केवल कला में भिन्न है, जैसा कि क्रमशः (ii), (iii) व (iv) से दिखाया गया है। इन तरंगों के आयाम व आवृत्ति क्रमश: 3 सेमी० व \(\frac{36}{2π}\) s-1 समान हैं।

प्रश्न 15.10
प्रगामी गुणावृत्ति तरंग
y (x, t) = 2.0 cos 2π (10t – 0.0080x + 0.35)
जिसमें x तथा y को m में तथा कोs में लिया गया है, के लिए उन दो दोलनी बिन्दुओं के बीच कलांतर कितना है जिनके बीच की दूरी है –
(a) 4m
(b) 0.5 m
(c) λ/2
(d) \(\frac{3λ}{4}\)
उत्तर:
दी हुई प्रगामी गुणावृत्ति तरंग का समीकरण निम्न है –
y(x, t) = 2.0 cos 2π (10t – 0.0080x + 0.35) ……………… (i)
अतः संचरित गुणावृत्ति तरंग की सामान्य समीकरण निम्न है –
y(x, t) = A cos \(\left[\frac{2 \pi}{T} t-\frac{2 \pi}{\lambda} x+\phi_{0}\right]\) ………………….. (ii)
समी० (i) व (ii) की तुलना से
\(\frac{2π}{λ}\) = 2π × 0.0080 cm-1 …………………. (iii)
\(\frac{2π}{T}\) = 2π × 10
ϕ0 = 0.35
हम जानते हैं कि कलान्तर = \(\frac{2π}{λ}\) × पथान्तर ……………..(iv)

(a) पथान्तर = 4m = 400m, (iv) से,
समी० (iv) से, कलान्तर = \(\frac{2π}{λ}\) × 400
= 2π × 0.0080 × 40 [समी० (iii) से]
= 6.41π rad

(b) पथान्तर = 0.5 m = 50 cm पर
कलान्तर = 2π × 0.0080 × 50
= 0.8π rad

(c) पथान्तर = \(\frac{π}{2}\) पर,
कलान्तर = \(\frac{2π}{λ}\) × \(\frac{λ}{2}\) = π radian पर

(d) पथान्तर = \(\frac{3λ}{4}\) पर,
कलान्तर = \(\frac{2π}{λ}\) × \(\frac{3λ}{4}\)
= \(\frac{3π}{2}\) rad = (π + \(\frac{π}{2}\))
∴ cos (π + θ) = – cos θ
प्रभावी कलान्तर = \(\frac{π}{2}\)

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प्रश्न 15.11
दोनों सिरों पर परिबद्ध किसी तानित डोरी पर अनुप्रस्थ विस्थापन को इस प्रकार व्यक्त किया गया है –
y (x, t) = 0.06 sin (\(\frac{2π}{3}\) x) cos (120 πt)
जिसमें x तथा y को m तथाt को s में लिया गया है। इसमें डोरी की लम्बाई 1.5 m है जिसकी संहति 3.0 × 10-2 kg है। निम्नलिखित का उत्तर दीजिए:
(a) यह फलन प्रगामी तरंग अथवा अप्रगामी तरंग में से किसे निरूपित करता है?
(b) इसकी व्याख्या विपरीत दिशाओं में गमन करती दो तरंगों के अध्यारोपण के रूप में करते हुए प्रत्येक तरंग की तरंगदैर्ध्य, आवृत्ति तथा चाल ज्ञात कीजिए।
(c) डोरी में तनाव ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया हुआ फलन है –
y (x, t) = 0.06 sin (\(\frac{2πx}{3}\)) cos (120 πt) …………….. (i)
संचरित तरंग को निम्न रूप में व्यक्त कर सकते हैं –
y (x, t) = A sin \(\frac{2π}{λ}\) (vt – x) ………………. (ii)
तथा प्रगामी तरंग निम्न रूप में व्यक्त कर सकते हैं –
y (x, t) = -2A sin (\(\frac{2πx}{λ}\)) cos (\(\frac{2πvt}{λ}\)) …………….. (iii)

(a) चूँकि दिया गया फलन प्रगामी तरंग की भाँति है। अतः दिया गया फलन प्रगामी तरंग को व्यक्त करता है।
(b) हम जानते हैं कि यदि तरंग
y1 = A sin \(\frac{2π}{λ}\) (vt + x)
x – अक्ष की धनात्मक दिशा में संचरित होती है, तो यह तरंग निम्न परावर्तित तरंग द्वारा अध्यारोपित होती है।
y2 = -A sin \(\frac{2π}{λ}\) (vt + x)
अतः अध्यारोपण सिद्धांत से, y = y1 + y2
= – 2A sin (\(\frac{2π}{λ}\) x) cos (\(\frac{2π}{λ}\) vt) ……………………. (iii)
समीकरण (i) तथा (ii) की तुलना करने पर,
= \(\frac{2π}{λ}\) = \(\frac{2π}{3}\) 0r λ = 3 m
\(\frac{2π}{λ}\) v = 120π
या v = 60λ = 60 × 3 = 180 ms-1
∴ आवृत्ति v = \(\frac{v}{λ}\) = \(\frac{180}{3}\) = 60 Hz
अनुप्रस्थ तरंग का वेग
v = \(\sqrt{\frac{T}{m}}\) or v2 = \(\frac{T}{m}\)
∴ T = v2 × m ………………… (iv)
दिया है:
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(c) माना डोरी में तनाव T है।
∴ समीकरण (iv) व (v) से,
T = (180)2 × (2 × 10-2)
= 32400 × 2 × 10-2
= 648 N

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प्रश्न 15.12
(i) प्रश्न 15.11 में वर्णित डोरी पर तरंग के लिए बताइए कि क्या डोरी के सभी बिन्दु समान (a) आवृत्ति, (b) कला, (c) आयाम से कंपन करते हैं? अपने उत्तरों को स्पष्ट कीजिए।
(ii) एक सिरे से 0.375 m दूर के बिन्दु का आयाम कितना हैं।
उत्ता:
(a) डोरी के समस्त बिन्दु समान आवृत्ति से कंपन करते हैं।
(b) चूंकि λ = 3 मीटर व डोरी की लम्बाई, l = 1.5 मीटर = \(\frac{1}{2}\)
अर्थात् डोरी को दोनों सिरों पर निस्पंद व मध्य में एक प्रस्पंद बनेगा।
चूँकि अप्रगामी तरंगों में दो क्रमागत निस्पंदों के मध्य के सभी बिन्दु समान कला में कम्पन करते हैं। अतः डोरी के सभी बिन्दु समान कला में कम्पन करेंगे।

(c) दी गई समीकरण निम्न है –
y (x, t) = 0.06 sin (\(\frac{2π}{3}\) x)
इस समीकरण का आयाम,
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प्रश्न 15.13
नीचे किसी प्रत्यास्थ तरंग (अनुप्रस्थ अथवा अनुदैर्ध्य) के विस्थापन को निरूपित करने वाले x तथा t के फलन दिए गए हैं। यह बताइए कि इनमें से कौन (i) प्रगामी तरंग को, (ii) अप्रगामी तरंग को, (iii) इनमें से किसी भी तरंग को निरूपित नहीं करता है –

  1. y = 2 cos (3x) sin 10t
  2. y = 2\(\sqrt{x-vt}\)
  3. y = 3 sin (5x – 0.5t)+4 cos (5x – 0.5t)
  4. y = cos x sin t + cos 2x sin 2t

उत्तर:

  1. महत्व फलन अप्रगामी तरंग को व्यक्त करता है।
  2. किसी भी तरंग के लिए स्वीकार करने योग्य नहीं है।
  3. प्रगामी गुणावृत्ति तरंग को प्रदर्शित करता है।
  4. दो प्रगामी तरंगों के अध्यारोपण प्रदर्शित करता है।

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प्रश्न 15.14
दो दृढ़ टेकों के बीच तानित तार अपनी मूल विधा में 45 H2 आवृत्ति से कंपन करता है। इस तार का द्रव्यमान 3.5 × 10-2 kg तथा रैखिक द्रव्यमान घनत्व 4.0 × 10-2 kg m-1 है।
(a) तार पर अनुप्रस्थ तरंग की चाल क्या है, तथा
(b) तार में तनाव कितना है?
उत्तर:
दिया है:
m = 3.5 × 10-2 kg
रैखिक द्रव्यमान घनत्व µ = 4 × 10-2 kg m-1
सूत्र µ = \(\frac{m}{l}\) से,
तार की लम्बाई l = \(\frac{m}{µ}\)
= \(\frac{3.5 \times 10^{-2}}{4 \times 10^{-2}}\) = \(\frac{7}{8}\) मीटर
माना तार में उत्पन्न तरंग की तरंगदैर्ध्य λ है।
चूँकि तार मूल विधा में कम्पन कर रहा है। अतः \(\frac{λ}{2}\) = l
∴ λ = 2l = \(\frac{7}{4}\) मीटर
सूत्र v = vλ से,
तार में तरंग की चाल
v = 45 × \(\frac{7}{4}\) = 79 ms-1
माना कि तार का तनाव t है।
∴ v = \(\sqrt{\frac{T}{\mu}}\)
∴ T = v2µ = (79)2 × 10-2
= 248 न्यूटन

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प्रश्न 15.15
एक सिरे पर खुली तथा दूसरे सिरे पर चलायमान पिस्टन लगी 1 m लंबी नलिका, किसी नियत आवृत्ति के स्त्रोत (340 Hz आवृत्ति का स्वरित्र द्विभुज) के साथ, जब नलिका में वायु कॉलम 25.5 cm अथवा 79.3 cm होता है तब अनुनाद दर्शाती है। प्रयोगशाला के ताप पर वायु में ध्वनि की चाल का आंकलन कीजिए। कोर-प्रभाव को नगण्य मान सकते हैं।
उत्तर:
नलिका में पिस्टन लगाने से यह बंद आर्गन नलिका की भाँति व्यवहार करेगा। माना बंद नलिका में nवें तथा (n + 1) वें कम्पन के लिए अनुनादित वायु स्तम्भों की लम्बाइयाँ l1 व l2 हैं।
∴ l1 = 25.5 सेमी
l2 = 79.3 सेमी
माना ध्वनि तरंग का वेग v है। अतः इन कम्पनों के लिए आवृत्ति v1 व v2 निम्नवत् होगी –
v1 = (2n – 1) \(\frac{v}{4 l_{1}}\) ……………… (i)
तथा v2 = [2(n + 1) – 1] \(\frac{v}{4 l_{2}}\) ……………………. (ii)
दोनों विधाओं में 340 Hz की आवृत्ति से अनुनाद होगा।
∴ v1 = v2 = 340
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या 3(2n – 1) = 2n +1
या 6n – 3 = 2n + 1
या 6n – 2n = 3 + 1
4n = 4
∴ n = 1
समी० (2n – 1) \(\frac{v}{4 l_{2}}\) = 340 में n = 1 रखने पर
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या v = 340 × 4 × 25.5
या v = 340 × 102
= 34680 cms-1
= 346.8 ms-1
= 347 ms-1

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प्रश्न 15.16
100 cm लंबी स्टील-छड़ अपने मध्य बिन्दु पर परिबद्ध है। इसके अनुदैर्ध्य कंपनों की मूल आवृत्ति 2.53 kHz है। स्टील में ध्वनि की चाल क्या है?
उत्तर:
चूँकि छड़ मध्य बिन्दु पर परिबद्ध है अतः यहाँ एक निस्पंद (A) तथा मूल विधा के लिए सिरों पर दो प्रस्पंद बनेंगे। अतः छड़ की मूल लम्बाई निम्नवत् होगी –
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l = \(\frac{λ}{2}\) 0r λ = 2l
जहाँ l = छड़ की लम्बाई
तथा λ = तरंग की तरंगदैर्ध्य
दिया है
l = 13100 cm, v = 2.53 kHz = 2.53 × 103 Hz
∴ λ = 2 × 100 = 200 cm
माना स्टील में ध्वनि का वेग v है।
अत: v = vλ
= 2.53 × 103 × 200
= 506 × 103 cms-1
= 5.06 × 103 ms-1
∴ v = 5.06 kms-1

प्रश्न 15.17
20 cm लंबाई के पाइप का एक सिरा बंद है। 430 Hz आवृत्ति के स्त्रोत द्वारा इस पाइप की कौन-सी गुणावृत्ति विधा अनुनाद द्वारा उत्तेजित की जाती है? यदि इस पाइप के दोनों सिरे खुले हों, तो भी क्या यह स्त्रोत इस पाइप के साथ अनुनाद करेगा? वायु में ध्वनि की चाल 340 ms-1 है।
उत्तर:
दिया है:
l = 20 cm = 0.2 m, v = 340 ms-1
उत्तेजित स्त्रोत की आवृत्ति vn = 430 Hz
हम जानते हैं कि बंद नली के कम्पनों की आवृत्ति निम्न होती है –
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अत: आर्गन नली प्रथम सन्नादी या दोलन की मूल आवृत्ति में है।
खुली नली में, कम्पन की nवीं विधा की आवृत्ति –
V’n = n \(\frac{v}{2l}\)
जहाँ मूल विधा में लम्बाई l = \(\frac{λ}{2}\) or λ = 2l
या 430 = \(\frac{n×340}{2×0.2}\)
या n = \(\frac{430×0.4}{340}\) = \(\frac{172}{340}\) = 0.5
चूँकि n एक पूर्णांक है। अतः n = 0.5 सम्भव नहीं है। अतः समान स्त्रोत खुली नली में अनुनादित नहीं होगा।

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प्रश्न 15.18
सितार की दो डोरियाँ A तथा B एक साथ ‘गा’ स्वर बजा रही हैं तथा थोड़ी-सी बेसुरी होने के कारण 6 Hz आवृत्ति के विस्पंद उत्पन्न कर रही हैं। डोरी A का तनाव कुछ घटाने पर विस्पंद की आवृत्ति घटकर 3 Hz रह जाती है। यदि A की मूल आवृत्ति 324Hz है तो B की आवृत्ति क्या है?
उत्तर:
हम जानते हैं कि –
आवृत्ति ∝ Bihar Board Class 11 Physics Chapter 15 तरंगें
अतः डोरी में तनाव कम होने से इसकी आवृत्ति भी घटती है।
माना A की वास्तविक आवृत्ति VA व B की VB है।
∴ VA – VB = 6 Hz
परन्तु VA = 324 Hz
∴ VB = 324 – 6
= 318 Hz
A में तनाव कम करने पर,
∆v = 3 Hz
A की आवृत्ति = 324 – 3 = 321 Hz
∴ B की आवृत्ति = 318 Hz

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प्रश्न 15.19
स्पष्ट कीजिए क्यों (अथवा कैसे)?
(a) किसी ध्वनि तरंग में विस्थापन निस्पंद दाब प्रस्पंद होता है और विस्थापन प्रस्पंद दाब निस्पंद होता है।
(b) आँख न होने पर भी चमगादड़ अवरोधकों की दूरी, ‘दिशा, प्रकृति तथा आकार सुनिश्चित कर लेते हैं।
(c) वायलिन तथा सितार के स्वरों की आवृत्तियाँ समान होने पर भी हम दोनों से उत्पन्न स्वरों में भेद कर लेते हैं।
(d) ठोस अनुदैर्ध्य तथा अनुप्रस्थ दोनों प्रकार की तरंगों का पोषण कर सकते हैं जबकि गैसों में केवल अनुदैर्ध्य तरंगें ही संचरित हो सकती हैं, तथा
(e) परिक्षेपी माध्यम में संचरण के समय स्पंद की आकृति विकृत हो जाती है।
उत्तर:
(a) ध्वनि तरंगों में जहाँ माध्यम के कणों का विस्थापन न्यूनतम होता है वहाँ कण अत्यधिक पास-पास होते हैं। अतः वहाँ दाब अधिकतम होता है। (i.e., दाब प्रस्पंद बनता है) एवं जहाँ विस्थापन महत्तम होता है वहाँ कण दूर-दूर होते हैं, अतः वहाँ दाब न्यूनतम होता है (i.e., दाब निस्पंद बनता है।)

(b) चमगादड़ उच्च आवृत्ति की पराश्रव्य तरंगें उत्सर्जित करती है। ये तरंगें अवरोधकों से टकराकर वापस लौटती हैं तो चमगादड़ इन्हें अवशोषित कर लेते हैं। परावर्तित तरंगों की आवृत्ति व तीव्रता की प्रेषित तरंगों से तुलना करके चमगादड़ अवरोधकों की दूरी, प्रकृति, दिशा व आकार सुनिश्चित कर लेते हैं।

(c) प्रत्येक स्वर में एक मूल स्वरक के साथ कुछ अधिस्वरक भी उत्पन्न होते हैं। परन्तु वायलिन व सितार से उत्पन्न स्वरों में मूल स्वरकों की आवृत्तियाँ समान रहती हैं लेकिन उनके साथ उत्पन्न होने वाले अधिस्वरकों की संख्या, आवृत्तियों व अपेक्षिक तीव्रताओं में भिन्नता होती है। इसी भिन्नता के आधार पर इन्हें विभेद किया जाता है।

(d) ठोसों में आयतन प्रत्यास्थता के साथ-साथ अपरूपण प्रत्यास्थता भी पाई जाती है। अतः ठोसों में दोनों प्रकार की तरंगें संचरित होती हैं। जबकि गैसों में केवल आयतन प्रत्यास्थता ही पाई जाती है। अतः गैसों में केवल अनुदैर्ध्य तरंगें ही संचरित हो पाती हैं।

(e) प्रत्येक ध्वनि स्पंद कई विभिन्न तरंगदैर्ध्य की तरंगों का मिश्रण होता है। जब यह स्पंद परिक्षेपी माध्यम में प्रवेश करता है तब ये तरंगें अलग-अलग वेगों से गतिमान रहती हैं। अतः स्पंद की आकृति विकृत हो जाती है।

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प्रश्न 15.20
रेलवे स्टेशन के बाह्य सिग्नल पर खड़ी कोई रेलगाड़ी शांत वायु में 400 Hz आवृत्ति की सीटी बजाती है।
(i) प्लेटफॉर्म पर खड़े प्रेक्षक के लिए सीटी की आवृत्ति क्या होगी जबकि रेलगाड़ी –
(a) 10 ms-1 चाल से प्लेटफॉर्म की ओर गतिशील है, तथा
(b) 10 ms-1 चाल से प्लेटफॉर्म से दूर जा रही है?
(ii) दोनों ही प्रकरणों में ध्वनि की चाल क्या है? शांत वायु में ध्वनि की चाल 340 ms-1 लीजिए।
उत्तर:
दिया है:
v = 400 Hz, vt = 10 ms-1
शांत वायु में ध्वनि की चाल
v = 340 ms-1
(i) (a) जब रेलगाड़ी (ध्वनि स्त्रोत) स्थिर प्रेक्षक की ओर गतिमान है, तब प्रेक्षक द्वारा सुनी गई ध्वनि की आवृत्ति,
v’ = v \(\left(\frac{v}{v-v_{t}}\right)\)
= 400 (\(\frac{340}{340-10}\))
= 412 Hz

(b) जब रेलगाड़ी स्थिर प्रेक्षक से दूर जा रही है तब प्रेक्षक द्वारा सुनी गई ध्वनि की आवृत्ति,
v’ = v \(\left(\frac{v}{v+v_{t}}\right)\)
= 400 (\(\frac{340}{340+10}\)) = 389 Hz

(ii) दोनों स्थितियों में ध्वनि की चाल (340 ms-1) समान है।

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प्रश्न 15.21
स्टेशन यार्ड में खड़ी कोई रेलगाड़ी शांत वायु में 400 Hz आवृत्ति की सीटी बजा रही है। तभी 10 ms-1 की चाल से यार्ड से स्टेशन की ओर वायु बहने लगती है। स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर खड़े किसी प्रेक्षक के लिए ध्वनि की आवृत्ति, तरंगदैर्ध्य तथा चाल क्या है? क्या यह स्थिति तथ्यतः उस स्थिति के समरूप है जिसमें वायु शांत हो तथा प्रेक्षक 10 ms-1 चाल से यार्ड की ओर दौड़ रहा हो? शांत वायु में ध्वनि की चाल 340 ms-1 ले सकते हैं।
उत्तर:
दिया है:
v = 400 Hz
वायु की प्रेक्षक की ओर चाल vw = 10 ms-1
शांत वायु में ध्वनि की चाल vw = 340 ms-1
चूँकि रेलगाड़ी व प्रेक्षक दोनों स्थिर हैं। अतः V0 = 0 व v’s = 0
अतः प्रेक्षक द्वारा सुनी गई ध्वनि की आवृत्ति
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चूँकि वायु प्रेक्षक की ओर चलती है।
अतः प्रेक्षक के लिए वायु की चाल
= vs + vw = 350 ms-1
प्रेक्षक के लिए सीटी की आवृत्ति = 400 Hz
∴ ध्वनि की तरंगदैर्ध्य λ’ = \(\frac{v_{t}+v_{s}}{v^{\prime}}\)
= \(\frac{340+10}{400}\) = \(\frac{7}{8}\) Hz = 0.875 m

Bihar Board Class 11 Physics तरंगें Additional Important Questions and Answers

अतिरिक्त अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 15.22
किसी डोरी पर कोई प्रगामी गुणावृत्ति तरंग इस प्रकार व्यक्त की गई है –
y (x, t) = 7.5 sin (0.0050x + 12t + π/4)
(a) x =1cm तथा t=1s पर किसी बिन्दु का विस्थापन तथा दोलन की चाल ज्ञात कीजिए। क्या यह चाल तरंग संचरण की चाल के बराबर है?
(b) डोरी के उन बिन्दुओं की अवस्थिति ज्ञात कीजिए जिनका अनुप्रस्थ विस्थापन तथा चाल उतनी ही है जितनी x = 1cm पर स्थित बिन्दु की समय t = 15, 5s तथा 11s पर है।
उत्तर:
दिया है:
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(a) समीकरण (i) की तुलना संचरित तरंग के सामान्य समीकरण से करने पर
y = a sin [\(\frac{2π}{λ}\) (vt + x) + \(\frac{π}{4}\)] we get
v = velocity of wave,
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बिन्दु के दोलन का वेग
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x = 1 सेमी° पर  t = 1 सेकण्ड
v = 90 cos (0.05 × 1 + 1.12 × 1 + 0.789)
= 90 cos 732.83° = 90 cos 12.83°
= 90 × 0.9571 cms-1 = 87.76 cms-1
= 88 cms-1
परन्तु तरंग संचरण का वेग 24 मीटर/सेकण्ड है।
स्पष्ट है कि बिन्दु का दोलन वेग तरंग संचरण के वेग के समान नहीं है।
∴ नहीं, यह वेग तरंग संचरण के वेग (24 मीटर/से०) के समान नहीं है।

(b) दी हुई समीकरण है,
y (x, t) = 7.5 sin (0.005x + 12t + \(\frac{π}{4}\))
इस समीकरण की तुलना समीकरण,
y = A sin (ωt + kx + ϕ) से करने पर,
∴ k = 0.005 रेडियन 1 सेमी०
∴λ = \(\frac{2π}{k}\)
= \(\frac{2×3.14}{0.005}\) = 12.57 मीटर
तरंग में सभी बिन्दुओं का समान अनुप्रस्थ विस्थापन होता है। यह विस्थापन λ, 2λ, 3λ, ……… इत्यादि होता है। अतः 12.57 मीटर, 25.14 मीटर, 37.71 मीटर इत्यादि दूरी पर स्थित बिन्दु x = 1 सेमी से समान विस्थापन पर होंगे। अतः सभी बिन्दुओं जिनका विस्थापन nλ है। जहाँ n = ±1, +2, ±3, ±4, …………… है, x =1 सेमी से 12.57 मोटर, 25.14 मीटर ………….. दूरी हैं।

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प्रश्न 15.23
ध्वनि का कोई सीमित स्पंद (उदाहरणार्थ सीटी की पिप) माध्यम में भेजा जाता है।
(a) क्या इस स्पंद की कोई निश्चित –
(i) आवृत्ति
(ii) तरंगदैर्ध्य
(iii) संचरण की चाल है?
(b) यदि स्पन्द दर 1 स्पंद प्रति 20 सेकण्ड है अर्थात् सीटी प्रत्येक 20 s के पश्चात् सेकंड के कुछ अंश के लिए बजती है, तो सीटी द्वारा उत्पन्न स्वर की आवृत्ति (1/20) Hz अथवा 0.05 Hz है?
उत्तर:
(a) नहीं, इस स्पंद की कोई निश्चित आवृत्ति या तरंगदैर्ध्य नहीं होती है। स्पन्द के संचरण की चाल निश्चित होती है, जो माध्यम में ध्वनि की चाल के समान है।
(b) नहीं, स्पंद की आवृत्ति (\(\frac{1}{20}\)) Hz
या 0.05 Hz नहीं है।

प्रश्न 15.24
8.0 × 10-3 kg m-1 रैखिक द्रव्यमान घनत्व की किसी लंबी डोरी का एक सिरा 256 Hz आवृत्ति के विद्युत चालित स्वरित्र द्विभुज से जुड़ा है। डोरी का दूसरा सिरा किसी स्थिर घिरनी के ऊपर गुजरता हुआ किसी तुला के पलड़े से बँधा है जिस पर 90 kg के बाट लटके हैं। घिरनी वाला सिरा सारी आवक ऊर्जा को अवशोषित कर लेता है जिसके कारण इस सिरे से परावर्तित तरंगों का आयाम नगण्य होता है। t = 0 पर डोरी के बाएँ सिरे (द्विभुज वाले सिरे) x = 0 पर अनुप्रस्थ विस्थापन शून्य है (y = 0) तथा वह y की धनात्मक दिशा के अनुदिश गतिशील है। तरंग का आयाम 5.0 cm है। डोरी पर इस तरंग का वर्णन करने वाले अनुप्रस्थ विस्थापन y को x तथा t के फलन के रूप में लिखिए।
उत्तर:
हम जानते हैं कि तरंग वेग –
v = \(\sqrt{\frac{T}{m}}\) ………………… (i)
पलड़े में द्रव्यमान = M = 90 kg
दिया है: T = Mg = 90 × 9.8 = 882.0 N
रेखीय द्रव्यमान घनत्व m = 8 × 10-3 kg m-1
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धनात्मक x – दिशा में विस्थापन वाली संचारित तरंग का समीकरण
y = A sin (wt – kx) ……………………. (ii)
जहाँ ω = 2πv तथा
A = 5.0 cm = 0.05 m, v = 256 Hz.
∴ω = 2π × 256 s-1
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समी० (ii) में ω1A तथा k के मान रखने पर,
y = 0.05 sin (1.6 × 103t – 4.84)

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प्रश्न 15.25
किसी पनडुब्बी से आबद्ध कोई ‘सोनार’ निकाय 40.0 KHz आवृत्ति पर प्रचालन करता है। कोई शत्रु-पनडुब्बी 360 km h-1 चाल से इस सोनार की ओर गति करती है। पनडुब्बी से परावर्तित ध्वनि की आवृत्ति क्या है? जल में ध्वनि की चाल 1450 ms-1 लीजिए।
उत्तर:
दिया है:
जल में ध्वनि की चाल v = 1450 ms-1
शत्रु पनडुब्बी की चाल v1 = 1360 km h-1
= 360 × \(\frac{5}{18}\) = 100 ms-1
सोनार द्वारा प्रेषित तरंग की आवृत्ति
ω = 40 kHz
माना शत्रु पनडुब्बी द्वारा ग्रहण आवृत्ति v1 है।
स्पष्ट है : श्रोता का वेग v0 = v1 = 100 ms-1
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शत्रु पनडुब्बी इस आवृत्ति की तरंगों को परावर्तित करती है। माना सोनार द्वारा ग्रहण आवृत्ति n2 है।
इस स्थिति में, स्त्रोत सोनार की ओर vs = 100 ms-1 के वेग से गति करता है।
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प्रश्न 15.26
भूकम्प पृथ्वी के भीतर तरंगें उत्पन्न करते हैं। गैसों के विपरीत, पृथ्वी अनुप्रस्थ (S) तथा अनुदैर्ध्य (P) दोनों प्रकार की तरंगों की अनुभूति कर सकती है। S तरंगों की प्रतिरूपी चाल लगभग 4.0 kms-1 तथा P तरंगों की प्रतिरूपी चाल लगभग 8.0 kms-1 है। कोई भूकंप-लेखी किसी भूकंप की P तथा S तरंगों को रिकॉर्ड करता है। पहली P तरंग पहली S तरंग की तुलना में 4 मिनट पहले पहुँचती है। यह मानते हुए कि तरंगें सरल रेखा में गमन करती हैं यह ज्ञात कीजिए कि भूकंप घटित होने वाले स्थान की दूरी क्या है?
उत्तर:
दिया है:
S तरंगों की चाल
v1 = 4 kms-1
= 4 × 60
= 240 km/min
P तरंगों की चाल v2 = 8 kms-1
= 480 km/min
अत: S तरंगों का भूकंप लेखी तक पहुँचने में लगा समय
t1 = \(\frac{x}{u_{1}}\) = \(\frac{n}{240}\) व P तरंगों का भूकंप लेखी तक पहुँचने में लगा समय
t2 = \(\frac{x}{u_{2}}\) = \(\frac{x}{480}\) मिनट
अतः t1 = t2
प्रश्नानुसार P तरंगें, Q तरंगों से भूकंप लेखी तक 4 मिनट पहले पहुँचती हैं।
∴ t2 – t1 = 4 मिनट
2t2 – t2 = 4
∴ t2 = 4 मिनट
∴ दूरी x = 480 × t2
= 480 × 4
= 1920 km

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प्रश्न 15.27
कोई चमगादड़ किसी गुफा में फड़फड़ाते हुए पराश्रव्य ध्वनि उत्पन्न करते हुए उड़ रहा है। मान लीजिए चमगादड़ द्वारा उत्सर्जित पराश्रव्य ध्वनि की आवृत्ति 40 Hz है। किसी दीवार की ओर सीधा तीव्र झपट्टा मारते समय चमगादड़ की चाल ध्वनि की चाल की 0.03 गुनी है। चमगादड़ द्वारा सुनी गई दीवार से परावर्तित ध्वनि की आवृत्ति क्या है?
उत्तर:
दिया है:
उत्सर्जित तरंग की आवृत्ति v = 40 kHz
माना ध्वनि की चाल = v
चमगादड़ की चाल v1 = 0.03v
माना दीवार द्वारा ग्रहण की गई तरंग की आगामी आवृत्ति v1 है।
इस स्थिति में श्रोता की ओर गतिमान है तथा श्रोता स्थिर है।
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= 41.24 kHz
v1 = 41.24 KHz आवृत्ति की तरंगें दीवारसे टकराकर चमगादड़ की ओर वापस लौटती हैं।
माना चमगादड़ द्वारा ग्रहण की गई तरंगो की आवृत्ति v2 इस स्थिति में, श्रोता, स्थिर स्त्रोत की ओर गतिमान है।
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= 42.47kHz
इस प्रकार चमगादड़ द्वारा ग्रहण की गई परावर्तित ध्वनि की आवृत्ति 42.47 kHz है।

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 14 दोलन

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 14 दोलन Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 14 दोलन

Bihar Board Class 11 Physics दोलन Text Book Questions and Answers

अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 14.1
नीचे दिए गए उदाहरणों में कौन आवर्ती गति को निरूपित करता है?

  1. किसी तैराक द्वारा नदी के एक तट से दूसरे तट तक जाना और अपनी एक वापसी यात्रा पूरी करना।
  2. किसी स्वतंत्रतापूर्वक लटकाए गए दंड चुंबक को उसकी N – S दिशा से विस्थापित कर छोड़ देना।
  3. अपने द्रव्यमान केन्द्र के परितः घूर्णी गति करता कोई हाइड्रोजन अणु।
  4. किसी कमान से छोड़ा गया तीर।

उत्तर:

  1. यह आवश्यक नहीं है कि तैराक को प्रत्येक बार वापस लौटने में समान समय लगे। अर्थात् यह गति आवर्ती गति नहीं है।
  2. दण्ड चुंबक को N – S दिशा से विस्थापित कर छोड़ने पर उसकी गति आवर्ती गति होगी।
  3. यह गति आवर्ती है।
  4. तीर छूटने के बाद कभी भी पुनः प्रारम्भिक स्थिति में नहीं लौटता है। अत: यह गति आवर्ती नहीं है।

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प्रश्न 14.2
नीचे दिए गए उदाहरणों में कौन (लगभग) सरल आवर्त गति को तथा कौन आवर्ती परंतु सरल आवर्त गति नहीं निरूपित करते हैं?

  1. पृथ्वी की अपने अक्ष के परितः घूर्णन गति।
  2. किसी U नली में दोलायमान पारे के स्तंभ की गति।
  3. किसी चिकने वक्रीय कटोरे के भीतर एक बॉल बेयरिंग की गति जब उसे निम्नतम बिन्दु से कुछ ऊपर के बिन्दु से मुक्त रूप से छोड़ा जाए।
  4. किसी बहुपरमाणुक अणु की अपनी साम्यावस्था की स्थिति के परित: व्यापक कंपन।

उत्तर:

  1. आवर्त गति लेकिन सरल आवर्त गति नहीं है।
  2. सरल आवर्त गति।
  3. सरल आवर्त गति
  4. आवर्ती गति लेकिन सरल आवर्त गति नहीं है।

प्रश्न 14.3
चित्र में किसी कण की रैखिक गति के लिए चार x – t आरेख दिए गए हैं। इनमें से कौन-सा आरेख आवर्ती गति का निरूपण करता है? उस गति का आवर्तकाल क्या है? (आवर्ती गति वाली गति का)।
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उत्तर:
(a) ग्राफ से स्पष्ट है कि कण कभी भी अपनी गति की पुनरावृत्ति नहीं करता है; अत: यह गति आवर्ती गति नहीं है।

(b) ग्राफ से ज्ञात है कि कण प्रत्येक 2 s के बाद अपनी गति की पुनरावृत्ति करता है; अतः यह गति एक आवर्ती गति है जिसका आवर्तकाल 2 s है।

(c) यद्यपि कण प्रत्येक 3 s के बाद अपनी प्रारम्भिक स्थिति में लौट रहा है परन्तु दो क्रमागत प्रारम्भिक स्थितियों के बीच कण अपनी गति की पुनरावृत्ति नहीं करता; अतः यह गति आवर्त गति नहीं है।

(d) कण प्रत्येक 2 s के बाद अपनी गति को दोहराता है; अत: यह गति एक आवर्ती गति है जिसका आवर्तकाल 2 s है।

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प्रश्न 14.4
नीचे दिए गए समय के फलनों में कौन –

(a) सरल आवर्त गति
(b) आवर्ती परंतु सरल आवर्त गति नहीं, तथा
(c) अनावर्ती गति का निरूपण करते हैं। प्रत्येक आवर्ती गति का आवर्तकाल ज्ञात कीजिए : (ω कोई धनात्मक अचर है।)

(a) sin ωt – cos ωt
(b) sin3 ωt
(c) 3 cos (\(\frac{1}{4}\) – 2ωt)
(d) cos ωt + cos 3ωt + cos 5ωt
(e) exp(-ω2t2)
(f) 1 + ωt + ω2t2
उत्तर:
(a) x = sin ωt – cos ωt
= 2 [\(\frac{1}{\sqrt{2}}\) sin ωt – \(\frac{1}{\sqrt{2}}\) cos ωt]
= \(\sqrt{2}\) [sin ω + cos \(\frac{π}{4}\) – cos ωt sin \(\frac{π}{4}\)]
= \(\sqrt{2}\) (ωt – \(\frac{π}{4}\))
स्पष्ट है कि यह सरल आवर्त गति को व्यक्त करता है।
इसका आयाम = \(\sqrt{2}\)
कोणीय वेग = ω
∴ आवर्त काल, T = \(\frac{2π}{ω}\)

(b) दिया गया फलन आवर्ती गति को व्यक्त करता है लेकिन यह सरल आवर्त गति नहीं है।
आवर्त काल, T = \(\frac{2π}{ω}\)

(c) यह फलन स० आ० ग० को व्यक्त करता है।
आवर्त काल T = \(\frac{2π}{ω}\) = \(\frac{π}{ω}\)

(d) यह फलन आवर्ती गति को व्यक्त करता है जोकि सरल आवर्त गति नहीं है।
फलन cos T = \(\frac{2π}{2ω}\) = \(\frac{π}{ω}\)
फलन cos ωt का आवर्तकाल T1 = \(\frac{2π}{ω}\)
फलन cos 2ωt का आवर्तकाल T2 = \(\frac{2π}{3ω}\)
व फलन cos 5ωt का आवर्तकाल T3 = \(\frac{2π}{5ω}\) है।
यहाँ T1 = 3T1 = 5T3
अत: T1 समय पश्चात् पहले फलन की एक बार दूसरे की तीन बार व तीसरे की पाँच बार पुनरावृत्ति होती है।
∴ दिए गए फलन का आवर्तकाल T = \(\frac{2π}{ω}\) है।

(e) तथा (f) में दिये दोनों फलन न तो आवर्त गति और न ही सरल आवर्त गति को निरूपित करते हैं।

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प्रश्न 14.5
कोई कण एक दूसरे से 10 cm दूरी पर स्थित दो बिन्दुओं A तथा B के बीच रैखिक सरल आवर्त गति कर रहा है। A से B की ओर की दिशा को धनात्मक दिशा मानकर वेग, त्वरण तथा कण पर लगे बल के चिह्न ज्ञात कीजिए जबकि यह कण
(a) A सिरे पर है,
(b) B सिरे पर है,
(c) A की ओर जाते हुए AB के मध्य बिन्दु पर है,
(d) A की ओर जाते हुए B से 2 cm दूर है,
(e) B की ओर जाते हुए A से 3 cm दूर है तथा
(f) A की ओर जाते हुए B से 4 cm दूर है।
उत्तर:
प्रश्न से स्पष्ट है कि बिन्दु A व B अधिकतम विस्थापन की स्थितियाँ हैं जिनका मध्य बिन्दु O सरल आवर्त गति का केन्द्र है।

(a)

  • बिन्दु A पर कण का वेग शून्य होगा।
  • कण के त्वरण की दिशा बिन्दु A से O की ओर होगी। अतः त्वरण धनात्मक होगा।
  • कण पर बल त्वरण की दिशा में होगा। अतः बल धनात्मक होगा।

(b)

  • बिन्दु B पर कण का वेग शून्य होगा।
  • कण का त्वरण B से O की ओर दिष्ट होगा। अत: त्वरण ऋणात्मक होगा।

(c)

  • AB का मध्य बिन्दु O से सरल आवर्त गति का केन्द्र है। चूँकि कण B से A की ओर चलता हुआ 0 से गुजरता है। अतः वेग BA के अनुदिश है अर्थात् वेग ऋणात्मक है।
  • त्वरण शून्य है।
  • बल भी शून्य है।

(d)

  • B से 2 सेमी० की दूरी पर कण B व O के मध्य होगा।
  • चूँकि कण B से A की ओर जा रहा है अत: वेग ऋणात्मक होगा।
  • त्वरण भी B से O की ओर दिष्ट है अतः त्वरण भी ऋणात्मक होगा।
  • बल भी ऋणात्मक होगा।

(e)

  • चूँकि कण B की ओर जा रहा है अतः वेग धनात्मक होगा।
  • चूँकि कण A व O के मध्य है अतः त्वरण A से O की ओर दिष्ट है। अतः त्वरण भी धनात्मक है।

(f)

  • चूँकि कण A की ओर गतिमान है अतः वेग ऋणात्मक होगा।
  • बल भी धनात्मक है।
  • चूँकि कण B तथा O के बीच है व त्वरण B से O की ओर दिष्ट है। अत: त्वरण ऋणात्मक है।
  • बल भी ऋणात्मक है।

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प्रश्न 14.6
नीचे दिए गए किसी कण के त्वरण a तथा विस्थापन के बीच संबंधों में से किससे सरल आवर्त गति संबद्ध है:
(a) a = 0.7x
(b) a = -200 x2
(c) a = -10x
(d) a = 100x3
उत्तर:
उपरोक्त में से केवल विकल्प (c) में a = -10x, त्वरण विस्थापन के समानुपाती है। इसमें त्वरण विस्थापन के विपरीत दिशा में है। अत: केवल यह सम्बन्ध सरल आवर्त गति को व्यक्त करता है।

प्रश्न 14.7
सरल आवर्त गति करते किसी कण की गति का वर्णन नीचे दिए गए विस्थापन फलन द्वारा किया जाता है,
x(t) = A cos (ωt + ϕ) ……………. (i)

यदि कण की आरंभिक (t = 0) स्थिति 1 cm तथा उसका आरंभिक वेग πcm s-1 है, तो कण का आयाम तथा आरंभिक कला कोण क्या है? कण की कोणीय आवृत्ति πs-1 है। यदि सरल आवर्त गति का वर्णन करने के लिए कोज्या (cos) फलन के स्थान पर हम ज्या (sin) फलन चुने; x = B sin (ωt + α) तो उपरोक्त आरंभिक प्रतिबंधों में कण का आयाम तथा आरंभिक कला कोण क्या होगा?
उत्तर:
(a) x (t) = A cos (ωt + ϕ) ……………. (i)
t = 0, ω = π cms-1
∴ x = 1 cm पर
v = ω = π cms-1 ……………….. (ii)
∴ समी० (i) व (ii) से,
1 = A cos (π × 0 + ϕ) = A cos ϕ ……………….. (iii)
पुनः ω = \(\frac{2π}{T}\)
∴ T = \(\frac{2π}{ω}\) = 2s
समी० (i) का t के सापेक्ष अवकलन करने पर,
\(\frac{d}{dx}\) (x) = -A sin (ωt + ϕ) (ω)
= -Aω sin (ωt + ϕ)
या v = -Aω sin (ωt + ϕ) …………………. (iv)
समी० (ii) व (iv) से
π = -A × π × sin (ω × 0 + b)
= -A sin ϕ
या 1 = -A sin ϕ
समी० (ii) व (v) का वर्ग करके जोड़ने पर,
12 + 12 = A2 (sin2 ϕ + cos2 ϕ) = A2
∴ A = \(\sqrt{2}\) cm
समी० (v) को समी० (iii) से भाग देने पर,
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(b) जब x = B sin (ωt + α)
या x = B cos Cos [(ωt + α) – \(\frac{π}{2}\)]
अब (a) t = 0 पर x = 1 सेमी
तथा ∴ v = π cms-1, ω = π s-1 से,
∴ 1 = B cos (π × 0 + α – \(\frac{π}{2}\))
= B cos (α – \(\frac{π}{2}\)) ……………….. (vii)
पुनः माना v’ = वेग
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समी० (vii) व (viii) का वर्ग कर जोड़ने पर,
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प्रश्न 14.8
किसी कमानीदार तुला का पैमाना 0 से 50 kg तक अंकित है और पैमाने की लम्बाई 20 cm है। इस तुला से लटकाया गया कोई पिण्ड, जब विस्थापित करके मुक्त किया जाता है, 0.65 के आवर्तकाल से दोलन करता है। पिंड का भार कितना है?
उत्तर:
दिया है, m = 50 kg,
अधिकतम प्रसार y = 20 – 0 = 20 cm
= 0.2 m, T = 0.65
∴ अधिकतम बल
F = mg = 50 × 9.8 = 490.0 N
∴ स्प्रिंग नियतांक
k = \(\frac{F}{y}\) = \(\frac{490}{0.2}\)
= \(\frac{490×10}{2}\) = 2450 Nm-1
हम जानते हैं कि आवर्त काल
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वस्तु का भार w = mg = 22.36 × 9.8
= 219.1 N
= 22.36 kg

प्रश्न 14.9
1200 Nm-1 कमानी-स्थिरांक की कोई कमानी (चित्र) में दर्शाए अनुसार किसी क्षैतिज मेज से जुड़ी है। कमानी के मुक्त सिरे से 3 kg द्रव्यमान का कोई पिण्ड जुड़ा है। इस पिण्ड को एक ओर 2.0 cm दूरी तक खींच कर मुक्त किया जाता है।
(i) पिण्ड के दोलन की आवृत्ति
(ii) पिण्ड का अधिकतम त्वरण, तथा
(iii) पिण्ड की अधिकतम चाल ज्ञात कीजिए।
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उत्तर:
दिया है:
k = 1200 Nm-1, m = 3.0 kg,
A = 2.0 cm = 0.02 m
= अधिकतम विस्थापन

(i) हम जानते हैं कि आवर्तकाल
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(ii) त्वरण, α = -ω2 x = \(\frac{-k}{m}\) x
या c|amax| = \(\frac{k}{m}\) |xmax|, जहाँ ω = \(\sqrt{\frac{k}{m}}\)
या x के अधिकतम होने पर त्वरण भी अधिकतम होगा।
या x = A = 0.02 m
∴ a = \(\frac{1200}{m}\) × 0.02 × 8.0 ms-2

(iii) द्रव्यमान की अधिकतम चाल
ν = Aω = A \(\sqrt{\frac{k}{m}}\) = 0.02 × \(\sqrt{\frac{1200}{3}}\)
= 0.02 × 20
= 0.40 ms-1

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प्रश्न 14.10
प्रश्न 14.9 में मान लीजिए जब कमानी अतानित अवस्था में है तब पिण्ड की स्थिति x = 0 है तथा बाएँ से दाएँ की दिशा :-अक्ष की धनात्मक दिशा है। दोलन करते पिण्ड के विस्थापन x को समय के फलन के रूप में दर्शाइए, जबकि विराम घड़ी को आरम्भ (t = 0) करते समय पिण्ड,
(a) अपनी माध्य स्थिति,
(b) अधिकतम तानित स्थिति, तथा
(c) अधिकतम संपीडन की स्थिति पर है।
सरल आवर्त गति के लिए ये फलन एक दूसरे से आवृत्ति में,आयाम में अथवा आरंभिक कला में किस रूप में भिन्न है?
उत्तर:
चूँकि द्रव्यमान x = 0 पर स्थित है। अतः x – दिशा में विस्थापन निम्नवत् होगा
x = A sin ωt …………….. (i)
[∴ x = 0 पर प्रारम्भिक कला ϕ = 0] प्रश्न 14.9 से A = 2 cm = 0.02 m
k = 1200 Nm-2 ω = \(\sqrt{\frac{k}{m}}\)
= \(\sqrt{\frac{1200}{3}}\) = 20 s-1

(a) जब वस्तु माध्य स्थिति में है, समी० (i) से,
x = 2 sin 20 t ……………… (ii)

(b) अधिकतम तानित स्थिति में ϕ = \(\frac{π}{2}\)
∴ x = A sin (ωt + ϕ )
= 2 sin (20t + \(\frac{π}{2}\)) = 2 cos 20t ………………… (iii)

(c) अधिकतम सम्पीडन की स्थिति में,
ϕ = \(\frac{π}{2}\) + \(\frac{π}{2}\) = \(\frac{2π}{2}\)
∴ x = A cos ωt = – 2cos (20t) ………………… (iv)
समी० (ii), (iii) तथा (iv) से स्पष्ट है कि फलन केवल प्रारम्भिक कला. में ही असमान है चूँकि इनके आयाम (A = 2 cm) तथा आवर्तकाल समान है –
i.e.,T = \(\frac{2π}{ω}\) = \(\frac{2π}{20}\) = \(\frac{π}{10}\) rad s-1

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प्रश्न 14.11
चित्र में दिए गए दो आरेख दो वर्तुल गतियों के तद्नुरूपी हैं। प्रत्येक आरेख पर वृत्त की त्रिज्या, परिक्रमण काल, आरंभिक स्थिति और परिक्रमण की दिशा दर्शायी गई है। प्रत्येक प्रकरण में, परिक्रमण करते कण के त्रिज्य-सदिश के x अक्ष पर प्रक्षेप की तद्नुरूपी सरल आवर्त गति ज्ञात कीजिए।
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उत्तर:
(a) यहाँ t = 0 पर, OP, x अक्ष से एका कोण बनाती है। चूंकि गति वर्तुल है अतः ϕ = \(\frac{+π}{2}\) रेडियन। अतः t समय पर OP का मन्घटक सरल आवर्त गति करता है।
t = 0 पर OP, x – अक्ष से धन दिशा में π कोण बनाता है।
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x = -3 sin πt (cm)
T = 4 S, A = 2 m
t = 0 पर Op x – अक्ष से धन दिशा में कोण बनाता है।
i.e., ϕ = + L
अतः t समय में OP के x घटक की सरल आवर्त गति की समीकरण निम्न होगी –
चूँकि
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प्रश्न 14.12
नीचे दी गई प्रत्येक सरल आवर्त गति के लिए तद्नुरूपी निर्देश वृत्त का आरेख खींचिए। घूर्णी कण की आरंभिक (t = 0) स्थिति, वृत्त की त्रिज्या तथा कोणीय चाल दर्शाइए। सुगमता के लिए प्रत्येक प्रकरण में परिक्रमण की दिशा वामावर्त लीजिए। (x को cm में तथा t को s में लीजिए।)
(a) x = – 2 sin (3t ÷ π/3)
(b) x = cos (π/6 – t)
(c) x = 3 sin (2πt + π/4)
(d) x = 2 cos πt
उत्तर:
(a) x = – z sin (3t + π/3)
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∴ संगत निर्देश वृत्त चित्र (a) में दिखाया गया है।
समी० (i) की तुलना x = A cos (ωt + ϕ) से करने पर,
T = \(\frac{2π}{3}\), ϕ = \(\frac{5π}{6}\), A = 2 cm

(b) x = cos (\(\frac{π}{6}\) – t)
= cos (t – \(\frac{π}{6}\))
= 1 cos (\(\frac{2π}{2π}\)t – \(\frac{π}{6}\)) ………………. (ii)
∴ संगत निर्देश चित्र (b) में दिखाया गया है।
समी० (ii) की तुलना x = A cos (\(\frac{2π}{T}\)t + ϕ) से करने पर
A = 1 cm, t = 2π, ϕ = –\(\frac{π}{-6}\)
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(c)
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संगत निर्देश वृत्त चित्र (d) में दिखाया गया है।
समी० (iii) की (v) से तुलना करने पर,
A = 2 cm, T = 1s,
ϕ = – \(\frac{π}{4}\)

(d) x = 2 cos πt
= 2 cos (\(\frac{π}{1}\) t + 0) …………………. (v)
संगत निर्देश वृत्त चित्र (d) में दिखाया गया है।
समी० (iii) की (v) से तुलना करने पर,
A = 2cm, T = 15, ϕ = 0
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प्रश्न 14.13
चित्र (a) में k बल-स्थिरांक की किसी | कमानी के एक सिरे को किसी दृढ़ आधार से जकड़ा तथा दूसरे मुक्त सिरे से एक द्रव्यमान m जुड़ा दर्शाया गया है। कमानी के मुक्त सिरे पर बल F आरोपित करने से कमानी तन जाती है। चित्र (b) में उसी कमानी के दोनों मुक्त सिरों से द्रव्यमान m जुड़ा दर्शाया गया है। कमानी के दोनों सिरों को चित्र में समान बल F द्वारा तानित किया गया है।
(a) दोनों प्रकरणों में कमानी का अधिकतम विस्तार क्या
(b) यदि (a) का द्रव्यमान तथा (b) के दोनों द्रव्यमानों को मुक्त छोड़ दिया जाए, तो प्रत्येक प्रकरण में दोलन का आवर्तकाल ज्ञात कीजिए।
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उत्तर:
माना कि स्प्रिंग का बल नियतांक = k
मुक्त सिरे से लटकाया गया द्रव्यमान = M

(1) मुक्त सिरे पर लगाया गया बल = F

(a) माना बल F लगाने पर मुक्त सिरे पर द्रव्यमान m लटकाने से उत्पन्न त्वरण a है।
अतः F = ma ……………… (i)
माना कि चित्र (a) में उत्पन्न विस्तार y1 है।
∴ F = -ky1 ……………… (ii)
समी० (i) व (ii) से,
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जहाँ y विस्थापन y1 के समान है।
पुनः हम जानते हैं कि
a = -ω2y ………………. (iv)
∴ समी० (iii) व (iv) से,
ω2 = \(\frac{k}{M}\) य ω = \(\sqrt{k/m}\) ………………. (v)
∴ स्प्रिंग में उत्पन्न अधिकतम प्रसार y1 = y
या y1 = \(\frac{F}{k}\)

(b) समी० (v) से, a ∝ y तथा द्रव्यमान स० आ० ग० करता
∴ माना m द्रव्यमान के दोलन का आवर्तकाल T1 है।
अत: T1 = \(\frac{2π}{ω}\)
= 2π \(\sqrt{m/k}\) (समी० (v) से)
या T1 = 2π \(\sqrt{m/k}\) ………………… (vi)

(2) (a) माना दोनों द्रव्यमानों को छोड़ने पर, स्प्रिंग में कुल उत्पन्न प्रसार y2 है। चूँकि दो द्रव्यमान समान हैं अतः प्रत्येक द्रव्यमान के कारण स्प्रिंग में उत्पन्न प्रसार y है। अतः
y2 = y’ + y’ = 2y’
पुनः 1 (a) से,
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i.e., प्रत्येक द्रव्यमान का विस्थापन
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∴ प्रत्येक द्रव्यमान में उत्पन्न त्वरण
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(b) माना प्रत्येक द्रव्यमान का आवर्तकाल T2 है।
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प्रश्न 14.14
किसी रेलगाड़ी के इंजन के सिलिंडर हैड में पिस्टन का स्ट्रोक (आयाम का दो गुना) 1.0 m का है। यदि पिस्टन 200 rad/min की कोणीय आवृत्ति से सरल आवर्त गति करता है तो उसकी अधिकतम चाल कितनी है?
उत्तर:
दिया है:
ω = 200 रेडियन/मिनट = \(\frac{200}{60}\) = \(\frac{10}{3}\) रेडियन प्रति सेकण्ड
स्ट्रोक की लम्बाई = 1 मीटर
माना सरल आवर्त गति का आयाम = a
∴2a = 1 मीटर
या a = \(\frac{1}{2}\) = 0.5 मीटर
सूत्र चाल = aω से,
पिस्टन की अधिकतम चाल,
νmax = aω = 0.5 × \(\frac{10}{3}\)
= \(\frac{5}{3}\) = 1.67 मीटर/सेकण्ड

प्रश्न 14.15
चंद्रमा के पृष्ठ पर गुरुत्वीय त्वरण 17 ms-2 है। यदि किसी सरल लोलक का पृथ्वी के पृष्ठ पर आवर्तकाल 3.5 s है, तो उसका चंद्रमा के पृष्ठ पर आवर्तकाल कितना होगा? (पृथ्वी के पृष्ठ पर g = 9.8 ms-2)
उत्तर:
दिया है:
पृथ्वी के पृष्ठ पर आवर्तकाल T = 3.5 s
चंद्रमा के पृष्ठ पर आवर्तकाल = Tm = ?
पृथ्वी के पृष्ठ पर गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण
ge = 9.8 ms-2
सरल लोलक की लम्बाई l = ?
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प्रश्न 14.16
नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
(a) किसी कण की सरल आवर्त गति के आवर्तकाल का मान उस कण के द्रव्यमान तथा बल-स्थिरांक पर निर्भर करता
T = 2π \(\sqrt{m/k}\)
कोई सरल लोलक सन्निकट सरल आवर्त गति करता है। तब फिर किसी लोलक का आवर्तकाल लोलक के द्रव्यमान पर निर्भर क्यों नहीं करता?

(b) किसी सरल लोलक की गति छोटे कोण के सभी दोलनों के लिए सन्निकट सरल आवर्त गति होती है। बड़े कोणों के दोलनों के लिए एक अधिक गूढ़ विश्लेषण यह दर्शाता है कि T का मान 2π \(\sqrt{l/g}\) से अधिक होता है। इस परिणाम को समझने के लिए किसी गुणात्मक कारण का चिंतन कीजिए।

(c) कोई व्यक्ति कलाई घड़ी बाँधे किसी मीनार की चोटी से गिरता है। क्या मुक्त रूप से गिरते समय उसकी घड़ी यथार्थ समय बताती है?

(d) गुरुत्व बल के अंतर्गत मुक्त सिरे से गिरते किसी केबिन में लगे सरल लोलक के दोलन की आवृत्ति क्या होती है?
उत्तर:
(a) चूँकि सरल लोलक के लिए k स्वयं m के अनुक्रमानुपाती होता है अत: m निरस्त हो जाता है।

(b) sin θ < θ पर, यदि प्रत्यानयन बल mg sin θ का प्रतिस्थापन mg θ से कर दें तब इसका तात्पर्य यह होगा कि बड़े कोणों के लिए g के परिमाण में प्रभावी कमी व इस प्रकार सूत्र T = 2π \(\sqrt{l/g}\) से प्राप्त आवर्तकाल के परिमाण में वृद्धि होगी।

(c) हाँ, क्योंकि कलाई घड़ी में आवर्तकाल कमानी क्रिया पर निर्भर करता है, जिसका गुरुत्वीय त्वरण से कोई सम्बन्ध नहीं होता

(d) स्वतन्त्रतापूर्वक गिरते हुए मनुष्य के लिए गुरुत्वीय त्वरण का प्रभावी मान शून्य हो जाता है। अतः आवृत्ति शून्य होती है।

प्रश्न 14.17
किसी कार की छत से लम्बाई का कोई सरल लोलक, जिसके लोलक का द्रव्यमान M है, लटकाया गया है। कार R त्रिज्या की वृत्तीय पथ पर एकसमान चाल से गतिमान है। यदि लोलकत्रिज्य दिशा में अपनी साम्यावस्था की स्थिति के इधर-उधर छोटे दोलन करता है, तो इसका आवर्तकाल क्या होगा?
उत्तर:
कार जब मोड़ पर मुड़ती है तो उसकी गति में त्वरण अभिकेन्द्र त्वरण \(\frac { v^{ 2 } }{ R } \) होता है। अत: कार एक अजड़त्वीय निर्देश तन्त्र है।
अतः गोलक पर एक छद्म बल \(\frac { mv^{ 2 } }{ R } \) वृत्तीय पथ के बाहर की ओर लगेगा जिस कारण लोलक ऊर्ध्वाधर रहने के स्थान पर थोड़ा तिरछा हो जाएगा।
इस क्षण लोलक पर दो बल क्रमश: उपकेन्द्र बल \(\frac { v^{ 2 } }{ R } \) व भार mg’ लगेंगे। यदि लोलक के लिए गुरुत्वीय त्वरण g का प्रभावी मान g’ हो, तो गोलक पर प्रभावी बल mg’ होगा जो कि उक्त दो बलों का परिणामी है।
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अत: लोलक का नया आवर्तकाल, सूत्र T = 2π \(\sqrt{l/g}\)
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प्रश्न 14.18
आधार क्षेत्रफल A तथा ऊँचाई h के एक कॉर्क का बेलनाकार दुकड़ा ρi घनत्व के किसी द्रव में तैर रहा है। कॉर्क को थोड़ा नीचे दबाकर स्वतंत्र छोड़ देते हैं, यह दर्शाइए कि कॉर्क ऊपर-नीचे सरल आवर्त दोलन करता है जिसका आवर्तकाल T = 2π \(\sqrt { \frac { h\rho }{ \rho _{ i }g } } \) है। यहाँ ρ कॉर्क का घनत्व है (द्रव की श्यानता के कारण अवमंदन को नगण्य मानिए)।
उत्तर:
माना कॉर्क के टुकड़े का द्रव्यमान m है। माना साम्यावस्था में इस टुकड़े की l लम्बाई द्रव में डूबती है।
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तैरने के सिद्धान्त से, कॉर्क के डूबे भाग द्वारा हटाए गए द्रव का भार कॉर्क के भार के समान होगा। अतः
1g = mg
जहाँ V = डूबे भाग द्वारा विस्थापित द्रव का आयतन माना कि कॉर्क का अनुप्रस्थ क्षेत्रफल A है।
∴ V = A × l
या Al.ρig = g
या Aρil = m ………………. (i)
कॉर्क को द्रव में नीचे की ओर दबाकर छोड़ने पर यह ऊपर नीचे दोलन करने लगता है। माना किसी क्षण इसका साम्यावस्था से नीचे की ओर विस्थापन y है। इस क्षण, इसकी लम्बाई (y) द्वारा विस्थापित द्रव का उत्क्षेप बेलनाकार बर्तन को प्रत्यानयन बल प्रदान करेगा।
∴ F = -Ayρ1g
यहाँ ऋण चिह्न प्रदर्शित करता है कि प्रत्यानयन बल F1 कॉर्क के टुकड़े के विस्थापन के विपरीत दिशा में लगता है। अतः टुकड़े का त्वरण,
a = \(\frac{F}{m}\) = \(\frac{-A y \rho_{1} g}{m}\) ………………. (ii)
चूँकि कॉर्क के टुकड़े का घनत्व ρ व ऊँचाई h है।
∴ m = Ahp
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अतः कॉर्क के टुकड़े का त्वरण α, विस्थापन के अनुक्रमानुपाती परन्तु दिशा विस्थापन के विपरीत है। अतः यह स० आ० ग० करता है।
समी० (ii) से,
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प्रश्न 14.19
पारे से भरी किसी U नली का एक सिरा किसी चूषण पम्प से जुड़ा है तथा दूसरा सिरा वायुमण्डल में खुला छोड़ दिया गया है। दोनों स्तम्भों में कुछ दाबान्तर बनाए रखा जाता है। यह दर्शाइए कि जब चूषण पम्प को हटा देते हैं, तब U नली में पारे का स्तम्भ सरल आवर्त गति करता है।
उत्तर:
स्पष्ट है कि चूषण पम्प की अनुपस्थिति में दोनों नलियों में पारे के तल समान होंगे। यह साम्यावस्था की स्थिति है। चूषण पम्प लगाने पर पम्प वाली नली में पारे का तल ऊपर उठ जाता है और पम्प हटाते ही पारा साम्यावस्था को प्राप्त करने का प्रयास करता है।
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माना पम्प हटाने के बाद किसी क्षण दूसरी नली में पारे का तल साम्यावस्था से दूरी नीचे है तो दूसरी ओर यह y दूरी ऊपर होगा। यदि नली में एकांक लम्बाई में भरे पारे का द्रव्यमान m है तो पम्प वाली नली में चढ़े अतिरिक्त पारद स्तम्भ का भार 2y × mg होगा।

यह भार ही द्रव को दूसरी ओर धकेलता है, अतः प्रत्यानयन बल F = -2mgy होगा। ऋण चिहन यह प्रदर्शित करता है कि यह बल विस्थापन के विपरीत दिष्ट है। माना साम्यावस्था में दोनों नलियों में पारद स्तम्भ की ऊँचाई h है, तब नलियों में भरे पारे का कुल द्रव्यमान M = 2hm होगा।
यदि पारद स्तम्भ का त्वरण a है तो
F = ma
⇒ – 2mgy = 2hma
⇒ त्वरण a = – (\(\frac{g}{h}\)) y
अतः a ∝ (-y)
इससे स्पष्ट है कि पारद स्तम्भ की गति सरल आवर्त गति है।
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Bihar Board Class 11 Physics दोलन Additional Important Questions and Answers

अतिरिक्त अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 14.20
चित्र में दर्शाए अनुसार V आयतन के किसी वायु कक्ष की ग्रीवा (गर्दन) की अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल a है। इस ग्रीवा में m द्रव्यमान की कोई गोली बिना किसी घर्षण के ऊपर-नीचे गति कर सकती है। यह दर्शाइए कि जब गोली को थोड़ा नीचे दबाकर मुक्त छोड़ देते हैं, तो वह सरल आवर्त गति करती है। दाब-आयतन विचरण को समतापी मानकर दोलनों के आवर्तकाल का व्यंजक ज्ञात कीजिए [चित्र देखिए।
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उत्तर:
गोली को नीचे की ओर दबाकर छोड़ने पर यह अपनी साम्यावस्था के ऊपर नीचे सरल रेखीय दोलन करने लगती है। माना कि किसी क्षण गोली का साम्य अवस्था से नीचे की ओर विस्थापन x है। माना इस स्थिति में कक्ष में भरी वायु का आयतन। के स्थान पर V – ∆V हो जाता है व दाब P ये (P + ∆P) हो जाता है।
∴ बॉयल के नियम से,
PV = (P + ∆P) (V – ∆V)
या ∆P.V = P.∆V (∆P ∆V को छोड़ने पर)
∴ P = \(\frac{∆P}{∆V/V}\)
लेकिन P = ET = वायु की समतापी प्रत्यास्थता है।
∴ ET = \(\frac{∆P}{∆V/V}\)
जहाँ F वायु द्वारा गोली पर लगने वाला अतिरिक्त बल है व a ग्रीवा का अनुप्रस्थ क्षेत्रफल है। चूँकि ग्रीवा के गोली का नीचे की ओर विस्थापन = x
वायु के आयतन में कमी, ∆V = ax
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परन्तु गोली पर वायु द्वारा लगने वाला बल बाहर की ओर लगता है। अत: यह बल गोली के विस्थापन x के विपरीत दिशा में है अर्थात् यह एक प्रत्यानयन बल है।
∴ सूत्र F = ma से,
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∴ त्वरण ∝ (-x)
अर्थात् त्वरण विस्थापन के विपरीत दिशा में हैं। अतः गोली स० आ० ग० करती है।
समी० (ii) से,
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प्रश्न 14.21
आप किसी 3000 kg द्रव्यमान के स्वचालित वाहन पर सवार हैं। यह मानिए कि आप इस वाहन की निलंबन प्रणाली के दोलनी अभिलक्षणों का परीक्षण कर रहे हैं। जब समस्त वाहन इस पर रखा जाता है, तब निलंबन 15 cm आनमित होता है। साथ ही, एक पूर्ण दोलन की अवधि में दोलन के आयाम में 50% घटोतरी हो जाती है। निम्नलिखित के मानों का आंकलन कीजिए:
(a) कमानी स्थिरांक, तथा
(b) कमानी तथा एक पहिए के प्रघात अवशोषक तंत्र के लिए अवमंदन स्थिरांक b यह मानिए कि प्रत्येक पहिया 750 kg द्रव्यमान वहन करता है।
उत्तर:
(a) दिया है:
M = 3000 kg
प्रत्येक पहिए पर लटकाया गया द्रव्यमान = m = 750 kg
y = 15 cm = 0.15 m, a = g
स्प्रिंग नियतांक k = ?
हम जानते हैं कि,
\(\frac{m}{k}\) = \(\frac{y}{a}\) = \(\frac{y}{g}\)
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(b)
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पुनः माना कि प्रारम्भिक मान के आधे मान तक छोड़ने पर आयाम की आवर्त काल T1/2 है।
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प्रश्न 14.22
यह दर्शाइए कि रैखिक सरल आवर्त गति करते किसी कण के लिए दोलन की किसी अवधि की औसत गतिज ऊर्जा उसी अवधि की औसत स्थितिज ऊर्जा के समान होती है।
उत्तर:
माना कि m द्रव्यमान का कण सरल आवर्त गति करता है जिसका आवर्त काल T है। किसी क्षण t पर जबकि समय माध्य स्थिति से मापा गया है, कण का विस्थापन निम्नवत् है –
y = a sin wt
V = कण का वेग
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∴ (Ek)av = प्रति चक्र औसत KE
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पुनः प्रति चक्र औसत स्थितिज ऊर्जा निम्नवत् है –
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अतः समी० (ii) व (iii) से स्पष्ट है कि दोलन काल के दौरान औसत गतिज ऊर्जा समान; दोलनकाल में औसत स्थितिज ऊर्जा के समान होती है।

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प्रश्न 14.23
10 kg द्रव्यमान की कोई वृत्तीय चक्रिका अपने केन्द्र से जुड़े किसी तार से लटकी है। चक्रिका को घूर्णन देकर तार में ऐंठन उत्पन्न करके मुक्त कर दिया जाता है। मरोड़ी दोलन का आवर्तकाल 1.5 s है। चक्रिका की त्रिज्या 15 cm है। तार का मरोड़ी कमानी नियतांक ज्ञात कीजिए। [मरोड़ी कमानी नियतांक α संबंध J = -αθ द्वारा परिभाषित किया जाता है, जहाँ J प्रत्यानयन बल युग्म है तथा θ ऐंठन कोण है।]
उत्तर:
सम्पूर्ण निकाय मरोड़ी दोलन की भाँति कार्य करता है जिसका साम्य मरोड़ी आघूर्ण निम्नवत् है –
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जहाँ t = तार की त्रिज्या
η = लटकाए गए तार की दृढ़ता गुणांक, θ = तार में ऐंठन कोण प्रति ऐंठन मरोड़ी आघूर्ण
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समी० (i) की तुलना दी हुई समी० J = -αθ से करने पर,
J = τ
तथा
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समीकरण (iv) मरोड़ी कमानी नियतांक को व्यक्त करता है।
वृत्तीय चक्रिका के लिए I = \(\frac{1}{2}\) mr2
पुनः αI = cθ तथा α = \(\frac{C}{1}\) θ
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दिया है:
r = 15 cm = 0.15 cm,
T = 1.5 s, m = 10 kg
इन मानों को समी० (v) में रखने पर,
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प्रश्न 14.24
कोई वस्तु 5 cm के आयाम तथा 0.2 सेकण्ड की आवृत्ति से सरल आवृत्ति गति करती है। वस्तु का त्वरण तथा वेग ज्ञात कीजिए जब वस्तु का विस्थापन (a) 5 cm (b) 3 cm (c) 0 cm हो।
उत्तर:
दिया है:
आयाम, r = 5 cm = 0.05 m
T = 0.2 s
ω = \(\frac{2π}{T}\) = \(\frac{2π}{0.2}\) = 10π rad s-1
मानो कि वस्तु का विस्थापन y है। अत:
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प्रश्न 14.25
किसी कमानी से लटका एक पिण्ड एक क्षैतिज तल में कोणीय वेग ω से घर्षण या अवमंद रहित दोलन कर सकता है। इसे जब x0 दूरी तक खींचते हैं और खींचकर छोड़ देते हैं तो यह संतुलन केन्द्र से समय t = 0 पर, v0 वेग से गुजरता है। प्राचल ω, x0 तथा v0 के पदों में परिणामी दोलन का आयाम ज्ञात करिये। [संकेत : समीकरण x = a cos (ωt + θ) से प्रारंभ कीजिए। ध्यान रहे कि प्रारंभिक वेग ऋणात्मक है।]
उत्तर:
माना किसी क्षण t कण का विस्थापन निम्न है –
x = a cos (ωt + ϕ0) ……………… (i)
जहाँ a = आयाम
ϕ0 = प्रा० कला
माना किसी क्षण t पर वेग v है।
तब,
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t = 0 रखने पर, समी० (i) व (ii) से,
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समी० (iii) यह व्यक्त करता है कि प्रा० वेग ऋणात्मक है। (iii) में दोनों ओर का वर्ग करने पर,
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Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

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Bihar Board Class 11 Physics अणुगति सिद्धांत Text Book Questions and Answers

अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 13.1
ऑक्सीजन के अणुओं के आयतन और STP पर इनके द्वारा घेरे गए कुल आयतन का अनुपात ज्ञात कीजिए। ऑक्सीजन के एक अणु का व्यास 3 A लीजिए।
उत्तर:
दिया है:
d = 3Å
∴r = \(\frac{1}{2}\) × 3 = 1.5 Å
= 1.5 × 10-10 मीटर
STP पर 1 मोल गैस का आयतन
V1 = 22.4 l = 22.4 × 10-3 मीटर3
तथा 1 मोल गैस में अणुओं की संख्या
= N = 6.02 × 1023
∴ अणुओं का आयतन, V2 = एक अणु का आयतन × N
= \(\frac{4}{3}\) π3 × N
= \(\frac{4}{3}\) × 3.14 × (1.5 × 10-10)3 × 6.02 × 1023
= 8.52 × 10-6 मीटर2
∴\(\frac{V_{2}}{V_{1}}\) = \(\frac{8.52 \times 10^{-6}}{22.4 \times 10^{-3}}\) = 3.8 × 10-4
अतः अणुओं के आयतन तथा STP पर इनके द्वारा घेरे गए आयतन का अनुपात 3.8 × 10-4 है।

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प्रश्न 13.2
मोलर आयतन STP पर किसी गैस (आदर्श) के 1 मोल द्वारा घेरा गया आयतन है। (STP : 1 atm) दाब, 0°C दर्शाइये कि यह 22.4 लीटर है।
उत्तर:
दिया है:
STP पर,
P = 1 atm = 7.6 m of Hg column
= 0.76 × 13.6 × 103 × 9.9
= 1.013 × 105 Nm-2
T = 0°C = 273 K
R = 8.31 J mol-1K-1
n = 1 मोल V = 22.41 सिद्ध करने के लिए, सूत्र PV = nRT से,
V = \(\frac{nRT}{P}\)
= \(\frac{1 \times 8.31 \times 273}{1.013 \times 10^{5}}\)
= 22.4 × 10-3 m-3
= 22.4 लीटर
इति सिद्धम्।

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प्रश्न 13.3
चित्र में ऑक्सीजन के 1.00 × 10-3 kg द्रव्यमान के लिए PV/T एवं P में, दो अलग-अलग तापों पर ग्राफ दर्शाये गए हैं।
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(a) बिंदुकित रेखा क्या दर्शाती है?
(b) क्या सत्य है : T1 > T2 अथवा T1 < T2?
(c) y – अक्ष पर जहाँ वक्र मिलते हैं वहाँ PVIT का मान क्या है?
(d) यदि हम ऐसे ही ग्राफ 100 × 10-3 kg हाइड्रोजन के लिए बनाएँ तो भी क्या उस बिंदु पर जहाँ वक्र y – अक्ष से मिलते हैं PV/T का मान यही होगा? यदि नहीं तो हाइड्रोजन के कितने द्रव्यमान के लिए PV/T का मान (कम दाब और उच्च ताप के क्षेत्र के लिए वही होगा? H2 का अणु द्रव्यमान = 2.02 u, O2 का अणु द्रव्यमान = 32.0 u, R = 8.31J mol-1K-1)
उत्तर:
(a) बिन्दुकित रेखा यह व्यक्त करती है कि राशि PV/T स्थिर है। यह तथ्य केवल आदर्श गैस के लिए सत्य है। अर्थात् बिन्दुकित रेखा आदर्श गैस का ग्राफ है।

(b) ताप T2 पर ग्राफ की तुलना में ताप T1 पर गैस का ग्राफ आदर्श गैस के ग्राफ के अधिक समीप है। हम जानते हैं कि वास्तविक गैसें निम्न ताप पर आदर्श गैस के व्यवहार से अधिक विचलित होती हैं। अत: T1 > T2

(c) जहाँ ग्राफ -अक्ष पर मिलते हैं ठीक उसी बिन्दु पर आदर्श गैस का ग्राफ भी गुजरता है। अतः इस बिन्दु पर ऑक्सीजन गैस, आदर्श गैस का पालन करती है।
अत: गैस समीकरण से,
\(\frac{PV}{T}\) = nR
हम जानते हैं O2 का 32 × 10-3 kg = 1 मोल
∴ O2 का 1.00 × 10-3 kg
= \(\frac{1}{32 \times 10^{-3}} \times 1 \times 10^{-3}\)
i.e., n = \(\frac{1}{32}\)
R = 8.31 JK-1 mol-1
∴\(\frac{PV}{T}\) = \(\frac{1}{32}\) × 8.31 = 0.26 JK-1

(d) नहीं, हाइड्रोजन गैस के लिए PV/T का मान समान नहीं रहता है। चूँकि यह द्रव्यमान पर निर्भर करता है तथा H2 का द्रव्यमान O2 से कम है।
माना हाइड्रोजन का अभीष्ट द्रव्यमान m किया है जिसमें PV/T का समान मान प्राप्त होता है।
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प्रश्न 13.4
एक ऑक्सीजन सिलिंडर जिसका आयतन 30 लीटर है, में ऑक्सीजन का आरंभिक दाब 15 atm एवं ताप 27°C है। इसमें से कुछ गैस निकाल लेने के बाद प्रमापी (गेज)दाब गिर कर 11 atm एवं ताप गिर कर 17°C हो जाता है। ज्ञात कीजिए कि सिलिंडर से ऑक्सीजन की कितनी मात्रा निकाली गई है। (R = 8.31J mol-1K-1, ऑक्सीजन का अणु द्रव्यमान O2 = 32 u)।
उत्तर:
दिया है:
ऑक्सीजन सिलिण्डर में प्रारम्भ में
V1 = 30 litres = 30 × 10-3 m3
P1 = 15 atm = 15 × 1.013 × 105 Pa
T1 = 27 + 273 = 300 K
R = 8.31 JK-1mol-1
माना सिलिण्डर में ऑक्सीजन गैस के n1 मोल हैं।
अतः सूत्र PV = nRT से,
n1 = \(\frac{P_{1} V_{1}}{R T_{1}}\)
= \(\frac{15 \times 1.013 \times 10^{5}}{8.31 \times 300}\) = 18.253
ऑक्सीजन का अणु भार
M = 32 = 32 × 10-3 kg
सिलिंडर में ऑक्सीजन का प्रारम्भिक द्रव्यमान
m1 = n1M
= 18.253 × 32 × 10-3 kg
माना अन्त में सिलिंडर में O2 के n2 मोल बचे हैं।
दिया है:
V2 = 30 × 10-3 m-3, P2 = 11 atm
= 11 × 1.013 × 105 pa
∴ n2 = \(\frac{P_{2} V_{2}}{R T_{2}}\)
= \(\frac{\left(11 \times 1.013 \times 10^{5}\right) \times\left(30 \times 10^{-3}\right)}{8.31 \times 290}\)
= 13.847 .
∴ सिलिंडर में O2 गैस का अन्तिम द्रव्यमान
m1 – m2
= (584.1 – 453.1) × 10-3 kg
= 141 × 10-3 kg = 0.141 kg

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प्रश्न 13.5
वायु का एक बुलबुला, जिसका आयतन 1.0 cm3 है, 40 m गहरी झील की तली में जहाँ ताप 12°C है, उठकर ऊपर पृष्ठ पर आता है जहाँ ताप 35°C है। अब इसका आयतन क्या होगा? उत्तर:
जब वायु का बुलबुला 40 मी० गहराई पर है तब
V1 = 1.0 cm3 = 1.0 × 10-6m3
T1 = 12°C
= 12°C – 12 + 273 = 285 K
= 1 atm + 40 m पानी की गहराई
P1 = 1 atm – h1ρg
= 1.013 × 105 + 40 × 103 × 9.8
= 493000 Pa
= 4.93 × 105 Pa
जब वायु का बुलबुला झील की सतह पर पहुँचता है तब
V2 = ?, T2 = 35°C
= 35 + 273
= 308 K
P2 = 1 atm = 1.013 × 105 Pa
सूत्र
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प्रश्न 13.6
एक कमरे में, जिसकी धारिता 25.0 m3 है, 27°C ताप और 1 atm दाब पर, वायु के कुल अणुओं (जिनमें नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, जलवाष्प और अन्य सभी अवयवों के कण सम्मिलित हैं) की संख्या ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
V = 25.0 m3
T = 27°C = 27 + 273 = 300 K
K = 1.38 × 10-23 JK-1
P = 1 atm = 1.013 × 105 Pa
गौस समीकरण से, P = \(\frac{nRT}{V}\)
= \(\frac{n}{V}\) (Nk) T (∵\(\frac{R}{n}\) = k)
= (nN) \(\frac{kT}{V}\) = N’ \(\frac{KT}{V}\)
जहाँ N’ = nN = दी गई गैस में ऑक्सीजन अणुओं की संख्या
N’ = \(\frac{PV}{kT}\)
= \(\frac{\left(1.013 \times 10^{5}\right) \times 25}{1.38 \times 10^{-23} \times 300}\)
= 6.10 × 1026

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प्रश्न 13.7
हीलियम परमाणु की औसत तापीय ऊर्जा का आंकलन कीजिए –
(i) कमरे के ताप (27°C) पर
(ii) सूर्य के पृष्ठीय ताप (6000 K) पर
(iii) 100 लाख केल्विन ताप (तारे के क्रोड का प्रारूपिक ताप) पर।
उत्तर:
गैस के अणुगति सिद्धान्त के अनुसार, ताप T पर गैस की औसत गतिज ऊर्जा (i.e., औसत ऊष्मीय ऊर्जा) निम्नवत् है –
E = \(\frac{3}{2}\) KT
दिया है: k = 1.38 × 10-23 JK-1

(i) T = 27°C = 273 + 27 = 300 K पर,
E = \(\frac{3}{2}\) × 1.38 × 10-23 × 300
= 621 × 10-23 J
= 6.21 × 10-21 J

(ii) T = 6000K पर
∴E = \(\frac{3}{2}\) × 1.38 × 10-23 × 6000
= 1.24 × 10-19 J

(iii) T = 10 × 106 K पर,
∴ E = \(\frac{3}{2}\) × 1.38 × 10-23 × 107
= 2.07 × 10-16 J
= 2.1 × 10-16 J

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प्रश्न 13.8
समान धारिता के तीन बर्तनों में एक ही ताप और दाब पर गैसें भरी हैं। पहले बर्तन में नियॉन (एकपरमाणुक) गैस है, दूसरे में क्लोरीन (द्विपरमाणुक) गैस है और तीसरे में यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड (बहुपरमाणुक) गैस है। क्या तीनों बर्तनों में गैसों के संगत अणुओं की संख्या समान है? क्या तीनों प्रकरणों में अणुओं की vrms (वर्गमाध्य मूल चाल) समान है।
उत्तर:
(a) हाँ, चूँकि आवोगाद्रों परिकल्पना से, समान परिस्थितियों में गैसों के समान आयतन में अणुओं की संख्या समान होती है।

(b) नहीं चूँकि Vrms = \(\sqrt{\frac{3 R T}{m}}\)
∴ Vrms ∝ \(\frac{1}{\sqrt{m}}\)
अतः तीनों गैसों के ग्राम-अणु भार अलग-अलग हैं। अतः अणुओं की वर्ग माध्य-मूल चाल अलग-अलग होगी।

प्रश्न 13.9
किस ताप पर आर्गन गैस सिलिंडर में अणुओं की vrms, 20°C पर हीलियम गैस परमाणुओं की vrms के बराबर होगी। (Ar का परमाणु द्रव्यमान = 39.91 एवं हीलियम का परमाणु द्रव्यमान = 4.0 u)।
उत्तर:
माना कि T1 व T2 K ताप पर आर्गन व हीलियम गैस की वर्ग माध्य मूल वेग क्रमश: C1 व C2 हैं।
दिया है:
M1 = 39.9 × 10-3 kg,
M2 = 4.0 × 10-3 kg, T1 = ?
T2 = -20 + 273 = 253 K
हम जानते हैं कि वर्ग माध्य मूल वेग
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या T = 2523.7 K = 2524 K
= 2.524 × 103K

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प्रश्न 13.10
नाइट्रोजन गैस के एक सिलिंडर में, 2.0 atm दाब एवं 17°C ताप पर नाइट्रोजन अणुओं के माध्य मुक्त पथ एवं संघट्ट आवृत्ति का आंकलन कीजिए। नाइट्रोजन अणु की त्रिज्या लगभग 1.0 A लीजिए। संघट्ट काल की तुलना अणुओं द्वारा दो संघट्टों के बीच स्वतंत्रतापूर्वक चलने में लगे समय से कीजिए। (नाइट्रोजन का आण्विक द्रव्यमान = 28.0 u)।
उत्तर:
मैक्सवेल संशोधन ने गैस अणुओं का मध्य मुक्त पद
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जहाँ d = अणु का व्यास
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2 atm दाब पर, m द्रव्यमान गैस का आयतन
V = \(\frac{RT}{P}\), T = 273 + 17 = 290 K
∴ n = \(\frac{n}{V}\) = \(\frac{NP}{RT}\)
दिया है: N = 6.023 × 1023 mole-1
P = 2 atm = 2 × 1.013 × 105 Nm-2
R = 8.3 JK -1 mol-1
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वर्ग माध्य मूल वग C = \(\sqrt{\frac{2 R T}{M}}\)
R = 8.31 J mol-1 K-1
T = 290 K, M = 28 × 10-3 kg रखने पर
C = \(\sqrt{\frac{3 \times 8.31 \times 290}{28 \times 10^{-3}}}\)
= 5.08 × 102 ms-1
= 5.10 × 102 ms-1
∴ संघट्ट आवृत्ति,
v = \(\frac{C}{λ}\) = \(\frac{5.1 \times 10^{2}}{1.0 \times 10^{-7}}\)
= 5.1 × 109 s-1
माना दो क्रमागत संघट्टों के मध्य र समय है।
∴ τ = \(\frac{λ}{C}\) = \(\frac{1.0 \times 10^{-7} \mathrm{m}}{5.1 \times 10^{2} \mathrm{ms}^{-1}}\)
= 2 × 10-13 s
पुनः माना संघट्ट के लिया गया समय t है।
∴ t = \(\frac{d}{C}\) = \(\frac{2 \times 10^{-10}}{5.10 \times 10^{2}}\)
= 4 × 10-13 s
समी० (i) को (ii) से भाग देने पर,
\(\frac{τ}{τ}\) = \(\frac{2.0 \times 10^{-10} \mathrm{s}}{4 \times 10^{-13} \mathrm{s}}\) = 500
या τ = 500t
अतः दो क्रमागत टक्करों के मध्य समय टक्कर में लिये गए समय का 500 गुना है। इससे यह प्रदर्शित होता है कि गैस के अणु लगभग हर समय मुक्त रूप से चलायमान रहते हैं।

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अतिरिक्त अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 13.11
1 मीटर लंबी संकरी ( और एक सिरे पर बंद) नली क्षैतिज रखी गई है। इसमें 76 cm लंबाई भरा पारद सूत्र, वायु के 15 cm स्तंभ को नली में रोककर रखता है। क्या होगा यदि खुला सिरा नीचे की ओर रखते हुए नली को ऊर्ध्वाधर कर दिया जाए।
उत्तर:
प्रारम्भ में नली क्षैतिज है तब बंद सिरे पर रोकी गई वायु का दाब वायुमण्डलीय दाब के समान होगा।
∴ P1 = 76 सेमी पारे स्तम्भ का दाब।
माना कि नली का अनुप्रस्थ क्षेत्रफल A सेमी2 है।
वायु का आयतन = 15 × A = 15A सेमी3

जब नली का खुला सिरा नीचे की ओर रखते हैं तथा ऊर्ध्वाधर करते हैं जब खुले सिरे पर बाहर की ओर से वायुमण्डलीय दाब कार्य करता है जबकि ऊपर की ओर से 76 सेमी पारद सूत्र का दाब व बंद सिरे पर एकत्र वायु का दाब अधिक है।

अतः पारद सूत्र असंचुलित रहेगा व नीचे गिरते हुए वायु को बाहर निकाल देता है। माना कि पारद सूत्र की 2 लम्बाई नीचे नली से बाहर निकलती है।
∴ नली में पारद सूत्र की शेष लम्बाई = (76 – h) सेमी
तथा बंद सिरे पर वायु स्तम्भ की लम्बाई
= (15 + 9 + h)
= (24 + h) सेमी

तथा वायु का आयतन V2 = (24 + h) A सेमी3
माना कि इस वायु का दाब P2 है।
∴ सन्तुलन में,
P2 + (76 – h) सेमी पारद सूत्र का दाब = वायुमण्डलीय दाब
∴P2 = R सेमी पारद सूत्र का दाब
सूत्र P1V1 = P2V2 से
76 × 15A = h × (24 + h) A
या 1140 = 24h + h2
या h2 + 24h – 1140 = 0
∴ h = -24 ± \(\sqrt{24^{2}-4 \times 17-1140}\)
= 28.23 या – 4784 सेमी
परन्तु h ≠ ऋणात्मक
∴ h = 28.23 सेमी।
अतः पारद सूत्र की 28.23 सेमी लम्बाई नली से बाहर निकल जाएगी।

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प्रश्न 13.12
किसी उपकरण से हाइड्रोजन गैस 28.7 cm3 s-1 की दर से विसरित हो रही है। उन्हीं स्थितियों में कोई दूसरी गैस 7.2 cm3 s-1 की दर से विसरित होती है। इस दूसरी गैस को पहचानिए।
[संकेत : ग्राहम के विसरण नियम R1/R2 = (M2/M1)1/2 का उपयोग कीजिए, यहाँ R1, R2 क्रमशः
गैसों की विसरण दर तथा M2 एवं M2 उनके आण्विक द्रव्यमान हैं। यह नियम अणुगति सिद्धांत का एक सरल परिणाम है।]
उत्तर:
विसरण के ग्राहम के नियम से,
\(\frac{R_{1}}{R_{2}}\) = \(\sqrt{\frac{M_{2}}{M_{1}}}\) ………………. (i)
जहाँ R1 = गैस – 1 की विसरण दर = 28.7 cm3 s-1
R2 = गैस – 2 की विसरण दर = 7.2 cm2 s-1 ………………. (ii)
माना इनके संगत अणुभार M1 व M2 हैं।
∴H2 के लिए, M1 = 2
∴ समी० (i) तथा (ii) से
\(\frac{28.7}{7.2}\) = \(\sqrt{\frac{M_{2}}{2}}\)
या \(\frac{M_{2}}{2}\) = (\(\frac{28.7}{7.2}\))2
या M2 = 2 × 15.89 = 31.77 = 32 u
हम जानते हैं कि O2 का अणुभार 32 है। अत: अज्ञात गैस O2 है।

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प्रश्न 13.13
साम्यावस्था में किसी गैस का घनत्व और दाब अपने संपूर्ण आयतन में एकसमान है। यह पूर्णतया सत्य केवल तभी है जब कोई भी बाह्य प्रभाव न हो। उदाहरण के लिए, गुरुत्व से प्रभावित किसी गैस स्तंभ का घनत्व (और दाब) एकसमान नहीं होता है। जैसा कि आप आशा करेंगे इसका घनत्व ऊँचाई के साथ घटता है।

परिशुद्ध निर्भरता ‘वातावरण के नियम n2 = n1 exp \(\left[-\frac{m g}{k_{B} T}\left(h_{2}-h_{1}\right)\right]\) से दी जाती है, यहाँ n2, n1 क्रमश: h2, h1 ऊँचाइयों पर संख्यात्मक घनत्व को प्रदर्शित करते हैं।

इस संबंध का उपयोग द्रव स्तंभ में निलंबित किसी कण के अवसादन साम्य के लिए समीकरण n2 = n1 exp \(\left[-\frac{m g N_{A}}{\rho R T}\left(\rho-\rho^{\prime}\right)\left(h_{2}-h_{1}\right)\right]\) को व्युत्पन्न करने के लिए कीजिए, यहाँ निलंबित कण का घनत्व तथा ρ’ चारों तरफ के माध्यम का घनत्व है। NA आवोगाद्रो संख्या, तथा R सार्वत्रिक गैस नियतांक है। संकेत : निलंबित कण के आभासी भार को जानने के लिए आर्किमिडीज के सिद्धांत का उपयोग कीजिए।]
उत्तर:
माना कि कणों तथा अणुओं का आकार गोलाकार है। कणों का भार निम्नवत् है।
w = mg = \(\frac{4}{3}\) πr2 ρg …………… (i)
जहाँ r = कणों की त्रिज्या
तथा ρ = कणों का घनत्व है।
कणों की गति गुरुत्व के अधीन होने पर, ऊपर की ओर उत्क्षेप लगाती है जिसका मान निम्नवत् है –
B = कण का आयतन × प्रतिवेश का घनत्व × g
= \(\frac{4}{3}\) πr3 ρ’g ………………. (ii)
माना कण पर नीचे की ओर लगने वाला बल F है।
अत: F = W – B
= \(\frac{4}{3}\) πr3(ρ – ρ’) g ……………….. (iii)
पुनः n2 = n1 exp \(\left[\frac{-m g}{k_{B} T}\left(h_{2}-h_{1}\right)\right]\) ……………… (iv)
जहाँ kB = बोल्ट्जमैन नियतांक है।
तथा n1 व n2 क्रमश: h1 व h2 ऊँचाई पर संख्या घनत्व है। समीकरण (iii) में mg के स्थान पर बल F रखने पर, समीकरण (ii) व (iv) से,
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जो कि अभीष्ट समीकरण है।
जहाँ \(\frac{4}{3}\) πr3 ρg = कण का द्रव्यमान × g = mg

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प्रश्न 13.14
नीचे कुछ ठोसों व द्रवों के घनत्व दिए गए हैं। उनके परमाणुओं की आमापों का आंकलन (लगभग)कीजिए।
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[संकेत : मान लीजिए कि परमाणु ठोस अथवा द्रव प्रावस्था में दृढ़ता से बंधे हैं तथा आवोगाद्रो संख्या के ज्ञात मान का उपयोग कीजिए। फिर भी आपको विभिन्न परमाण्वीय आकारों के लिए अपने द्वारा प्राप्त वास्तविक संख्याओं का बिल्कुल अक्षरशः प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि दृढ़ संवेष्टन सन्निकटन की रुक्षता के परमाणवीय आकार कुछ Å के परास में हैं।
उत्तर:
(a) कार्बन का परमाणु भार
M = 12.01 × 10-3 kg
N = 6.023 × 1023
∴ एक कार्बन परमाणु का द्रव्यमान
m = \(\frac{M}{N}\) = \(\frac{12.01 \times 10^{-3}}{6.023 \times 10^{23}}\)
या m = 1.99 × 10-26 kg
= 2 × 10-26 kg
कार्बन का घनत्व \(\rho_{\varepsilon}\) = 2.2 × 10+3 kg m-3
∴ प्रत्येक कार्बन परमाणु का आयतन
V = \(\frac{m}{\rho_{\mathrm{C}}}=\frac{2 \times 10^{-26}}{2.2 \times 10^{3}}\)
= 0.9007 × 10-29 m3
माना rC = कार्बन परमाणु की त्रिज्या
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(b) दिया है : स्वर्ण परमाणु का परमाणु भार
M = 1.97 × 10-3 kg
∴ प्रत्येक स्वर्ण परमाणु का द्रव्यमान
= \(\frac{M}{N}\) = \(\frac{197 \times 10^{3}}{6.023 \times 10^{23}}\)
= 3.271 × 10-25 kg
ρg = 19.32 × 103 kg m-3
माना rg = गोल्ड परमाणु की त्रिज्या
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(c) दिया है : नाइट्रोजन परमाणु का परमाणु भार
M = 14.01 × 10-3 kg
∴ प्रत्येक परमाणु का द्रव्यमान
m = \(\frac{M}{N}\) = \(\frac{14.01 \times 10^{-3} \mathrm{kg}}{6.023 \times 10^{23}}\)
= 2.3261 × 10-26 kg
माना rn = इसके प्रत्येक परमाणु की त्रिज्या
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(d) दिया है : MLi = 6.94 × 10-3 kg
ρLi = 0.53 × 103 kg m-3
∴ mLi = mass of Li atom
= \(\frac{M_{\mathrm{Li}}}{\rho_{\mathrm{Li}}}=\frac{6.94 \times 10^{-3}}{6.023 \times 10^{23}}\)
= 1.152 × 10-26 kg
माना rLi = Li परमाणु की त्रिज्या
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(e) दिया है : MF = 1.9 × 10-3 kg
ρF = 1.14 × 103 kg m3
∴ प्रत्येक फलुओरीन परमाणु का द्रव्यमान
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माना प्रत्येक फलुओरीन परमाणु की त्रिज्या rF है। अतः
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Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण

Bihar Board Class 11 Physics द्रव्य के तापीय गुण Text Book Questions and Answers

अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 11.1
निऑन तथा CO2 के त्रिक बिन्दु क्रमश: 24.57 K तथा 216.55 K हैं। इन तापों को सेल्सियस तथा फारेनहाइट मापक्रमों में व्यक्त कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
निऑन का त्रिक बिन्दु, T1 = 24.57 K CO2 का त्रिक बिन्दु, T2 = 216.55 K
हम जानते हैं कि केल्विन सेल्यिस व फारेनहाइट पैमाने में निम्नवत् सम्बन्ध है –
\(\frac{C-O}{100-O}\) = \(\frac{F-32}{212-32}\)
= \(\frac{T-273.15}{100}\)
सेल्सियस पैमाने पर,
\(\frac{C-O}{100-O}\) = \(\frac{T-273.15}{100}\)
या C – T = 273.15
Ne के लिए
1 C = 24.57 – 273.15
= -248.58°C CO2 के लिए
2 C = 216.55 – 273.15 = -55.6°C
फारेनहाइट पैमाने पर,
\(\frac{F-32}{180}\) = \(\frac{T-273.14}{100}\)
Ne के लिए,
F1 = (T1 – 273.15) × \(\frac{9}{5}\) + 32
= (24.57 – 273.15) × \(\frac{9}{5}\) + 32
= -248.58 × \(\frac{9}{5}\) + 32
= -415.26°F
CO2 के लिए,
F2 = (T2 – 273.15) × \(\frac{9}{5}\) + 32
= (216.55 – 273.15) \(\frac{9}{5}\) + 32
= -56.6 × \(\frac{9}{5}\) + 32 = -69.88°F

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प्रश्न 11.2
दो परम ताप मापक्रमों A तथा B पर जल के त्रिक बिन्दु को 200 A तथा 350 B द्वारा परिभाषित किया गया है। TA तथा TB में क्या सम्बन्ध है?
उत्तर:
माना दोनों का शून्य, परम शून्य ताप से सम्पाती है। प्रश्नानुसार, प्रथम पैमाने पर परम शून्य से जल के त्रिक बिन्दु तक के तापों को 200 भागों में एवम् दूसरे पैमाने पर 350 भागों में विभाजित किया गया है।
∴ 200A – OA = 350B – OB
= 273.16K – 0K
∴200A = 350B = 273.16K
∴ 1A = \(\frac{273.16}{200}\) K व 1B = \(\frac{273.16}{350}\)
माना कि इन पैमानों पर किसी वस्तु का ताप क्रमश: TA व TB है।
TA = \(\frac{T×273.16}{200}\) K
तथा 1B = \(\frac{T×273.16}{350}\) K
\(\frac{T_{A}}{T_{B}}\) = \(\frac{350}{200}\) = \(\frac{7}{4}\)
TA : TB = 7 : 4
या TA = \(\frac{7}{4}\) TB

प्रश्न 11.3
किसी तापमापी का ओम में विद्युत प्रतिरोध ताप के साथ निम्नलिखित, सन्निकट नियम के अनुसार परिवर्तित होता है –
R = R0 [1 + α (T – T0)]
यदि तापमापी का जल के त्रिक बिन्दु 273.16 K पर प्रतिरोध 101.6 Ω तथा लैड के सामान्य संगलन बिन्दु (600.5 K) पर प्रतिरोध 165.5 Ω है तो वह ताप ज्ञात कीजिए जिस पर तापमापी का प्रतिरोध 123.4 Ω है।
उत्तर:
दिया है:
T1 = 273.16 K पर R1 = 101.612 व T2 = 600.5 K पर R2 = 165.5 माना T0 पर R0 प्रतिरोध है।
तथा T3 ताप पर प्रतिरोध R3 = 123.452 है।
हम जानते हैं कि –
R = R0 [1 + 5 × 10-3 (T – T0)] ……………. (i)
101.6 = R0 [1 + 5 × 10-3(273.16 – T0)] ………………. (ii)
तथा 165.5 = R0 [1 + 5 × 10-3(600.5 – T0)] ………………. (iii)
समी० (iii) को (ii) से भाग देने पर,
\(\frac{165.5}{101.6}\) = \(\frac{1+5 \times 10^{-3}\left(600.5-T_{0}\right)}{1+5 \times 10^{-3}\left(273.16-T_{0}\right)}\)
या 1 + 5 × 10-3(600.5 – T0) = 1.629 [1 + 5 × 10-3 (273.16 – T0)
या 1.629 [1 + 1.366 – 0.005 T0)
= 1 + 3.003 – 0.005 T0
या 3.854 – 008T0 = 4.003 – 0.005T0
या 0.003T0 = -49.67 K
समी० (ii) से,
R0 = \(\frac{101.6}{1+0.005(273.16+49.67)}\)
= \(\frac{101.16}{2.614}\) = 38.87 Ω
123.4 = 38.87 [1 + 0.05) T – (-49.67)]
या T + 49.67 = \(\frac{123.34}{38.87}\) – 1) \(\frac{1}{0.005}\)
या T = 434.94 – 49.67 = 385 K

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प्रश्न 11.4
निम्नलिखित के उत्तर दीजिए –
(a) आधुनिक तापमिति में जल का त्रिक बिन्दु एक मानक नियत बिन्दु है, क्यों? हिम के गलनांक तथा जल के क्वथनांक को मानक नियत-बिन्दु मानने में (जैसा कि मूल सेल्सियस मापक्रम में किया गया था।) क्या दोष है?

(b) जैसा कि ऊपर वर्णन किया जा चुका है कि मूल सेल्सियस मापक्रम में दो नियत बिन्दु थे जिनको क्रमशः 0°C तथा 100°C संख्याएँ निर्धारित की गई थीं। परम ताप मापक्रम पर दो में से एक नियत बिन्दु जल का त्रिक बिन्दु लिया गया है जिसे केल्विन परम ताप मापक्रम पर संख्या 273.16 K निर्धारित की गई है। इस मापक्रम (केल्विन परम ताप) पर अन्य नियत बिन्दु क्या है?

(c) परम ताप (केल्विन मापक्रम) T तथा सेल्सियस मापक्रम पर तापत्र tC में संबंध इस प्रकार है –
tC = T – 273.15 इस संबंध में हमने 273.15 लिखा है 273.16 क्यों नहीं लिखा?
(d) उस परमताप मापक्रम पर, जिसके एकांक अंतराल का आमाप फारेनहाइट के एकांक अंतराल की आमाप के बराबर है, जल के त्रिक बिन्दु का ताप क्या होगा?
उत्तर:
(a) चूँकि जल का त्रिक बिन्दु (273.16 K) एक अद्वितीय बिन्दु है जबकि हिम का गलनांक व जल का क्वथनांक नियत नहीं है। ये दाब परिवर्तित करने पर बदल जाते हैं।

(b) केल्विन मापक्रम पर, 0°C दूसरा नियत बिन्दु परमशून्य ताप है। इस ताप पर सभी गैसों का दाब शून्य हो जाता है।

(c) सेल्सियस पैमाने पर, 0°C ताप सामान्य दाब पर बर्फ का गलनांक है। इसके संगत केल्विन ताप 273.15 K है। अतः प्रत्येक परम ताप (273.16 K), संगत सेल्सियस ताप के 273.15 K ऊँचा है। अतः उक्त सम्बन्ध में 273.15 का प्रयोग किया गया है।

(d) चूँकि 32°F = 273.15 K
तथा 212°F = 373.15 K
∴(212 – 32)°F = (373.15 – 273.15) K
या 180°F = 100K
∴ 1°F = \(\frac{100}{180}\) K
केल्विन मापक्रम में जल के त्रिक बिन्दु का ताप T = 273.16 K
माना नए परमताप पैमाने पर त्रिक बिन्दु का ताप T’ F है।
T’F – 0 F = 273.16 K – 0 K
T’ × \(\frac{100}{180}\) K = 273.16 K
या T = \(\frac{273.16×180}{100}\) = 491.69
अतः नए पैमाने पर त्रिक बिन्दु के ताप का आंकिक मान 491.69 है।

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प्रश्न 11.5
दो आदर्श गैस तापमापियों A तथा B में क्रमश: ऑक्सीजन तथा हाइड्रोजन प्रयोग की गई है। इनके प्रेक्षण निम्नलिखित हैं –
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(a) तापमापियों A तथा B के द्वारा लिए गए पाठ्यांकों के अनुसार सल्फर के सामान्य गलनांक के परमताप क्या हैं?
(b) आपके विचार से तापमापियों A तथा B के उत्तरों में थोड़ा अंतर होने का क्या कारण है? (दोनों तापमापियों में कोई दोष नहीं है)। दो पाठ्यांकों के बीच की विसंगति को कम करने के लिए इस प्रयोग में और क्या प्रावधान आवश्यक हैं?
उत्तर:
(a) माना सल्फर का गलनांक T है।
हम जानते हैं कि जल का त्रिक बिन्दु
Ttr = 273.16 K
थर्मामीटर A के लिए
Ptr = 1.250 × 105 Pa,
P = 1.797 × 105 Pa, T = ?
सूत्र \(\frac{T}{T_{\mathrm{tr}}}=\frac{P}{P_{\mathrm{tr}}}\) से
TA = \(\frac{P}{P_{\mathrm{tr}}}\) × Ttr
= \(\frac{1.797 \times 10^{5}}{1.250 \times 10^{5}}\) × 273.16
= 392.69 K
थर्मामीटर B के लिए,
Ptr = 0.200 × 105 Pa
P = 0.287 × 105 Pa
TB = Ttr × \(\frac{P}{P_{\mathrm{tr}}}\)
= 273.16 × \(\frac{0.287 \times 10^{5}}{0.200 \times 10^{5}}\)
या TB = 391.98 K

(b) दोनों तापमापियों के पाठ्यांकों में अन्तर होने का यह कारण है कि प्रयोग की गई गैसें आदर्श नहीं हैं। विसंगति को दूर करने के लिए पाठ्यांक कम दाब पर लेने चाहिए जिससे गैसें आदर्श गैस की भाँति व्यवहार करे।

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प्रश्न 11.6
किसी 1 m लंबे स्टील के फीते का यथार्थ अंशांकन 27.0°C पर किया गया है। किसी तप्त दिन जब ताप 45°C था तब इस फीते से किसी स्टील की छड़ की लंबाई 63.0 cm मापी गई। उस दिन स्टील की छड़ की वास्तविक लंबाई क्या थी? जिस दिन ताप 27.0°C होगा उस दिन इसी छड़ की लंबाई क्या होगी? स्टील का रेखीय प्रसार गुणांक = 1.20 × 10-5 K-1
उत्तर:
दिया है:
T1 = 27°C पर फीते की लम्बाई, L = 100 सेमी
तथा T2 = 45°C पर फीते द्वारा मापी गई छड़ की ल० l = 63 सेमी।
स्टील का रेखीय प्रसार गुणांक,
α = 1.2 × 10-5 प्रति K
हम जानते हैं कि α = \(\frac{∆L}{L×∆T}\)
L × ∆T × α
= 1000 × (45 – 27) × 1.2 × 10-5
= 0.0216 सेमी
100 सेमी लम्बाई में वृद्धिं = 0.0216 सेमी
1 सेमी लम्बाई में वृद्धि = (0.0216/100) सेमी
63 सेमी लम्बाई में वद्धि = \(\frac{0.0216×63}{100}\)
= 0.0136 सेमी
अत: 45°C ताप पर स्टील की छड़ की वास्तविक लम्बाई
= 63 + 0.0136 सेमी।
= 63.0136 सेमी।
तथा जिस दिन ताप 27°C है उस दिन पुन: स्टील की छड़ की लम्बाई 63.0136 सेमी होगी।

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प्रश्न 11.7
किसी बड़े स्टील के पहिए को उसी पदार्थ की किसी धुरी पर ठीक बैठाना है। 27°C पर धुरी का बाहरी व्यास 8.70 cm तथा पहिए के केंद्रीय छिद्र का व्यास 8.69 cm है। सूखी बर्फ द्वारा धुरी को ठंडा किया गया है। धुरी के किस ताप पर पहिया धुरी पर चढ़ेगा? यह मानिए कि आवश्यक ताप परिसर में स्टील का रैखिक प्रसार गुणांक नियत रहता है –
α स्टील = 1.2 × 10-5 K-1
उत्तर:
माना कि T1 व T2 पर स्टील की रैखिक माप क्रमश: l1 व l2 है।
दिया है: αsteel = 1.20 × 10-5 K-1
l1 = 8.70 cm
l2 = 8.69 cm
T1 = 27°C = 273 + 27 = 300 K
T2 = ?
स्टील की शॉफ्ट को ठण्डा करने पर, लम्बाई निम्नवत् होती है –
l2 = l1 [1 + α(T2 – T1)] …………… (1)
शॉफ्ट को T2 ताप पर ठण्डा करने पर l2 = 8.69 सेमी०, तब पहिया शॉफ्ट पर फिसल सकेगा।
अतः समी० (1) से,
8.69 = 8.70 [1 + 1.20 × T-5(T2 – 300)]
या T2 – 300 = \(\frac{8.69-8.70}{8.70 \times 1.20 \times 10^{-5}}\)
= -95.78 K
या T2 = 300 – 95.78 = 204.22 K
या = 204.22 – 273.15 = -68.93°C
= -68.93°C
या T2 = -69°C

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प्रश्न 11.8
ताँबे की चादर में एक छिद्र किया गया है। 27.0°C पर छिद्र का व्यास 4.24 cm है। इस धातु की चादर को 227°C तक तप्त करने पर छिद्र के व्यास में क्या परिवर्तन होगा? ताँबे का रेखीय प्रसार गुणांक = 1.70 × 10-5 K-1
उत्तर:
दिया है:
t1 = 27°C
t2 = 227°C
∆t = 227 – 27 = 200°C
ताँबे के लिए रेखीय प्रसार गुणांक
α = 1.7 × 10-5°C-1
27°C पर छिद्र का व्यास, d1 = 4.24 सेमी
माना कि 227°C पर छिद्र का व्यास = d2
∆d = d2 – d1 = ?
ताँबे के लिए क्षेत्रीय प्रसार गुणांक
β = 2a = 2 × 1.7 × 10-5
= 3.4 × 10-5°C-1
माना छिद्र का पृष्ठ क्षेत्रफल 27°C व 227°C पर क्रमश: S1 व S2 है।
S1 = \(\frac{\pi d_{1}^{2}}{4}\) = \(\frac{π}{4}\) × (4.24)2
= 4.4947 π सेमी2
S2 = S1 (1 + β ∆t)
= 4.49π (1 + 3.40 × 10-5 × 200)
या S2 = 4.49π × 1.00668
= 4.525 πcm2
या \(\frac{\pi d_{2}^{2}}{4}\) = 4.25π
या d2 = \(\sqrt{4.525×4}\) = 4.525 cm
∆d = d2 – d1 = 4.2544 cm
= 0.0144 cm
या ∆d = 1.44 × 10-2 सेमी

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प्रश्न 11.9
27°C पर 1.8 cm लंबे किसी ताँबे के तार को दो दृढ़ टेकों के बीच अल्प तनाव रखकर थोड़ा कसा गया है। यदि तार को -39°C ताप पर शीतित करें तो तार में कितना तनाव उत्पन्न हो जाएगा? तार का व्यास 2.0 mm है। पीतल का रेखीय प्रसार गुणांक = 2.0 × 10-5K-1 पीतल का यंग प्रत्यास्थता गुणांक = 0.91 × 1011Pa
उत्तर:
दिया है:
l1 = 1.8 m, t1 = 27°C, t2 = -39°C
∆t = t2 – t1
= – 39 – 27
= -66°C t2°C पर लम्बाई = l2
पीतल के लिए α = 2 × 10-50 K-1
Y = 0.91 × 1011 Pa
तार का व्यास
d = 2.0 mm
= 2.0 × 10-3 m
माना तार का अनुप्रस्थ परिच्छेद a है।
a = \(\frac{\pi d^{2}}{4}\) = \(\frac{π}{4}\) × (2.0 × 10-3)2
= 3.142 × 10-6 m2
माना तार में उत्पन्न तनाव F है।
अतः सूत्र Y = \(\frac{F/a}{∆l/L}\) से
F = \(\frac{Y a \Delta l}{l_{1}}\) ………………. (i)
परन्तु l = l1 α ∆t
= 1.8 × 2 × 10-5 × (-66)
= -0.00237 m
= -0.0024 m
ऋणात्मक चिह्न प्रदर्शित करता है कि समी० (i) में Y, a, ∆l तथा l1 का मान रखने पर लम्बाई घटती है।
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= 381N
= 3.81 × 102 N

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प्रश्न 11.10
50 cm लंबी तथा 3.00 mm व्यास की किसी पीतल की छड़ को उसी लंबाई तथा व्यास की किसी स्टील की छड़ से जोड़ा गया है। यदि ये मूल लंबाइयाँ 40°C पर हैं, तो 250°C पर संयुक्त छड़ की लंबाई में क्या परिवर्तन होगा? क्या संधि पर कोई तापीय प्रतिबल उत्पन्न होगा? छड़ के सिरों को प्रसार के लिए मुक्त रखा गया है। (पीतल तथा स्टील के रेखीय प्रसार गुणांक क्रमशः = 2.0 × 10-5 K-1, स्टील = 1.2 × 10-5 K-1 हैं।)
उत्तर:
पीतल की छड़ के लिए,
α = 2.0 × 10-5 K-1, l1 = 50 cm, t1 = 40°C
t2 = 250°C
∆t = t2 – t1
= 250 – 40 = 210°C
माना t2°C पर लम्बाई l2 है। अतः
l2 = l1(1 + α ∆t)
= 50 (1 + 2 × 10-5 × 210)
= 50.21 cm
∆l brass = l2 – l1
= 50.21 – 50
= 0.21 cm
स्टील की छड़ के लिए,
t1 = 40°C, t2 = 250°C, α = 1.2 × 10-5 K-1,
l1 = 50.0 cm
∆t’ = t2 – t1
= 250 – 40 = 210°C
माना 250°C पर स्टील छड़ की ल० l2 है
अतः l2 = l1 (1 + α ∆t’)
= 50 (1 + 1.2 × 10-5 × 210)
= 50.126 cm
250°C पर संयुक्त छड़ की लम्बाई 250°C = l2 + l2
= 50.21 + 50.126
= 100.336 cm व 40°C पर संयुक्त छड़ की लम्बाई
= l1 + l1 = 50 + 50
= 100 cm
संयुक्त छड़ की लम्बाई में परिवर्तन
= 100.336 – 100
= 0.336 cm
= 0.34 cm
अतः सन्धि पर कोई तापीय प्रतिबल उत्पन्न नहीं होता है।

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प्रश्न 11.11
ग्लिसरीन का आयतन प्रसार गुणांक 4.9 × 10-5 K-1 है। ताप में 30°C की वृद्धि होने पर इसके घनत्व में क्या आंशिक परिवर्तन होगा?
उत्तर:
दिया है:
V = 4.9 × 10-5 K-1
ताप में वृद्धि ∆t = 30°C
माना 0°C पर ग्लिसरीन का प्रा० आयतन V0 है।
माना 30°C पर ग्लिसरीन का आयतन V1 है।
तब V1 = v0 (1 + r ∆t)
= V0(1 + 49 × 10-5 × 30)
= V0(1 + 0.01470)
= 1.01470 V0
या \(\frac{V_{0}}{V_{1}}\) = \(\frac{1}{1.01470}\) ……………….. (i)
अतः प्रारम्भिक घनत्व, P0 = \(\frac{m}{V_{0}}\)
तथा अन्तिम घनत्व, P1 = \(\frac{m}{V_{t}}\)
जहाँ m ग्लिसरीन का द्रव्यमान है।
\(\frac{\Delta \rho}{\rho_{0}}\) = घनत्व में भिन्नात्मक परिवर्तन
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यहाँ गुणात्मक चिह्न प्रदर्शित करता है कि ताप में वृद्धि से घनत्व घटता है।
\(\frac{\Delta \rho}{\rho_{0}}\) = 0.0145 = 1.45 × 10-2
= -1.5 × 10-2

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प्रश्न 11.12
8.0 kg द्रव्यमान के किसी एल्युमीनियम के छोटे ब्लॉक में छिद्र करने के लिए किसी 10 W की बरमी का उपयोग किया गया है। 2.5 मिनट में ब्लॉक के ताप में कितनी वृद्धि हो जाएगी। यह मानिए कि 50% शक्ति तो स्वयं बरमी को गर्म करने में खर्च हो जाती है अथवा परिवेश में लुप्त हो जाती है। एल्युमीनियम की विशिष्ट ऊष्मा धारिता = 0.91Jg-1 K-1 है।
उत्तर:
दिया है:
m = 8 kg
शक्ति, P = 10 KW = 10 × 103 J/S
समय t = 2.5 मिनट = 150 सेकण्ड
विशिष्ट ऊष्मा धारिता S = 0.91 Jg-1 K-1
= 910 Jkg-1 K-1
2.5 मिनट में बमों द्वारा कम की गई ऊर्जा, E = Pt
= (10 × 103) × 150
= 1.5 × 106 जूल
माना सम्पूर्ण ऊर्जा ऊष्मा में परिवर्तित हो जाती है जिसका 50% बर्मे द्वारा अवशोषित हो जाता है।
अतः ब्लॉक द्वारा शोषित ऊष्मा,
θ = E का 50%
= 1.5 × 106 × \(\frac{50}{100}\)
= 1.5 × 106 जूल
माना शोषित ऊष्मा से ब्लॉक के ताप में वृद्धि ∆T है।
सूत्र θ = ms ∆T से,
∆T = \(\frac{θ}{ms}\) = \(\frac{0.75 \times 10^{-6}}{8 \times 910}\)
= 103°C

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प्रश्न 11.13
2.5 kg द्रव्यमान के ताँबे के गुटके को किसी भट्टी में 500°C तक तप्त करने के पश्चात् किसी बड़े हिम-ब्लॉक पर रख दिया जाता है। गलित हो सकने वाली हिम की अधिकतम मात्रा क्या है? ताँबे की विशिष्ट ऊष्मा धारिता = 0.39Jg-1 K-1; बर्फ की संगलन ऊष्मा = 335 Jg-1
उत्तर:
दिया है:
m = 2.5 kg
T1 = 500°C विशिष्ट ऊष्मा धारिता,
S = 0.39 Jg-1 K-1 = 390 Jkg-1 K-1
बर्फ की संगलन ऊष्मा,
Lf = 335 Jg-1
= 335 × 103 Jkg-1
प्रश्नानुसार, निकाय का अन्तिम ताप T2 = 0°C
∆T = T1 – T2
= 500°C या 500 K
सूत्र θ = ms ∆T से
गुट के द्वारा दी गई ऊष्मा,
θ = 2.5 × 390 × 500
= 48.75 × 107 J
माना कि बर्फ का m’ द्रव्यमान इस ऊष्मा को शोषित कर गल जाता है।
Q = m’Lf
m’ = \(\frac{\theta}{L_{f}}\)
= \(\frac{48.75 \times 10^{4}}{335 \times 10^{3}}\) = 1.45 kg

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण

प्रश्न 11.14
किसी धातु की विशिष्ट ऊष्मा धारिता के प्रयोग में 0.20 kg के धातु के गुटके को 150°C पर तप्त करके, किसी ताँबे के ऊष्मामापी (जल तुल्यांक 30.025 kg), जिसमें 27°C का 150 cm3 जल भरा है, में गिराया जाता है। अंतिम ताप 40°C है। धातु की विशिष्ट ऊष्मा धारिता परिकलित कीजिए। यदि परिवेश में क्षय ऊष्मा उपेक्षणीय न मानकर परिकलन किया जाता है, तब क्या आपका उत्तर धातु की विशिष्ट ऊष्मा धारिता के वास्तविक मान से अधिक मान दर्शाएगा अथवा कम?
उत्तर:
दिया है:
गुटके का द्रव्यमान m = 0.20 kg
ऊष्मामापी का जल तुल्यांक m1 = 0.025 kg
भरे जल का द्रव्यमान m2 = 150 gm = 0.15 kg
गुटके का प्रारम्भिक ताप Ti = 150°C
ऊष्मामापी तथा जल का प्रारम्भिक ताप T’i = 27°C
मिश्रण का ताप, Tf = 40°C
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माना धातु की विशिष्ट ऊष्मा धारिता Sm है।
गुटके द्वारा दी गई ऊष्मा,
Q = ms(Ti – Tf)
तथा ऊष्मामापी व जल द्वारा ली गई ऊष्मा
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परन्तु दी गई ऊष्मा = ली गई ऊष्मा
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यदि हम परिवेश में ऊष्मा क्षय को नगण्य न मानकर परिकलित करें, तब उपरोक्त मान वास्तविक विशिष्ट ऊष्मा धारिता से कम मान दर्शाएगा।

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प्रश्न 11.15
कुछ सामान्य गैसों के कक्ष ताप पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिताओं के प्रेक्षण नीचे दिए गए हैं –
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इन गैसों की मापी गई मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिताएँ एक परमाणुक गैसों की मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिताओं से सुस्पष्ट रूप से भिन्न हैं। प्रतीकात्मक रूप में किसी एक परमाणुक गैस की मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिता 2.92 cal/mol K होती है। इस अंतर का स्पष्टीकरण कीजिए। क्लोरीन के लिए कुछ अधिक मान (शेष की अपेक्षा) होने से आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं?
उत्तर:
एक परमाणुक गैसों के अणुओं में सिर्फ स्थानान्तरीय गतिज ऊर्जा होती है परन्तु द्विपरमाणुक गैसों के अणुओं में स्थानान्तरीय गतिज ऊर्जा के अतिरिक्त घूर्णी गतिज ऊर्जा भी होती है। इसका कारण यह है कि द्विपरमाणुक गैसों के अणु अन्तराण्विक अक्ष के लम्बवत् दो अक्षों के परितः भी घूर्णन कर सकते हैं।

किसी गैस को ऊष्मा देने पर यह ऊष्मा अणुओं की सभी प्रकार की भुजाओं में समान वृद्धियाँ करती हैं। चूँकि द्विपरमाणुक गैसों के अणुओं की ऊर्जा के प्रकार अधिक होते हैं इसलिए इनकी मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिताएँ भी अधिक होती हैं। क्लोरीन की मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिता का अधिक मान यह व्यक्त करता है कि इसके अणु स्थानान्तरीय व घूर्णनी गतिज ऊर्जा के अतिरिक्त काम्पनिक गतिज ऊर्जा भी रखते हैं।

प्रश्न 11.16
101°F ताप ज्वर से पीड़ित किसी बच्चे को एन्टीपायरिन ( ज्वर कम करने की दवा) दी गई जिसके कारण उसके शरीर से पसीने के वाष्पन की दर में वृद्धि हो गई। यदि 20 मिनट में ज्वर 98°F तक गिर जाता है तो दवा द्वारा होने वाले अतिरिक्त वाष्पन की औसत दर क्या है? यह मानिए कि ऊष्मा ह्रास का एकमात्र उपाय वाष्पन ही है। बच्चे का द्रव्यमान 30 kg है। मानव शरीर की विशिष्ट ऊष्मा धारिता जल की विशिष्ट ऊष्मा धारिता के लगभग बराबर है तथा उस ताप पर जल के वाष्पन की गुप्त ऊष्मा 580 cal g-1 है।
उत्तर:
दिया है:
बच्चे का द्रव्यमान, m = 30 kg
ताप में गिरावट, ∆T = T1 – T2
= 101°F – 98°F
= 3°F = 3 × \(\frac{5}{9}\)°C
या ∆T = \(\frac{5}{3}\)°C
मानव शरीर की विशिष्ट ऊष्मा
C = 4.2 × 103 Jkg-1C-1
वाष्पन की गुप्त ऊष्मा = 580 cal g-1
= 580 × 4.2 × 103 Jkg-1C-1
माना 20 मिनट में बच्चे के शरीर से m ग्राम पसीना उत्सर्जित होता है।
माना आवश्यक ऊष्मा Q है।
अतः Q = m’L
= m × 580 × 4.2 × 103 J ……………. (i)
माना पसीने के उत्सर्जन के रूप में ऊष्मा Q का ह्रास होता है।
अतः Q = mCAT
= 30 × 4.2 × 103 × 51
= 2.10 × 105 J ………………. (ii)
समी० (i) व (ii) से,
m’ × 580 × 4.2 × 103
= 2.1 x 105
या m’ = \(\frac{2.1 \times 10^{5}}{580 \times 4.2 \times 10^{3}}\)
= \(\frac{10}{116}\) = 0.0862 kg
पसीने के उत्सर्जित होने की दर
= \(\frac{m’}{t}\) = \(\frac{0.0862}{20}\)
= 0.00431 kg min-1 = 4.31 g min-1

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प्रश्न 11.17
थर्मोकोल का बना ‘हिम बॉक्स’ विशेषकर गर्मियों में कम मात्रा के पके भोजन के भंडारण का सस्ता तथा दक्ष साधन है। 30 cm भुजा के किसी हिम बॉक्स की मोटाई 5.0 cm है। यदि इस बॉक्स में 4.0 kg हिम रखा है तो 6 h के पश्चात् बचे हिम की मात्रा का आंकलन कीजिए। बाहरी ताप 45°C है तथा थर्मोकोल की ऊष्मा चालकता 0.01 Js-1 m-1 K-1 है। (हिम की संगलन ऊष्मा = 335 × 103 Jkg-1)
उत्तर:
दिया है:
घन के छह पृष्ठों का क्षेत्रफल
= 6 × 30 × 30 cm2
= 6 × 900 × 10-4 m2
दूरी, d = 5.0 cm = 5.0 × 10-2 m
बर्फ का कुल द्रव्यमान, M = 4 kg
समय t = 6 h = 6 × 60 × 60s
बक्से के बाहर का ताप = Q1 = 45°C
बक्से के भीतर का ताप = Q2 = 0°C
∆θ = θ1 – θ1 = 45 – 0
= 45°C
संगलन की ऊष्मा,
L = 335 × 103 Jkg-1
थर्माकोल की ऊष्मीय चालकता गुणांक
= K = 0.01 Js-1 m-10 K-1
माना बर्फ का m kg द्रव्यमान गलता है
अतः 0°C पर गलन के लिए आवश्यक ऊष्मा,
Q = mL ……………. (i)
पुनः Q = KA \(\frac{∆θ}{d}\) t ……………… (ii)
समी० (i) व (ii) से,
m = \(\frac{KA}{L}\) \(\frac{∆θ}{d}\) t
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= 0.313 kg
बॉक्स में शेष बची हिम का द्रव्यमान = M – m
= 4 – 0.313
= 3.687
= 3.7 किग्रा

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प्रश्न 11.18
किसी पीतल के बॉयलर की पेंदी का क्षेत्रफल 0.15 m2 तथा मोटाई 1.0 cm है। किसी गैस स्टोव पर रखने पर इसमें 6.0 kg/min की दर से जल उबलता है। बॉयलर के संपर्क की ज्वाला के भाग का ताप आकलित कीजिए। पीतल की ऊष्मा चालकता = 109 Js-1 m-1 K-1; जल की वाष्पन ऊष्मा = 2256 × 103 Jkg-1 है।
उत्तर:
दिया है:
K = 109 Js-1 m-1 K-1
A = 0.15 m2
d = 1.0 cm = 10-2 m θ2 = 100°C
माना बॉयलर के स्टोव के सम्पर्क वाले हिस्से का ताप θ1 है।
अत: Q = \(\frac{K A\left(\theta_{1}-\theta_{2}\right)}{d}\)
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जल के, वाष्पीकरण की ऊष्मा,
L = 2256 × 103 Jkg-1
बॉयलर में जल के उबलने की दर,
M = 6.0 kg min-1
= \(\frac{6.0}{60}\) = 0.1 kg-1 s
जल द्वारा प्रति सेकण्ड अवशोषित ऊष्मा, Q = ML
या Q = 0.1 × 2256 × 103 Js-1
समी० (i) व (ii) से
1635 (θ1 – 100) = 2256 × 102
या θ1 – 100 = \(\frac{2256×100}{1635}\) = 138
θ1 = 100 + 138 = 238°C

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प्रश्न 11.19
स्पष्ट कीजिए कि क्यों –
(a) अधिक परावर्तकता वाले पिंड अल्प उत्सर्जक होते हैं।
(b) कँपकँपी वाले दिन लकड़ी की ट्रे की अपेक्षा पीतल का गिलास कहीं अधिक शीतल प्रतीत होता है।
(c) कोई प्रकाशिक उत्तापमापी ( उच्च तापों को मापने की युक्ति), जिसका अंशांकन किसी आदर्श कृष्णिका के विकिरणों के लिए किया गया है,खुले में रखे किसी लाल तप्त लोहे के टुकड़े का ताप काफी कम मापता है, परन्तु जब उसी लोहे के टुकड़े को भट्टी में रखते हैं, तो वह ताप का सही मान मापता है।
(d) बिना वातावरण के पृथ्वी अशरणीय शीतल हो जाएगी।
(e) भाप के परिचालन पर आधारित तापन निकाय तप्त जल के परिचालन पर आधारित निकायों की अपेक्षा भवनों को उष्ण बनाने में अधिक दक्ष होते हैं।
उत्तर:
(a) चूँकि उच्च परावर्तकता वाले पिंड अपने ऊपर गिरने वाले अधिकांश विकिरण को परावर्तित कर देते हैं। अतः वे अल्प अवशोषक होते हैं। इसी कारण वे अल्प उत्सर्जक भी होते हैं।

(b) लकड़ी की ट्रे ऊष्मा की कुचालक होती है तथा पीतल का गिलास ऊष्मा का सुचालक होता है। कँपकँपी वाले दिन दोनों ही समान ताप पर होंगे। लेकिन स्पर्श करने पर गिलास हमारे हाथ से तेजी से ऊष्मा लेता है जबकि लकड़ी की ट्रे बहुत कम ऊष्मा लेती है। अतः गिलास ट्रे की तुलना में अधिक ठण्डा लगता है।

(c) चूँकि खुले में रखे तप्त लोहे का गोला तीव्रता से ऊष्मा खोता है तथा कम ऊष्माधारिता के कारण तीव्रता से ठण्डा होता जाता है। इस प्रकार उत्तापमापी को पर्याप्त विकिरण ऊर्जा लगातार नहीं मिल पाती है। जबकि भट्टी में रखने पर, गोले का ताप स्थिर बना रहता है तथा यह नियत दर से विकिरण उत्सर्जित करता है।

(d) चूँकि वायु ऊष्मा की कुचालक है। अतः पृथ्वी के चारों ओर का वायुमण्डल एक कम्बल की तरह व्यवहार करता है तथा पृथ्वी से उत्सर्जित होने वाले ऊष्मीय विकिरणों को वापस पृथ्वी की ओर को परावर्तित करता है। वायुमण्डल की अनुपस्थिति में, पृथ्वी से उत्सर्जित होने वाले ऊष्मीय विकिरण सीधे सुदूर अन्तरिक्ष में चले जाते हैं। एवम् पृथ्वी अशरणीय शीतल हो जाएगी।

(e) चूँकि 1 g जलवाष्प, 100°C के 1 g जल की तुलना में 540 cal अतिरिक्त ऊष्मा रखती है। अतः स्पष्ट है कि जलवाष्प आधारित तापन निकाय, तप्त जल आधारित तापन निकाय से ज्यादा दक्ष है।

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प्रश्न 11.20
किसी पिंड का ताप 5 मिनट में 80°C से 50°C हो जाता है। यदि परिवेश का ताप 20°C है, तो उस समय का परिकलन कीजिए जिसमें उसका ताप 60°C से 30°C हो जाएगा।
उत्तर:
80°C व 50°C का माध्य ताप 65°C है।
अतः परिवेश ताप से अन्तर = (65 – 20) = 45°C
सूत्र ताप में कमी/समयान्तराल = K (तापान्तर) से …………… (i)
60°C व 30° C का माध्य ताप 45°C है।
इसका परिवेश ताप से अन्तर (45 – 20) = 25°C
या t = \(\frac{30}{6}\) × \(\frac{45}{25}\) = 9 मिनट
अतः पिंड के ताप को 60°C से 30°C तक गिरने में 9 मिनट लगते हैं।

Bihar Board Class 11 Physics द्रव्य के तापीय गुण Additional Important Questions and Answers

अतिरिक्त अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 11.21
CO2 के P – T प्रावस्था आरेख पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
(a) किस ताप व दाब पर CO2 की ठोस, द्रव तथा वाष्प प्रावस्थाएँ साम्य में सहवर्ती हो सकती हैं?
(b) CO2 के गलनांक तथा क्वथनांक पर दाब में कमी का क्या प्रभाव पड़ता है?
(c) CO2 के लिए क्रांतिक ताप तथा दाब क्या हैं? इनका क्या महत्व है?
(d)

  • -70°C ताप व 1 atm दाब
  • -60°Cताप व 10atm दाब
  • 15°C ताप व 56 atm दाब पर CO2 ठोस, द्रव अथवा गैस में से किस अवस्था में होती है?

उत्तर:
(a) -56.6°C ताप व 5.11 वायुमण्डलीय दाब पर।
(b) दाब में कमी होने पर दोनों घटते हैं।
(c) CO2 के लिए क्रान्तिक ताप 31.1°C व क्रान्तिक दाब 73 वायुमण्डलीय दाब है।
(d)

  • – 70°C ताप व 1 atm दाब पर वाष्प या गैसीय अवस्था में।
  • – 60°C ताप व 10 atm दाब पर ठोस अवस्था में।
  • 15°C ताप व 56 atm दाब पर द्रव अवस्था में।

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प्रश्न 11.22
CO2 के P – T प्रावस्था आरेख पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
(a) 1 atm दाब तथा – 60°Cताप पर CO2 का समतापी संपीडन किया जाता है? क्या यह द्रव प्रावस्था में जाएगी?
(b) क्या होता है जब 4atm दाब व CO2 का दाब नियत रखकर कक्ष ताप पर शीतन किया जाता है?
(c) 10 atm दाब तथा -65°C ताप पर किसी दिए गए द्रव्यमान की ठोस CO2 को दाब नियत रखकर कक्ष ताप तक तप्त करते समय होने वाले गुणात्मक परिवर्तनों का वर्णन कीजिए।
(d) CO2 को 70°C तक तप्त तथा समतापी संपीडित किया जाता है। आप प्रेक्षण के लिए इसके किन गुणों में अंतर की अपेक्षा करते हैं?
उत्तर:
(a) समतापी सम्पीडनं से तात्पर्य है कि गैस को – 60°C ताप पर दाब अक्ष के समान्तर ऊपर को ले जाया जाता है। इसके लिए हम (- 60°C) ताप पर दाब अक्ष के समान्तर रेखा खींचते हैं। यह रेखा गैसीय क्षेत्र से सीधे ठोस क्षेत्र में प्रवेश कर जाती है तथा द्रव क्षेत्र से नहीं जाती है। अर्थात् गैस बिना द्रवित हुए ठोस में परिवर्तित हो जाती है।

(b) यहाँ पर 4 atm दाब पर ताप अक्ष के समान्तर रेखा खींचते हैं। हम देखते हैं कि यहाँ रेखा वाष्प क्षेत्र से सीधे ठोस क्षेत्रों में प्रवेश करती है। इसका तात्पर्य है कि गैस, बिना द्रवित हुए ठोस अवस्था में संघनित होगी।

(c) यहाँ हम 10 atm दाब व – 65°C ताप से प्रारम्भ कर ताप अक्ष के समान्तर रेखा खींचते हैं। यह रेखा ठोस क्षेत्र से द्रव क्षेत्र तथा बाद में वाष्प क्षेत्र में प्रवेश करती है। इसका तात्पर्य यह है कि इस ताप व दाब पर गैस ठोस अवस्था में होगी। गर्म करने पर यह गैस धीरे-धीरे द्रवास्था में आ जाएगी व पुनः गर्म करने पर गैसीय अवस्था में आ जाएगी।

(d) चूँकि 70°C ताप गैस के क्रान्ति ताप से अधिक है। अतः इसे समतापी सम्पीडन से द्रवित नहीं किया जा सकता है। इस प्रकार चिर स्थायी गैसों की भाँति दाब बढ़ाते जाने पर इसका आयतन कम होता जाएगा।

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 12 ऊष्मागतिकी

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 12 ऊष्मागतिकी Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

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अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 12.1
कोई गीजर 3.0 लीटर प्रति मिनट की दर से बहते हुए जल को 27°C से 77°C तक गर्म करता है। यदि गीजर का परिचालन गैस बर्नर द्वारा किया जाए तो ईंधन के व्यय की क्या दर होगी? बर्नर के ईंधन की दहन-ऊष्मा 4.0 × 104 Jg-1 है?
उत्तर:
दिया है:
ताप में वृद्धि
∆T = (77 – 27)°C
= 50°C
\(S_{\mathrm{H}_{2} \mathrm{O}}\) = 4.2 × 103 Jkg-1°C-1
ईंधन की दहन ऊष्मा
HC = 4 × 104 Jg-1
प्रति मिनट प्रवाहित जल का द्रव्यमान, m = 3 ली
= 3 किग्रा (∴ 1 ली० = 1kg)
जल द्वारा गर्म होने के लिए ली गई ऊष्मा,
θ = ms ∆T
माना ईंधन के जलने की दर m’ प्रति मिनट है। ……………. (i)
अतः ईंधन द्वारा 1 मिनट में दी गई ऊष्मा
θ = m’HC
ईंधन द्वारा प्रति मिनट दी गई ऊष्मा = प्रति मिनट ली गई ऊष्मा।
∴ m’HC = ms ∆T
∴ m’ = \(\frac{m s \Delta T}{H_{\mathrm{C}}}\)
= \(\frac{3 \times 4.2 \times 10^{3} \times 50}{4 \times 10^{4}}\)
= 15.75 g
= 16 gm
अतः ईंधन 16 gm / मिनट की दर से जलता है।

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प्रश्न 12.2
स्थिर दाब पर 2.0 × 10-2 kg नाइट्रोजन (कमरे के ताप पर) के ताप में 45°C वृद्धि करने के लिए कितनी ऊष्मा की आपूर्ति की जानी चाहिए? (N2) का अणुभार 28; R = 8.3 Jmol-1 K-1)।
उत्तर:
दिया है:
N2 का अणु भार = 28
गैस का द्रव्यमान, m = 2 × 10-2 किग्रा
ताप वृद्धि T = 45°C
R = 8.3 जूल प्रति मोल प्रति K
आवश्यक ऊष्मा θ = ?
दी गई गैस द्रव्यमान में, ग्राम मोलों की संख्या,
µ = \(\frac{m}{2gm}\) = \(\frac{20}{8}\) = 0.714
R = 8.3 mol-1K-1
माना नियत दाब पर गैस की मोलर विशिष्ट ऊष्मा Cp है।
Cp = \(\frac{7}{2}\) R = \(\frac{20}{8}\) × 8.3 J mol-1 K
दी गई ऊष्मा Q = ?
सूत्र Q = nCp ∆θ से,
Q = nCp ∆θ
= 0.714 × \(\frac{7}{2}\) × 8.3 × 45 J
= 933.75 J
= 934 J

प्रश्न 12.3
व्याख्या कीजिए कि ऐसा क्यों होता है?
(a) भिन्न – भिन्न तापों T1 व T2 के दो पिण्डों को यदि ऊष्मीय संपर्क में लाया जाए तो यह आवश्यक नहीं कि उनका अंतिम ताप (T1 + T2)/2 ही हो।
(b) रासायनिक या नाभिकीय संयंत्रों में शीतलक (अर्थात् द्रव जो संयंत्र के भिन्न-भिन्न भागों को अधिक गर्म होने से रोकता है) की विशिष्ट ऊष्मा अधिक होनी चाहिए।
(c) कार को चलाते-चलाते उसके टायरों में वायुदाब बढ़ जाता है।
(d) किसी बंदरगाह के समीप के शहर की जलवायु, समान अक्षांश के किसी रेगिस्तानी शहर की जलवायु से अधिक शीतोष्ण होती है।
उत्तर:
(a) इसका कारण यह है कि अन्तिम ताप वस्तुओं को अलग-अलग तापों के अतिरिक्त उनकी. ऊष्मा धारिताओं पर भी निर्भर करता है।
(b) चूँकि शीतलक संयन्त्र से अभिक्रिया जनित ऊष्मा को हटाता है अतः शीतलक की विशिष्ट ऊष्मा धारिता अधिक होनी चाहिए ताकि कम ताप-वृद्धि के लिए अधिक ऊष्मा शोषित कर सके।
(c) कार को चलाते-चलाते, सड़क के साथ घर्षण के कारण टायर का ताप बढ़ता है। इस कारण टायर में भरी हवा का दाब बढ़ जाता है।
(d) बन्दरगाह के समीप के शहरों की आपेक्षिक आर्द्रता समान अक्षांश के रेगिस्तानी शहर की तुलना में अधिक रहती है। इस कारण बन्दरगाह के समीप शहर की जलवायु रेगिस्तानी शहर की अपेक्षा शीतोष्ण बनी रहती है।

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प्रश्न 12.4
गतिशील पिस्टन लगे किसी सिलिंडर में मानक ताप व दाब पर 3 मोल हाइड्रोजन भरी है। सिलिंडर की दीवारें ऊष्मारोधी पदार्थ की बनी हैं तथा पिस्टन को उस पर बालू की परत लगाकर ऊष्मारोधी बनाया गया है। यदि गैस को उसके आरंभिक आयतन के आधे आयतन तक संपीडित किया जाए तो गैस का दाब कितना बढ़ेगा?
उत्तर:
माना V1 = x
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द्विपरमाणुक गैस का हाइड्रोजन के लिए
γ = \(\frac{7}{5}\) = 1.4
चूँकि ऊष्मा का आदान-प्रदान नहीं होता है, अतः प्रक्रम ऊष्मारोधी है।
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प्रश्न 12.5
रुद्धोष्म विधि द्वारा किसी गैस की अवस्था परिवर्तन करते समय उसकी एक साम्यावस्था A से दूसरी साम्यावस्था B तक ले जाने में निकाय पर 22.3J कार्य किया जाता है। यदि गैस को दूसरी प्रक्रिया द्वारा अवस्थाA से अवस्था B में लाने में निकाय द्वारा अवशोषित नेट ऊष्मा 9.35 cal है तो बाद के प्रकरण में निकाय द्वारा किया गया नेट कार्य कितना है?
उत्तर:
दिया है:
dw = 22.3J …………….. (i)
ऊष्मागतिकी के.प्रथम नियम से
∴ dQ = dU + dw’ ……………… (ii)
ऊष्मारोधी प्रक्रम के लिए dU = 0
∴ dQ = 0 + dw’ or dw’ = dQ
= 9.35 × 4.19J
दिया है:
dp = 9.35 cal (1 cal = 4.19J) …………….. (iii)
∴ समी (ii) व (iii) से,
dw’ = 9.35 × 4.19 J
= 38.97 J
माना निकाय पर कृत कार्य W’ है।
W’ = dw’ – dW
= 38.97 – 22.3
= 16.67
= 16.7J

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प्रश्न 12.6
समान धारिता वाले दो सिलिंडर A तथा B एक-दूसरे से स्टॉपकॉक के द्वारा जुड़े हैं। A में मानक ताप व दाब पर गैस भरी है जबकि B पूर्णतः निर्वातित है। स्टॉपकॉक यकायक खोल दी जाती है। निम्नलिखित का उत्तर दीजिए:
(a) सिलिंडर A तथा B में अंतिम दाब क्या होगा?
(b) गैस की आंतरिक ऊर्जा में कितना परिवर्तन होगा?
(c) गैस के ताप में क्या परिवर्तन होगा?
(d) क्या निकाय की माध्यमिक अवस्थाएँ (अंतिम साम्यावस्था प्राप्त करने के पूर्व) इसके P – V – T पृष्ठ पर होंगी?
उत्तर:
(a) दिया है:
मानक दाब = P1 = 1 atm, V1 = V
P2 = ? तथा V2 = 2V
चूँकि सिलिंडर B निर्वातित है अतः स्टॉपकॉक खोलने पर गैस का निर्वात में मुक्त प्रसार होगा। अतः गैस न तो कोई कार्य करेगी और न ही ऊष्मा का आदान-प्रदान होगा। अर्थात् गैस की आन्तरिक ऊर्जा व ताप स्थिर रहेंगे। पुनः बॉयल के नियम से,
P1V1 = P2V2
∴ P2 = \(\frac{P_{1} V_{1}}{V_{2}}\) = \(\frac{1×V}{2v}\) = 0.5 atm

(b) चूँकि ω = 0 व θ = 0
∴ ∆V = 0
अर्थात् गैस की आन्तरिक ऊर्जा अपरिवर्तित रहेगी।

(c) चूँकि आन्तरिक ऊर्जा अपरिवर्तित रहती है। अतः गैस का ताप भी अपरिवर्तित रहेगा।

(d) चूँकि गैस का मुक्त प्रसार हुआ है। इस कारण माध्यमिक अवस्थाएँ साम्य अवस्थाएँ नहीं हैं। अतः ये अवस्थाएँ दाब-आयतन-ताप पृष्ठ पर नहीं होगी।

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प्रश्न 12.7
एक वाष्प इंजन अपने बॉयलर से प्रति मिनट 3.6 × 109 J ऊर्जा प्रदान करता है जो प्रति मिनट 5.4 × 108 J कार्य देता है। इंजन की दक्षता कितनी है? प्रति मिनट कितनी ऊष्मा अपशिष्ट होगी?
उत्तर:
दिया है:
प्रति मिनट बॉयलर द्वारा अवशोषित ऊष्मा
= Q1 = 3.6 × 109 J
भाप इंजन द्वारा प्रति मिनट कृत कार्य
= 5.4 × 108 J
प्रति मिनट व्यय/उत्सर्जित ऊष्मा = Q2 = ?
इंजन की प्रतिशत दक्षता n% = ?
हम जानते हैं कि n% = \(\frac{W}{Q_{1}} \times 100\)
∴n% = \(\frac{5.4 \times 10^{8} \mathrm{J}}{3.6 \times 10^{9} \mathrm{J}}\) × 100
= \(\frac{3}{20}\) × 100 = 15%
सूत्र, Q1 = W + Q2 से,
Q2 = Q1 – W
= 36 × 108 – 5.4 × 108
= 30.6 × 108 J/min
= 30.6 × 109 J/min
= 3.1 × 109 J/min

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प्रश्न 12.8
एक हीटर किसी निकाय को 100 W की दर से ऊष्मा प्रदान करता है। यदि निकाय 75 Js-1 की दर से कार्य करता है, तो आंतरिक ऊर्जा की वृद्धि किस दर से होगी?
उत्तर:
दिया है:
θ = 100 W = 100 Js-1
W = 75 Js-1
∴ ∆V = θ – W
= 100 – 75
= 25 Js-1
अत: निकाय की आन्तरिक ऊर्जा वृद्धि दर 25 Js-1 है।

प्रश्न 12.9
किसी ऊष्मागतिकीय निकाय को मूल अवस्था से मध्यवर्ती अवस्था तक (चित्र) में दर्शाये अनुसार एक रेखीय प्रक्रम द्वारा ले जाया गया है। एक समदाबी प्रक्रम द्वारा इसके आयतन को E से F तक ले जाकर मूल मान तक कम कर देते हैं। गैस द्वारा D से E तथा वहाँ से F तक कुल किए गये कार्य का आंकलन कीजिए।
Bihar Board Class 11 Physics Chapter 12 ऊष्मागतिकी
उत्तर:
माना गैस D से E व E से F तक कृत कार्य = W
अतः W = W1 + W2
मानां W1 = D से E तक प्रसार में कृत कार्य
= DEHGD का क्षेत्रफल = ADEF का क्षे० + आयत EHGF का क्षे० …………….. (ii)
दिया है:
EF = 5 – 2 = 3 litre = 3 × 10-3 m3
DF = 600 – 300 = 300 Nm-2
FG = 300 – 0 = 300 Nm2
GH = 5 – 2 = 3 × 10-3 m3
∴ समीकरण (ii) से,
∴W1 = [\(\frac{1}{2}\) × 3 × 10-3 × 300 + 3 × 10-3 × 300] J ……………. (iii)
माना E से F (संपीडन) तक कृत कार्य = W2 = EHGF का
= – FG × GH
= -(300 – 0) × (5 – 2) × 10-3
= – 300 × 3 × 10-3 J ……………….. (iv)
∴ समी० (i) (iii) व (iv) से,
W = \(\frac{1}{2}\) × 3 × 10-3 × 300 + 3 × 10-3
= 3 × 103 × 150 J = 450 × 10-3 J
= 0.450 J

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प्रश्न 12.10
खाद्य पदार्थ को एक प्रशीतक के अंदर रखने पर उसे 9°C पर बनाए रखता है। यदि कमरे का ताप 36°C है तो प्रशीतक के निष्पादन गुणांक का आंकलन कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
T1 = 273 + 36 = 309 K
T2 = 9°C = 282 K
β = ?
सूत्र β = \(\frac{T_{2}}{T_{1}-T_{2}}\) से
β = \(\frac{283}{309-282}\) = \(\frac{282}{7}\) = 10.4

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

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Bihar Board Class 11 Physics तरलों के यांत्रिकी गुण Text Book Questions and Answers

अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 10.1
स्पष्ट कीजिए क्यों?
(a) मस्तिष्क की अपेक्षा मानव का पैरों पर रक्तचाप अधिक होता है।
(b) 6 km ऊँचाई पर वायुमण्डलीय दाब समुद्र तल पर वायुमण्डलीय दाब का लगभग आधा हो जाता है, यद्यपि वायुमण्डल का विस्तार 100 km से भी अधिक ऊँचाई तक है।
(c) यद्यपि दाब, प्रति एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाला बल होता है तथापि द्रवस्थैतिक दाब एक अदिश राशि है।
उत्तर:
(a) पैरों के ऊपर रक्त स्तम्भ की ऊँचाई मस्तिष्क के ऊपर रक्त स्तम्भ की ऊँचाई से ज्यादा होती है। हम जानते हैं कि द्रव स्तम्भ का दाब गहराई के अनुक्रमानुपाती होता है। इसी कारण पैरों पर रक्त दाब मस्तिष्क की तुलना में अधिक होता है।

(b) पृथ्वी के गुरुत्वीय प्रभाव के कारण वायु के अणु पृथ्वी के नजदीक बने रहते हैं, अधिक ऊँचाई तक नहीं जा पाते हैं। इस प्रकार 6 किमी से अधिक ऊँचाई तक जाने पर वायु बहुत ही विरल हो जाती है तथा घनत्व बहुत कम हो जाता है। चूंकि द्रव-दाब, द्रव के घनत्व के समानुपाती होता है। इस प्रकार 6 किमी से ऊपर की वायु का कुल दाब बहुत कम होता है। अतः पृथ्वी तल से 6 किमी की ऊँचाई पर वायुमण्डलीय दाब समुद्र तल पर वायुमण्डलीय दाब से आधा रह जाता है।

(c) पास्कल के नियमानुसार, किसी बिन्दु पर द्रव दाब समस्त दिशाओं में समान रूप से लगता है। अतः दाब के साथ कोई दिशा नहीं जोड़ी जा सकती है। अतः दाब एक सदिश राशि है।

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प्रश्न 10.2
स्पष्ट कीजिए क्यों?
(a) पारे का काँच के साथ स्पर्श कोण अधिक कोण होता है जबकि जल का काँच के साथ स्पर्श कोण न्यून कोण होता
(b) काँच के स्वच्छ समतल पृष्ठ पर जल फैलने का प्रयास करता है जबकि पारा उसी पृष्ठ पर बूंदें बनाने का प्रयास करता है। (दूसरे शब्दों में जल काँच को गीला कर देता है जबकि पारा ऐसा नहीं करता है।)
(c) किसी द्रव का पृष्ठ तनाव पृष्ठ के क्षेत्रफल पर निर्भर नहीं करता है।
(d) जल में घुले अपमार्जकों के स्पर्श कोणों का मान कम होना चाहिए।
(e) यदि किसी बाह्य बल का प्रभाव न हो, तो द्रव बूंद की आकृति सदैव गोलाकार होती है।
उत्तर:
(a) पारे के अणुओं के मध्य संसजक बल, पारे तथा काँच के अणुओं के मध्य आसंजक बल से अधिक होता है। अतः काँच व पारे का स्पर्श कोण अधिक कोण होता है जबकि जल के अणुओं के मध्य संसजक बल, काँच तथा जल के अणुओं के मध्य आसंजक बल से कम होता है। अत: जल व काँच के मध्य स्पर्श कोण न्यूनकोण होता है।
(b) यहाँ पर उपरोक्त कारण लागू होता है।
(c) किसी द्रव के मुक्त पृष्ठ का क्षेत्रफल बढ़ा देने पर उसके तनाव में कोई परिवर्तन नहीं होता है जबकि रबड़ की झिल्ली को खींचने पर उसमें तनाव बढ़ जाता है। अतः द्रव का पृष्ठ-तनाव उसके मुक्त क्षेत्रफल से निर्भर होता है।
(d) अपमार्जक घुले होने पर जल का पृष्ठ तनाव कम हो जाता है, परिणामस्वरूप स्पर्श कोण भी कम हो जाता है।
(e) बाह्य बल की अनुपस्थिति में बूंद की आकृति सिर्फ पृष्ठ तनाव द्वारा निर्धारित होती है। पृष्ठ तनाव के कारण बूंद न्यूनतम क्षेत्रफल वाली आकृति ले लेती है। चूँकि एक दिए गए आयतन के लिए गोले का युक्त पृष्ठ न्यूनतम होता है। अतः बूंद गोलाकार हो जाती है।

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प्रश्न 10.3
प्रत्येक प्रकथन के साथ संलग्न सूची में से उपयुक्त शब्द छाँटकर उस प्रकथन के रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए –
(a) व्यापक रूप में द्रवों का पृष्ठ तनाव ताप बढ़ने पर …………………….. (बढ़ता/घटता)
(b) गैसों की श्यानता ताप बढ़ने पर …………………….. है, जबकि द्रवों की श्यानता ताप बढ़ने पर ………………… है। (बढ़ती/घटती)
(c) दृढ़ता प्रत्यास्थता गुणांक वाले ठोसों के लिए अपरूपण प्रतिबल ………………….. के अनुक्रमानुपाती होता है, जबकि द्रवों के लिए वह ……………….. के अनुक्रमानुपाती होता है। (अपरूपण विकृति/अपरूपण विकृति की दर)
(d) किसी तरल के अपरिवर्ती प्रवाह में आए किसी संकीर्णन पर प्रवाह की चाल में वृद्धि में ………………….. का अनुसरण होता है। (संहति का संरक्षण/बर्नूली सिद्धांत)
(e) किसी वायु सुरंग में किसी वायुयान के मॉडल में प्रक्षोभ की चाल वास्तविक वायुयान के प्रक्षोभ के लिए क्रांतिक चाल की तुलना में ………………. होती है। (अधिक/कम)
उत्तर:
(a) घटता
(b) बढ़ती, घटती
(c) अपरूपण विकृति, अपरूपण विकृति की दर
(d) संहति का संरक्षण
(e) अधिक।

प्रश्न 10.4
निम्नलिखित के कारण स्पष्ट कीजिए।
(a) किसी कागज की पड़ी को क्षैतिज रखने के लिए आपको उस कागज पर ऊपर की ओर हवा फूंकनी चाहिए, नीचे की ओर नहीं।
(b) जब हम किसी जल टोंटी को अपनी उँगलियों द्वारा बंद करने का प्रयास करते हैं, तो उँगलियों के बीच की खाली जगह से तीव्र जल धाराएँ फूट निकलती हैं।
(c) इंजेक्शन लगाते समय डॉक्टर के अंगूठे द्वारा आरोपित दाब की अपेक्षा सुई का आकार दवाई की बहिःप्रवाही धारा को अधिक अच्छा नियंत्रित करता है।
(d) किसी पात्र के बारीक छिद्र से निकलने वाला तरल उस पर पीछे की ओर प्रणोद आरोपित करता है।
(e) कोई प्रचक्रमान क्रिकेट की गेंद वायु में परवलीय प्रपथ का अनुसरण नहीं करती।
उत्तर:
(a) कागज पर ऊपर की ओर फूंक मारने से ऊपर की वायु का वेग अधिक हो जाएगा। अत: बर्नूली की प्रमेय से, कागज के ऊपर वायुदाब, नीचे की अपेक्षा कम हो जाएगा। इससे कागज पर उत्थापक बल लगेगा जो कागज को नीचे गिरने से रोकेगा।

(b) जल टोंटी को उँगलियों द्वारा बन्द करने पर उँगलियों के बीच की खाली जगह से तीव्र जल धाराएँ फूट निकलती हैं। यहाँ धारा का अनुप्रस्थ क्षेत्रफल टोंटी के अनुप्रस्थ क्षेत्रफल से कम होता है। अतः अविरतता के नियमानुसार, जल का वेग अधिक हो जाता है।

(c) अविरतता के नियम से, समान दाब आरोपित किए जाने पर, सुई बारीक होने पर बहिःप्रवाही धारा का प्रवाह वेग बढ़ जाता है। अतः बहि:प्रवाही वेग सुई के आकार से ज्यादा नियन्त्रित होता है।

(d) किसी पात्र के बारीक छिद्र से निकलने वाला तत्व उस पर पीछे की ओर प्रणोद आरोपित करता है। इसका कारण यह है कि यहाँ उच्च बहि:स्राव वेग प्राप्त कर लेता है। बाह्य बल के अनुपस्थिति में पात्र तथा तरल का संवेग संरक्षित रहता है। अतः पात्र विपरीत दिशा में संवेग प्राप्त करता है। अर्थात् बाहर निकलता हुआ द्रव पात्र पर विपरीत दिशा में प्रणोद लगाता है।

(e) घूर्णन करती गेंद अपने साथ वायु को खींचती है। अतः गेंद के ऊपर व नीचे वायु के वेग में अन्तर आ जाता है। परिणामस्वरूप दाबों में भी अन्तर आ जाता है। इसी कारण गेंद पर भार के अतिरिक्त एक दूसरा बल भी लगने लगता है तथा गेंद का पथ परवलयाकार नहीं रह पाता है।

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प्रश्न 10.5
ऊँची एड़ी के जूते पहने 50 kg संहति की कोई बालिका अपने शरीर को 1.0 cm व्यास की एक ही वृत्ताकार एड़ी पर संतुलित किए हुए है। क्षैतिज फर्श पर एड़ी द्वारा आरोपित दाब ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है, F = mg = 50 × 9.8 N = 490 N
d = 1.0 cm, r = \(\frac{d}{2}\) = 0.5 cm
= 0.5 × 10-2 m = 5 × 10-3 m
फर्श का क्षैतिज क्षेत्रफल जहाँ एड़ी लगती है,
A = πr2
= 3.142 × (5 × 10-3)2
= 3.142 × 25 × 10-6 m2
माना एड़ी द्वारा क्षैतिज फर्श पर लगाया गया दाब P है।
अतः P = \(\frac{F}{A}\)
या P = \(\frac{490}{3.142 \times 25 \times 10^{-6}}\)
= 6.24 × 106 Pascal
P = 6.24 × 106 Pa

प्रश्न 10.6
टॉरिसिली के वायुदाब मापी में पारे का उपयोग किया गया था। पास्कल ने ऐसा ही वायुदाब मापी 984 kgm-3 घनत्व की फ्रेंच शराब का उपयोग करके बनाया। सामान्य वायुमंडलीय दाब के लिए शराब स्तंभ की ऊँचाई ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
माना सामान्य ताप पर संगत फ्रेंच शराब स्तम्भ की ऊँचाई h है।
साधारण वायुमण्डलीय दाब,
P = 1.013 × 105 पास्कल
माना शराब स्तम्भ के संगत दाब P’ है।
P’ = Hpωg
जहाँ pω = शराब का घनत्व = 984 kgm-3
प्रश्नानुसार, P’ = P
या hρωg = P
या h = \(\frac{P}{\rho_{w} g}\)
= \(\frac{1.013 \times 10^{5}}{984 \times 9.8}\) = 10.5 m

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प्रश्न 10.7
समुद्र तट से दूर कोई ऊर्ध्वाधर संरचना 109 Pa के अधिकतम प्रतिबल को सहन करने के लिए बनाई गई है। क्या यह संरचना किसी महासागर के भीतर किसी तेल कूप के शिखर पर रखे जाने के लिए उपयुक्त है? महासागर की गहराई लगभग 3 km है। समुद्री धाराओं की उपेक्षा कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
जल स्तम्भ की गहराई, L = 3 किमी
= 3 × 103 मीटर
जल का घनत्व, ρ = 103 किग्रा/मीटर3
माना जल स्तम्भ द्वारा आरोपित दाब P है।
∴ P = hpg
= 3 × 103 × 103 × 9.8
= 30 × 106 = 3 × 107 पास्कल
चूँकि संरचना को महासागर पर रखा गया है अतः महासागर का जल 3 × 107 पास्कल का दाब लगाता है।
चूँकि ऊर्ध्व संरचना पर अधिकतम भंजक प्रतिबल 109 है।
3 × 107 पास्कल < 109 पास्कल
अतः यह संरचना महासागर के भीतर तेल कूप के शिखर पर रखी जा सकती है।

प्रश्न 10.8
किसी द्रवचालित आटोमोबाइल लिफ्ट की संरचना अधिकतम 3000 kg संहति की कारों को उठाने के लिए की गई है। बोझ को उठाने वाले पिस्टन की अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल 425 cm है। छोटे पिस्टन को कितना अधिकतम दाब सहन करना होगा?
उत्तर:
दिया है:
बड़े पिस्टन पर अधिकतम सहनीय बल,
F = 3000 kgf = 3000 × 9.8 N
पिस्टन का क्षेत्रफल,
A = 425 cm2 = 425 × 10-4 m2
माना बड़े पिस्टन पर अधिकतम दाब P है।
अतः P = \(\frac{F}{A}\) = \(\frac{3000 \times 9.8}{425 \times 10^{-4}}\)
= 6.92 × 105 Pa
चूँकि द्रव सभी दिशाओं में समान दाब आरोपित करता है। अतः छोटी पिस्टन 6.92 × 105 पास्कल का अधिकतम दाब सहन करना होगा।

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प्रश्न 10.9
किसी U – नली की दोनों भजाओं में भरे जल तथा मेथेलेटिड स्पिरिट को पारा एक-दूसरे से पृथक् करता है। जब जल तथा पारे के स्तंभ क्रमशः 10 cm तथा 12.5 cm ऊँचे हैं, तो दोनों भुजाओं में पारे का स्तर समान है। स्पिरिट का आपेक्षित घनत्व ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
U नली की एक भुजा में जल की ऊँचाई,
h1 = 10 सेमी,
ρ1 = ग्राम/सेमी3
U नली की एक दूसरी भुजा में स्प्रिट की ऊँचाई, h2 = 12.5 सेमी,
ρ2 = ?
माना जल तथा स्प्रिट द्वारा लगाया गया दाब क्रमश: P1 व P2 है।
∴ P1 = h1ρ1g ……………… (i)
व P2 = h2ρ2g ………………….. (ii)
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चूँकि संरचना को महासागर पर रखा गया है अतः
P1 = P2
या h1ρ1g = h2ρ2 g
या ρ2 = \(\frac{h_{1} \rho_{1}}{h_{2}}\)
= \(\frac{0.8 \mathrm{gcm}^{-3}}{1 \mathrm{gcm}^{-3}}\) = 0.800

प्रश्न 10.10
यदि प्रश्न 10.9 की समस्या में, U – नली की दोनों भुजाओं में इन्हीं दोनों द्रवों को और उड़ेल कर दोनों द्रवों के स्तंभों की ऊँचाई 15 cm और बढ़ा दी जाए, तो दोनों भुजाओं में पारे के स्तरों में क्या अंतर होगा। (पारे का आपेक्षिक घनत्व = 13.6)।
उत्तर:
माना U – नली की दोनों भुजाओं में अन्तर h है।
माना पारे का घनत्व ρm है।
माना समान क्षैतिज पर दो बिन्दु A व B हैं।
∴ A पर दाब = B पर दाब
या P0 + hωρωg
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= P0 + hsρsg + hmρmg
जहाँ P0 = वायुमण्डलीय दाब
या hwρw = hsρs + hmPm
या hmρm = hwρw – hsρs ………………. (i)
दिया है जल स्तम्भ की ऊँचाई,
hw = 10 + 15 = 25 cm ……………….. (ii)
स्प्रिट स्तम्भ की ऊँचाई,
hs = 12.5 + 15 = 27.5 cm
ρw = 1 g cm-3
ρs = 0.8 cm-3
ρm = 13.6 g cm-3
समी० (i) व (ii) से
hm × 13.6 = 25 × 1-27.5 × 0.8
या hm = \(\frac{25-22.00}{13.6}\) = 0.2206
= 0.221 cm
या hm = 0.221 cm

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प्रश्न 10.11
क्या बर्नूली समीकरण का उपयोग किसी नदी की किसी क्षिप्रिका के जल-प्रवाह का विवरण देने के लिए किया जा सकता है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
बर्नूली समीकरण केवल धार – रेखी प्रवाह पर लागू होता है। नदी की क्षिप्रिका का जल-प्रवाह धारा रेखी प्रवाह नहीं होता है। इसलिए इसका विवरण देने के लिए बर्नूली समीकरण का प्रयोग नहीं किया जा सकता है।

प्रश्न 10.12
बर्नूली समीकरण के अनुप्रयोग में यदि निरपेक्ष दाब के स्थान पर प्रमापी दाब (गेज दाब) का प्रयोग करें तो क्या इससे कोई अंतर पड़ेगा? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
बर्नूली समीकरण से,
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माना दो बिन्दुओं पर वायुमण्डलीय व गेज दाब क्रमश:
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अतः दोनों बिन्दुओं पर वायुमण्डलीय दाबों में बहुत कम अन्तर होने पर परमदाब के स्थान पर गेज दाब का प्रयोग करने से कोई अन्तर नहीं पड़ेगा।

प्रश्न 10.13
किसी 1.5 m लंबी 1.0 cm त्रिज्या की क्षैतिज नली से ग्लिसरीन का अपरिवर्ती प्रवाह हो रहा है। यदि नली के एक सिरे पर प्रति सेकंड एकत्र होने वाली ग्लिसरीन का परिणाम 4.0 × 10-3 kgs -1 है, तो नली के दोनों सिरों के बीच दाबांतर ज्ञात कीजिए। (ग्लिसरीन का घनत्व = 1.3 × 103 kgm-3 तथा ग्लिसरीन की श्यानता = 0.83 Pas) [आप यह भी जाँच करना चाहेंगे कि क्या इस नली में स्तरीय प्रवाह की परिकल्पना सही है।
उत्तर:
दिया है:
r = 1.0 cm = 10-2 cm
l = 1.5 m
ρ = 1.3 × 10-2 kg m-3
प्रति सेकण्ड ग्लिसरीन का प्रवाहित द्रव्यमान
M = 4 × 10-3 kgs-1
ग्लिसरीन की श्यानता,
η = 0.83 Pas = 0.83 Nm-2s
माना नली के दोनों सिरों पर दाबान्तर P है।
रेनॉल्ड संख्या NR = ?
माना ग्लिसरीन का प्रति सेकण्ड प्रवाहित आयतन V है।
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पासले सूत्र से,
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धारा रेखीय प्रवाह की अभिग्रहीति जाँचने के लिए हम रेनॉल्ड संख्या का मान निकालते हैं –
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धारा रेखीय प्रवाह के लिए,
0 < Nr < 2000
समी० (i) व (ii) से,
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अत: प्रवाह स्तरीय (धारा रेखीय) है।

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प्रश्न 10.14
किसी आदर्श वायुयान के परीक्षण प्रयोग में वायु-सुरंग के भीतर पंखों के ऊपर और नीचे के पृष्ठों पर वायु-प्रवाह की गतियाँ क्रमश: 70 ms-1 तथा 63 ms-1 हैं। यदि पंख का क्षेत्रफल 2.5 m2 है, तो उस पर आरोपित उत्थापक बल परिकलित कीजिए। वायु का घनत्व 1.3 kgm-3 लीजिए।
उत्तर:
माना वायुयान के ऊपरी व निचली पर्तों की चाल क्रमशः v1 व v2 है तथा संगत दाब क्रमशः P1 व P2 है।
दिया है –
v1 = 70 मीटर/सेकण्ड
v2 = 63 मीटर/सेकण्ड
ρ = 1.3 किग्रा/मीटर3
माना पंखों की ऊपरी व निचले पर्ते समान ऊँचाई पर हैं।
h1 = h2
पंख का क्षेत्रफल, A = 2.5 मीटर2
बरनौली प्रमेय से,
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यह दाबान्तर ही वायुयान को ऊपर उठाता है। माना, पंखे पर आरोपित बल है।
अतः
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प्रश्न 10.15
चित्र (a) तथा (b) किसी द्रव (श्यानताहीन) का अपरिवर्ती प्रवाह दर्शाते हैं। इन दोनों चित्रों में से कौन सही नहीं है? कारण स्पष्ट कीजिए।
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उत्तर:
चित्र (a) सही नहीं है। चूंकि इस चित्र में, नलिका की ग्रीवा में अनुप्रस्थ क्षेत्रफल कम है। अत: अविरतता के सिद्धान्त से, यहाँ वेग अधिक होगा। अर्थात् बर्नूली प्रमेय से यहाँ जल दाब कम होगा जबकि चित्र (a) में ग्रीवा पर जल दाब अधिक दिखाया गया है।

प्रश्न 10.16
किसी स्प्रे पंप की बेलनाकार नली की अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल 8.0 cm2 है। इस नली के एक सिरे पर 1.0 mm व्यास के 40 सूक्ष्म छिद्र हैं। यदि इस नली के भीतर द्रव के प्रवाहित होने की दर 1.5 m min-1 है, तो छिद्रों से होकर जाने वाले द्रव की निष्कासन-चाल ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
A1 = 8 सेमी2 = 8 × 10-4 मीटर2
छिद्र की त्रिज्या,
r = 0.5 मिमी = 0.5 × 10-3 मीटर
छिद्रों का कुल क्षेत्रफल = 40 × π(r2)
= 40 × 3.14 × (0.5 × 10-3)2
= 0.3 × -4 मीटर2
vt = 1.5 मीटर/मिनट
= \(\frac{1.5}{60}\) = \(\frac{1}{40}\) मीटर/सेकण्ड
v2 = ?
सातत्यता समीकरण से,
A2v2 = A1v1
v2 = \(\frac{A_{1}}{A_{2}}\) v1
= \(\frac{8 \times 10^{-4}}{0.3 \times 10^{-4}}\) × 0.025
= 9.64 मीटर/सेकण्ड

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प्रश्न 10.17
U – आकार के किसी तार को साबुन के विलयन में डुबो कर बाहर निकाला गया जिससे उस पर एक पतली साबुन की फिल्म बन गई। इस तार के दूसरे सिरे पर फिल्म के संपर्क में एक फिसलने वाला हल्का तार लगा है जो 1.5 × 10-2 N भार (जिसमें इसका अपना भार भी सम्मिलित है) को सँभालता है। फिसलने वाले तार की लम्बाई 30 cm है। साबुन की फिल्म का पृष्ठ तनाव कितना है?
उत्तर:
दिया है:
तार की लंबाई,
l = 30 सेमी = 0.3 मीटर
तार पर लटका भार,
W = 1.5 × 10-2 न्यूटन
माना फिल्म का पृष्ठ तनाव S है।
अत: फिल्म के एक ओर के पृष्ठ के कारण तार पर लगने वाला बल,
F1 = s × l
दोनों पृष्ठों के कारण तार पर बल,
F1 = 2F1
= 2sl
यह बल (F) ही भार (W) को सन्तुलित करता है।
2sl = W
पृष्ठ तनाव, s = \(\frac{W}{2l}\)
= \(\frac{1.5 \times 10^{-2}}{2 \times 0.3}\)
= 2.5 × 10-2 न्यूटन प्रति मीटर

प्रश्न 10.18
निम्नांकित चित्र (a) में किसी पतली द्रव फिल्म को 4.5 × -2 N का छोटा भार सँभाले दर्शाया गया है। चित्र (b) तथा (c) में बनी इसी द्रव की फिल्में इसी ताप पर कितना भार सँभाल सकती हैं? अपने उत्तर को प्राकृतिक नियमों के अनुसार स्पष्ट कीजिए।
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उत्तर:
तीनों चित्रों में, फिल्म के नीचे वाले किनारे की लम्बाई 40 सेमी (समान) है। (F = 25 l) इस किनारे पर फिल्म के पृष्ठ तनाव (S) के कारण समान बल लगेगा। यह बल लटके हुए भार को साधता है। चूंकि साधने वाला बल प्रत्येक दशा में समान है। इसलिए चित्र (b) तथा (c) में भी वही भार 4.5 × -2 न्यूटन सँभाला जा सकता है।

प्रश्न 10.19
3.00 mm त्रिज्या की किसी पारे की बूंद के भीतर कमरे के ताप पर दाब क्या है? 20°C ताप पर पारे का पृष्ठ तनाव 4.65 × 10-1 Nm-1 है। यदि वायुमंडलीय दाब 1.01 × 105 Pa है, तो पारेकी बँद के भीतर दाब-आधिक्य भी ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
बूंद की त्रिज्या r = 3.0 mm
= 3.0 × 10-3 m
पारे का पृष्ठ तनाव,
T = 4.65 × 10-1 Nm-1
बूंद के बाहर दाब, P0 = वायुमण्डलीय दाब
= 1.01 × 105 Pa
माना कि बूंद के अन्दर दाब Pi है तब बूंद के अन्दर आधिक्य दाब निम्नवत् है –
P = Pi = P0 = \(\frac{2T}{r}\)
= \(\frac{2 \times 4.65 \times 10^{-1}}{3 \times 10^{-3}}\)
Pi = P + P0
= 310 + 1.01 × 105 Pa
= 1.01 × 105 + 0.00310 × 105
= 1.01310 × 105 × 105 Pa
अतः Pi = 1.01 × 105 Pa

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण

प्रश्न 10.20
5.00 mm त्रिज्या के किसी साबुन के विलयन के बुलबुले के भीतर दाब-आधिक्य क्या है? 20°C ताप पर साबुन के विलयन का पृष्ठ तनाव 2.50 × 10-2 Nm-1 है। यदि इसी विमा का कोई वायु का बुलबुला 1.20 आपेक्षिक घनत्व के साबुन के विलयन से भरे किसी पात्र में 40.0 cm गहराई पर बनता, तो इस बुलबुले के भीतर क्या दाब होता, ज्ञात कीजिए। (1 वायुमंडलीय दाब = 1.01 × 105 Pa)।
उत्तर:
साबुन के घोल का पृष्ठ तनाव,
T = 2.5 × 10-2 Nm-1
साबुन के घोल का घनत्व = ρ
= 1.2 × 103 kg m-3
साबुन के बुलबुले की त्रिज्या = r
= 5.0 mm
= 5.0 × 10-3 m
1 वायुमण्डलीय दाब = 1.01 × 105 Pa
साबुन के बुलबुले के अन्दर आधिक्य दाब निम्नवत् है –
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साबुन के घोल में वायु के बुलबुले के अन्दर आधिक्य दाब
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40 सेमी गहराई पर वायु के बुलबुले के बाहर दाब, P0 = वायुमण्डलीय दाब + 40 सेमी के कारण दाब
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∴ वायु के बुलबुले के अन्दर दाब
Pi = P0 + \(\frac{2T}{r}\)
= (1.06 × 105 + 10) Pa
= 1.06 × 105 + 0.00010 × 105
= 1.06010 × 105 Pa
= 1.06 × 105 Pa

Bihar Board Class 11 Physics तरलों के यांत्रिकी गुण Additional Important Questions and Answers

अतिरिक्त अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 10.21
1.0 m2 क्षेत्रफल के वर्गाकार आधार वाले किसी टैंक को बीच में ऊर्ध्वाधर विभाजक दीवार द्वारा दो भागों में बाँटा गया है। विभाजक दीवार में नीचे 20 cm2 क्षेत्रफल का कब्जेदार दरवाजा है। टैंक का एक भाग जल से भरा है तथा दूसरा भाग 1.7 आपेक्षिक घनत्व के अम्ल से भरा है। दोनों भाग 4.0 m ऊँचाई तक भरे गए हैं। दरवाजे को बंद रखने के आवश्यक बल परिकलित कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
दोनों ओर भरे द्रवों की ऊँचाई
hw = ha = 4 मीटर
जल का घनत्व pw = 103 किग्रा प्रति मीटर3
अम्ल का आपेक्षिक घनत्व = \(\frac{\rho_{a}}{\rho_{w}}\) = 1.7
दरवाजे का क्षेत्रफल
A = 20 सेमी2 = 2 × 10-3 मीटर2
जल की साइड से दरवाजे पर दाब
P1 = Pa + hwρωg
= Pa + 4 × 103 × 9.8
= Pa + 3.92 × 104 न्यूटन/मीटर2
अम्ल की साइड से दरवाजे पर दाब,
P2 = Pa + hwwg
= Pa + 4 × 103 × 9.8
= Pa + 3.92 × 104 न्यूटन/मीटर2
अम्ल की साइड से दरवाजे पर दाब,
P2 = Pa + haρa g
= Pa + ha \(\frac{\rho_{a}}{\rho_{w}}\) × g × ρw
= Pa + 4 × 1.7 × 9.8 × 103
= Pa + 6.66 × 104 न्यूटन/मीटर2
अतः दाबान्तर P = P2 – P1
= (6.66 – 3.92) × 104
= 2.74 × 104 न्यूटन/मीटर2
अतः दरवाजा बन्द रखने के लिए आवश्यक बल F = PA
= 2.74 × 104 × 2 × 10-3
= 54.8
= 55 न्यूटन

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प्रश्न 10.22
चित्र (a) में दर्शाए अनुसार कोई मैनोमीटर किसी बर्तन में भरी गैस के दाब का पाठ्यांक लेता है। पंप द्वारा कुछ गैस बाहर निकालने के पश्चात् मैनोमीटर चित्र
(b) में दर्शाए अनुसार पाठ्यांक लेता है। मैनोमीटर में पारा भरा है तथा वायुमंडलीय दाब का मान 76 cm (Hg) है।
(i) प्रकरणों (a) तथा (b) में बर्तन में भरी गैस के निरपेक्ष दाब तथा प्रमापी दाब cm (Hg) के मात्रक में लिखिए।
(ii) यदि मैनोमीटर की दाहिनी भुजा में 13.6 cm ऊँचाई तक जल (पारे के.साथ अमिश्रणीय) उड़ेल दिया जाए तो प्रकरण
(b) में स्तर में क्या परिवर्तन होगा?(गैस के आयतन में हुए थोड़े परिवर्तन की उपेक्षा कीजिए।)
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उत्तर:
(i) प्रकरण (a) में,
गैस का निरपेक्ष दाब = Pa + h
दिया है : h = 20 सेमी पारा व pa = 76 सेमी पारा (वायुमण्डलीय दाब)
निरपेक्ष दाब = 76 + 20 = 96 सेमी (पारा) लेकिन प्रमापी दाब (मेज दाब) = 20 सेमी (पारा)
प्रकरण (b) में,
गैस का निरपेक्ष दाब = Pa + h
= 76 – 18 (h = -18 सेमी)
= 58 सेमी (पारा) लेकिन प्रमापी दाब (गेज दाब)
= -18 सेमी (पारा)

(ii) जल स्तम्भ के दाब को सन्तुलित करने के लिए बाईं भुजा में पारा ऊपर चढ़ेगा। माना दोनों ओर के तलों का अन्तर h है।
माना h1 = 13.6 सेमी ऊँचे जल स्तम्भ का दाब h’1 ऊँचाई वाले पारे के स्तम्भ के दाब के समान है।
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प्रकरण (c) में गैस का निरपेक्ष दाब,
P = Pa + h’ + h’1
58 = 76 + h + 1
h = 58 – 77 = -19 सेमी।
अतः प्रथम स्तम्भ में पारे का तल दूसरे स्तम्भ की तुलना में 19 सेमी ऊँचा हो जाएगा।

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प्रश्न 10.23
दो पात्रों के आधारों के क्षेत्रफल समान हैं परंतु आकृतियाँ भिन्न-भिन्न हैं। पहले पात्र में दूसरे पात्र की अपेक्षा किसी ऊँचाई तक भरने पर दो गुना जल आता है। क्या दोनों प्रकरणों में पात्रों के आधारों पर आरोपित बल समान हैं। यदि ऐसा है तो भार मापने की मशीन पर रखे एक ही ऊँचाई तक जल से भरे दोनों पात्रों के पाठ्यांक भिन्न-भिन्न क्यों होते है।
उत्तर:
हाँ, दोनों प्रकरणों में पात्रों के आधारों पर आरोपित बल समान है। माना प्रत्येक पात्र में जल स्तम्भ की ऊँचाई h व आधार का क्षेत्रफल A है।
अतः आधार पर बल = जल स्तम्भ का दाब – क्षेत्रफल
= hρg × A = Ahρg
अत: दोनों पात्रों के आधारों पर समान बल लगेंगे। भाप मापने वाली मशीन, पात्रों के आधार पर लगने वाले बल को मापने के स्थान पर पात्र तथा जल का भार मापती है। चूँकि एक पात्र में दूसरे की तुलना में दो गुना जल है। अतः भार मापने की मशीन के पाठ्यांक अलग-अलग होंगे।

प्रश्न 10.24
रुधिर-आधान के समय किसी शिरा में,जहाँ दाब 2000 Pa है, एक सुई धुंसाई जाती है। रुधिर के पात्र को किस ऊँचाई पर रखा जाना चाहिए ताकि शिरा में रक्त ठीक-ठीक प्रवेश कर सके।
(सम्पूर्ण रुधिर का घनत्व सारणी 10.1 में दिया गया है।)
उत्तर:
दिया है:
शिरा में रक्त दाब,
P = 2000 Pa
रक्त का घनत्व ρ = 1.06 × 103 kg m-3
g = 9.8 ms-2
माना कि रक्त के पात्र की सुई से ऊँचाई = h
सूत्र P = hρg से,
h = \(\frac{P}{ρg}\)
= \(\frac{2000}{1.06 \times 10^{3} \times 9.8}\)
= \(\frac{1000}{106×49}\)
= 0.193 m
या h = 0.2 m

प्रश्न 10.25
बर्नूली समीकरण व्युत्पन्न करने में हमने नली में भरे तरल पर किए गए कार्य को तरल की गतिज तथा स्थितिज ऊर्जाओं में परिवर्तन के बराबर माना था।
(a) यदि क्षयकारी बल उपस्थित है, तब नली के अनुदिश तरल में गति करने पर दाब में परिवर्तन किस प्रकार होता है?
(b) क्या तरल का वेग बढ़ने पर क्षयकारी बल अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं? गुणात्मक रूप में चर्चा कीजिए।
उत्तर:
(a) क्षयकारी बल की अनुपस्थिति में बहते हुए द्रव के एकांक आयतन की सम्पूर्ण ऊर्जा स्थिर रहती है लेकिन क्षयकारी बल की उपस्थिति में नली में तरल के प्रवाह को बनाए रखने के लिए क्षयकारी बल के विरुद्ध कार्य करना पड़ता है।

अतः नली के अनुदिश चलने पर तरल का दाब अधिक तीव्रता से घटता जाता है। इसी कारण शहरों में जल की टंकी से बहुत दूरी पर स्थित मकानों की ऊँचाई टंकी से कम होने पर भी जल उनकी ऊपर वाली मंजिल तक नहीं पहुँच पाता है।

(b) हाँ, तरल का वेग बढ़ने पर तरल की अपरूपण दर। बढ़ती है। इस प्रकार क्षयकारी श्यान बल और ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

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प्रश्न 10.26
(a) यदि किसी धमनी में रुधिर का प्रवाह पटलीय प्रवाह ही बनाए रखना है तो 2 × 10-3 m त्रिज्या की किसी धमनी में रुधिर-प्रवाह की अधिकतम चाल क्या होनी चाहिए?
(b) तद्नुरूपी प्रवाह-दर क्या है? (रुधिर की श्यानता 2.084 × 10-3 Pas लीजिए)।
उत्तर:
दिया है:
η = 2.084 × 10-3
r = 2 c 10-3 मीटर

(a) माना रुधिर प्रवाह की अधिकतम चाल = vmax
सूत्र रेनाल्ड संख्या,
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= 0.98 मीटर/सेकण्ड

(b) माना तद्नुरूपी प्रवाह दर = प्रति सेकण्ड प्रवाहित रक्त = धमनी का अनुप्रस्थ परिच्छेद × रक्त प्रवाह की दर
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प्रश्न 10.27
कोई वायुयान किसी निश्चित ऊँचाई पर किसी नियत चाल से आकाश में उड़ रहा है तथा इसके दोनों पंखों में प्रत्येक का क्षेत्रफल 25 m2 है। यदि वायु की चाल पंख के निचले पृष्ठ पर 180 kmh-1 तथा ऊपरी पृष्ठ पर 234 kmh-1 है, तो वायुयान की संहति ज्ञात कीजिए। (वायु का घनत्व 1kgm-3 लीजिए)।
उत्तर:
माना पंख के ऊपरी व निचले पृष्ठ पर वायु का वेग क्रमशः v1 व v2 है।
v1 = 234 kmh-1
= 234 × \(\frac{5}{18}\)
= 65 ms-1
तथा v2 = 180 kmh-1
= 180 × \(\frac{5}{18}\)
= 50 ms-1
प्रत्येक पंख का क्षेत्रफल = 25 m2
पंख का कुल क्षेत्रफल,
A = 25 + 25 = 50 m2
अतः बर्नूली प्रमेय से दोनों पंखों के वायु का घनत्व
ρ = 1kg m-3
पृष्ठों के बीच दाबान्तर,
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प्रश्न 10.28
मिलिकन तेल बूंद प्रयोग में, 2.0 × 10-5 m त्रिज्या तथा 1.2 × 103 kgm-3 घनत्व की किसी बँद की सीमांत चाल क्या है? प्रयोग के ताप पर वायु की श्यानता 1.8 × 10-5 Pas लीजिए। इस चाल पर बूंद पर श्यान बल कितना है? (वायु के कारण बूंद पर उत्प्लावन बल की उपेक्षा कीजिए)।
उत्तर:
दिया है:
r = 2.0 × 10-5 m
ρ = 1.2 × 103 kgm-3,
η = 1.8 × 10-5 Nsm-2,
vT = ?; F = ?
सीमान्त वेग v = \(\frac{2}{9}\) r2 \(\frac{\left(p-\rho_{0}\right) g}{\eta}\)
चूँकि वायु के कारण बूँद का घनत्व नगण्य है।
वायु के लिए ρ0 = 0
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स्टोक्स के नियम से बूंद पर श्यान बल,
F = 6πηrnvT
= 6 × 3.142 × (1.8 × 10-5) × (2 × 10-5) × (5.8 × 10-2)
= 3.93 × 10-10 N

प्रश्न 10.29
सोडा काँच के साथ पारे का स्पर्श कोण 140° है। यदि पारे से भरी द्रोणिका में 1.00 mm त्रिज्या की काँच की किसी नली का एक सिरा डुबोया जाता है, तो पारे के बाहरी पृष्ठ के स्तर की तुलना में नली के भीतर पारे का स्तर कितना नीचे चला जाता है? (पारे का घनत्व = 13.6 × 103kgm-3)
उत्तर:
दिया है:
स्पर्श कोण, θ = 140°, r = 1 मिमी = 10-3 मीटर
पृष्ठ तनाव T = 0.465 न्यूटन प्रति मीटर
पारे का घनत्व ρ = 13.6 × 103 किग्रा प्रति मीटर
h = ?
cos θ = cos 140°
= – cos 40°
= -0.7660
सूत्र h = \(\frac{2T cosθ}{rρg}\) से
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यहाँ ऋणात्मक चिन्ह को छोड़ने पर यह प्रदर्शित करता है कि बाहर के पारे के स्तम्भ के सापेक्ष नली के स्तम्भ में अवनमन होता है।
अवनमन = 5.34 मिमी।

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प्रश्न 10.30
3.0 mm तथा 6.0 mm व्यास की दो संकीर्ण नलियों को एक साथ जोड़कर दोनों सिरों से खुली एक U – आकार की नली बनाई जाती है। यदि इस नली में जल भरा है, तो इस नली की दोनों भुजाओं में भरे जल के स्तरों में क्या अंतर है। प्रयोग के ताप पर जल का पृष्ठ तनाव 7.3 × 10-2 Nm-1 है। स्पर्श कोण शून्य लीजिए तथा जल का घनत्व 1.0 × 103 kgm -3 लीजिए। (g = 9.8 ms-2)
उत्तर:
दिया है:
जल का पृष्ठ घनत्व,
T = 7.3 × 10-2 Nm-1
जल का घनत्व ρ = 1 × 103 kg m-3
स्पर्श कोण, θ = 0°, g = 9.8 ms-2
माना दो संकीर्ण नलिकाओं के छिद्रों के व्यास D1 व D2 हैं।
अत: D1 = 3.0 mm तथा D2 = 6.0 mm
∴ त्रिज्याएँ, r1 = \(\frac{D_{2}}{2}\) = \(\frac{6}{2}\) = 3mm
= 3 × 10-3 m
माना U आकार की नली में पहली व दूसरी नली में जल क्रमश: h1 व h2 ऊँचाई तक चढ़ता है।
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r2 > r1
∴h1 > h2
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परिकलित्र/कम्प्यूटर – आधारित प्रश्न

प्रश्न 10.31
(a) यह ज्ञात है कि वायु का घनत्व ρ ऊँचाई y(मीटरों में) के साथ इस संबंध के अनुसार घटता है –
\(\rho=\rho_{0} e^{-y / y_{0}}\) यहाँ समुद्र तल पर वायु का घनत्व P0 = 125 kg m-3 तथा Y0 एक नियतांक है। घनत्व में इस परिवर्तन को वायुमंडल का नियम कहते हैं। यह संकल्पना करते हुए कि वायुमंडल का ताप नियत रहता है (समतापी अवस्था) इस नियम को प्राप्त कीजिए। यह भी मानिए किg का मान नियत रहता है।
(b) 1425 m3 आयतन का हीलियम से भरा कोई बड़ा गुब्बारा 400 kg के किसी पेलोड को उठाने के काम में लाया जाता है। यह मानते हुए कि ऊपर उठते समय गुब्बारे की त्रिज्या नियत रहती है, गुब्बारा कितनी अधिकतम ऊँचाई तक ऊपर उठेगा? [y0 = 8000 m तथा ρHe = 0.18 kg m-3 लीजिए।]
उत्तर:
(a) माना कि एक दूसरे से ऊर्ध्वाधर दूरी dy पर दो बिन्दु A व B हैं।
माना Y = बिन्दु A की समुद्र तल से ऊँचाई
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(i) P = A पर दाब
dp = A से B तक दाब में परिवर्तन
जैसे-जैसे हम समुद्र तल से ऊँचाई की ओर चलते हैं, दाब तथा घनत्व दोनों ही ऊँचाई के साथ बढ़ते हैं।
p – dp = B पर दाब
माना A तथा B पर घनत्व क्रमशः ρ व ρ – dρ हैं।
अतः A से B तक दाब में कमी = -dp
= बल/क्षेत्रफल = \(\frac{mg}{a}\) = \(\frac{mg}{V.a}\) V
= (\(\frac{m}{V}\))g. \(\frac{a}{a}\) dy
= ρgdy
चूँकि ताप नियत रहता है।
∴P ∝ ρ
(∵ बॉयल के नियम से p ∝ \(\frac{1}{V}\) ∝ \(\frac{1}{(M/ρ)}\) या \(\frac{P}{M}\) ∝ ρ)
या p = kp
जहाँ K नियतांक है।
समी० (i) व (ii) से,
-d(kp) = ρgdy
या \(\frac{dρ}{ρ}\) = \(\frac{g}{k}\) dy = 0 …………….. (iii)
समी (iii) का समाकलन करने पर,
∫ \(\frac{dρ}{ρ}\) + ∫\(\frac{g}{k}\) dy = C
या logeρ + \(\frac{g}{k}\) y = C …………….. (iv)
जहाँ C समाकलन नियतांक है।
माना Y = 0 पर ρ = ρ0
समी० (iv) से,
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दिया है: y0 = \(\frac{k}{g}\) नियतांक है।
(b) माना हीलियम का गुब्बारा Y ऊँचाई तक उड़ता है। गुब्बारे का आयतन, V = 1425 मीटर3
ρHeपेलोड = 400 gN
ρHeHe = 0.18 किग्रा-मीटर-3, ρ0 = 1.25 kgm-3
Y0 = 8km
माना He का द्रव्यमान = m
m = ρHe × y
= 0.18 × 1425
= 256.5 kg
लिफ्ट से अलग कुल लोड
= 400 + 256.5
= 656.5 N
माना ऊँचाई पर वायु का घनत्व है। साम्यावस्था में, लिफ्ट से अलग किया लोड = He के गुब्बारे का भार
या 656.5g = V × ρ × g
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या y = 0.997 × 8
= 7.98 km
~ 8 km
यदि ऊँचाई के साथ g में परिवर्तन माना जाए तब ऊँचाई लगभग 8.2 किमी० होगी।

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अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 9.1
4.7 m लम्बे व 3.0 × 10-5 m2 अनुप्रस्थ काट के स्टील के तार तथा 3.5 m लंबे व 4.0 × 10-5 m2 अनुप्रस्थ काट के ताँबे के तार पर दिए गए समान परिमाण के भारों को लटकाने पर उनकी लंबाइयों में समान वृद्धि होती है। स्टील तथा ताँबे के यंग प्रत्यास्थता गुणांकों में क्या अनुपात है।
उत्तर:
दिया है:
स्टील के तार के लिए,
तार की लम्बाई, l1 = 4.7 m
अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल
a = 3.0 × 10-5 m2
माना लम्बाई में वृद्धि, ∆l1 = ∆l
ताँबे के तार के लिए, तार की लम्बाई l2 = 3.5 m
अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल
a2 = 4.0 × 10-5 m2
माना लम्बाई में वृद्धि
∆l2 = ∆l; F2 = F
माना स्टील ताँबे के तार के यंग प्रत्यास्थता गुणांक Y1 व Y2 हैं।
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समी० (i) को (ii) से भाग देने पर
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प्रश्न 9.2
नीचे चित्र में किसी दिए गए पदार्थ के लिए प्रतिबल-विकृति वक्र दर्शाया गया है। इस पदार्थ के लिए –
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(a) यंग प्रत्यास्थता गुणांक तथा
(b) सन्निकट पराभव सामर्थ्य क्या है?
उत्तर:
(a) ग्राफ पर स्थित बिन्दु P पर विकृति,
E = 0.002 प्रतिबल, σ = 150 × 106 न्यूटन/मीटर2
सूत्र यंग प्रत्यास्थता गुणांक, Y = \(\frac{σ}{E}\) से
y = \(\frac{150 \times 10^{6}}{0.002}\)
= 7.5 × 1010 न्यूटन/मीटर2

(b) परास व सामर्थ्य = ग्राफ के उच्चतम बिन्दु के संगत प्रतिबल
= 290 × 106 न्यूटन प्रति मीटर2

प्रश्न 9.3
दो पदार्थों A और B के लिए प्रतिबल-विकृति ग्राफ चित्र में दर्शाए गए हैं। इन ग्राफों को एक ही पैमाना मानकर खींचा गया है।
(a) किस पदार्थ का यंग प्रत्यास्थता गुणांक अधिक है?
(b) दोनों पदार्थों में कौन अधिक मजबूत है?
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उत्तर:
(a) पदार्थ A के ग्राफ का ढाल दूसरे ग्राफ की तुलना में अधिक है; अत: पदार्थ A का यंग गुणांक अधिक है।
(b) दोनों ग्राफों पर पराभव बिन्दुओं की ऊँचाई लगभग बराबर है परन्तु पदार्थ A के ग्राफ, पदार्थ B की तुलना में प्लास्टिक क्षेत्र अधिक सुस्पष्ट है; अत: पदार्थ A अधिक मजबूत है।

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प्रश्न 9.4
निम्नलिखित दो कथनों को ध्यान से पढ़िये और कारण सहित बताइये कि वे सत्य हैं या असत्य –
(a) इस्पात की अपेक्षा रबड़ का यंग गुणांक अधिक है।
(b) किसी कुण्डली का तनन उसके अपरूपण गुणांक से निर्धारित होता है।
उत्तर:
(a) असत्य, चूँकि इस्पात व रबड़ से बने एक जैसे तारों में समान विकृति उत्पन्न करने के लिए इस्पात के तार में रबड़ की अपेक्षा अधिक प्रतिबल उत्पन्न होता है। इससे स्पष्ट है कि इस्पात का यंग गुणांक रबड़ से अधिक है।
(b) सत्य, चूँकि हम किसी कुण्डली या स्प्रिंग को खींचते हैं तो न तो स्प्रिंग निर्माण में लगे तार की लम्बाई में कोई परिवर्तन होता है और न ही उसका आयतन परिवर्तित होता है। स्प्रिंग का केवल रूप बदलता है। अतः स्प्रिंग का तनन उसके अपरूपण गुणांक से निर्धारित होता है।

प्रश्न 9.5
0.25 cm व्यास के दो तार, जिनमें एक इस्पात का तथा दूसरा पीतल का है, चित्र के अनुसार भारित है। बिना भार लटकाए इस्पात तथा पीतल के तारों की लम्बाइयाँ क्रमशः 1.5 m तथा 1.0 m हैं। यदि इस्पात तथा पीतल के यंग गुणांक क्रमशः 2.0 × 10111 Pa तथा 0.9 × 1011 हों तो इस्पात तथा पीतल के तारों में विस्तार की गणना कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
RS = RB = 0.125 cm
= 1.25 × 10-3 m
Ls = 1.5 m, LB = 1.0 m
YS = 2.0 × 1011 Pa,
YB = 0.91 × 1011 Pa
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जहाँ S व B क्रमश: इस्पात (Steel) तथा पीतल (Brass) को प्रदर्शित करते हैं। पीतल के तार पर केवल 6.0 kg द्रव्यमान के पिंड का भार लगा है, जबकि इस्पात के तार पर (6.0 + 4.0 = 10.0 kg) का भार लगा है।
∴ FB = 6.0 kg × 9.8 Nkg-1 = 58.8 N
FS = 10.0 kg × 9.8 Nkg-1 = 98 N
प्रत्येक का अनुप्रस्थ क्षेत्रफल A = πR2
= 3.14 × (1.25 × 10-3 m)2
= 4.91 × 10-6 m2
सूत्र Y = \(\frac{FL}{A∆L}\) से
पीतल के तार हेतु,
∆LB = \(\frac{F_{B} L_{B}}{A_{B} Y_{B}}\)
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तथा इस्पात के तार हेतु,
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= 14.96 × 10-5 m ~ 0.015 cm

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प्रश्न 9.6
ऐल्युमिनियम के किसी घन के किनारे 10 cm लम्बे हैं। इसकी एक फलक किसी ऊर्ध्वाधर दीवार से कसकर जुड़ी हुई है। इस घन के सम्मुख फलक से 100 kg का एक द्रव्यमान जोड़ दिया गया है। ऐल्युमीनियम का अपरूपण गुणांक 25 GPa है। इस फलक का ऊर्ध्वाधर विस्थापन कितना होगा?
उत्तर:
दिया है:
अपरूपण गुणांक G = 25 GPa
= 25 × 109 Nm-2
बल-आरोपित फलक का क्षेत्रफल
A = 10 cm × 10 cm
= 100 × 10-4 m2
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आरोपित बल
F = 100 kg × 9.8 Nkg-1 = 980 N
माना फलक का ऊर्ध्व विस्थापन = ∆x
जबकि L = 10 cm = 0.1 m
∴ सूत्र G = \(\frac{(F / A)}{(\Delta x / L)}\) से
फलक का विस्थापन
∆x = \(\frac{FL}{GA}\)
Bihar Board Class 11 Physics Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

प्रश्न 9.7
मृदु इस्पात के चार समरूप खोखले बेलनाकार स्तम्भ 50,000 kg द्रव्यमान के किसी बड़े ढाँचे को आधार दिये हुए हैं। प्रत्येक स्तम्भ की भीतरी तथा बाहरी त्रिज्याएँ क्रमश: 30 तथा 60 cm हैं। भार वितरण को एकसमान मानते हुए प्रत्येक स्तम्भ की संपीडन विकृति की गणना कीजिये।
उत्तर:
दिया है:
आन्तरिक त्रिज्या (भीतरी त्रिज्या)
Rint = 30 सेमी
= 0.3 मीटर बाहरी त्रिज्या,
Rext = 60 सेमी = 0.6 मीटर
प्रत्येक स्तम्भ का अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल
A = \(\pi R_{\mathrm{ext}}^{2}\) – \(\pi R_{\mathrm{int}}^{2}\)
= 3.14 [(0.6)2 – (0.3)2]
= 0.85 मीटर2
ढाँचे का सम्पूर्ण भार,
W = 50,000 × 9.8
= 4.9 × 105 न्यूटन
अतः प्रत्येक स्तम्भ पर भार,
F1 = \(\frac{1}{4}\)W =1.225 × 105 न्यूटन
हम जानते हैं कि इस्पात का यंग गुणांक,
Y = 2 × 1011 न्यूटन/मीटर2
सूत्र Y = \(\frac{FL}{A∆L}\) से
प्रत्येक स्तम्भ पर संपीडन विकृति
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चारों स्तम्भों पर संपीडन विकृति
= (0.72 × 10-6) × 4
= 2.88 × 10-6

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प्रश्न 9.8
ताँबे का एक टुकड़ा, जिसका अनुप्रस्थ परिच्छेद 15.2 mm × 19.1 mm का है, 44,500 N बल के तनाव से खींचा जाता है, जिससे केवल प्रत्यास्थ विरूपण उत्पन्न हो। उत्पन्न विकृति की गणना कीजिये।
उत्तर:
दिया है,
Y = 1.1 × 1011 Nm-2
A = परिच्छेद क्षेत्रफल
= 15.2 mm × 19.1 mm
= 15.2 × 10-3 m × 19.1 × 10-3 m
बल F = 44500N
परिणामी = विकृति = ?
Y = प्रतिबल/विकृति या विकृति
प्रतिबल/Y = \(\frac{F}{AY}\)
या अनुदैर्ध्य विकृति
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प्रश्न 9.9
1.5 cm त्रिज्या का एक इस्पात का केबिल भार उठाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यदि इस्पात के लिए अधिकतम अनुज्ञेय प्रतिबल 108 Nm-2 है तो उस अधिकतम भार की गणना कीजिए जिसे केबिल उठा सकता है।
उत्तर:
दिया है:
इस्पात के तार की त्रिज्या, r = 1.5 सेमी
= 1.5 × 10-2 मीटर
अधिकतम अनुज्ञेय प्रतिबल = 108 न्यूटन/मीटर2
तार का अनुप्रस्थ क्षेत्रफल,
A = πr2 = 3.14 × (1.5 × 10-2)2
अधिकतम भार जिससे केबिल उठा सकता है = अधिकतम बल = ?
अधिकतम बल सूत्र,
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अधिकतम बल = अधिकतम प्रतिबल × अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल
= 108 × π × (1.5 × 10-2)2
= 3.14 × 2.25 × 104 न्यूटन
अधिकतम बल जिससे केबिल उठा सकता है
= 7.1 × 104 न्यूटन

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प्रश्न 9.10
15 kg द्रव्यमान की एक दृढ़ पट्टी को तीन तारों, जिनमें प्रत्येक की लंबाई 2 m है, से सममित लटकाया गया है। सिरों के दोनों तार ताँबे के हैं तथा बीच वाला लोहे का है। तारों के व्यासों के अनुपात निकालिए, प्रत्येक पर तनाव उतना ही रहना चाहिए।
उत्तर:
माना कि ताँबे व लोहे के यंग गुणांक क्रमशः y1 व y2 है।
y1 = 110 × 109 न्यूटन/मीटर2 व y2 = 190 × 109 न्यूटन/मीटर2
माना कि ताँबे व लोहे के अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल क्रमश: a1 व a2 हैं तथा इनके व्यास क्रमश: a1 व a2 हैं।
सूत्र क्षेत्रफल = π(व्यास/2)2 से,
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दिया है:
L = 2 मीटर
माना प्रत्येक तार में उत्पन्न वृद्धि ∆l है तथा प्रत्येक तार में उत्पन्न तनाव F है।
सूत्र Y = प्रतिबल/विकृति से,
ताँबे के तार की विकृति = \(\frac{F / a_{1}}{Y_{1}}\)
तथा लोहे के तार की विकति = \(\frac{F / a_{2}}{Y_{2}}\)
चूँकि छड़ को सममित लटकाया गया है।
चूँकि दैनिक विकृति समान है।
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प्रश्न 9.11
एक मीटर अतानित लंबाई के इस्पात के तार के एक सिरे से 14.5 kg का द्रव्यमान बाँध कर उसे एक ऊर्ध्वाधर वृत्त में घुमाया जाता है, वृत्त की तली पर उसका कोणीय वेग 2 rev/s है। तार के अनुप्रस्थ परिच्छेद का क्षेत्रफल 0.065 cm है2। तार में विस्तार की गणना कीजिए जब द्रव्यमान अपने पथ के निम्नतम बिंदु पर है।
उत्तर:
निम्नतम बिन्दु पर द्रव्यमान के घूर्णन के कारण तार में उत्पन्न बल,
T – mg = \(\frac{m}{w^{2}}\)
जहाँ T = तार में तनाव है।
T = mg + \(\frac{m}{w^{2}}\)
= 14.5 × 9.8 + 14.5 × 1 × (4π)2
= 14.5 (9.8 + 16 × 9.87)
= 14.5 (9.8 + 157.92)
= 2431.94 N
प्रतिबल = \(\frac{T}{A}\) = \(\frac{2431.94}{65 \times 10^{7}}\)
विकृति = \(\frac{∆l}{l}\) = \(\frac{∆l}{l}\) = ∆l
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= 0.19 सेमी।

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प्रश्न 9.12
नीचे दिये गये आँकड़ों से जल के आयतन प्रत्यास्थता गुणांक की गणना कीजिए, प्रारंभिक आयतन = 100.0L दाब में वृद्धि = 100.0 atm (1 atm = 1.013 × 105Pa), अंतिम आयतन = 100.5 L नियत ताप पर जल तथा वायु के आयतन प्रत्यास्थता गुणांकों की तुलना कीजिए। सरल शब्दों में समझाइये कि यह अनुपात इतना अधिक क्यों है?
उत्तर:
दिया है:
P = 100 वायुमण्डलीय दाब
= 100 × 1.013 × 105 Pa (∵ 1 atm = 1.013 × 1015 Pa)
प्रारम्भिक आयतन,
V1 = 100 litre = 100 × 10-3 m-3
अन्तिम आयतन,
V2 = 100.5 litre = 100.5 × 10-3 m-3
आयतन में परिवर्तन = ∆V = V2 – V1
= (100.5 – 100) × 10-3 m-3
= 0.5 × 10-3 m3
जल का आयतन गुणांक = Kw = ?
सूत्र
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पुनः हम जानते हैं कि STP पर वायु का आयतन गुणांक
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= 20260
यह अनुपात बहुत अधिक है। अर्थात् जल का आयतन प्रत्यास्थता वायु की आयतन प्रत्यास्थता से बहुत अधिक है। इसका कारण यह है कि समान दाब द्वारा जल के आयतन में होने वाली कमी, वायु के आयतन में होने वाली कमी की तुलना में नगण्य होती है।

प्रश्न 9.13
जल का घनत्व उस गहराई पर, जहाँ दाब 80.0 atm हो, कितना होगा? दिया गया है कि पृष्ठ पर जल का घनत्व 1.03 × 103 kgm-3, जल की संपीडता 45.8 × 10-11 Pa -1 (1 Pa = 1Nm-2)
उत्तर:
दिया है:
P = 80 atm = 80 × 1.013 × 105 Pa
\(\frac{1}{k}\) = 45.8 × 10-11 Pa-1
पृष्ठ पर जल का घनत्व,
ρ = 1.03 × 103 किग्रा प्रति मीटर3
माना दी हुई गहराई पर जल का घनत्व ρ है।
माना M द्रव्यमान के जल के द्वारा पृष्ठ व दी हुई गहराई पर आयतन क्रमश: V व V’ है।
अत: V = \(\frac{M}{ρ}\) तथा V’ = \(\frac{M}{ρ’}\)
∴ आयतन में परिवर्तन
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पुनः हम जानते हैं कि जल का आयतन गुणांक निम्नवत्
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प्रश्न 9.14
काँच के स्लेब पर 10 atm का जलीय दाब लगाने पर उसके आयतन में भिन्नात्मक अंतर की गणना कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
P = 10 atm = 10 × 1.013 × 105 Pa
सारणी से, काँच के गुटके के लिए,
K = 37 × 109 Nm-2
काँच के गुटके के आयतन में भिन्नात्मक अन्तर
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प्रश्न 9.15
ताँबे के एक ठोस घन का एक किनारा 10 cm का है। इस पर 7.0 × 106 Pa का जलीय दाब लगाने पर इसके आयतन में संकुचन निकालिए।
उत्तर:
दिया है:
L = 10 cm = 0.1 m
ताँबे का आयतन गुणांक
= 140 × 109 Pa
P = 7 × 106 Pa
ठोस ताँबे के घन में आयतन सम्पीडन
= ∆V = ?
V = L3 = (0.1)3 = 0.001 m3
सूत्र,
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यहाँ ऋणात्मक चिह्न से स्पष्ट होता है कि आयतन संकुचित होता है।

प्रश्न 9.16
1 लीटर जल पर दाब में कितना अन्तर किया जाए कि वह 0.10% सम्पीडित हो जाए।
उत्तर:
दिया है:
V = 1 लीटर
∆V = -0.10% of V
= – \(\frac{0.10}{100}\) × 1 = – \(\frac{1}{1000}\) लीटर
माना ∆p = 1 लीटर जल संकुचित करने के लिए आवश्यक
दाब
पानी का आयतन प्रसार गुणांक
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Bihar Board Class 11 Physics ठोसों के यांत्रिक गुण Additional Important Questions and Answers

अतिरिक्त अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 9.17
हीरे के एकल क्रिस्टलों से बनी निहाइयों, जिनकी आकृति चित्र में दिखाई गयी है, का उपयोग अति उच्च दाब के अंतर्गत द्रव्यों के व्यवहार की जाँच के लिए किया जाता है। निहाई के संकीर्ण सिरों पर सपाट फलकों का व्यास 0.50 mm है। यदि निहाई के चौड़े सिरों पर 50,000 N का बल लगा हो तो उसकी नोंक पर दाब ज्ञात कीजिए।
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उत्तर:
दिया है:
आरोपित बल, F = 5 × 104 न्यूटन
व्यास, D = 5 × 10-4 मीटर
त्रिज्या, r = \(\frac{D}{2}\) = 2.5 × 10-4 m
क्षेत्रफल, A = πr2
= \(\frac{22}{7}\) × (2.5 × 10-4)2
नोंक पर दाब, P = ?
सूत्र P = \(\frac{F}{A}\) से,
P = \(\frac{5 \times 10^{4}}{\frac{22}{7} \times\left(2.5 \times 10^{-4}\right)^{2}}\)
= 0.255 × 1012 Pa
= 2.55 × 1011 Pa

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प्रश्न 9.18
1.05 m लंबाई तथा नगण्य द्रव्यमान की एक छड़ को बराबर लंबाई के दो तारों, एक इस्पात का (तार A) तथा दूसरा ऐल्युमीनियम का तार (तार B) द्वारा सिरों से लटका दिया गया है, जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। A तथा B के तारों के अनुप्रस्थ परिच्छेद के क्षेत्रफल क्रमशः 1.0 mm2 और 2.0 mm2 हैं। छड़ के किसी बिन्दु से एक द्रव्यमान m को लटका दिया जाए ताकि इस्पात तथा एल्युमीनियम के तारों में (a) समान प्रतिबल तथा
(b) समान विकृति उत्पन्न हो।
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उत्तर:
माना कि स्टील तथा एल्युमीनियम के दो तारों क्रमश: A व B की लम्बाई L है।
माना कि A तथा B के अनुप्रस्थ क्षेत्रफल क्रमश: a1 व a2 हैं।
a1 = 1 मिमी2 = (10-3)2 = 10-6 मीटर2
a2 = 2 मिमी2 = 2 × 10-6 मीटर2
सारणी से, स्टील के लिए,
Y1 = 2 × 1011 न्यूटन मीटर-2
एल्युमीनियम के लिए,
Y2 = 7 × 1019 न्यूटन मीटर-2
माना तारों के निचले सिरों पर लगाए गए बल F1 व F2 हैं।
(a) A तथा B पर प्रतिबल क्रमश: F1/a1 व F1/a2 हैं। जब दोनों प्रतिबल बराबर हैं, तब
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माना कि दोनों छड़ों से x व y दूरी पर लटकाए गए भार mg द्वारा आरोपित बल F1 व F2 हैं। तब
F1x = F2y
या \(\frac{F_{1}}{F_{2}}=\frac{y}{x}\) = \(\frac{y}{x}\) …………….. (ii)
समी० (i) व (ii) से,
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अतः द्रव्यमान m को A (स्टील तार.) से 0.7 मीटर या B(Al) से 0.35 मीटर की दूरी पर लटकाना चाहिए।
सूत्र y = प्रतिबल/विकृति से,
विकृति = प्रतिबल/Y
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इसी प्रकार समीकरण (ii) से,
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y तथा a के मानों को रखने पर,
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अतः द्रव्यमान m को तार A से 0.43 मीटर दूर लटकाना चाहिए।

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प्रश्न 9.19
मृदु इस्पात के एक तार, जिसकी लंबाई 1.0 m तथा अनुप्रस्थ परिच्छेद का क्षेत्रफल 0.50 × 10-2 cm है, को दो खम्भों के बीच क्षैतिज दिशा में प्रत्यास्थ सीमा के अंदर ही तनित किया जाता है। तार के मध्य बिंदु से 100 g का एक द्रव्यमान लटका दिया जाता है। मध्य बिंदु पर अवनमन की गणना कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
l = 1 मीटर
क्षेत्रफल:
A = 0.5 × 10-2 cm2
= 0.5 × 10-2 × (10-2 m2
= 0.5 × 10-6 m2
द्रव्यमान:
m = 100 g = 0.1 kg
भार W = mg = 0.1 × 9.8 N
माना तार की त्रिज्या r है।
A = πr2 = 0.5 × 10-6 m2
r2 = \(\frac{0.5 \times 10^{-6}}{\pi}\) m2
स्टील के लिए, y = 2 × 1011 Pa
अवनमन δ = ? = ?
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= 0.051 m
= 0.01 m

प्रश्न 9.20
धातु के दो पहियों के सिरों को चार रिवेट से आपस में जोड़ दिया गया है। प्रत्येक रिवेट का व्यास 6 mm है। यदि रिवेट पर अपरूपण प्रतिबल 6.9 × 107 Pa से अधिक नहीं बढ़ना हो तो रिवेट की हुई पट्टी द्वारा आरोपित तनाव का अधिकतम मान कितना होगा? मान लीजिए कि प्रत्येक रिवेट एक चौड़ाई भार वहन करता है।
उत्तर:
माना रिवेट पर w भार लगाया जाता है।
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प्रत्येक रिवेट पर आरोपित बल = \(\frac{ω}{4}\)
प्रत्येक रिवेट पर अधिकतम अपरूपण प्रतिबल
= 6.9 × 107 Pa
माना अपरूपण बल प्रत्येक रिवेट के A क्षेत्रफल पर लगाया जाता है।
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= \(\frac{W/4}{A}\) = \(\frac{W}{4A}\)
माना रिवेट पट्टी द्वारा लगाया गया अधिकतम तनाव Wmax है।
अत: \(\frac{W_{\max }}{4 A}\) = 6.9 × 107
या Wmax = 4A = 6.9 × 107
दिया है:
प्रत्येक रिवेट का व्यास
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प्रश्न 9.21
प्रशांत महासागर में स्थित मैरिना नामक खाई एक स्थान पर पानी की सतह से 11 km नीचे चली जाती है और उस खाई में नीचे तक 0.32 m3 आयतन का इस्पात का एक गोला गिराया जाता है, तो गोले के आयतन में परिवर्तन की गणना करें।खाई के तल पर जल का दाब 1.1 × 108 Pa है और इस्पात का आयतन गुणांक 160 GPa है।
उत्तर:
दिया है:
h = 11 km = 11 × 103 m
जल का घनत्व, ρ = 103 kgm-3
खाई के तल पर जल के 11 किमी स्तम्भ द्वारा लगाया गया दाब
ρ = hpg
= 11 × 103 × 103 × 10 Pa
V = 0.32 m3
∆V = ?
जल का आयतन गुणांक = K
= 2.2 × 104
= 2.2 × 104 × 105 Pa
= 2.2 × 109 Pa (∵ 1 atm = 105 Pa)
सूत्र
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= 0.016 m3

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 8 गुरुत्वाकर्षण

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 8 गुरुत्वाकर्षण Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 8 गुरुत्वाकर्षण

Bihar Board Class 11 Physics गुरुत्वाकर्षण Text Book Questions and Answers

अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 8.1
निम्नलिखित के उत्तर दीजिए:
(a) आप किसी आवेश का वैद्युत बलों से परिरक्षण उस आवेश को किसी खोखले चालक के भीतर रखकर कर सकते हैं। क्या आप किसी पिंड का परिरक्षण, निकट में रखे पदार्थ के गुरुत्वीय प्रभाव से, उसे खोखले गोले में रखकर अथवा किसी अन्य साधनों द्वारा कर सकते हैं?

(b) पृथ्वी के परितः परिक्रमण करने वाले छोटे अन्तरिक्षयान में बैठा कोई अन्तरिक्ष यात्री गुरुत्व बल का संसूचन नहीं कर सकता। यदि पृथ्वी के परितः परिक्रमण करने वाला अन्तरिक्ष स्टेशन आकार में बड़ा है, तब क्या वह गुरुत्व बल के संसूचन की आशा कर सकता है?

(c) यदि आप पृथ्वी पर सूर्य के कारण गुरुत्वीय बल की तुलना पृथ्वी पर चन्द्रमा के कारण गुरुत्व बल से करें, तो आप यह पाएँगे कि सूर्य का खिंचाव चन्द्रमा के खिंचाव की तुलना में अधिक है (इसकी जाँच आप स्वयं आगामी अभ्यासों में दिए गए आँकड़ों की सहायता से कर सकते हैं।) तथापि चन्द्रमा के खिंचाव का ज्वारीय प्रभाव सूर्य के ज्वारीय प्रभाव से अधिक है। क्यों?
उत्तर:
(a) नहीं।
(b) हाँ, यदि अंतरिक्ष यान का आकार उसके लिए इतना अधिक हो कि वह गुरुत्वीय त्वरण (g) के परिवर्तन का संसूचण कर सके।
(c) ज्वारीय प्रभाव दूरी के घन के व्युत्क्रमानुपाती होता है तथा इस अर्थ में यह उन बलों से भिन्न है जो दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होते हैं।

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प्रश्न 8.2
सही विकल्प का चयन कीजिए:
(a) बढ़ती तुंगता के साथ गुरुत्वीय त्वरण बढ़ता/घटता है।
(b) बढ़ती गहराई के साथ (पृथ्वी को एकसमान घनत्व को गोला मानकर) गुरुत्वीय त्वरण बढ़ता/घटता है।
(c) गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी के द्रव्यमान/पिंड के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता।
(d) पृथ्वी के केन्द्र से तथा दूरियों के दो बिन्दुओं के बीच स्थितिज ऊर्जा-अन्तर के लिए सूत्र
-GMm (1/r2 – 1/r1) सूत्र mg(r2 – r1) से अधिक/कम यथार्थ है।
उत्तर:
(a) घटता है।
(b) घटता है।
(c) पिंड के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता है।
(d) अधिक।

प्रश्न 8.3
मान लीजिए एक ऐसा ग्रह है जो सूर्य के परितः पृथ्वी की तुलना में दो गुनी चाल से गति करता है, तब पृथ्वी की कक्षा की तुलना में इसका कक्षीय आमाप क्या है?
उत्तर:
माना पृथ्वी व ग्रह का परिक्रमण काल क्रमश: TE व Tp हैं।
∴ Tp = \(\frac{T_{E}}{2}\)
माना कक्षीय आमाप क्रमशः re व rp हैं।
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अर्थात् ग्रह का आमाप पृथ्वी से 0.63 गुना छोटा है।

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प्रश्न 8.4
बृहस्पति के एक उपग्रह, आयो (lo), की कक्षीय अवधि 1.769 दिन तथा कक्षा की त्रिज्या 4.22 × 108 m है। यह दर्शाइए कि बृहस्पति का द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान का लगभग 1/1000 गुना है।
उत्तर:
दिया है:
सूर्य का द्रव्यमान = Ms = 2 × 30 kg
बृहस्पति के उपग्रह का आवर्त काल = T = 1.769 दिन
= 1.769 × 24 × 3600s
= 15.2841 × 104 s
बृहस्पति के चारों ओर उपग्रह की त्रिज्या
= r = 4.22 × 8 m
G = 6.67 × 10-11 Nm2kg-2
माना बृहस्पति का द्रव्यमान MJ है।
MJ = \(\frac{1}{1000}\)Ms सिद्ध करने के लिए
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अत: बृहस्पति का द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान का लगभग (1/1000) गुना है।

प्रश्न 8.5
मान लीजिए कि हमारी आकाशगंगा में एक सौर द्रव्यमान के 2.5 × 1011 तारे हैं। मंदाकिनीय केन्द्र से 50,000 105 ly दूरी पर स्थित कोई तारा अपनी एक परिक्रमा पूरी करने में कितना समय लेगा? आकाशगंगा का व्यास 105 ly लीजिए।
उत्तर:
एक सौर द्रव्यमान = 2 × 1030 kg
एक प्रकाश वर्ष = 9.46 × 1015 m
माना M = आकाश गंगा में तारे का द्रव्यमान
= 2.5 × 1011 × 2 × 1030 kg
= 5 × 1041 kg
तारे की कक्षा की त्रिज्या = r = मंदाकिनी के केन्द्र से तारे की दूरी
= 50,000 प्रकाश वर्ष
= 50,000 × 9.46 × 1015 m
G = 6.67 × 10-11 Nm2 kg-2
एक आवृत्ति काल = T
आकाशगंगा का व्यास = 105 प्रकाश वर्ष
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प्रश्न 8.6
सही विकल्प का चयन कीजिए:
(a) यदि स्थितिज ऊर्जा का शुन्य अनन्त पर है, तो कक्षा में परिक्रमा करते किसी उपग्रह की कुल ऊर्जा इसकी गतिज/स्थितिज ऊर्जा का ऋणात्मक है।
(b) कक्षा में परिक्रमा करने वाले किसी उपग्रह को पृथ्वी के गुरुत्वीय प्रभाव से बाहर निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा समान ऊँचाई (जितनी उपग्रह की है) के किसी स्थिर पिंड को पृथ्वी के प्रभाव से बाहर प्रक्षेपित करने के लिए आवश्यक ऊर्जा से अधिक/कम होती है।
उत्तर:
(a) गतिज ऊर्जा
(b) कम होती है।

प्रश्न 8.7
क्या किसी पिंड की पृथ्वी से पलायन चाल –

  1. पिंड के द्रव्यमान
  2. प्रक्षेपण बिन्दु की अवस्थिति
  3. प्रक्षेपण की दिशा
  4. पिंड के प्रमोचन की अवस्थिति की ऊँचाई पर निर्भर करती है।

उत्तर:

  1. नहीं
  2. नहीं
  3. नहीं
  4. हाँ।

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प्रश्न 8.8
कोई धूमकेत सूर्य की परिक्रमा अत्यधिक दीर्घवृत्तीय कक्षा में कर रहा है। क्या अपनी कक्षा में धूमकेतु की शुरू से अन्त तक –

  1. रैखिक चाल
  2. कोणीय चाल
  3. कोणीय संवेग
  4. गतिज ऊर्जा
  5. स्थितिज ऊर्जा
  6. कुल ऊर्जा नियत रहती है। सूर्य के अति निकट आने पर धूमकेतु के द्रव्यमान में ह्रास को नगण्य मानिये।

उत्तर:

  1. नहीं
  2. नहीं
  3. हाँ
  4. नहीं
  5. नहीं
  6. हाँ।

प्रश्न 8.9
निम्नलिखित में से कौन से लक्षण अन्तरिक्ष में अन्तरिक्ष यात्री के लिए दुःखदायी हो सकते हैं?
(a) पैरों में सूजन
(b) चेहरे पर सूजन
(c) सिरदर्द
(d) दिक्विन्यास समस्या।
उत्तर:
(b), (c) व (d)।

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प्रश्न 8.10
एक समान द्रव्यमान घनत्व की अर्धगोलीय खोलों द्वारा परिभाषित ढोल के पृष्ठ के केन्द्र पर गुरुत्वीय तीव्रता की दिशा देखिए चित्र]

  1. a
  2. b
  3. c
  4. 0 में किस तीर द्वारा दर्शायी जाएगी?

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उत्तर:
गोलों को पूरा करने पर, केन्द्र C पर नेट तीव्रता शून्य होगी। इसका तात्पर्य है कि केन्द्र C पर दोनों अर्धगोलों के कारण तीव्रताएँ परस्पर विपरीत व बराबर होंगी। अर्थात् दिशा (iii) C द्वारा व्यक्त होगी।

प्रश्न 8.11
उपरोक्त समस्या में किसी यादृच्छिक बिन्दु P पर गुरुत्वीय तीव्रता किस तीर –
(i) d
(ii) e
(iii) f
(iv) g द्वारा व्यक्त की जाएगी?
उत्तर:
(ii) (e) द्वारा व्यक्त होगी।

प्रश्न 8.12
पृथ्वी से किसी रॉकेट को सूर्य की ओर दागा गया है। पृथ्वी के केन्द्र से किस दूरी पर रॉकेट पर गुरुत्वाकर्षण बल शून्य है? सूर्य का द्रव्यमान = 2 × 1030 kg, पृथ्वी का द्रव्यमान = 6 × 1024 kg। अन्य ग्रहों आदि के प्रभावों की उपेक्षा कीजिए ( कक्षीय त्रिज्या = 15 × 1011 m)
उत्तर:
माना पृथ्वी के केन्द्र से दूरी पर सूर्य व पृथ्वी के कारण गुरुत्वाकर्षण बल बिन्दु P पर है। अतः रॉकेट पर गुरुत्वाकर्षण बल शून्य है।
माना सूर्य से पृथ्वी से बीच की दूरी = x = पृथ्वी की त्रिज्या
सूर्य का द्रव्यमान, Ms = 2 × 1030 किग्रा
पृथ्वी का द्रव्यमान Me = 6 × 1024 किग्रा
x = 1.5 × 1011 मीटर
माना रॉकेट का द्रव्यमान m है।
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बिन्दु P पर, सूर्य व रॉकेट के मध्य गुरुत्वाकर्षण बल
= पृथ्वी व रॉकेट के मध्य गुरुत्वाकर्षण बल।
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प्रश्न 8.13
आप सूर्य को कैसे तोलेंगे, अर्थात् उसके द्रव्यमान का आंकलन कैसे करेंगे? सूर्य के परितः पृथ्वी की कक्षा की औसत त्रिज्या 15 × 108 km है।
उत्तर:
हम जानते हैं कि पृथ्वी, सूर्य के चारों ओर 1.5 × 1011 मीटर त्रिज्या की कक्षा में घूमती है। पृथ्वी एक चक्कर 365 दिनों में पूरा करती है।
दिया है:
पृथ्वी की त्रिज्या = R = 1.5 × 1011 मीटर
सूर्य के चारों ओर पृथ्वी और पृथ्वी का आवर्तकाल,
T = 365
दिन = 365 × 24 × 60 × 60 से०,
G = 6.67 × 1011 न्यूटन-मीटर2 प्रति किग्रा2
जहाँ Ms = सूर्य का द्रव्यमान है = ?
हम जानते हैं कि –
जहाँ Ms = सूर्य का द्रव्यमान है।
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∴ सूर्य का द्रव्यमान = 2.0 × 1030 किग्रा।

प्रश्न 8.14
एक शनि वर्ष एक पृथ्वी-वर्ष का 29.5 गुना है। यदि पृथ्वी सूर्य से 15 × 108 km दूरी पर है, तो शनि सूर्य से कितनी दूरी पर है?
उत्तर:
केप्लर के नियम से,
i.e., T2 ∝ R3
∴ शनि के लिए \(T_{s}^{2} \propto R_{s}^{3}\) …………….. (i)
तथा पृथ्वी के लिए \(T_{e}^{2} \propto R_{c}^{3}\) ……………. (ii)
समी० (i) को (ii) से भाग देने पर,
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दिया है:
Ts = 29.5Te या \(\frac{T_{s}}{T_{e}}\) = 29.5
सूर्य से पृथ्वी की दूरी = Rs = 1.5 × 108 km
सूर्य से शनि की दूरी = Rs ……. (iv)
∴ समी० (iii) व (iv) से,
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= 1.43 × 107 किमी

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प्रश्न 8.15
पृथ्वी के पृष्ठ पर किसी वस्तु का भार 63N है। पृथ्वी की त्रिज्या की आधी ऊँचाई पर पृथ्वी के कारण इस वस्तु पर गुरुत्वीय बल कितना है?
उत्तर:
पृथ्वी के पृष्ठ से ऊँचाई = h = \(\frac{R}{2}\)
जहाँ R = पृथ्वी की त्रिज्या है।
हम जानते हैं कि gh = g[1 + \(\frac{h}{R}\))2
दिया है:
h = \(\frac{R}{2}\)
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माना m = वस्तु का द्रव्यमान है
माना पृथ्वी के पृष्ठ व hऊँचाई पर भार क्रमश: W व Wh हैं।
अतः w = mg = 63 N दिया है।
तथा Wh = mgh
= m × \(\frac{4}{9}\)g = \(\frac{4}{9}\) mg
= \(\frac{4}{9}\) × 63 = 28 N
∴ Wh = 28 N

प्रश्न 8.16
यह मानते हुए कि पृथ्वी एकसमान घनत्व का एक गोला है तथा इसके पृष्ठ पर किसी वस्तु का भार 250N है, यह ज्ञात कीजिए कि पृथ्वी के केन्द्र की ओर आधी दूरी पर इस वस्तु का भार क्या होगा?
उत्तर:
माना कि पृथ्वी के पृष्ठ तथा पृथ्वी के पृष्ठ से d दूरी पर गुरुत्व के कारण त्वरण क्रमशः g व gd हैं।
माना कि पृथ्वी के पृष्ठ तथा पृथ्वी के पृष्ठ से d दूरी पर भार क्रमश: W व Wd है।
∴ W = mg = 250 N ……. (i)
तथा Wd = mgd ……………….. (ii)
हम जानते हैं कि gd = g(1 – \(\frac{d}{R}\)) ………………. (iii)
दिया है: d = \(\frac{R}{2}\) जहाँ R = पृथ्वी की त्रिज्या। ………………… (iv)
∴ समी० (iii) व (iv) से,
gd = g(1- \(\frac{R/2}{R}\))
= g (1 – \(\frac{1}{2}\)) = g × \(\frac{1}{2}\)
= \(\frac{g}{2}\) ……………. (v)
∴ wd = mgd = m \(\frac{g}{2}\) (समी० (v) से)
= \(\frac{1}{2}\) mg = \(\frac{1}{2}\) W
= \(\frac{1}{2}\) × 250 = 125 N
∴ पृथ्वी के केन्द्र से आधी दूरी पर वस्तु पर वस्तु का भार
= 125 N

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प्रश्न 8.17
पृथ्वी के पृष्ठ से ऊर्ध्वाधरतः ऊपर की ओर कोई रॉकेट 5 kms-1 की चाल से दागा जाता है। पृथ्वी पर वापस लौटने से पूर्व यह रॉकेट पृथ्वी से कितनी दूरी तक जाएगा? पृथ्वी का द्रव्यमान = 6.0 × 1024 kg पृथ्वी की माध्य त्रिज्या = 6.4 × 106 m तथा G = 6.67 × 10-11 Nm2 kg-2
उत्तर:
माना रॉकेट की प्रारम्भिक चाल है रॉकेट की पृथ्वी से h ऊँचाई पर वेग शून्य है।
माना रॉकेट का द्रव्यमान m है तथा पृथ्वी के पृष्ठ पर इसकी सम्पूर्ण ऊर्जा
K.E. + P.E. = \(\frac{1}{2}\) mv2 – \(\frac{GMm}{R}\) ………………… (i)
जहाँ M = पृथ्वी का द्रव्यमान
R = पृथ्वी की त्रिज्या
G = सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक
उच्चतम बिन्दु पर K.E. = 0 (∵ वेग = 0)
तथा P.E. = –\(\frac{GMm}{R}\) ………….. (ii)
h ऊँचाई पर रॉकेट की सम्पूर्ण ऊर्जा
= K.E. + P.E. = 0 + P.E. = P.E.
= \(\frac{G M_{m}}{R+h}\) ……………….. (iii)
ऊर्जा संरक्षण के नियम से,
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दिया है: v = 5 km s-1 = 5000 ms-1
दिया है: R = 6.4 × 6 m
समी० (iv) में दिया मान रखने पर,
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∴ पृथ्वी के केन्द्र से दूरी
= R + h = 6.4 × 106 + 1.6 × 106
= 8.0 × 106 मीटर।

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प्रश्न 8.18
पृथ्वी के पृष्ठ पर किसी प्रक्षेप्य की पलायन चाल 11.2 kms-1 है। किसी वस्तु को इस चाल की तीन गुनी चाल से प्रक्षेपित किया जाता है। पृथ्वीसे अत्यधिक दूर जाने पर इस वस्तु की चाल क्या होगी? सूर्य तथा अन्य ग्रहों की उपस्थिति की उपेक्षा कीजिए।
उत्तर:
माना वस्तु की प्रारम्भिक व अन्तिम चाल v व v’ है।
माना वस्तु का द्रव्यमान m है।
वस्तु की प्रारम्भिक गतिज ऊर्जा
= \(\frac{1}{2}\) mv2
वस्तु की स्थितिज ऊर्जा (पृथ्वी की सतह पर)
= \(\frac{-GMm}{R}\)
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जहाँ M व R क्रमशः पृथ्वी के द्रव्यमान व त्रिज्या हैं।
वस्तु की अन्तिम स्थितिज ऊर्जा (अनन्त पर) = 0
वस्तु की अन्तिम गतिज ऊर्जा (अनन्त पर) = \(\frac{1}{2}\) mv2
ऊर्जा संरक्षण के नियम से,
प्रा० गतिज ऊर्जा + प्रा० PE = अन्तिम (KE + PE)
या \(\frac{1}{2}\) mv2 – \(\frac{GMm}{R}\) = \(\frac{1}{2}\) mv2 + 0
या \(\frac{1}{2}\) mv2 = \(\frac{1}{2}\) mv2 – \(\frac{GMm}{R}\) ……………….. (i)
Also Let ve = escape velocity
\(\frac{1}{2} m v_{e}^{2}\) = \(\frac{GMm}{R}\) ………….. (ii)
समी० (i) तथा (ii) से,
\(\frac{1}{2}\) mv2 = \(\frac{1}{2}\) mv2 – \(\frac{1}{2} m v_{e}^{2}\) …………….. (iii)
अब
ve = 11.2 kms-1
v = 3ve ……………… (iv) (दिया है)
समी० (iii) तथा (iv) से,
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= 31.7 kms-1

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प्रश्न 8.19
कोई उपग्रह पृथ्वी के पृष्ठ से 400 km ऊँचाई पर पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा है। इस उपग्रह को पृथ्वी के गुरुत्वीय प्रभाव से बाहर निकालने में कितनी ऊर्जा खर्च होगी? उपग्रह का द्रव्यमान = 200 kg; पृथ्वी का द्रव्यमान = 6.0 × 1024 kg; पृथ्वी की त्रिज्या = 6.4 × 106 m तथा G = 6.67 × 10-11 Nm2 kg-2
उत्तर:
माना पृथ्वी का द्रव्यमान व त्रिज्या क्रमशः M व R है।
माना पृथ्वी पृष्ठ से L ऊँचाई पर उपग्रह का द्रव्यमान m है।
h ऊँचाई पर कक्ष में वेग = कक्षीय वेग = v
कक्ष में उपग्रह की KE = \(\frac{1}{2}\) mv2
h ऊँचाई पर उपग्रह की स्थितिज ऊर्जा
= \(\frac{-GMm}{R+h}\)
अत: चक्रण करते उपग्रह की सम्पूर्ण ऊर्जा (KE + PE)
= \(\frac{1}{2}\) mv2 – \(\frac{GMm}{R+h}\)
= \(\frac{1}{2}\)m (\(\frac{GM}{R+h}\)) – \(\frac{GMm}{R+h}\)
(∵ h ऊँचाई पर कक्षीय वेग = \(\sqrt{\frac{G M}{R+h}}\))
= – \(\frac{1}{2}\) \(\frac{GMm}{R+h}\)
उपग्रह को पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण से बाहर भेजने के लिए इसकी गुरुत्वाकर्षण स्थितिज ऊर्जा शून्य होगी तथा इसकी गतिज ऊर्जा भी शून्य होगी।
पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से बाहर भेजने पर उपग्रह की अन्तिम ऊर्जा = 0
R ऊँचाई पर चक्रण करती वस्तु की ऊर्जा + दी गई ऊर्जा = 0 (ऊर्जा संरक्षण के नियम से)
उपग्रह को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से बाहर भेजने के लिए दी गई ऊर्जा
= E = – चक्रण करते उपग्रह की ऊर्जा
= -(\(\frac{1}{2}\) \(\frac{GMm}{R+h}\)) = \(\frac{1}{2}\) \(\frac{GMm}{R+h}\)
दिया है
h = 400 km
= 400 × 103 m, R = 6400 × 103 m,
G = 6.67 × 10-11 Nm2 kg-2
M = 6 × 1024 kg, m = 200 kg
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प्रश्न 8.20
दो तारे, जिनमें प्रत्येक का द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान (2 × 1030 kg) के बराबर है, एक दूसरे की ओर सम्मुख टक्कर के लिए आ रहे हैं। जब वे 109 km की दूरी पर हैं तब इनकी चाल उपेक्षणीय है। ये तारे किस चाल से टकराएंगे? प्रत्येक तारे की त्रिज्या 104 km है। यह मानिए कि टकराने के पूर्व तक तारों में कोई विरूपण नहीं होता (G के ज्ञात मान का उपयोग कीजिए)।
उत्तर:
दिया है:
प्रत्येक तारे का द्रव्यमान
M = 2 × 1030 किग्रा
दोनों तारों के मध्य प्रा० दूरी,
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r = 109 किमी = 1012 मीटर
प्रत्येक तारे का आकार = त्रिज्या
= r = 104 किमी = 107 मीटर
माना दोनों तारे एक दूसरे से v से टकराते हैं।
माना दोनों तारे की प्रा० चाल u है।
r दूरी पर रखे एक तारे की दूसरे के सापेक्ष स्थितिज ऊर्जा
PE = \(-\frac{G m_{1} m_{2}}{r}=-\frac{G M m}{r}\)
r दूरी पर KE = 0 [∵ u = 0]
सम्पूर्ण प्रा० ऊर्जा
KE + PE = 0 – \(\frac{G M^{2}}{r}\) = \(\frac{-G M^{2}}{r}\) ……………… (i)
माना दोनों तारों के केन्द्र r’ दूरी पर जब दोनों तारे एकदम टकराने वाले होते हैं = 2R
संघट्ट के बाद दोनों तारों की KE
= \(\frac{1}{2}\) mv2 + \(\frac{1}{2}\) mv2
– Mv2
संघट्ट के समय दोनों तारों की
PE = \(\frac{-GMM}{r’}\) = \(\frac{G M^{2}}{r}\)
ऊर्जा संरक्षण के नियम से
सम्पूर्ण प्रा० ऊर्जा = अन्तिम (ICE + IPE)
या \(\frac{-G M^{2}}{r}\) = Mv2 – \(\frac{G M^{2}}{2R}\)
या Mv2 = \(\frac{G M^{2}}{2R}\) – \(\frac{-G M^{2}}{r}\)
v2 = GM(\(\frac{1}{2R}\) – \(\frac{1}{r}\))

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प्रश्न 8.21
दो भारी गोले जिनमें प्रत्येक का द्रव्यमान 100 kg, त्रिज्या 0.10 m है किसी क्षैतिज मेज पर एक दूसरे से 1.0 m दूरी पर स्थित हैं। दोनों गोलों के केन्द्रों को मिलाने वाली रेखा के मध्य बिन्दु पर गुरुत्वीय बल तथा विभव क्या है? क्या इस बिन्दु पर रखा कोई पिंड संतुलन में होगा? यदि हाँ, तो यह सन्तुलन स्थायी होगा अथवा अस्थायी?
उत्तर:
माना दोनों गोले क्रमश: A व B बिन्दु पर रखे गए हैं। दोनों गोलों के बीच की दूरी = r = AB = 1 मीटर
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AB का मध्य बिन्दु 0 = AB × \(\frac{1}{2}\)
= \(\frac{1}{2}\) × 1m = 0.5 m
AO = OB
= \(\frac{1}{2}\) × 1m = 0.5 m
प्रत्येक गोले का द्रव्यमान = M = 100 kg
माना कि O बिन्दु पर रखी प्रत्येक वस्तु का द्रव्यमान = m
हम जानते हैं कि गुरुत्वाकर्षण बल,
F = \(\frac{G M m}{d^{2}}\)
माना A व b के कारण O पर बल क्रमश: FA व FB हैं। अतः
FA = \(\frac{G \times 100 \times m}{(0.5)^{2}}\) along OA
तथा FB = \(\frac{G \times 100 \times m}{(0.5)^{2}}\) along OB
चूँकि |\(\vec{F}\)A| = |\(\vec{F}\)B|
ये दोनों विपरीत दिशा में लगते हैं।
अतः O पर परिणामी बल = 0
इसका तात्पर्य यह है कि O बिन्दु पर रखी वस्तु पर कोई बल नहीं लगता है। अतः यह वस्तु सन्तुलन में है। लेकिन यह सन्तुलन अस्थिर है चूँकि A व B में सूक्ष्म विस्थापन से भी सन्तुलन बदला जाता है।
पुनः हम जानते हैं कि गुरुत्वाकर्षण विभव,
= – \(\frac{Gm}{d}\)
माना A व B बिन्दुओं पर रखे गोलों पर O के कारण गुरुत्वाकर्षण विभव क्रमश: VA व VB है।
अतः VA = \(\frac{G×100}{(0.5)}\) (∵d = 0.5)
तथा VB = – \(\frac{G×100}{(0.5)}\)
सम्पूर्ण विभव V = VA + VB
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अतः मध्यबिन्दु पर रखी वस्तु अस्थिर सन्तुलन में होती है।

Bihar Board Class 11 Physics गुरुत्वाकर्षण Additional Important Questions and Answers

अतिरिक्त अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 8.22
जैसा कि आपने इस अध्याय में सीखा है कि कोई तुल्यकाली उपग्रह पृथ्वी के पृष्ठ से लगभग 36,000 km ऊँचाई पर पृथ्वी की परिक्रमा करता है। इस उपग्रह के निर्धारित स्थल पर पृथ्वी के गुरुत्व बल के कारण विभव क्या है? (अनन्त पर स्थितिज ऊर्जा शून्य लीजिए।) पृथ्वी का द्रव्यमान = 6.0 × 1024 kg; पृथ्वी की त्रिज्या = 6400 km.
उत्तर:
दिया है:
ME = 6 × 1024 किग्रा
RE = 6400 किमी = 6.4 × 106 मीटर
h = 36 × 106 मीटर
हम जानते हैं कि गुरुत्वीय विभव
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= -9.4 × 106 जूल प्रति किग्रा

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प्रश्न 8.23
सूर्य के द्रव्यमान से 2.5 गुने द्रव्यमान का कोई तारा 12 km आमाप से निपात होकर 1.2 परिक्रमण प्रति सेकण्ड से घूर्णन कर रहा है। (इसी प्रकार के संहत तारे को न्यूट्रॉन तारा कहते हैं कुछ प्रेक्षित तारकीय पिंड, जिन्हें पल्सार कहते हैं, इसी श्रेणी में आते हैं।) इसके विषुवत् वृत्त पर रखा कोई पिंड, गुरुत्व बल के कारण, क्या इसके पृष्ठ से चिपका रहेगा? (सूर्य का द्रव्यमान = 2 × 1030 kg)
उत्तर:
तारे से चिपके तारकीय पिंड के लिए, तीर का गुरुत्वाकर्षण बल अभिकेन्द्र बल के बराबर या अधिक होगा। इस दशा में अभिकेन्द्र बल, गुरुत्वाकर्षण बल से अधिक नहीं होगा तथा पिंड नहीं उड़ेगा।
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अतः तारे से तारकीय पिंड से चिपकने के लिये, गुरुत्व के कारण तारे पर त्वरण ≥ अभिकेन्द्रीय त्वरण
दिया है:
r = 12 km = 12 × 103 m
आवृत्ति v = 1.5 rps
w = 2πv = 2π × 1.5 = 3 × rads-1
अभिकेन्द्रीय त्वरण,
ac = \(\frac{v^{2}}{r}\) = rω2
= 12 × 103 × (3π2) …………… (i)
= 12 × 103 × 9 × 9.87
= 1065.96 × 103 ms-2
= 1.1 × 106 ms-1
पुनः हम जानते हैं कि तारे पर गुरुत्व के कारण त्वरण निम्नवत् है –
g = \(\frac{G M}{r^{2}}\) ……………… (ii)
दिया है:
M = सूर्य के द्रव्यमान का 2.5 गुना
= 2.5 × 2 × 1030 kg (∵ सूर्य का द्रव्यमान = 2 × 1030 kg)
= 5 × 1030
r = 12 km
G = 6.67 × 10-11 Nm2kg-2 …………… (iii)
समी० (ii) व (iii) से,
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समीकरण (i).व (iv) से,
g >> a
अतः पिंड तारे से चिपका रहेगा।

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प्रश्न 8.24
कोई अन्तरिक्षयान मंगल पर ठहरा हुआ है। इस अन्तरिक्षयान पर कितनी ऊर्जा खर्च की जाए कि इसे सौरमण्डल से बाहर धकेला जा सके। अन्तरिक्षयान का द्रव्यमान = 1000 kg; सूर्य का द्रव्यमान = 2 × 1030 kg; मंगल का द्रव्यमान = 6.4 × 1023 kg; मंगल की त्रिज्या = 3395 km; मंगल की कक्षा की त्रिज्या = 2.28 × 108 km तथा G = 6.67 × 10-11 Nm2kg-2
उत्तर:
G = 6.67 × 10-11 Nm2kg-2
माना कि सूर्य के सापेक्ष मंगल का द्रव्यमान व त्रिज्या क्रमश: M व R है।
दिया है:
सूर्य का द्रव्यमान M = 2 × 1030 kg
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व्यक्ति की सूर्य के चारों ओर त्रिज्या,
= R = 2.28 × 108 km
मंगल की त्रिज्या = R’ = 3395 km
मंगल का द्रव्यमान = M’ = 6.4 × 1023 kg
सौरमण्डल का द्रव्यमान m = 1000 किग्रा
सूर्य के गुरुत्वाकर्षण के कारण अन्तरिक्षयान की स्थितिज ऊर्जा
= \(\frac{-GMm}{R}\) ………………. (i)
मंगल के गुरुत्वाकर्षण के कारण सौरमण्डल की स्थितिज ऊर्जा
= \(\frac{-GM’m}{R’}\) …………….. (ii)
मंगल के पृष्ठ पर अन्तरिक्षयान की सम्पूर्ण स्थितिज ऊर्जा
= \(\frac{-GMm}{R}\) – \(\frac{GM’m}{R’}\) ……………. (iii)
चूँकि अन्तरिक्षयान की KE शून्य है .
∴ अन्तरिक्षयान की सम्पूर्ण ऊर्जा
= KE + PE = 0 + PE
= \(\frac{-GMm}{R}\) + \(\frac{GM’m}{R’}\)
= -Gm \(\frac{M}{R}\) + \(\frac{M’}{R’}\) ………………. (iv)
अन्तरिक्षयान को सौरमण्डल से बाहर करने के लिए, इसकी गतिज ऊर्जा इतनी बढ़ानी चाहिए जिससे इस ऊर्जा का मान, मंगल के पृष्ठ पर ऊर्जा के समान हो जाए।
अभीष्ट ऊर्जा = – (अन्तरिक्षयान की सम्पूर्ण ऊर्जा)
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प्रश्न 8.25
किसी रॉकेट को मंगल के पृष्ठ से 2 kms-1 की चाल से ऊर्ध्वाधर ऊपर दागा जाता है। यदि मंगल के वातावरणीय प्रतिरोध के कारण इसकी 20% आरंभिक ऊर्जा नष्ट हो जाती है, तो मंगल के पृष्ठ पर वापस लौटने से पूर्व यह रॉकेट मंगल से कितनी दूरी तक जाएगा? मंगल का द्रव्यमान = 6.4 × 1023 kg; मंगल की त्रिज्या = 3395 km तथा G = 6.67 × 10-11 Nm 2kg-2
उत्तर:
माना रॉकेट का द्रव्यमान m है।
दिया है:
मंगल का द्रव्यमान, M = 6.4 × 1023 किग्रा
मंगल की त्रिज्या, R = 3395 किमी
गुरुत्वाकर्षण नियतांक
G = 6.67 × 10-11 न्यूटन-मीटर2 प्रति किग्रा2
माना कि रॉकेट मंगल से h ऊँचाई तक पहुँचता है।
माना कि मंगल के पृष्ठ से रॉकेट को प्रारम्भिक चाल v से छोड़ा जाता है।
रॉकेट की प्रारम्भिक गतिज ऊर्जा = \(\frac{1}{2}\) mv2
व रॉकेट की प्रारम्भिक स्थितिज ऊर्जा = \(\frac{-GMm}{R}\)
रॉकेट की सम्पूर्ण प्रा० ऊर्जा = K.E. + P.E.
= \(\frac{1}{2}\) mv2 – \(\frac{GMm}{R}\)
चूँकि h ऊँचाई पर 20% ऊर्जा नष्ट हो जाती है जबकि 80% ऊर्जा संचित रहती है।
संचित ऊर्जा = \(\frac{80}{100}\) × \(\frac{1}{2}\) mv2
सम्पूर्ण उपलब्ध प्रा० ऊर्जा,
= \(\frac{4}{5}\) \(\frac{1}{2}\) mv2 – \(\frac{GMm}{R}\)
= 0.4 mv2 – \(\frac{GMm}{R}\)
h ऊँचाई पर रॉकेट की स्थितिज ऊर्जा = \(\frac{-GMm}{R+h}\)
h ऊँचाई पर K.E. = 0
ऊर्जा संरक्षण के नियम से,
सम्पूर्ण प्रा० ऊर्जा = सम्पूर्ण अन्तिम ऊर्जा
∴ प्रा० (KE + PE) = अन्तिम (KE + PE)
= 0 + P.E. = P.E.
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दिया है:
Bihar Board Class 11 Physics Chapter 8 गुरुत्वाकर्षण
= 495 × 103 m
= 495 किमी

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

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Bihar Board Class 11 Physics कणों के निकाय तथा घूर्णी गति Text Book Questions and Answers

अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 7.1
एक समान द्रव्यमान घनत्व के निम्नलिखित पिंडों में प्रत्येक के द्रव्यमान केंद्र की अवस्थिति लिखिए:
(a) गोला
(b) सिलिंडर
(c) छल्ला तथा
(d) घन। क्या किसी पिंड का द्रव्यमान केंद्र आवश्यक रूप से उस पिंड के भीतर स्थित होता है?
उत्तर:
(a) गोला
(b) सिलिंडर
(c) छल्ला व
(d) घन, चारों का द्रव्यमान केन्द्र उनका ज्यामितीय केन्द्र होता है। नहीं, जहाँ कोई पदार्थ नहीं है। जैसे वलय, खोखले सिलिंडर व खोखले गोले में द्रव्यमान केन्द्र पिंड के बाहर भी हो सकता है।

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प्रश्न 7.2
HCL अणु में दो परमाणुओं के नाभिकों के बीच पृथकन लगभग 1.27 Å (1Å = 10-10 m) है। इस अणु के द्रव्यमान केंद्र की लगभग अवस्थिति ज्ञात कीजिए।यह ज्ञात है कि क्लोरीन का परमाणु हाइड्रोजन के परमाणु की तुलना में 35.5 गुना भारी होता है तथा किसी परमाणु का समस्त द्रव्यमान उसके नाभिक पर केंद्रित होता है।
उत्तर:
माना द्रव्यमान केन्द्र H परमाणु से x दूरी पर है। माना हाइड्रोजन परमाणु का द्रव्यमान, m1 = m
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तथा क्लोरीन परमाणु का द्रव्यमान m2 = 35.5 m
माना द्रव्यमान केन्द्र (मूलबिन्दु) के सापेक्ष H व Cl \(\vec{r}_{1}\) व \(\vec{r}_{2}\) दूरी पर है।
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या m1\(\vec{r}_{1}\) + m2\(\vec{r}_{2}\) = 0 यहाँ
\(\vec{r}_{1}\) = – x\(\hat { i } \) व \(\vec{r}_{2}\) = (1.27 – x)\(\hat { i } \)
∴ m(-x\(\hat { i } \)) + 35.5m (1.27 – x) \(\hat { i } \) = 0
∴ m(-x\(\hat { i } \)) + 35.5m (1.27 – x)\(\hat { i } \) = 0
∴ x = \(\frac{35.5×1.27}{36.5}\)
= 1.235 = 1.2 Å
अर्थात् द्रव्यमान केन्द्र H – परमाणु से 1.24 Å की दूरी पर Cl परमाणु की ओर है।

प्रश्न 7.3
कोई बच्चा किसी चिकने क्षैतिज फर्श पर एकसमान चाल v से गतिमान किसी लंबी ट्राली के एक सिरे पर बैठा है। यदि बच्चा खड़ा होकर ट्राली पर किसी भी प्रकार से दौड़ने लगता है, तब निकाय (ट्राली + बच्चा) के द्रव्यमान केंद्र की चाल क्या है?
उत्तर:
प्रश्नानुसार, ट्राली एक चिकने क्षैतिज फर्श पर गति कर रही है। इसलिए फर्श के चिकना होने के कारण निकाय पर क्षैतिज दिशा में कोई बाह्य बल नहीं लगता है। परन्तु जब बच्चा दौड़ता है तब बच्चे द्वारा ट्राली पर व ट्राली द्वारा बच्चे पर लगाए गए दोनों ही बल आन्तरिक बल होते हैं।
∴ \(\vec{F}\)ext = 0
संवेग संरक्षण के नियमानुसार M\(\vec{V}\)cm = नियतांक
∴ \(\vec{V}\)cm = नियतांक
अतः द्रव्यमान केन्द्र की स्थित चाल होगी।

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प्रश्न 7.4
दर्शाइये कि a एवं b के बीच बने त्रिभुज का क्षेत्रफल a × b के परिमाण का आधा है।
उत्तर:
माना ∆AOB की संलग्न भुजाओं के सदिश \(\vec{a}\) व \(\vec{b}\)
∴ \(\vec{O}\)A – \(\vec{b}\), \(\vec{O}\)B + \(\vec{a}\) या OA = b, OB = a
माना \(\bar{a}\) तथा \(\bar{b}\) के बीच कोण θ है।

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तथा माना त्रिभुज की ऊँचाई h है।
∴ h = AC
समकोण ∆OCA में,
sin θ = \(\frac{AC}{OA}\)
या AC = OA sin θ
या h = b sin θ …………… (i)
हम जानते हैं कि त्रिभुज AOB का क्षेत्रफल
= \(\frac{1}{2}\) × आधार × ऊँचाई
= \(\frac{1}{2}\) × OB × AC = \(\frac{1}{2}\) × a × h
= \(\frac{1}{2}\) × a × b sin θ
= \(\frac{1}{2}\) ab sin θ ………………. (ii)
पुनः सदिश गुणन के नियम से
\(\vec{a}\) × \(\vec{b}\) = ab sin θ \(\hat { n } \)
या |\(\vec{a}\) × \(\vec{b}\)| = |ab sin θ \(\hat { n } \)]
= ab sin θ [∵|\(\hat { n } \)| = 1] …………….. (iii)
∆AOB का क्षेत्रफल
= \(\frac{1}{2}\) |\(\vec{a}\) × \(\vec{b}\)|
= \(\frac{1}{2}\) \(\vec{a}\) × \(\vec{b}\) का परिमाण।

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प्रश्न 7.5
दर्शाइये कि a (bx c) का परिमाण तीन सदिशों a, b एवं c से बने समान्तर षट्फलक के आयतन के बराबर है।
उत्तर:
माना OABCDEFG एक समान्तर षट्फलक है जिसकी भुजाएँ क्रमश: OA, OC व OE हैं।
माना कि \(\vec{O}\)A = \(\vec{b}\), \(\vec{O}\)C = व \(\vec{O}\)E = \(\vec{a}\)
यहाँ \(\bar{a}\) व समान्तर चतुर्भुज OABC की संलग्न भुजाएँ हैं।
∴ \(\vec{S}\) = \(\vec{b}\) × \(\vec{c}\) = s\(\hat { n } \)
जहाँ \(\hat { n } \), \(\vec{S}\) के अनुदिश एकांक सदिश है जो कि भुजाओं \(\vec{b}\) व \(\vec{c}\) कोण तल के लम्बवत् है, व S तल OABC का क्षेत्रफल है। माना \(\vec{a}\), \(\vec{s}\) से θ कोण पर है।
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∴ \(\vec{a}\) (\(\vec{b}\) × \(\vec{c}\)) = \(\vec{a}\).\(\vec{s}\) = \(\vec{a}\).\(\hat { n } \)S
= a cos θ.S
= hS ……….. (i)
जहाँ h = a cos θ = \(\vec{a}\) के शीर्ष द्वारा समचतुर्भुज OABC पर डाला गया लम्ब EE’ \(\bar{a}\) की ऊँचाई।
पुनः माना V = समषट्फलक OABC = DEFG का आयतन है।
∴ V = तल OABC का क्षेत्रफल × OABC तल पर E से अभिलम्ब
= S × h
समी० (i) व (ii) से,
v = \(\vec{a}\).(\(\vec{b}\) × \(\vec{c}\)) इति सिद्धम्

प्रश्न 7.6
एक कण, जिसके स्थिति सदिश r के x, y, z अक्षों के अनुदिश अवयव क्रमशःx, y, हैं,और रेखीय संवेग सदिश P के अवयव px, Py, Pz हैं, के कोणीय संवेग 1 के अक्षों के अनुदिश अवयव ज्ञात कीजिए। दर्शाइये, कि यदि कण केवल x – y तल में ही गतिमान हो तो कोणीय संवेग का केवल z – अवयव ही होता है।
उत्तर:
माना OX, OY तथा OZ तीन परस्पर लम्बवत् अक्ष हैं। माना x – y तल में स्थिति सदिश \(\vec{O}\)P = \(\vec{r}\) एक बिन्दु P है।
माना रेखीय संवेग \(\vec{P}\) का \(\hat{r}\) से कोण θ है व कोणीय संवेग \(\vec{L}\)। है।
∴ \(\vec{L}\) = \(\hat{r}\) × \(\hat{p}\) …………….. (i)
यह एक संवेग राशि है जिसकी दिशा दाएँ हाथ के नियम से दी जा सकती है। चूँकि \(\hat{r}\) व \(\hat{p}\) तल OXY में हैं।
अतः
\(\vec{r}\) = x\(\hat{i}\) + y\(\hat{j}\) + z\(\hat{k}\)
तथा \(\vec{p}\) = px\(\hat{i}\) + py\(\hat{j}\) + pz\(\hat{k}\) ………….. (ii)
∴ समी० (i) व (ii) से,
\(\vec{L}\) = (x\(\hat{i}\) + y\(\hat{j}\) + z\(\hat{k}\)) × (px\(\hat{i}\) + py\(\hat{j}\) + pz\(\hat{k}\))
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तुलना करने पर,
Lx = yPz – zpy
Ly = zPx – xPz
Lz = xpy – ypx …….. (iii)
समी० (iii) से, x, y व z – अक्षों के अनुदिश \(\vec{z}\) के अभीष्ट घटक प्राप्त होते हैं।

(b) हम जानते हैं कि xy – तल में गतिमान कण पर लगने वाला बलाघूर्ण
iz = xFy – yFz ………….. (i)
जहाँ \(\hat{i}\)z = xy तल में गतिमान गण z अक्ष के अनुदिश लगने वाले बलाघूर्ण का घटक है।
माना xy – \(\vec{v}\) तल में वेग से गतिमान कण का द्रव्यमान = m
इस वेग के vx, व vy घटक क्रमश: x व y – दिशा में हैं। न्यूटन के गति के दूसरे समी० से,
Fx = \(\frac{d}{dt}\) (Px) = \(\frac{d}{dt}\) (mvx) = m\(\frac{d v_{x}}{d t}\)
तथा Fy = \(\frac{d}{dt}\)(Py) = m.\(\frac{d v_{y}}{d t}\) …………….. (ii)
∴ समी० (i) व (ii) से,
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∴ समी० (iii) व (iv) से,
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∴ समी० (v) व (vi) से,
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अतः समीकरण (vii) से यह निष्कर्ष निकलता है, कि xy – तल में गतिमान कण का कोणीय वेग (\(\vec{L}\)) का केवल एक घटक अर्थात् z – अक्ष के अनुदिश है।

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प्रश्न 7.7
दो कण जिनमें से प्रत्येक का द्रव्यमान m एवं चाल v है d दूरी पर, समान्तर रेखाओं के अनुदिश, विपरीत दिशाओं में चल रहे हैं। दर्शाइये कि इस द्विकण निकाय का सदिश कोणीय संवेग समान रहता है, चाहे हम जिस बिन्दु के परितः कोणीय संवेग लें।
उत्तर:
माना दूरी पर दो समान्तर रेखाओं के अनुदिश गतिमान प्रत्येक कण का द्रव्यमान m है।
माना v प्रत्येक कण विपरीत दिशा में चाल है।
माना कि क्षण t व कण P1 व P2, बिन्दुओं O पर हैं। अब इन दोनों कणों द्वारा बनाए गए निकाय का किसी बिन्दु O के परितः कोणीय संवेग ज्ञात करते हैं। माना प्रत्येक कण का कोणीय संवेग \(\vec{L}\)1 व \(\vec{L}\)2 है।
∴ \(\vec{L}\)1 = \(\vec{r}\)1 × m\(\vec{v}\)
माना कि निकाय का कोणीय संवेग \(\vec{L}\) है।
∴ \(\vec{L}\) = \(\vec{L}\)1 – \(\vec{L}\)2
= \(\vec{r}\)1 × m\(\vec{v}\) – \(\vec{r}\)2 × m\(\vec{v}\)
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अथवा |\(\vec{L}\)| = |\(\vec{L}\)1| – |\(\vec{L}\)2||
= mvr1 sin θ1 – mvr2 sin θ2 ……………. (i)
जहाँ θ1 व θ2, क्रमश: \(\vec{r}\)1, \(\vec{v}\) व \(\vec{r}\)2(-\(\vec{v}\)) के बीच कोण हैं। (चित्र) चूँकि कण की स्थिति समय के सापेक्ष परिवर्तित होती है।
अतः \(\vec{v}\) की दिशा समान रेखा में होगी तथा OM = r1 sin θ1 – r2 sin θ2 = d ……………. (ii)
समी० (i) व (ii) से,
L = mvd
\(\vec{L}\) की दिशा भी \(\vec{r}\) व \(\vec{v}\) के तल के लम्बवत् होती है। जोकि कागज के तल में होगी। यह दिशा समय के साथ अपरिवर्तित रहती है। अर्थात् \(\vec{L}\) परिमाण व दिशा में समान रहता है। अतः यह संरक्षित रहता है।

प्रश्न 7.8
W भार की एक असमांग छड़ को, उपेक्षणीय भार वाली दो डोरियों से चित्र में दर्शाये अनुसार लटका कर विरामावस्था में रखा गया है। डोरियों द्वारा ऊर्ध्वाधर से बने कोण क्रमशः 36.9° एवं 53.1° हैं। छड़ 2 m लम्बाई की है। छड़ के बाएँ सिरे से इसके गुरुत्व केन्द्र की दूरी d ज्ञात कीजिए।
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उत्तर:
माना एक समान छड़ AB का भार W2 है। यह छड़ दो डोरियों OA व O’B से लटकायी गई है। ऊर्ध्वाधर से OA छड़ से 36.9° व O’B छड़ से 53.1° कोण पर है।
<OAA’ = 90° – 36.9°
= 53.1°
इसी प्रकार, <O’ BB’ = 36.9°
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AB – 2M, AC = d मीटर
माना डोरी OA व O’B में तनाव क्रमशः T1 व T2 है। यहाँ वियोजित घटक चित्रानुसार होंगे।
चूँकि छड़ विराम में है, अत: A’B’ अक्ष के अनुदिश व लम्बवत् लगने वाले बलों का सदिश योग शून्य है। अतः
– T1 cos 53.1° + T2 cos 36.9° = 0 ……………. (i)
तथा T1 sin 53.1° + T2 sin 36.9° – W = 0 ………………. (ii)
A के परित: बलाघूर्ण लेने पर व बलाघूर्णों के योग का शून्य रखने पर –
– (T2 sin 36.9°) × 2 + Wd = 0
या T2 = \(\frac{Wd}{2 sin 36.9°}\) …………… (iii)
∴ समी० (ii) व (iii) से,
T1 sin 53.1° = W – T2 36.9°
= W – \(\frac{Wd}{2}\)
∴ T1 = \(\frac{Wd}{sin 53.1°}\) (1 – \(\frac{d}{2}\)) …………….. (iv)
∴ समी० (i), (iii) व (iv) से,
T1 cos 53.1° = T2 cos36.9°
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या 0.5d + 0.8870d = 1
या d = \(\frac{1}{1.3870}\)d = 1
या d = \(\frac{1}{1.3870}\) = 0.721
m = 72.1 सेमी

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प्रश्न 7.9
एक कार का भाग 1800 kg है। इसकी अगली और पिछली धुरियों के बीच की दूरी 1.8 m है। इसका गुरुत्व केन्द्र, अगली धुरी से 1.05 m पीछे है। समतल धरती द्वारा इसके प्रत्येक अगले और पिछले पहियों पर लगने वाले बल की गणना कीजिए।
उत्तर:
माना आगे के पहिए का द्रव्यमान = m ग्राम
∴ (900 – m) kg = प्रत्येक पहिए का द्रव्यमान
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∴ m × 1.05 =(900 – m) × 0.75
या 1.8m = 900 × 0.75
या m = 375 kg
∴ 900 – m = 525 kg
आगे के प्रत्येक पहिये का भार,
W1 = mg = 375 × 9.8
= 3675 न्यूटन
पीछे के प्रत्येक पहिये का भार,
W2 = 525 × 9.8
= 5145 न्यूटन
पृथ्वी द्वारा पहिये पर आरोपित बल = पृथ्वी की प्रतिक्रिया
W2 = 3675 न्यूटन
इसी प्रकार, प्रत्येक पीछे के पहिये पर पृथ्वी द्वारा आरोपित बल = पृथ्वी की प्रतिक्रिया
W2 = 5145 न्यूटन

प्रश्न 7.10
(a) किसी गोले का, इसके किसी व्यास के परितः जड़त्व आघूर्ण 2MR2/5है, जहाँ M गोले का द्रव्यमान एवं R इसकी त्रिज्या है। गोले पर खींची गई स्पर्श रेखा के परितः इसका जड़त्व आघूर्ण ज्ञात कीजिए। (b) M द्रव्यमान एवं R त्रिज्या वाली किसी डिस्क का इसके किसी व्यास के परितः जड़त्व आघूर्ण MR2/4 है। डिस्क के लम्बवत् इसकी कोर से गुजरने वाली अक्ष के परितः इस चकती का जड़त्व आघूर्ण ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
(a) माना व्यास AB के परित: R त्रिज्या के गोले का जड़त्व आघूर्ण IAB है। जबकि गोले का द्रव्यमान m है।
∴ IAB = \(\frac{2}{5}\) MR2
माना गोले के व्यास AB के समान्तर स्पर्शी CD है।
∴ समान्तर x – अक्षों की प्रमेय से,
स्पर्श रेखा के परितः गोले का जड़त्व आघूर्ण
ICD = IAB + MR2
= \(\frac{2}{5}\) MR2 + MR2
= \(\frac{7}{5}\) MR2
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(b) माना M द्रव्यमान तथा R त्रिज्या के गोले के दो कास AB व CD हैं। माना चकती के लम्बवत् इसके द्रव्यमान केन्द्र O से गुजरने वाली अक्ष EF है। चकती के लम्बवत् अक्ष DG है जोकि चकती की परिधि पर स्थित बिन्दु D से गुजरती है। अर्थात् DG, EF के समान्तर है। माना चकती का EF अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण IEF है।
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∴ लम्बवत् अक्षों की प्रमेय से,
IEE = IAB + ICD
= \(\frac{1}{2} M R^{2}\) + MR2 = \(\frac{3}{2} M R^{2}\)

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प्रश्न 7.11
समान द्रव्यमान और त्रिज्या के एक खोखले बेलन और एक ठोस गोले पर समान परिमाण के बल आघूर्ण लगाये गये हैं। बेलन अपनी सामान्य सममित अक्ष के परितः घूम सकता है और गोला अपने केन्द्र से गुजरने वाली किसी अक्ष के परितः एक दिये गये समय के बाद दोनों में कौन अधिक कोणीय चाल प्राप्त कर लेगा?
उत्तर:
माना खोखले बेलन व ठोस गोले के द्रव्यमान व त्रिज्या क्रमश: M व R हैं।
माना खोखले बेलन का सममित के परित: जड़त्व आघूर्ण L1 है तथा ठोस गोले का केन्द्र के परितः जड़त्व आघूर्ण I2 है।
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माना प्रत्येक पर लगाया गया बलाघूर्ण \(\hat { i } \) है। माना α1 व α2, क्रमश: बेलन व गोले पर कोणीय त्वरण हैं।
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माना ω1, व ω2 किसी क्षण t पर बेलन व गोले की कोणीय चाल है।
∴ ω1 = ω0 + α1t ………….. (iv)
व ω2 = ω0 + α2t
= ω0 + 2.5 α1t
समी० (iv) व (v) से
ω2 > ω1 अर्थात् गोले की कोणीय चाल बेलन से अधिक होगी।

प्रश्न 7.12
20 kg द्रव्यमान का कोई ठोस सिलिंडर अपने अक्ष के परितः 100 rad s-1 की कोणीय चाल से घूर्णन कर रहा है। सिलिंडर की त्रिज्या 0.25 m है। सिलिंडर के घूर्णन से संबद्ध गतिज ऊर्जा क्या है? सिलिंडर का अपने अक्ष के परितः कोणीय संवेग का परिमाण क्या है?
उत्तर:
दिया है:
m = 20 किग्रा
R = 0.25 मीटर
ω = 100 रेडियन प्रति सेकण्ड
माना बेलन की अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण I है
तब I = \(\frac{1}{2} M R^{2}\)
= \(\frac{1}{2}\) × 20 × (0.25)2
= 0.625 किग्रा-मीटर2
∴ घूर्णन करते बेलन की गतिज ऊर्जा
K.E. = \(\frac{1}{2}\) Iω2
= \(\frac{1}{2}\) × 0.625 × (100)2
= \(\frac{1}{2}\) × 0.625 × \(\frac{10^{4}}{10^{3}}\) =3125 JKE
हम जानते हैं कि,
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= 62.5 JS

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प्रश्न 7.13
(a) कोई बच्चा किसी घूर्णिका (घूर्णीमंच) पर अपनी दोनों भुजाओं को बाहर की ओर फैलाकर खड़ा है। घूर्णिका को 40 rev/min की कोणीय चाल से घूर्णन कराया जाता है। यदि बच्चा अपने हाथों को वापस सिकोड़ कर अपना जड़त्व आघूर्ण अपने प्रारंभिक जड़त्व आघूर्ण का 2/5 गुना कर लेता है, तो इस स्थिति में उसकी कोणीय चाल क्या होगी? यह मानिए कि घूर्णिका की घूर्णन गति घर्षणरहित है।
(b) यह दर्शाइए कि बच्चे की घूर्णन की नयी गतिज ऊर्जा उसकी आरंभिक घूर्णन की गतिज ऊर्जा से अधिक है। आप गतिज ऊर्जा में हुई इस वृद्धि की व्याख्या किस प्रकार करेंगे?
उत्तर:
(a) माना बच्चे का प्रारम्भिक व अन्तिम जड़त्व आघूर्ण क्रमशः I1 व I2 है।
अतः
∴ I2 = \(\frac{2}{5}\) I1 दिया है।
v1 = 40 rev/min = \(\frac{40}{60}\) rev/min
v2 = ?
∴ ω1 = 2πv1
= \(\frac{2π×40}{60}\) rads-1
= \(\frac{4}{5}\) π रेडियन प्रति सेकण्ड
माना बच्चे को बाहर की ओर हाथ फैलाकर व सिकोड़कर घूर्णीय चाल क्रमश: ω1, व ω2 है।
रेखीय संवेग संरक्षण के नियम से,
I1ω1 = I2ω2
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∴ घूर्णन आवृत्ति v2
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= 100 चक्र प्रति मिनट
∴ v2 = 100 चक्र प्रति मिनट

(b) घूर्णन की प्रा० गतिज ऊर्जा
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स्पष्ट है कि हाथ सिकोड़कर बच्चे की घूर्णन गतिज ऊर्जा, घूर्णन की प्रा० गतिज ऊर्जा से \(\frac{5}{2}\) गुना अधिक है। अन्तिम स्थिति में गतिज ऊर्जा में वृद्धि, बच्चे की आन्तरिक ऊर्जा के कारण होती है।

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प्रश्न 7.14
3 kg द्रव्यमान तथा 40 cm त्रिज्या के किसी खोखले सिलिंडर पर कोई नगण्य द्रव्यमान की रस्सी लपेटी गई है। यदि रस्सी को 30 Nबल से खींचा जाए तो सिलिंडर का कोणीय त्वरण क्या होगा? रस्सी का रैखिक त्वरण क्या है? यह मानिए कि इस प्रकरण में कोई फिसलन नहीं है।
उत्तर:
दिया है:
बेलन का द्रव्यमान,
M = 3 kg
बेलन की त्रिज्या R = 0.4 m
स्पर्शरेखीय बल F = 30 N
a = ?
α = ?
माना खोखले बेलन का अक्ष के परितः जड़त्व घूर्णन है।
अतः I = MR2
= 3(0.4)2
= 0.48 kg m2
माना बेलन पर आरोपित बलाघूर्णन t है।
अतः τ = FR = 30 × 0.4 = 12 Nm
∴ α = \(\frac{τ}{1}\) = \(\frac{12}{0.48}\) = 25 rad-2
α = Rα = 0.4 × 25

प्रश्न 7.15
किसी घूर्णक (रोटर) की 200 rads-1 की एकसमान कोणीय चाल बनाए रखने के लिए एक इंजन द्वारा 180 Nm का बल आघूर्ण प्रेषित करना आवश्यक होता है। इंजन के लिए आवश्यक शक्ति ज्ञात कीजिए। (नोट : घर्षण की अनुपस्थिति में एकसमान कोणीय वेग होने में यह समाविष्ट है कि बल का आघूर्ण शून्य है। व्यवहार में लगाए गए बल आघूर्ण की आवश्यकता घर्षणी बल आघूर्ण को निरस्त करने के लिए होती है।) यह मानिए कि इंजन की दक्षता 100% है।
उत्तर:
दिया है:
ω = 200 रेडियन प्रति सेकण्ड
τ = 180 न्यूटन मीटर
P = ?
सम्बन्ध P = τw से,
P = 180 × 200
= 36000 वॉट
= 36 किलो वॉट

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प्रश्न 7.16
R त्रिज्या वाली समांग डिस्क से R/2 त्रिज्या का एक वृत्ताकार भाग काट कर निकाल दिया गया है। इस प्रकार बने वृत्ताकार सुराख का केन्द्र मूल डिस्क के केन्द्र से R/2 दूरी पर है। अवशिष्ट डिस्क के गुरुत्व केन्द्र की स्थिति ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
प्रारम्भिक चकती की त्रिज्या = R
काटकर अलग की गई चकती की त्रिज्या = \(\frac{R}{2}\)
माना A व a चकतियों के क्षे० हैं।
अतः A = πR2
तथा a = π(\(\frac{R}{2}\))2 = \(\frac{\pi R^{2}}{4}\)
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यहाँ O प्रारम्भिक चकती का केन्द्र है।
तथा O1 अलग किए गए गोल भाग का केन्द्र है।
व O2 बचे हुए भाग का केन्द्र है।
p = डिस्क का प्रति एकांक क्षेत्रफल द्रव्यमान है।
माना m1 व m वास्तविक चकती व अलग किए गए चकती के द्रव्यमान है।
अतः m1 = ρA = πR2ρ
तथा m = ρa = \(\frac{\pi R^{2}}{4}\)ρ
माना शेष बचे भाग का द्रव्यमान m है।
अतः m2 = m1 – m
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माना मूल बिन्दु O है।
माना Rcm बचे भाग का द्रव्यमान केन्द्र है।
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ऋणात्मक चिह्न यह व्यक्त करता है कि बचे भाग का द्रव्यमान केन्द्र O से बाईं ओर है जोकि कटे भाग के केन्द्र के विपरीत ओर है।

प्रश्न 7.17
एक मीटर छड़ के केन्द्र के नीचे क्षुर – धार रखने पर वह इस पर संतुलित हो जाती है जब दो सिक्के, जिनमें प्रत्येक का द्रव्यमान 5g है, 12.0 cm के चिह्न पर एक के ऊपर एक रखे जाते हैं तो छड़ 45.0 cm चिह्न पर संतुलित हो जाती है। मीटर छड़ का द्रव्यमान क्या है?
उत्तर:
माना m ग्राम = द्रव्यमान/छड़ की ल० सेमी
माना m मीटर का कुल द्रव्यमान व m = 100 ग्राम है।
जब मीटर केन्द्र पर सन्तुलित होता है, तब प्रत्येक भाग का द्रव्यमान = 50 मी/ग्राम
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माना 12 सेमी चिह्न पर रखे दो सिक्कों का द्रव्यमान m2 है।
m2 = 5 × 2 = 10 ग्राम
द्रव्यमान केन्द्र = 45 सेमी के चिह्न पर (बिन्दु A)
चूँकि छड़ी सन्तुलन में है। अतः बिन्दु A के परित: अलग-अलग द्रव्यमानों का आघूर्ण समान है।
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या (3025 – 1089 – 936)
m = 330 × 2 = 660
या 1000m = 660
या m = 0.66 ग्राम
M = 100m = 100 × 0.66 = 66 ग्राम

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प्रश्न 7.18
एक ठोस गोला, भिन्न नति के दो आनत तलों पर एक ही ऊँचाई से लुढ़कने दिया जाता है।
(a) क्या वह दोनों बार समान चाल से तली में पहुँचेगा?
(b) क्या उसको एक तल पर लुढ़कने में दूसरे से अधिक समय लगेगा?
(c) यदि हाँ, तो किस पर और क्यों?
उत्तर:
माना तल – 1 पर निम्न बिन्दु से शिखर तक चली दूरी व झुकाव क्रमशः l2 व θ1 है।
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तथा तल – 2 पर निम्न बिन्दु से शिखर तक चली दूरी व झुकाव क्रमश: l2 व θ2 है।
स्पष्ट है कि θ1 > θ2
∴ sin θ1 > sin θ2
या \(\frac{\sin \theta_{1}}{\sin \theta_{2}}>1\) > 1 …………….. (i)
प्रत्येक झुके तल की ऊँचाई,
λ = 14 l1 sinθ 1 = l2 sin θ2 (a) है।
तल के शिखर पर, गोले में केवल स्थितिज ऊर्जा होगी। i.e., PE = mgh
जहाँ m = गोले का द्रव्यमान है।
जब गोला शिखर से निम्न बिन्दु तक लुढ़कता है, तो स्थितिज ऊर्जा, रैखिक गतिज ऊर्जा (\(\frac{1}{2}\) Iω2) में परिवर्तित हो जाती है। जहाँ I गोले का जड़त्वाघूर्ण है। माना तल के निम्न बिन्दु पर रेखीय वेग v व कोणीय चाल के ω है।
माना v1 व v2 क्रमशः दोनों तलों (1 व 2) पर निम्न बिन्दु पर रेखीय वेग है।
अत:
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जहाँ K घूर्णन त्रिज्या है।
समी० (ii) व (iii) से स्पष्ट है कि प्रत्येक स्थिति में गोला निम्न बिन्दु पर समान वेग से लौटता है।

(b) हाँ, यह तल – 1 पर तल – 2 से अधिक समय लेगा। यह समय कम झुकाव वाले तल के लिए अधिक होगा।
व्याख्या: माना तल – 1 व तल – 2 पर फिसलने में लिया गया समय क्रमशः t1 व t2 है।
ठोस गोले के लिए,
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हम जानते हैं कि, झुके तल पर वस्तु का त्वरण निम्न है –
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जहाँ θ = झुकाव
माना झुके तल – 1 व 2 पर गोले के त्वरण क्रमशः a1 व a2 है।
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पुनः माना तल 1 व 2 पर फिसलने का समय क्रमश: t1 व t2 2 है। अतः
सूत्र S = ut + \(\frac{1}{2}\)at2 से,
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समी० (iv) को भाग देने पर
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समी० (vi) व (vii) से,
\(\frac{t_{1}}{t_{2}}\) < 1 t1 < t2
समय t, झुकाव कोण θ पर निर्भर करता है। अतः झुकाव कोण जितना कम होगा, गोला लुढ़कने में उतना ही अधिक समय लेगा।

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प्रश्न 7.19
2 m त्रिज्या के एक वलय (छल्ले) का भार 100 kg है। यह एक क्षैतिज फर्श पर इस प्रकार लोटनिक गति करता है कि इसके द्रव्यमान केन्द्र की चाल 20 cm/s हो। इसको रोकने के लिए कितना कार्य करना होगा?
उत्तर:
दिया है:
r = 2 मीटर
m = 100 किग्रा
द्रव्यमान केन्द्र का वेग,
y = 20 cms-1
= 0.20 मीटर/सेकण्ड
रोकने में व्यय कार्य = ?
माना वलय का कोणीय वेग ω है।
अतः ω = \(\frac{v}{r}\) = \(\frac{0.20}{2}\) = 0.10 सेकण्ड/से०
माना वलय का केन्द्र से गुजरती व तल के लम्बवत् अक्ष के परितः जड़त्वाघूर्णन I है।
1 = mr2
= 100 × (2)2
= 400 kgm2
वलय की सम्पूर्ण गतिज ऊर्जा =वलय की घूर्णन गतिज ऊर्जा + वलय की रेखीय गतिज ऊर्जा
या
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= 2 + 2 + 4J
∴ कार्य ऊर्जा प्रमेय से,
रोकने में व्यय कार्य = वलय की सम्पूर्ण KE
= 4 जूल

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प्रश्न 7.20
ऑक्सीजन अणु का द्रव्यमान 5.30 × 10-26 kg है तथा इसके केन्द्र से होकर गुजरने वाली और इसके दोनों परमाणुओं को मिलाने वाली रेखा के लम्बवत् अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण 1.94 × 10-46 kg m2 है। मान लीजिए कि गैस के ऐसे अणु की औसत चाल 500 m/s है और इसके घूर्णन की गतिज ऊर्जा, स्थानान्तरण की गतिज ऊर्जा की दो तिहाई है। अणु का औसत कोणीय वेग ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
ऑक्सीजन अणु का द्रव्यमान
m = 5.30 × 10-26 किग्रा
ऑक्सीजन अणु का जड़त्वाघूर्णन
I = 1.94 × 10-46 किग्रा – मीटर
अणु का मध्य वेग v = 500 ms-1
औसत कोणीय चाल = ?
प्रश्नानुसार, घूर्णन की गतिज ऊर्जा,
\(\frac{2}{3}\) × रैखिक गतिज ऊर्जा KE
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प्रश्न 7.21
एक बेलन 30° कोण बनाते आनत तल पर लुढ़कता हुआ ऊपर चढ़ता है। आनत तल की तली में बेलन के द्रव्यमान केन्द्र की चाल 5 m/s है।
(a) आनत तल पर बेलन कितना ऊपर जायेगा?
(b) वापस तली तक लौट आने में इसे कितना समय लगेगा?
उत्तर:
दिया है:
θ = 30°
तलों में बेलन के द्रव्यमान केन्द्र की चाल, u = 5 मीटर/सेकण्ड

(a) आनत तल पर लुढ़कते बेलन का त्वरण = -a
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माना बेलन ठोस है, तब K2 = \(\frac{R^{2}}{2}\)
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माना तल पर चली दूरी S है।
∴ v = 0
सूत्र v2 = u2 = 2as से,

(b) माना तली तक आने में बेलन को T समय लगता है।
∴ T = 2t जहाँ t आने या जाने का समय है।
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s = 3.83 मीटर
दिया है:
प्रा० वेग = 0
∴ सूत्र s = ut + \(\frac{1}{2}\) at2 से,
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प्रश्न 7.22
जैसा चित्र में दिखाया गया है, एक खड़ी होने वाली सीढ़ी के दो पक्षों BA और CA की लम्बाई 1.6 m है और इनको A पर कब्जा लगा कर जोड़ा गया है। इन्हें ठीक बीच में 0.5 m लम्बी रस्सी DE द्वारा बाँधा गया है। सीढ़ी BA के अनुदिश B से 1.2 m की दूरी पर स्थित बिन्दु F से 40 kg का एक भार लटकाया गया है। यह मानते हुए कि फर्श घर्षण रहित है और सीढ़ी का भार उपेक्षणीय है, रस्सी में तनाव और सीढ़ी पर फर्श द्वारा लगाया गया बल ज्ञात कीजिए। (g = 9.8 m/s2 लीजिए) (संकेत : सीढ़ी के दोनों ओर के संतुलन पर अलगअलग विचार कीजिए)
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उत्तर:
दिया है:
AB = AC = 1.6 मीटर
DE = 0.5 मीटर
AD = DB = AE = EC = \(\frac{1.6}{2}\) = 0.8 मीटर
BF = 1.2 मीटर
AF = 0.4 मीटर
माना रस्सी में तनाव = T
फर्श द्वारा सीढ़ी पर बिन्दु B व C पर आरोपित बल
= N’B NC = ?
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W = 40 kg wt = 40 × 9.8 N = 392 N
माना = A’ = DE का मध्य बिन्दु
∴ DA’ = \(\frac{5}{2}\) = 25 m
DF’ = 125 m चित्र में स्पष्ट है कि
NB = Nc = W = 392 N ………… (i)
माना सीढ़ी AB व AC अलग-अलग सन्तुलन में है। A के परितः विभिन्न बलों का आघूर्ण लेने पर
NB × BC’ = W × DF’ + T × AA’ (AB सीढ़ी के लिए)
या NB × AB cos θ
= W × 0.125 + T × 0.8 sin θ ……………. (ii)

इसी सीढ़ी AC के लिए,
या NC × CC’ = T × AA’
या NC × AC cos θ = T × 0.8 sin θ ……………… (iii)

∆DEF’ में,
cos θ = \(\frac{DF’}{DF}\) = \(\frac{0.125}{0.4}\)
= 0.3125 = cos θ 72.8°
∴ θ = 72.8′
∴ sin θ = 0.9553
tan θ = 3.2305
∴ समी० (ii) व (iv) से,
NB × 0.6 × 0.135 = 0.392 × 0.125 + T × 0.8 × 0.9553
या 0.5 NB = 0.764 + 49 …………… (v)
इसी प्रकार,
NC + 1.6 × 0.3125 = T × 0.8 × 0.9553
या 0.5NC = 0.764T
समी० (v) व (vi) से,
NC + 1.6 × 0.3125 = T × 0.8 x 0.9553
या 0.5NC = 0.764T …………… (vi)
समी० (v) व (vi) से,
0.5NB = 0.5NC + 49
या \(\frac{1}{2}\) (NB – NC) = 49
या NB – NC = 98 ………….. (vii)
समी० (i) व (vii) को जोड़ने पर,
2NB = 392 + 98 = 450
∴ NB = 225 N
∴ NC = NB – 98
= 225 – 98 = 147 N ……. (viii)
∴ समी० (vi) व (viii) से,
0.5 × \(\frac{147}{0.764}\) = 96.2 N

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प्रश्न 7.23
कोई व्यक्ति एक घूमते हुए प्लेटफॉर्म पर खड़ा है। उसने अपनी दोनों बाहें फैला रखी हैं और उनमें से प्रत्येक में 5 kg भार पकड़ रखा है। प्लेटफॉर्म का कोणीय चाल 30 rev/min है। फिर वह व्यक्ति बाहों को अपने शरीर के पास ले आता है जिससे घूर्णन अक्ष से प्रत्येक भार की दूरी 90 cm से बदल कर 20 cm हो जाती है। प्लेटफॉर्म सहित व्यक्ति के जड़त्व आघूर्ण का मान 7.6 kg m2 ले सकते हैं।
(a) उसका नया कोणीय वेग क्या है? (घर्षण की उपेक्षा कीजिए)
(b) क्या इस प्रक्रिया में गतिज ऊर्जा संरक्षित होती है? यदि नहीं, तो इसमें परिवर्तन का स्त्रोत क्या है?
उत्तर:
दिया है:
प्रत्येक हाथ में द्रव्यमान = 5 किग्रा
r1 = 90 cm = 0.90 मीटर
r2 = 20 cm = 0.20 मीटर
आदमी तथा प्लेटफॉर्म का जड़त्व आघूर्ण,
1 = 7.6 kgm2
माना r1 व r2 दूरी पर जड़त्वाघूर्ण क्रमशः I’1 व I’2 है।
तब सूत्र I = mr2 से,
I’1 = 2m × \(r_{\mathrm{1}}^{2}\)
= 2 × 5 × (0.2)2
= 8.1 kgm2
I’2 = 2m × \(r_{\mathrm{2}}^{2}\)
= 2 × 5 × (0.2)2
= 0.4 kgm2
माना r1 व r2 दूरी पर निकाय (व्यक्ति + भार + प्लेटफॉर्म) का जड़त्वाघूर्ण क्रमशः
I1 व I है।
तब –
I1 = I’1 + I = 8.1 + 7.6 = 15.7 kgm2 तथा
I2 = I’2I
= 0.4 + 7.6 = 8.0 kgm2
v1 = 30 rpm = \(\frac{30}{60}\) = \(\frac{1}{2}\) ps
ω1 = 2πv1 = 2π × \(\frac{1}{2}\) = π rads-1
माना r2 दूरी पर नवीन कोणीय चाल ω2 है।
∴ कोणीय संवेग संरक्षण के नियम से,
या I1ω1 = I2ω2
15.7 × π = 8 × ω2
या ω2 = 15.7 \(\frac{π}{8}\)
= 1.9625 π rads-1
∴ कोणीय आवृत्ति v2 निम्न है –
v2 = \(\frac{\omega_{2}}{2 \pi}\) = \(\frac{1.9625}{2π}\) × π rps
= \(\frac{1.9625}{2}\) × 60 rpm
= 58.875 rpm
= 58.9 rpm
= 59 rpm
नहीं, यहाँ गतिज ऊर्जा संरक्षित नहीं होगी? चूँकि घूर्णनी गति में कोणीय संवेग संरक्षित रहता है। अत: यह आवश्यक नहीं है कि घूर्णनी गतिज ऊर्जा भी संरक्षित रहे जिसे निम्न रूप में समझाया जा सकता है –
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अर्थात् I के घटने पर घूर्णनी KE बढ़ती है। KE में यह परिवर्तन (i.e., वृद्धि) वस्तु के जड़त्वाचूर्ण को कम करने में व्यक्ति द्वारा किए गए कार्य के व्यय होने के कारण होता है।

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प्रश्न 7.24
10g द्रव्यमान और 500 m/s चाल वाली बन्दूक की गोली एक दरवाजे के ठीक केन्द्र में टकराकर उसमें अंत:स्थापित हो जाती है। दरवाजा 1.0 m चौड़ा है और इसका द्रव्यमान 12 kg है। इसके एक सिरे पर कब्जे लगे हैं और यह इनसे गुजरती एक ऊर्ध्वाधर अक्ष के परितः लगभग बिना घर्षण के घूम सकता है। गोली के दरवाजे में अंत:स्थापन के ठीक बाद इसका कोणीय वेग ज्ञात कीजिए। (संकेत : एक सिरे से गुजरती ऊर्ध्वाधर अक्ष के परितः दरवाजे का जड़त्व-आघूर्ण ML2/3 है)
उत्तर:
दिया है:
गोली का द्रव्यमान
m = 10g = 0.01
किग्रा गोली का वेग v = 500 मीटर/से०
दरवाजे की चौ० b = 1.0 मीटर
दरवाजे का द्र० M = 12 किग्रा
कोणीय चाल = ?
ऊर्जा संरक्षण के नियम से,
\(\frac{1}{2}\) mv2 = \(\frac{1}{2}\) Iω2
माना कब्जे वाली भुजा के परितः जड़त्वाघूर्ण है।
∴ I = \(\frac{1}{3}\) (M + m) (\(\frac{b}{2}\))2
(∵ द्रव्यमान केन्द्र से दूरी = \(\frac{b}{2}\) तथा गोली दरवाजे में है।)
\(\frac{1}{2}\) mv2 = \(\frac{1}{3}\) (M + m) (\(\frac{b}{2}\))2
\(\frac{1}{2}\) mv2 = \(\frac{1}{2}\) × \(\frac{1}{3}\) (M + m) \(\frac{b^{2}}{4}\) ω2
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= 49.98 रेडियन/सेकण्ड

प्रश्न 7.25
दो चक्रिकाएँ जिनके अपने-अपने अक्षों (चक्रिका के अभिलंबवत् तथा चक्रिका के केंद्र से गुजरने वाले) के परितः जड़त्व आघूर्ण I1 तथा I2 हैं और जो तथा ω1 तथा ω2 कोणीय चालों से घूर्णन कर रही है, को उनके घूर्णन अक्ष संपाती करके आमने-सामने लाया जाता है?
(a) इस दो चक्रिका निकाय की कोणीय चाल क्या है?
(b) यह दर्शाइए कि इस संयोजित निकाय की गतिज ऊर्जा दोनों चक्रिकाओं की आरंभिक गतिज ऊर्जाओं के योग से कम है। ऊर्जा में हुई इस हानि की आप कैसे व्याख्या करेंगे? ω1 ≠ ω2 लीजिए।
उत्तर:
माना I1 व I2 जड़त्व आघूर्ण वाली चकतियों की कोणीय चाल क्रमशः ω1 व ω2 है। सम्पर्क में लाने पर दोनों चकतियों के निकाय का जड़त्व आघूर्ण I1 + I2 होगा।
माना ω = पूरे निकाय की कोणीय चाल है।

(a) ∵ दोनों चकतियों के कुल प्रा० कोणीय संवेग,
L1 = I1 ω1 + I2ω2
संयुक्त निकाय का कुल अन्तिम कोणीय संवेग,
L2 = L1
या (I1 + I2)ω = I1ω1 + I2ω1
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(b) दोनों चकतियों की प्रा० गतिज ऊर्जा
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संयुक्त निकाय की अन्तिम KE.
E2 = \(\frac{1}{2}\) (I1 + I22 ………….. (iii)
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समी० (i) व (ii) से,
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जोकि धनात्मक राशि है।
अतः E1 – E2 > 0 या E1 > E2
या E2 > E1 अर्थात् पूरे निकाय की घूर्णनी गतिज ऊर्जा दोनों चकतियों की प्रारम्भिक ऊर्जाओं के योग से कम है। अतः दो चकतियों को सम्पर्क में लाने पर, गतिज ऊर्जा में कमी आती है। यह कमी दोनों चक्रिकाओं की सम्पर्कित सतहों के बीच घर्षण के बल के कारण होती है।

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प्रश्न 7.26
(a) लम्बवत् अक्षों के प्रमेय की उपपत्ति करें। संकेत (x, y) तल के लम्बवत् मूल बिन्दु से गुजरती अक्ष से किसी बिन्दु x – y की दूरी का वर्ग (x2 + y2) है
(b) समांतर अक्षों के प्रमेय की उपपत्ति करें(संकेत : यदि द्रव्यमान केन्द्र को मूल बिन्दु ले लिया जाये तो Σmiri = 0)
उत्तर:
(a) समकोणिक (लम्ब) अक्षों की प्रमेयकिसी समतल पटल को उसके तल में ली गई दो परस्पर लम्बवत् अक्षों OX तथा OY के परित: जड़त्व आघूर्णों का योग इन अक्षों के कटान बिन्दु O में को जाने वाली तथा पटल के तल के लम्बवत् अक्ष OZ के परित: जड़त्व आघूर्ण के बराबर होता है। पटल का अक्ष OZ के परितः जड़त्व आघूर्ण Iz = Iz + Iy
जहाँ Iz तथा Iy पटल का क्रमश: अक्ष OX तथा OY के परितः जड़त्व आघूर्ण है।

सिद्ध करना:
माना एक पटल है जिसके तल में दो परस्पर लम्बवत् अक्षं OX तथा OY ली गई हैं अक्ष OZ पटल के तल के अभिलम्बवत् है तथा OX व OY के कटान बिन्दु०से गुजरती है। माना अक्ष OZ से r दूरी पर m द्रव्यमान का एक कण P है। इस कण का अक्ष OZ के परितः जड़त्व आघूर्ण mr2 होगा। अतः पूरे पटल का अक्ष OZ के परित: जड़त्व आघूर्ण
Iz = Σmr2
लेकिन r2 = x2 + y2
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जहाँ x व y कण भी क्रमश: अक्षों OY व OX से दूरियाँ हैं।
∴ I2 = Σm(x2 + y2)
= Σmx2 + Σmy2
लेकिन Ix = Σmx2 तथा Iy = Σmy2
अतः Ix = Iz + Iy

(b) समान्तर अक्षों की प्रमेय-किसी पिंड का किसी अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण (I) उस पिंड के द्रव्यमान केन्द्र में को जाने वाली समान्तर अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण (Icm) तथा पिंड के द्रव्यमान व दोनों अक्षों के बीच की लम्बवत् दूरी के वर्ग के गुणनफल के योग के बराबर होता है।
I = Icm + Ma2
जहाँ M पिंड का द्रव्यमान है तथा a दोनों अक्षों के बीच लम्बवत् दूरी है।

सिद्ध करना:
माना एक समतल पटल है जिसका द्रव्यमान केन्द्र C है। माना पटल का पटल के तल में स्थित अक्ष AB के परितः जड़त्व आघूर्ण I है तथा इसके द्रव्यमान केन्द्र C से गुजरने वाली समान्तर अक्ष EF के परितः जड़त्व आघूर्ण Icm है। माना AB तथा EF अक्षों के बीच लम्बवत् दूरी a है। माना EF अक्ष से दूरी पर m द्रव्यमान का एक कण P है। P की AB से दूरी (r + a) होगी। P का AB के परितः जड़त्व आघूर्ण m(r + a)2 होगा। अतः पूरे पटल का AB अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण
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I = Σm(r + a)2
= Σm(r2 + a2 + 2ar)
I = Σmr2 + Σma2 + 2aΣmr
अथवा I = Σmr2 + a2Σ + 2aΣmr
लेकिन Icm = Σmr2
तथा a2Σm = a2M
तथा Σmr = 0 क्योंकि किसी पटल के समस्त कणों का पटल के द्रव्यमान केन्द्र में से गुजरने वाली अक्ष के परित: आघूर्णों का योग शून्य होता है। अतः
I = Icm + Ma2

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प्रश्न 7.27
सत्र v2 = \(\frac{2 g h}{\left(1+k^{2} / R^{2}\right)}\) को गतिकीय दृष्टि (अर्थात् बलों तथा बल आघूर्णों के विचार) से व्युत्पन्न कीजिए। जहाँ v लोटनिक गति करते पिंड (वलय, डिस्क, बेलन या गोला) का आनत तल की तली में वेग है। आनत तल पर h वह ऊँचाई है जहाँ से पिंड गति प्रारंभ करता है। सममित अक्ष के परितः पिंड की घूर्णन त्रिज्या है और R पिंड की त्रिज्या है।
उत्तर:
माना M व R क्रमश: गोलीय पिंड के द्रव्यमान व त्रिज्या है, यह एक ऐसे आनत तल पर A बिन्दु पर रखा गया है जिसका क्षैतिज से झुकाव θ है। इस पिंड में A बिन्दु पर पूर्णतः स्थितिज ऊर्जा होगी।
∴ E = mgh …….. (i)
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जब यह पिंड तल पर फिसलना प्रारम्भ करता है, पिंड द्रव्यमान केन्द्र से गुजरने वाली अक्ष (i.e., c) से गुजरता है जो कि तल के समान्तर है। इसके भार व भार के घटक के कारण घूर्णनी गति नहीं होती है कि इसकी क्रिया रेखा C से गुजरती है। इस प्रकार पिंड पर लगने वाला सम्पूर्ण बलाघूर्ण शून्य होगा। घर्षण बलाघूर्ण अर्थात् घूर्णन के कारण बल लगता है।
∴ τ = FR ………….. (ii)
घूर्णन करते पिंड की सम्पूर्ण गतिज ऊर्जा (E) में रैखिक गतिज ऊर्जा (Kt व घूर्णनी गतिज ऊर्जा (Kr) होती है।
i.e., E = Kt + Kr
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तथा v = Rω = घूर्णन करते पिंड का रैखिक वेग
जहाँ जे कोणीय ω वेग है।
पिंड का जड़त्व आघूर्ण, I = \(\frac{1}{2}\) mK2 जहाँ K = घूर्णन त्रिज्या।
माना पृष्ठ सतह खुरदरी है तथा पिंड बिना फिसले ही घूर्णन करता है। बिन्दु B पर, पिंड में दोनों रैखिक व घूर्णनी गतिज ऊर्जाएँ होती हैं। बिन्दु B पर सम्पूर्ण ऊर्जा समी० (iii) के अनुसार होगी।
ऊर्जा संरक्षण के नियम से,
बिन्दु A पर स्थितिज ऊर्जा = बिन्दु B पर सम्पूर्ण गतिज ऊर्जा
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प्रश्न 7.28
अपने अक्ष पर ω0 कोणीय चाल से घूर्णन करने वाली किसी चक्रिका को धीरे से (स्थानान्तरीय धक्का दिए बिना) किसी पूर्णतः घर्षणरहित मेज पर रखा जाता है। चक्रिका की त्रिज्या R है। चित्र में दर्शाई चक्रिका के बिन्दुओं A, B तथा C पर रैखिक वेग क्या हैं? क्या यह चक्रिका चित्र में दर्शाई दिशा में लोटनिक गति करेगी?
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उत्तर:
चक्रिका व मेज के मध्य घर्षण बल शून्य है। इस कारण चक्रिका लोटनिक गति नहीं कर पाएगी व मेज के एक ही बिन्दु B के सम्पर्क में रहते हुए अपनी अक्ष के परित: घूर्णनी गति करती रहेगी।
दिया है:
बिन्दु A की अक्ष से दूरी R है।
अतः बिन्दु A पर रैखिक वेग,
VA = Rω0 (तीर की दिशा में)
तथा बिन्दु B पर रैखिक वेग,
VA = Rω0 (तीर की विपरीत दिशा में)
चूँकि बिन्दु C की अक्ष से दूरी \(\frac{R}{2}\) है
अतः बिन्दु C पर रैखिक वेग vc = \(\frac{R}{2}\) (क्षैतिजत: बाईं ओर से दाईं ओर को)
अर्थात् चक्रिका लोटनिक गति नहीं करेगी।

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प्रश्न 7.29
स्पष्ट कीजिए कि चित्र (प्रश्न 7.28) में अंकित दिशा में चक्रिका की लोटनिक गति के लिए घर्षण होना आवश्यक क्यों है?
(a) B पर घर्षण बल की दिशा तथा परिशुद्ध लुढ़कन आरंभ होने से पूर्व घर्षणी बल आघूर्ण की दिशा क्या है?
(b) परिशुद्ध लोटनिक गति आरंभ होने के पश्चात् घर्षण बल क्या है?
उत्तर:
(a) बिन्दु B पर घर्षण बल B के वेग का विरोध करता है। अतः घर्षण बल तीर की दिशा में होगा। घर्षण बल आघूर्ण के कार्य करने की दिशा इस प्रकार है कि वह कोणीय गति का विरोध करता है। ω0 व τ दोनों ही कागज के पृष्ठ के अभिलम्बवत् कार्य करते हैं। इनमें ω0 कागज के पृष्ठ के अंतर्मुखी व र कागज के पृष्ठ के बहिर्मुखी है।
(b) घर्षण बल सम्पर्क – बिन्दु B के वेग को कम कर देता है। जब यह वेग शून्य होता है तो चक्रिका की लोटन गति आदर्श सुनिश्चित हो जाती है। एक बार ऐसा हो जाने पर घर्षण बल का मान शून्य हो जाता है।

प्रश्न 7.30
10 cm त्रिज्या की कोई ठोस चक्रिका तथा इतनी ही त्रिज्या का कोई छल्ला किसी क्षैतिज मेज पर एक ही क्षण 10π rads-1 की कोणीय चाल से रखे जाते हैं। इनमें से कौन पहले लोटनिक गति आरंभ कर देगा। गतिज घर्षण गुणांक µk = 0.2
उत्तर:
दिया है:
छल्ले तथा ठोस चक्रिका की त्रिज्या,
R = 10 सेमी – 0.1 मीटर
µk = 0.2
छल्ले का जड़त्व आघूर्ण = MR2 …………… (i)
ठोस चक्रिका का जड़त्व आघूर्ण = \(\frac{1}{2}\)mR2 …………….. (ii)
प्रा० कोणीय वेग = ω0 = 10π रेडियन/सेकण्ड
घर्षण बल के कारण गति होती है तथा घर्षण के कारण द्रव्यमान केन्द्र त्वरित होता है। छल्ला शून्य प्रारम्भिक वेग से चलता है। प्रारम्भिक कोणीय वेग ω0 में मन्दन घर्षण बलाघूर्ण के कारण होता है।
हम जानते हैं कि F = µkN = ma
या µkmg = ma
या a = µkg ……………. (iii)
तथा बलाघूर्ण τ = -Iα
= FR = µkmgR ……………. (iv)
जहाँ R = चकती या वलय की त्रिज्या
ऋणात्मक चिह्न प्रदर्शित करता है कि मन्दन बलाघूर्ण है।
यहाँ u = 0
∴ v = u + at से
v = at or a = \(\frac{v}{t}\)
समी० (iii) से a = µkg
या \(\frac{v}{t}\) = µkg
या v = µkgt (छल्ले के लिए)
तथा = µkgt’ (चकती के लिए) …………….. (v)
समी० (iv) से
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माना छल्ले की t समय व चकती की t’ समय बाद कोणीय वेग
∴ सम्बन्ध ω = ω0 + αt से,
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एकदम फिसलने की शर्त लगाने पर (i.e., V = Rω), छल्ले के लिए
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तथा चकती के लिए,
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अतः समी० (xii) व (xiii) से स्पष्ट है कि t’ < t अर्थात् चकती पहले फिसलना प्रारम्भ करेगी।

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प्रश्न 7.31
10 kg द्रव्यमान तथा 15 cm त्रिज्या का कोई सिलिंडर किसी 30° झुकाव के समतल पर परिशुद्धतः लोटनिक गति कर रहा है। स्थैतिक घर्षण गुणांक µs = 0.25
(a) सिलिंडर पर कितना घर्षण बल कार्यरत है?
(b) लोटन की अवधि में घर्षण के विरुद्ध कितना कार्य किया जाता है?
(c) यदि समतल के झुकाव में वृद्धि कर दी जाए तो के किस मान पर सिलिंडर परिशुद्धतः लोटनिक गति करने की बजाय फिसलना आरंभ कर देगा?
उत्तर:
दिया है:
m = 10 kg, R = 0.15 m, θ = 30°, µk = 0.25
(a) बेलन पर लगने वाला घर्षण बल –
F = \(\frac{1}{3}\) mg sin θ
= \(\frac{1}{3}\) × 10 × 9.8 × sin 30° = 16.3 न्यूटन

(b) चूँकि परिशुद्ध लोटनिक गति में, सम्पर्क बिन्दु पर कोई सरकन गति नहीं है। इसलिए घर्षण बल के विरुद्ध कृत कार्य, W = 0 है।

(c) लोटनिक गति के लिए,
\(\frac{F}{R}\) = \(\frac{1}{3}\) tan θ ≤ µs
∴ tan θ = 3µs
= 3 × 0.25 = 0.75
∴ θ = tan-1(0.75)
= 37°

प्रश्न 7.32
नीचे दिए गए प्रत्येक प्रकथन को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा कारण सहित उत्तर दीजिए कि इनमें से कौन-सा सत्य है और कौन-सा असत्य है –

  1. लोटनिक गति करते समय घर्षण बल उसी दिशा में कार्यरत होता है जिस दिशा में पिंड का द्रव्यमान केंद्र गति करता है।
  2. लोटनिक गति करते समय संपर्क बिंदु की तात्क्षणिक चाल शून्य होती है।
  3. लोटनिक गति करते समय संपर्क बिन्दु का तात्क्षणिक त्वरण शून्य होता है।
  4. परिशुद्ध लोटनिक गति के लिए घर्षण के विरुद्ध किया गया कार्य शून्य होता है।
  5. किसी पूर्णतः घर्षणरहित आनत समतल पर नीचे की ओर गति करते पहिए की गति फिसलन गति (लोटनिक गति नहीं) होगी।

उत्तर:

  1. सत्य, चूँकि स्थानान्तरीय गति घर्षण बल के कारण ही उत्पन्न होती है। इसी बल के कारण पिंड का द्रव्यमान आगे की ओर बढ़ता है।
  2. सत्य, चूँकि लोटनिक गति, सम्पर्क बिन्दु पर सी गति के समाप्त होने पर प्रारम्भ होती है। इस प्रकार परिशुद्ध लोटनिक गति में सम्पर्क बिन्दु की तात्क्षणिक चाल शून्य होती है।
  3. असत्य चूँकि घूर्णन गति के कारण, सम्पर्क बिन्दु की गति में अभिकेन्द्र त्वरण अवश्य ही विद्यमान होता है।
  4. सत्य चूँकि परिशुद्ध लोटनिक गति में सम्पर्क बिन्दु पर कोई सरकन नहीं होता है। इस कारण घर्षण बल के विरुद्ध किया गया कार्य शून्य होता है।
  5. सत्य, घर्षण के न होने पर आनत तल पर छोड़े गए पहिए का आनत तल के साथ सम्पर्क बिन्दु विरामावस्था में नहीं रहेगा बल्कि पहिए के भार के अधीन माना तल के अनुदिश फिसलता जाएगा। इस कारण यह गति लोटनिक न होकर विशुद्ध सरकन गति होगी।

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प्रश्न 7.33
कणों के किसी निकाय की गति को इसके द्रव्यमान केन्द्र की गति और द्रव्यमान केन्द्र के परितः गति में अलग-अलग करके विचार करना।
दर्शाइये कि –
(a) P = p’i + miV
जहाँ pi (mi द्रव्यमान वाले) i – वें कण का संवेग है, और P’i = miv’i। ध्यान दें कि द्रव्यमान केन्द्र के सापेक्ष i – वें कण का वेग है। द्रव्यमान केन्द्र की परिभाषा का उपयोग करके यह भी सिद्ध कीजिए कि Σp’i = 0
(b) K = K’ + \(\frac{1}{2}\) MV2
K कणों के निकाय की कुल गति ऊर्जा, K’ = निकाय की कुल गतिज ऊर्जा जबकि कणों की गतिज ऊर्जा द्रव्यमान केन्द्र के सापेक्ष ली जाये। MV2/2 संपूर्ण निकाय के (अर्थात् निकाय के द्रव्यमान केन्द्र के) स्थानान्तरण की गतिज ऊर्जा है। इस परिणाम का उपयोग भाग 7.14 में किया गया है।

(c) L = Σ + R × MV
जहाँ L’ = r’i × P’i द्रव्यमान के परितः निकाय का कोणीय संवेग है जिसकी गणना में वेग द्रव्यमान केन्द्र के सापेक्ष मापे गये हैं। याद कीजिए r’i = ri – R; शेष सभी चिह्न अध्याय में प्रयुक्त विभिन्न राशियों के मानक चिह्न हैं। ध्यान दें कि L’ द्रव्यमान केन्द्र के परितः निकाय का कोणीय संवेग एवं MR × V इसके द्रव्यमान केन्द्र का कोणीय संवेग है।

(d) \(\frac{dL’}{dt}\) = Σr’i × \(\frac{dp’}{dt}\)
यह भी दर्शाइये कि
\(\frac{dL’}{dt}\) = τ’ext
(जहाँ τ’ext द्रव्यमान केन्द्र के परितः निकाय पर लगने वाले सभी बाह्य बल आघूर्ण हैं।)
[संकेत : द्रव्यमान केन्द्र की परिभाषा एवं न्यूटन के गति के तृतीय नियम का उपयोग कीजिए। यह मान लीजिए कि किन्हीं दो कणों के बीच के आन्तरिक बल उनको मिलाने वाली रेखा के अनुदिश कार्य करते हैं।]
उत्तर:
(a) माना कि m1m2 … mn, दृढ़ पिंड की रचना करने वाले कणों के द्रव्यमान हैं तथा मूल बिन्दु O (0, 0) के सापेक्ष इन कणों के स्थिति सदिश क्रमश:
\(\vec{r}_{1}\), \(\vec{r}_{2}\) …………. \(\vec{r}_{n}\) हैं।
माना कि मूल बिन्दु के सापेक्ष द्रव्यमान केन्द्र (G) की स्थिति सदिश \(\vec{R}\) व द्रव्यमान केन्द्र के सापेक्ष अलग-अलग कणों की
स्थिति क्रमश: \(\vec{r}_{1}\), \(\vec{r}_{2}\) ………………. \(\vec{r}_{n}\) हैं।
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t के सापेक्ष दोनों ओर का अवकलन करने पर,
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(d) माना कि कणों के निकाय पर बलाघूर्ण लगाया जाता है।
माना कि कण के लिए \(\vec{L}\) के घटक Lx, Ly व Lz क्रमशः x, y, z व : अक्षों के अनुदिश हैं। माना कि px, py व pz इसके रैखिक संवेग के घटक हैं।
Lz = xpy – yPx
Lx = ypz – zpy
Ly = zpx – xpz
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किसी कण के कोणीय संवेग की परिवर्तन दर,
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माना निकाय का सम्पूर्ण कोणीय संवेग \(\vec{L}\) है।
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हम जानते हैं कि निकाय पर लगने पर सम्पूर्ण बाह्य बलाघूर्ण τ’ext है। अतः
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[∵ बाह्य बल सदैव युग्म में होता है व निरस्त करते हैं।]
∴ समी० (i) व (ii) से,
\(\frac{d \vec{L}_{i}}{d t}\) = τ’ext

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

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Bihar Board Class 11 Physics कार्य, ऊर्जा और शक्ति Text Book Questions and Answers

अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 6.1
किसी वस्तु पर किसी बल द्वारा किए गए कार्य का चिह्न समझना महत्वपूर्ण है। सावधानीपूर्वक बताइए कि निम्नलिखित राशियाँ धनात्मक हैं या ऋणात्मक:

  1. किसी व्यक्ति द्वारा किसी कुएँ में से रस्सी से बँधी बाल्टी को रस्सी द्वारा बाहर निकालने में किया गया कार्य।
  2. उपर्युक्त स्थिति में गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य।
  3. किसी आनत तल पर फिसलती हुई किसी वस्तु पर घर्षण द्वारा किया गया कार्य।
  4. किसी खुरदरे क्षैतिज तल पर एकसमान वेग से गतिमान किसी वस्तु पर लगाए गए बल द्वारा किया गया कार्य।
  5. किसी दोलायमान लोलक को विरामावस्था में लाने के लिए वायु के प्रतिरोधी बल द्वारा किया गया कार्य।

उत्तर:

  1. चूँकि रस्सी का विस्थापन तथा मनुष्य द्वारा लगाया गया बल दोनों ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर दिष्ट हैं। अत: कार्य धनात्मक होगा।
  2. चूँकि गुरुत्वीय बल व बाल्टी का विस्थापन विपरीत दिशा में है। अतः गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक होगा।
  3. चूँकि घर्षण बल व बाल्टी का विस्थापन विपरीत दिशा में है। अतः घर्षण बल द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक होगा।
  4. चूँकि वस्तु पर लगाया गया बल, वस्तु की गति की दिशा में है। अतः कृतं कार्य धनात्मक होगा।
  5. चूँकि वायु का प्रतिरोधी बल सदैव गति के विपरीत दिशा में है अत: कार्य ऋणात्मक होगा।

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प्रश्न 6.2
2 kg द्रव्यमान की कोई वस्तु जो आरंभ में विरामावस्था में है, 7N के किसी क्षैतिज बल के प्रभाव से एक मेज पर गति करती है। मेज का गतिज-घर्षण गुणांक 0.1 है। निम्नलिखित का परिकलन कीजिए और अपने परिणामों की व्याख्या कीजिए।
(a) लगाए गए बल द्वारा 10 s में किया गया कार्य।
(b) घर्षण द्वारा 10 s में किया गया कार्य।
(c) वस्तु पर कुल बल द्वारा 10 s में किया गया कार्य।
(d) वस्तु की गतिज ऊर्जा में 10 s में परिवर्तन।
उत्तर:
दिया है:
बल, F = 7 न्यूटन,
m = 2 किग्रा, µ = 0, µk = 0.1
चूँकि गति क्षैतिज मेज पर हो रही है।
अतः घर्षण बल, µkR = µk mg
= 0.1 × 2 × 10 = 2 न्यूटन
अतः पिण्ड पर गति की दिशा में नेट बल,
F1 = F – µkN
= 7 – 2 = 5 न्यूटन
सूत्र F1 = ma से,
त्वरण,
a = \(\frac{F_{1}}{m}\) = \(\frac{5}{2}\)
= 2.5 मीटर/सेकण्ड2
अतः 10 सेकण्ड में चली दूरी,
सूत्र S = ut + \(\frac{1}{2}\) at2 से,
S = 0 × 10 + 1 × 2.5 × 102
= 125 मीटर

(a) आरोपित बल द्वारा 10 सेकण्ड में किया गया कार्य,
W1 = F.S cos 0°
= 7 × 125
= 875 जूल

(b) घर्षण बल द्वारा 10 सेकण्ड में किया गया कार्य,
W2 = -(µkR).S
= -2 × 25
= -250 जूल
चूँकि विस्थापन घर्षण बल के विरुद्ध है। इसी कारण यह कार्य ऋणात्मक है।

(c) सम्पूर्ण बल द्वारा कृत कार्य,
W = सम्पूर्ण बल × कुल विस्थापन
= 5 × 125
= 625 न्यूटन

(d) कार्य ऊर्जा प्रमेय से,
गतिज ऊर्जा में परिवर्तन,
∆K = सम्पूर्ण बल द्वारा किया गया कार्य
= 625 न्यूटन।
यहाँ गतिज ऊर्जा में कुल परिवर्तन बाह्य बल द्वारा किए गए कार्य से कम है। इसका कारण यह है कि बाह्य बल द्वारा किए गए कार्य का कुछ भाग घर्षण प्रभाव को समाप्त करने में कम होता है।

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प्रश्न 6.3
चित्र में कुछ एकविमीय स्थितिज ऊर्जा-फलनों के उदाहरण दिए गए हैं। कण की कुल ऊर्जा कोटि-अक्ष पर क्रॉस द्वारा निर्देशित की गई है। प्रत्येक स्थिति में, कोई ऐसे क्षेत्र बताइए, यदि कोई हैं तो जिनमें दी गई ऊर्जा के लिए, कण को नहीं पाया जा सकता। इसके अतिरिक्त, कण की कुल न्यूनतम ऊर्जा भी निर्देशित कीजिए। कुछ ऐसे भौतिक सन्दर्भो के विषय में सोचिए जिनके लिए ये स्थितिज ऊर्जा आकृतियाँ प्रासंगिक हों।
उत्तर:
∵ KE + P.E. = E (constant)
∴ K.E. = E – P.E.

(a) इस ग्राफ में x < a के लिए स्थितिज ऊर्जा वक्र, दूरी अक्ष
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के साथ सम्पाती (P.E. = 0) जबकि x > a के लिए स्थितिज ऊर्जा कुल ऊर्जा से अधिक है; अतः गतिज ऊर्जा ऋणात्मक हो जाएगी जो कि असम्भव है।
अतः कण x > a क्षेत्र में नहीं पाया जा सकता।

(b) इस ग्राफ से स्पष्ट है कि प्रत्येक स्थान पर P.E. > E
अतः गतिज ऊर्जा ऋणात्मक होगी जो कि असम्भव है; अतः कण को कहीं भी नहीं पाया जा सकता।

(c) 0 < x < a तथा b < x क्षेत्रों में P.E. > E
अतः गतिज ऊर्जा ऋणात्मक होगी; अतः कण को इन क्षेत्रों में नहीं पाया जा सकता।

(d) –\(\frac{b}{2}\) < x < \(\frac{a}{2}\) तथा < x < \(\frac{b}{2}\) क्षेत्रों में P.E. > E;
अतः गतिज ऊर्जा ऋणात्मक होगी इसलिए कण इन क्षेत्रों में नहीं पाया जा सकता।

प्रश्न 6.4
रेखीय सरल आवर्त गति कर रहे किसी कण का स्थितिज ऊर्जा फलन V(x) = kx2/2 है, जहाँ k दोलक का बल नियतांक है। k = 0.5 Nm-1 के लिए V(x) व x के मध्य ग्राफ चित्र में दिखाया गया है। यह दिखाइए कि इस विभव के अंतर्गत गतिमान कुल 1J ऊर्जा वाले कण को अवश्य ही ‘वापिस आना’ चाहिए जब यह x = ± 2 m पर पहुँचता है।
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उत्तर:
हम जानते हैं कि,
E = KE + PE
∴ E = \(\frac{1}{2}\) mv2 + \(\frac{1}{2}\) kx2 [∵ PE = v(x) = \(\frac{k x^{2}}{2}\)]
कण उस स्थिति x = xm से लौटना शुरू करेगा जबकि कण की गतिज ऊर्जा शून्य होगी।
इस प्रकार, \(\frac{1}{2}\) mv2 = 0 तथा x = xm पर,
E = \(\frac{1}{2}\) kx2m
दिए है: E = 1 जूल व k = 0.5 न्यूटन/मीटर
∴ 1 = \(\frac{1}{2}\) × 0.5 × x2m
या \(x_{m}^{2}\) = \(\frac{2}{0.5}\) = 4
∴ xm = ± 2 मीटर
इस प्रकार कण x = ± 2 मीटर पर पहुँचने पर ही वहाँ से वापस लौटना प्रारम्भ करता है।

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प्रश्न 6.5
निम्नलिखित का उत्तर दीजिए:
(a) किसी रॉकेट का बाह्य आवरण उड़ान के दौरान घर्षण के कारण जल जाता है। जलने के लिए आवश्यक ऊष्मीय ऊर्जा किसके व्यय पर प्राप्त की गई-रॉकेट या वातावरण?
(b) धूमकेतु सूर्य के चारों ओर बहुत ही दीर्घवृत्तीय कक्षाओं में घूमते हैं। साधारणतया धूमकेतु पर सूर्य का गुरुत्वीय बल धूमकेतु के लंबवत् नहीं होता है। फिर भी धूमकेतु की संपूर्ण कक्षा में गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य शून्य होता है। क्यों?
(c) पृथ्वी के चारों ओर बहुत ही क्षीण वायुमण्डल में घूमते हुए किसी कृत्रिम उपग्रह की ऊर्जा धीरे-धीरे वायुमण्डलीय प्रतिरोध (चाहे यह कितना ही कम क्यों न हो) के विरुद्ध क्षय के कारण कम होती जाती है फिर भी जैसे-जैसे कृत्रिम उपग्रह पृथ्वी के समीप आता है तो उसकी चाल में लगातार वृद्धि क्यों होती है?
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(d) चित्र (i) में एक व्यक्ति अपने हाथों में 15 kg का कोई द्रव्यमान लेकर 2 m चलता है। चित्र (ii) में वह उतनी ही दूरी अपने पीछे रस्सी को खींचते हुए चलता है। रस्सी घिरनी पर चढ़ी हुई है और उसके दूसरे सिरे पर 15 kg का द्रव्यमान लटका हुआ है। परिकलन कीजिए कि किस स्थिति में किया गया कार्य अधिक है?
उत्तर:
(a) बाहरी आवरण के जलने के लिए आवश्यक ऊष्मीय ऊर्जा रॉकेट की यान्त्रिक ऊर्जा से प्राप्त होती है।

(b) धूमकेतु पर सूर्य द्वारा लगाया गया गुरुत्वाकर्षण बल एक संरक्षी बल है। संरक्षी बल के द्वारा बन्द पथ में गति करने वाले पिण्ड पर किया गया नेट कार्य शून्य होता है। इस प्रकार धूमकेतु की सम्पूर्ण कक्षा में सूर्य के गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा किया गया कार्य शून्य होगा।

(c) जैसे – 2 उपग्रह पृथ्वी के समीप आता है वैसे – 2 उसकी गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा कम होती है। ऊर्जा संरक्षण के नियमानुसार गतिज ऊर्जा में वृद्धि होती रहती है। अतः उसकी चाल बढ़ती जाती है। कुल ऊर्जा का कुछ भाग घर्षण बल के विरुद्ध कार्य करने में खर्च हो जाता है।

(d) चित्र (i) में स्थिति में, व्यक्ति द्रव्यमान को उठाए रखने के लिए भार के विरुद्ध ऊपर की ओर बल लगाता है जबकि उसका विस्थापन क्षैतिज दिशा में है (i.e., θ = 90)
अतः मनुष्य द्वारा किया गया कार्य,
W = Fs cos 90° = 0
चित्र (ii) स्थिति में, घिरनी मनुष्य द्वारा लगाए गए क्षैतिज बल की दिशा को ऊर्ध्वाधर कर देती है व द्रव्यमान का विस्थापन भी ऊपर की ओर है (i. e., θ = 0°)
अत: मनुष्य द्वारा किया गया कार्य,
W = mgh cos 0°
= 15 × 20 × 1
= 300 जूल।

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प्रश्न 6.6
सही विकल्प को रेखांकित कीजिए:

  1. जब कोई संरक्षी बल किसी वस्तु पर धनात्मक कार्य करता है तो वस्तु की स्थितिज ऊर्जा बढ़ती है/घटती है/अपरिवर्ती रहती है।
  2. किसी वस्तु द्वारा घर्षण के विरुद्ध किए गए कार्य का परिणाम हमेशा इसकी गतिज/स्थितिज ऊर्जा में क्षय होता है।
  3. किसी बहुकण निकाय के कुल संवेग-परिवर्तन की दर निकाय के बाह्य बल/आंतरिक बलों के जोड़ के अनुक्रमानुपाती होती है।
  4. किन्हीं दो पिंडों के अप्रत्यास्थ संघट्ट में वे राशियाँ, जो संघट्ट के बाद नहीं बदलती हैं; निकाय की कुल गतिज ऊर्जा/कुल रेखीय संवेग/कुल ऊर्जा हैं।

उत्तर:

  1. घटती है, चूँकि संरक्षी बल के विरुद्ध किया गया कार्य ही स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित होता है।
  2. गतिज ऊर्जा, चूँकि घर्षण के विरुद्ध कार्य तभी होता है जबकि गति हो रही है।
  3. बाह्य बल, चूँकि बहुकण निकाय में, आन्तरिक बलों का परिणामी शून्य होता है एवम् आन्तरिक बल संवेग परिवर्तन के लिए उत्तरदायी नहीं होते हैं।
  4. कुल रेखीय संवेग तथा कुल ऊर्जा भी जबकि दो पिंडों का निकास वियुक्त है।

प्रश्न 6.7
बतलाइए कि निम्नलिखित कथन सत्य हैं या असत्य। अपने उत्तर के लिए कारण भी दीजिए।

  1. किन्हीं दो पिंडों के प्रत्यास्थ संघट्ट में, प्रत्येक पिंड का संवेग व ऊर्जा संरक्षित रहती है।
  2. किसी पिंड पर चाहे कोई भी आंतरिक व बाह्य बल क्यों न लग रहा हो, निकाय की कुल ऊर्जा सर्वदा संरक्षित रहती है।
  3. प्रकृति में प्रत्येक बल के लिए किसी बंद लूप में, किसी पिंड की गति में किया गया कार्य शून्य होता है।
  4. किसी अप्रत्यास्थ संघट्ट में, किसी निकाय की अंतिम गतिज ऊर्जा, आरंभिक गतिज ऊर्जा से हमेशा कम होती है।

उत्तर:

  1. असत्य
  2. सत्य
  3. असत्य
  4. सत्य।

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प्रश्न 6.8
निम्नलिखित का उत्तर ध्यानपूर्वक, कारण सहित दीजिए:

  1. किन्हीं दो बिलियर्ड-गेंदों के प्रत्यास्थ संघट्ट में, क्या गेंदों के संघट्ट की अल्पावधि में (जब वे संपर्क में होती है) कुल गतिज ऊर्जा संरक्षित रहती है?
  2. दो गेंदों के किसी प्रत्यास्थ संघट्ट की लघु अवधि में क्या कुल रेखीय संवेग संरक्षित रहता है?
  3. किसी अप्रत्यास्थ संघट्ट के लिए प्रश्न (a) व (b) के लिए आपके उत्तर क्या हैं?
  4. यदि दो बिलियर्ड-गेंदों की स्थितिज ऊर्जा केवल उनके केंद्रों के मध्य, पृथक्करण-दूरी पर निर्भर करती है तो संघट्ट प्रत्यास्थ होगा या अप्रत्यास्थ? (ध्यान दीजिए कि यहाँ हम संघट्ट के दौरान बल के संगत स्थितिज ऊर्जा की बात कर रहे हैं, ना कि गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा की)

उत्तर:

  1. नहीं, चूँकि संघट्ट काल के दौरान गेंद सम्पीडित हो जाती है। अतः गतिज ऊर्जा, गेंदों की स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है।
  2. हाँ, संवेग संरक्षित रहता है।
  3. हाँ, दोनों उत्तर उपर्युक्त ही रहेंगे।
  4. चूँकि स्थितिज ऊर्जा केन्द्रों के मध्य दूरी पर निर्भर करती है इसका तात्पर्य यह है कि संघट्ट काल में पिंडों के मध्य लगने वाला संरक्षी बल है। अतः ऊर्जा संरक्षित रहेगी। अतः प्रत्यास्थ संघट्ट होगा।

प्रश्न 6.9
कोई पिंड जो विरामावस्था में है, अचर त्वरण से एकविमीय गति करता है। इसको किसी समय पर दी गई शक्ति अनुक्रमानुपाती है –

  1. t1/2
  2. t
  3. t3/2
  4. t2

उत्तर:
a = नियत, µ = 0
∴ बल = ma, अचर होगा तथा = at होगा। ]
∴ शक्ति P = Fv = ma.at = ma2t
∴ P ∝ t
अतः विकल्प (ii) सत्य है।

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प्रश्न 6.10
एक पिंड अचर शक्ति के स्त्रोत के प्रभाव में एक ही दिशा में गतिमान है। इसका t समय में विस्थापन, अनुक्रमानुपाती है –

  1. t1/2
  2. t
  3. t3/2
  4. t2

उत्तर:
शक्ति P = Fv अचर है।
∴ P = (ma)
v = m.\(\frac{dv}{dt}\).v
या \(\frac{vdv}{dt}\) = \(\frac{p}{m}\)
या vdv = \(\frac{p}{m}\).dt
समाकलन करने पर, \(\frac{v^{2}}{2}\) = \(\frac{pt}{m}\) + c1
प्रारम्भ में, t = 0 पर v = 0
∴ a = 0
∴ \(\frac{v^{2}}{2}\) = \(\frac{p}{m}\).t
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समाकलन करने पर,
प्रारम्भ में, t = 0 पर s = 0
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अतः विकल्प (iii) सही है।

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प्रश्न 6.11
किसी पिंड पर नियत बल लगाकर उसे किसी निर्देशांक प्रणाली के अनुसार z – अक्ष के अनुदिश गति करने के लिए बाध्य किया गया है जो इस प्रकार है।
F = (-\(\hat { i } \) + 2\(\hat { j } \) + 3\(\hat { k } \))N
जहाँ \(\hat { i } \), \(\hat { j } \), \(\hat { k } \) क्रमशः x – , y – एवं z – अक्ष के अनुदिश एकांक सदिश हैं। इस वस्तु को 7 – अक्ष के अनुदिश 4m की दूरी तक गति कराने के लिए आरोपित बल द्वारा किया गया कार्य कितना होगा?
उत्तर:
दिया है:
\(\vec { F } \) = –\(\hat { i } \) + 2\(\hat { j } \) + 3\(\hat { k } \) न्यूटन
चूँकि विस्थापन z – अक्ष के अनुदिश है।
अतः \(\vec { s } \) = 4\(\hat { i } \) मीटर
∴ बल द्वारा किया गया कार्य, W = \(\bar{F}\). \(\hat { S } \)
= (-\(\hat { i } \) + 2\(\hat { j } \) + 3\(\hat { k } \).(4\(\hat { k } \))
= 12 जूल [∵\(\hat { j } \).\(\hat { k } \) = 0 व \(\hat { k } \).\(\hat { k } \) = 1 इत्यादि]

प्रश्न 6.12
किसी अंतरिक्ष किरण प्रयोग में एक इलेक्ट्रॉन और एक प्रोटॉन का संसूचन होता है जिसमें पहले कण की गतिज ऊर्जा 10 kev है और दूसरे कण की गतिज ऊर्जा 100 keV है। इनमें कौन-सा तीव्रगामी है, इलेक्ट्रॉन या प्रोटॉन? इनकी चालों का अनुपात ज्ञात कीजिए। (इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान = 9.11 × 10-31 kg, प्रोटॉन का द्रव्यमान = 1.67 × 10-27 kg, 1ev = 1.60 × 10-19 J)
उत्तर:
दिया है:
इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान me = 9.11 × 10-31 किग्रा,
प्रोटॉन का द्रव्यमान mp = 1.67 × 10-27 किग्रा,
1eV = 1.6 × 10-19 जूल
प्रोटॉन की गतिज ऊर्जा,
Kp = 100 KeV = 105eV
= 105 × 1.6 × 10-19J
इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा
Ke = 10 keV = 104 eV
= 104 × 1.6 × 10-19J
माना कि प्रोटॉन व इलेक्ट्रॉन की चाल क्रमशः vp, व ve हैं।
सूत्र गतिज ऊर्जा, K = \(\frac{1}{2}\) mv2 से,
प्रोटॉन की गतिज ऊर्जा,
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इसी प्रकार,
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चूँकि ve > vp
अर्थात् इलेक्ट्रॉन तीव्रगामी है।
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प्रश्न 6.13
2 mm त्रिज्या की वर्षा की कोई बूंद 500 m की ऊँचाई से पृथ्वी पर गिरती है। यह अपनी आरंभिक ऊँचाई के आधे हिस्से तक (वायु के श्यान प्रतिरोध के कारण) घटते त्वरण के साथ गिरती है और अपनी अधिकतम (सीमान्त) चाल प्राप्त कर लेती है, और उसके बाद एकसमान चाल से गति करती है। वर्षा की बूंद पर उसकी यात्रा के पहले व दूसरे अर्ध भागों में गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य कितना होगा? यदि बूंद की चाल पृथ्वी तक पहुँचने पर 10 ms-1 हो तो संपूर्ण यात्रा में प्रतिरोधी बल द्वारा किया गया कार्य कितना होगा?
उत्तर:
दिया है:
वर्षा की बूंद की त्रिज्या, r = 2 मिमी
= 2 × 10-3 मीटर,
प्रारम्भिक ऊँचाईं, h = 500 मीटर
प्रारम्भिक चाल, u = 0
पृथ्वी तल पर बूंद की चाल, v = 10 मीटर/सेकण्ड
त्वरण, g = 9.8 मीटर/सेकण्ड2
जल का घनत्व ρ = 103 किग्रा प्रति मीटर3
बूंद का द्रव्यमान, m = (\(\frac{4}{3}\) πr3) × (ρ)
= \(\frac{4}{3}\) × \(\frac{22}{7}\) × (2 × 10-3)3 × 103
= 3.35 × 10-5 किग्रा
बूंद पर गुरुत्वीय बल,
F1 = mg = 3.35 × 10-5 × 9.8
= 3.28 × 10-4 न्यूटन
यात्रा के दोनों अर्धभाग समान हैं।
∴ h1 = h2 = \(\frac{h}{2}\) = 250 मीटर
यात्रा के इन भागों में गुरुत्वीय बल द्वारा कृत कार्य,
W1 = W2 = mgh1
= (3.28 × 10-4) × 250 = 0.082 जूल

वर्षा की बूँद की गतिज ऊर्जा में कुल वृद्धि,
∆K = K2 – K1
= \(\frac{1}{2}\) mv2 – \(\frac{1}{2}\) mu2
= \(\frac{1}{2}\) × 3.35 × 10-5 × (10)2 – 0
= 0.001 जूल

गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कुल कार्य,
Wg = W1 + W2
= 0.082 + 0.082
= 0.164 जूल

माना प्रतिरोधी बल द्वारा कुल कृत कार्य ωr है।
∴ नेट कार्य, W = Wg + Wr = ∆K (कार्य ऊर्जा प्रमेय से)
∴ ωr = ∆K – Wg
= 0.001 – 0.0164
= – 0.163 जूल

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प्रश्न 6.14
किसी गैस-पात्र में कोई अणु 200 ms-1 की चाल से अभिलंब के साथ 30° का कोण बनाता हुआ क्षैतिज दीवार से टकराकर पुनः उसी चाल से वापस लौट जाता है। क्या इस संघट्ट में संवेग संरक्षित है? यह संघट्ट प्रत्यास्थ है या अप्रत्यास्थ?
उत्तर:
दिया है:
θ = 30°, u = 200 मीटर प्रति सेकण्ड दीवार से संघट्ट के बाद चाल,
v = u = 200 मीटर प्रति सेकण्ड
चूँकि प्रत्येक संघट्ट में भी संवेग संरक्षित रहता है। अतः इस संघट्ट में भी संवेग संरक्षित रहता है।
माना अणु का द्रव्यमान m है।
अतः दीवार से टकराते समय निकाय की गतिज ऊर्जा,
K1 = \(\frac{1}{2}\) mu2 = \(\frac{1}{2}\) m (200)2 जूल
एवम् संघट्ट के बाद गतिज ऊर्जा,
K2 = \(\frac{1}{2}\) mv2 = \(\frac{1}{2}\) m (200)2 जूल
∴ K1 = K2
अतः यह एक प्रत्यास्थ संघट्ट है।

प्रश्न 6.15
किसी भवन के भूतल पर लगा कोई पंप 30 m3 आयतन की पानी की टंकी को 15 मिनट में भर देता है। यदि टंकी पृथ्वी तल से 40 m ऊपर हो और पंप की दक्षता 30% हो तो पंप द्वारा कितनी विद्युत शक्ति का उपयोग किया गया?
उत्तर:
दिया है:
टंकी की ऊँचाई, h = 40 मीटर
टंकी का आयतन, V = 30 मीटर3
लगा समय, t = 15 मिनट = 15 × 60 सेकण्ड, पम्प की दक्षता, η = 30%
जल का घनत्व, ρ = 103 किग्रा प्रति मीटर3
उठाए गए जल का द्रव्यमान,
m = V × ρ = 30 × 103
= 3 × 104 किग्रा
पम्प द्वारा टंकी भरने में खर्च की गई शक्ति,
P0 = \(\frac{W}{t}\) = \(\frac{mgh}{t}\)
= \(\frac{3 \times 10^{4} \times 9.8 \times 40}{1.5 \times 60}\) = 13066 वॉट
माना पम्प द्वारा उपयोग की गई शक्ति P1 है।
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= 43553 वॉट
= 43.55 किलो वॉट।

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प्रश्न 6.16
दो समरूपी बॉल बियरिंग एक-दूसरे के सम्पर्क में हैं और किसी घर्षणरहित मेज पर विरामावस्था में हैं। इनके साथ समान द्रव्यमान का कोई दूसरा बाल बियरिंग, जो आरंभ में V चाल से गतिमान है, सम्मुख संघट्ट करता है। यदि संघट्ट प्रत्यास्थ है तो संघट्ट के पश्चात् निम्नलिखित (चित्र) में कौन-सा परिणाम संभव है?
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उत्तर:
माना प्रत्येक बॉल बियरिंग का द्रव्यमान m है।
अतः संघट्ट से पूर्व निकाय की गतिज ऊर्जा,
K1 = \(\frac{1}{2}\) mv2 + 0 + 0 = \(\frac{1}{2}\)mv2
प्रथम स्थिति में, संघट्ट के पश्चात् निकाय की गतिज ऊर्जा,
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अतः K1 > K2
द्वितीय स्थिति में, संघट्ट के पश्चात् निकाय की कुल ऊर्जा,
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अतः K1 = K2
तृतीय स्थिति में, संघट्ट के पश्चात् निकाय की गतिज ऊर्जा,
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प्रश्नानुसार संघट्ट प्रत्यास्थ है। अतः निकाय की गतिज ऊर्जा संरक्षित रहेगी। चूँकि केवल द्वितीय स्थिति में ही गतिज ऊर्जा संरक्षित रहती है अर्थात् केवल यही परिणाम सम्भव होगा।

प्रश्न 6.17
किसी लोलक के गोलक A को, जो ऊर्ध्वाधर से 30° का कोण बनाता है, छोड़े जाने पर मेज पर, विरामावस्था में रखे दूसरे गोलक B से टकराता है जैसा कि चित्र में प्रदर्शित है। ज्ञात कीजिए कि संघट्ट के पश्चात् गोलक A कितना ऊँचा उठता है? गोलकों के आकारों की उपेक्षा कीजिए और मान लीजिए कि संघट्ट प्रत्यास्थ है।
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उत्तर:
दोनों गोलक समरूप हैं तथा संघट्ट प्रत्यास्थ है; अतः संघट्ट के दौरान लटका हुआ गोलक अपना सम्पूर्ण संवेग नीचे रखे गोलक को दे देता है और जरा भी ऊपर नहीं उठता।

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प्रश्न 6.18
किसी लोलक के गोलक को क्षैतिज अवस्था से छोड़ा गया है। यदि लोलक की लंबाई 1.5 m है तो निम्नतम बिंदु पर, आने पर गोलक की चाल क्या होगी? यह दिया गया है कि इसकी आरंभिक ऊर्जा का 5% अंश वायु प्रतिरोध के विरुद्ध क्षय हो जाता है।
उत्तर:
निम्नतम बिन्दु P पर, लोलक में केवल स्थितिज ऊर्जा है। बिन्दु B पर, लोलक में केवल गतिज ऊर्जा है। इका अर्थ है कि जब लोलक P से Q पर पहुँचता है, तब स्थितिज ऊर्जा, गतिज ऊर्जा में परिवर्तित होती है।
अतः बिन्दु Q पर KE = PE
लेकिन 5% स्थितिज ऊर्जा, वायु प्रतिरोध के विरुद्ध क्षय हो जाती है।
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∴ Q पर गतिज ऊर्जा
= P पर स्थितिज ऊर्जा का 95% …… (1)
माना लोलक का द्रव्यमान = m
बिन्दु Q पर लोलक की चाल = v
तथा बिन्दु P की 0 के सापेक्ष ऊँचाई = h = 1.5 मीटर
∴ समी० (1) से,
\(\frac{1}{2}\)mv2 = \(\frac{95}{100}\) × mgh
अथवा
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= 5.29 मीटर/सेकण्ड
v = 5.3 मीटर।

प्रश्न 6.19
300 kg द्रव्यमान की कोई ट्राली, 25 kg रेत का बोरा लिए हुए किसी घर्षणरहित पथ पर 27 kmh-1 की एकसमान चाल से गतिमान है। कुछ समय पश्चात् बोरे में किसी छिद्र से रेत 0.05 kg s-1 की दर से निकलकर ट्राली के फर्श पर रिसने लगती है। रेत का बोरा खाली होने के पश्चात् ट्रॉली की चाल क्या होगी?
उत्तर:
चूँकि वेग एक समान है व ट्रॉली व रेत का बोरा एक ही निकाय के अंग हैं जिस पर कोई बाह्य बल नहीं लगा है अत: निकाय का रेखीय संवेग नियत रहेगा भले ही निकाय में किसी भी तरह का आन्तरिक परिवर्तन क्यों न हो जाए। इस प्रकार ट्रॉली की चाल 27 किमी प्रति घण्टा ही बनी रहेगी।

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प्रश्न 6.20
0.5 kg द्रव्यमान का एक कण y = ax3/2 वेग से सरल रेखीय गति करता है जहाँ a = 5 m-1/2s-1 है। x = 0 से x = 2m तक इसके विस्थापन में कुल बल द्वारा किया गया कार्य कितना होगा?
उत्तर:
दिया है:
m = 0.5 किग्रा
v = ax3/2
a = 5m-1/2 प्रति सेकण्ड
माना वस्तु पर F बल से a’ त्वरण उत्पन्न होता है।
∴ F = ma’ = \(\frac{mdv}{dt}\)
माना वस्तु को dx दूरी विस्थापित करने पर किया गया कार्य dw है।
∴ dw = F.dx = m\(\frac{dv}{dt}\).dx
= m.dv. \(\frac{dx}{dt}\) = mvdv ……………. (1)
माना वस्तु को x = 0 से x = 2 मीटर तक चलाने में किया गया कुल कार्य W है।
∴ समी० (1) से,
W = ∫dw = ∫mvdv
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= 50 जूल

प्रश्न 6.21
किसी पवनचक्की के ब्लेड, क्षेत्रफल A के वृत्त जितना क्षेत्रफल प्रसर्प करते हैं।
(a) यदि हवा वेग से वृत्त के लंबवत् दिशा में बहती है तो t समय में इससे गुजरने वाली वायु का द्रव्यमान क्या होगा?
(b) वायु की गतिज ऊर्जा क्या होगी?
(c) मान लीजिए कि पवनचक्की हवा की 25% ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में रूपान्तरित कर देती है यदि A = 30 m2, और v = 36 kmh-1 और वायु का घनत्व 1.2 kgm-3 है तो उत्पन्न विद्युत शक्ति का परिकलन कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
वायु का घनत्व, ρ = 1.2 किग्रा प्रति मीटर3,
वायु का वेग, v = 36 किमी/घण्टा
= 36 × \(\frac{5}{8}\) = 10 मीटर/सेकण्ड
= 30 मीटर2, समय, t = ?

(a) t समय में वृत्त से प्रवाहित वायु का आयतन,
V = A × vt
वृत्त से प्रवाहित वायु का द्रव्यमान,
m = vp = Avtρ

(b) इस वायु की गतिज ऊर्जा,
K = \(\frac{1}{2}\) mv2 = \(\frac{1}{2}\) (Avtρ) v3
= \(\frac{1}{2}\)ρAv2t

(c) इस समय में पवन चक्की द्वारा उत्पन्न विद्युत ऊर्जा,
E = वायु की गतिज ऊर्जा का 25%
= (\(\frac{1}{2}\) Aρv3t) × \(\frac{25}{100}\) = \(\frac{1}{8}\) Aρv3t
अत: इस ऊर्जा द्वारा उत्पन्न विद्युत शक्ति,
P = \(\frac{E}{t}\)
= \(\frac{1}{8}\) Aρv3
= \(\frac{1}{8}\) × 30 × 1.2 × 103
= 4.5 विलोवॉट

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प्रश्न 6.22
कोई व्यक्ति वजन कम करने के लिए 10 kg द्रव्यमान को 0.5 m की ऊँचाई तक 1000 बार उठाता है। मान लीजिए कि प्रत्येक बार द्रव्यमान को नीचे लाने में खोई हुई ऊर्जा क्षयित हो जाती है।
(a) वह गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध कितना कार्य करता है?
(b) यदि वसा 3.8 × 107 J ऊर्जा प्रति किलोग्राम आपूर्ति करता हो जो कि 20% दक्षता की दर से यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है तो वह कितनी वसा खर्च कर डालेगा?
उत्तर:
दिया है:
m = 10 किग्रा,
h = 0.5 मीटर
द्रव्यमान को उठाया गया, n = 1000 बार
(a) 10 किग्रा के द्रव्यमान को 1000 बार उठाने में किया गया कार्य,
W = n × mgh
= 1000 × 10 × 9.8 × 0.5
= 49000
= 49 किलो जूल

(b) 1 किग्रा वसा द्वारा प्रदत्त यान्त्रिक ऊर्जा
= 3.8 × 107 जूल का 20%
= 3.8 × 107 × \(\frac{20}{100}\)
= \(\frac{3.8}{5}\) × 107 जूल
इसलिए (\(\frac{3.8}{5}\) × 107) जूल ऊर्जा मिलती है = 1 किग्रा वसा से,
∴ 1 जूल ऊर्जा मिलती है = \(\frac{5}{3.8 \times 10^{7}}\) किग्रा वसा से
∴ 49000 जूल ऊर्जा मिलती है,
= \(\frac{5}{3.8 \times 10^{7}}\) × 49000 किग्रा वसा से
= 6.45 × 10-3 किग्रा वसा से

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प्रश्न 6.23
कोई परिवार 8 kW विद्युत-शक्ति का उपभोग करता है।
(a) किसी क्षैतिज सतह पर सीधे आपतित होने वाली सौर ऊर्जा की औसत दर 200 Wm-2 है। यदि इस ऊर्जा का 20% भाग लाभदायक विद्युत ऊर्जा में रूपान्तरित किया जा सकता है तो 8 KW की विद्युत आपूर्ति के लिए कितने क्षेत्रफल की आवश्यकता होगी?
(b) इस क्षेत्रफल की तुलना किसी विशिष्ट भवन की छत के क्षेत्रफल से कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
उपभोग की गई विद्युत शक्ति = 8 KW
(a) सौर ऊर्जा की औसत दर = 200 वॉट/मीटर2
उपयोगी विद्युत ऊर्जा में रूपान्तरण दर = 20%
8 किलो वॉट के लिए आवश्यक क्षे० = ?
प्रति वर्ग मीटर क्षेत्रफल से प्राप्त उपयोगी विद्युत शक्ति
= 200 वॉट का 20%
= 200 × \(\frac{20}{100}\) = 40 वॉट
इसलिए 40 वॉट उपभोगी शक्ति प्राप्त होती है = 1 मी2 क्षेत्रफल से।
∴ 1 वॉट उपभोगी शक्ति प्राप्त होती है
= \(\frac{1}{40}\) क्षेत्रफल से
∴ 8 kw उपभोगी शक्ति प्राप्त होती है
= \(\frac{1}{40}\) × 8 × 1000 क्षेत्रफल से।
= 200 मीटर2 क्षेत्रफल से।

(b) इस क्षेत्रफल की तुलना जटिल घर की छत से करने के लिए माना छत की भुजा a है।
∴ छत का क्षेत्रफल = a × a2
a2 = 200
a = \(\sqrt{200}\) = 14.14 मीटर
= 14 मीटर
अर्थात् आवश्यक क्षेत्रफल 14 मीटर × 14 मीटर आकार के भवन की छत के क्षेत्रफल के समतुल्य है।

Bihar Board Class 11 Physics कार्य, ऊर्जा और शक्ति Additional Important Questions and Answers

अतिरिक्त अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 6.24
0.012 kg द्रव्यमान की कोई गोली 70 ms-1 की क्षैतिज चाल से चलते हुए 0.4 kg द्रव्यमान के लकड़ी के गुटके से टकराकर गुटके के सापेक्ष तुरंत ही विरामावस्था में आ जाती है। गुटके को छत से पतली तारों द्वारा लटकाया गया है। परिकलन कीजिए कि गुटका किस ऊँचाई तक ऊपर उठता है? गुटके में पैदा हुई ऊष्मा की मात्रा का भी अनुमान लगाइए।
उत्तर:
दिया है:
गोली का द्रव्यमान, m = 0.012 किग्रा,
गोली की प्रा० चाल, u = 70 मीटर/सेकण्ड
गोली की अन्तिम चाल v = 0
लकड़ी के गुटके का द्रव्यमान, m = 0.4 किग्रा
लकडी के गटके की प्रा० चाल, u1 = 0
माना कि संघट्ट के बाद गोली तथा गुटके की अन्तिम चाल v मीटर/सेकण्ड है।
संवेग संरक्षण के नियमानुसार,
संघट्ट से पूर्व गोली तथा गुटके का संवेग = संघट्ट के पश्चात् दोनों का अन्तिम संवेग।
∴ mu + mu1 = (m + m)v
∴ 0.012 × 70 + 0.4 × 0
= (0.012 + 0.4) y
∴ v = \(\frac{0.012×70}{0.412}\) = 2.04 मीटर/सेकण्ड
माना गुटका संघट्ट के बाद h ऊँचाई तक ऊपर उठता है।
∴ संघट्ट से पूर्व गुटके व गोली की KE में कमी = संघट्ट के बाद गुटके व गोली की P.E. में वृद्धि
∴ \(\frac{1}{2}\) (m + m) v2 = (m + m) gh
∴ h = \(\frac{v^{2}}{2 g}\) = \(\frac{2.04×2.04}{2×9.8}\)
= 0.212 मीटर
= 21.2 सेमी
गोली धंसने से उत्पन्न हुई ऊष्मा
= \(\frac{1}{2}\) mu2 – \(\frac{1}{2}\) (m + m) v2
= \(\frac{1}{2}\) × 0.012 × 702 – \(\frac{1}{2}\) × 0.412 × 2.042
= 28.54 जूल

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प्रश्न 6.25
दो घर्षण रहित आनत पथ, जिनमें से एक की ढाल अधिक है और दूसरे की ढाल कम है, बिंदु पर मिलते हैं। बिंदु A से प्रत्येक पथ पर एक-एक पत्थर को विरामावस्था से नीचे सरकाया जाता है (चित्र)। क्या ये पत्थर एक ही समय पर नीचे पहुँचेंगे? क्या वे वहाँ एक ही चाल से पहुँचेंगे? व्याख्या कीजिए। यदि θ1 = 30°, θ2 = 60° और h = 10m दिया है, तो दोनों पत्थरों की चाल एवं उनके द्वारा नीचे पहुँचने में लिए गए समय क्या हैं?
उत्तर:
AB तथा AC क्रमश: θ1, व θ2, पर झुके दो समतल तल हैं। दोनों पत्थर एक ही समय नीचे नहीं आएंगे।
व्याख्या: माना इन तलों पर इन पत्थरों के भार क्रमश: m1g
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व m2g हैं। m1g तथा m2g के वियोजित घटक चित्र के अनुसार होंगे।
माना पहले व दूसरे पत्थर में उत्पन्न त्वरण क्रमशः a1 व a2 हैं। तब
या ma1 = m1g sin θ1
a1 = g sin θ1
इसी प्रकार, a2 = g sin θ2
∴ a2 = g sin θ2
∴ a2 > a1 i.e., a1 = sin 30° = \(\frac{g}{2}\)
तथा a2 = g sin 60° = \(\frac{g \sqrt{3}}{2}\)
v = u + at v = ar
या t = \(\frac{v}{a}\) ………. (1)
यहाँ
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अर्थात् दूसरा पत्थर कम समय लेगा व पहले पत्थर पर | जल्दी नीचे पहुँचेगा।

हाँ, दानों पत्थर एक साथ नीचे पहुँचेंगे।
व्याख्या: बिन्दु A पर तल की ऊँचाई, h = 10 मीटर है।
माना दोनों पत्थर, क्रमश: v1 व v2 वेग से नीचे पहुंचते हैं।
ऊर्जा संरक्षण के नियम से,
चोटी पर स्थितिज ऊर्जा में क्षय = नीचे गतिज ऊर्जा में वृद्धि
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प्रश्न 6.26
किसी रुक्ष आनत तल पर रखा हुआ 1 kg द्रव्यमान का गुटका किसी 100 Nm-1 स्प्रिंग नियतांक वाले स्प्रिंग से दिए गए चित्र के अनुसार जुड़ा है। गुटके को स्प्रिंग की बिना खिंची स्थिति में, विरामावस्था से छोड़ा जाता है। गुटका विरामावस्था में आने से पहले आनत तल पर 10 cm नीचे खिसक जाता है। गुटके और आनत तल के मध्य घर्षण गुणांक ज्ञात कीजिए। मान लीजिए कि स्प्रिंग का द्रव्यमान उपेक्षणीय है और घिरनी घर्षणरहित है।
उत्तर:
दिया है:
गुटके का द्रव्यमान, m = 1 किग्रा
स्प्रिंग नियतांक, K = 100 न्यूटन/मीटर,
g = 10 मीटर/सेकण्ड2
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माना गुटके को छोड़ने पर विस्थापन,
x = 10 सेमी = 0.1 मीटर
झुकाव, θ = 37°
∴ sin 37° = 0.6018 व cos 37° = 0.7996
माना नीचे की ओर x दूरी चलने में किया गया कार्य है।
∴ W = (mg sin θ – u mg cosθ)x …………. (1)
लेकिन स्प्रिंग में यह कार्य स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित रहेगा।
∴ PE = \(\frac{1}{2}\) Kx2 ……. (2)
समी० (1) व (2) से,
\(\frac{1}{2}\) Kx2 = mg (sinθ – µcos θ).x
= µmg cosθ = – \(\frac{1}{2}\) kx = mg sinθ
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= 0.125

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प्रश्न 6.27
0.3 kg द्रव्यमान का कोई बोल्ट 7 ms-1 की एकसमान चाल से नीचे आ रही किसी लिफ्ट की छत से गिरता है। यह लिफ्ट के फर्श से टकराता है (लिफ्ट की लंबाई = 3 m) और वापस नहीं लौटता है। टक्कर द्वारा कितनी ऊष्मा उत्पन्न हुई? यदि लिफ्ट स्थिर होती तो क्या आपका उत्तर इससे भिन्न होता?
उत्तर:
दिया है: बोल्ट का द्रव्यमान, m = -0.3 किग्रा
लिफ्ट की लम्बाई, h = 3 मीटर
छत पर बोल्ट की स्थितिज ऊर्जा, v = mgh
= 0.3 × 9.8 × 3
= 8.82 जूल
चूँकि बोल्ट लिफ्ट के फर्श से टकराकर बिल्कुल भी ऊपर नहीं उठता है, इसका तात्पर्य है कि फर्श से टकराने पर बोल्ट की सम्पूर्ण स्थितिज ऊर्जा, ऊष्मा में बदल जाती है। अत: बोल्ट के फर्श से टकराने पर उत्पन्न ऊष्मा 8.82 जूल है। लिफ्ट के स्थिर होने पर, यह एक जड़त्वीय निर्देश तन्त्र होता है। चूँकि गुरुत्वीय त्वरण का मान सभी स्थानों पर एक समान होता है अर्थात् हमारा उत्तर समान होगा।

प्रश्न 6.28
200 kg द्रव्यमान की कोई ट्रॉली किसी घर्षणरहित पथ पर 36 km h-1 की एकसमान चाल से गतिमान है। 20 kg द्रव्यमान का कोई बच्चा ट्रॉली के एक सिरे से दूसरे सिरे तक (10 m दूर) ट्रॉली के सापेक्ष 4 ms-1 की चाल से ट्रॉली की गति की विपरीत दिशा में दौड़ता है और ट्रॉली से बाहर कूद जाता है। ट्रॉली की अंतिम चाल क्या है? बच्चे के दौड़ना आरंभ करने के समय से ट्रॉली ने कितनी दूरी तय की?
उत्तर:
दिया है:
ट्रॉली का द्रव्यमान, m1 = 200 किग्रा, ट्रॉली की चाल u = 36 किमी प्रति घण्टा
= 36 × \(\frac{5}{18}\) = 10 मी/से
बच्चे का द्रव्यमान m2 = 20 किग्रा
बच्चे की ट्रॉली के सापेक्ष चाल, v2 = 4 मीटर/सेकण्ड
माना ट्रॉली की अन्तिम चाल v1 है
∴ बच्चे के दौड़ना प्रारम्भ करने से पूर्व निकाय का संवेग,
Pi = (m1 + m2) u1
= (200 + 20) × 10 = 2200 किग्रा मीटर/सेकण्ड
बच्चे के ट्रॉली से कूदते समय निकाय का संवेग,
P1 = m1 v1 + m2 (v1 – v2)
= 200v1 + 20 (v1 – 4)
= 220v1 – 80
परन्तु संवेग संरक्षण के नियमानुसार, Pi = Pf
2200 = 220v1 – 80
या 220v1 = 2280
∴ v1 = \(\frac{2280}{220}\) = 10.36 मीटर/सेकण्ड
ट्रॉली में 10 मीटर की दूरी चलने में बच्चे द्वारा लिया गया समय,
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= \(\frac{10}{4}\) = 2.5 सेकण्ड
माना इस समय में ट्राली द्वारा चली गई दूरी x है।
∴ x = v × t = 10.36 × 2.5
= 25.9 मीटर।

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प्रश्न 6.29
चित्र में दिए गए स्थितिज ऊर्जा वक्रों में से कौन-सा वक्र सम्भवतः दो बिलियर्ड-गेंदों के प्रत्यास्थ संघट्ट का वर्णन नहीं करेगा? यहाँr गेंदों के केन्द्रों के मध्य की दूरी है और प्रत्येक गेंद का अर्धव्यास R है।
उत्तर:
जब गेंदें संघट्ट करेंगी और एक – दूसरे को संपीडित करेंगी तो उनके केन्द्रों के बीच की दूरी 7, 2R से घटती जाएगी और इनकी स्थितिज ऊर्जा बढ़ती जाएगी। प्रत्यानयन काल में गेंदें अपने आकार को वापस पाने की क्रिया में एक-दूसरे से दूर हटेंगी तो उनकी स्थितिज ऊर्जा घटेगी और प्रारम्भिक आकार पूर्णतः प्राप्त कर लेने पर (r = 2R) स्थितिज ऊर्जा शून्य हो जाएगी।
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केवल ग्राफ (V) की ही उपर्युक्त व्याख्या हो सकती है; अतः अन्य ग्राफों में से कोई भी बिलियर्ड गेंदों के प्रत्यास्थ संघट्ट को प्रदर्शित नहीं करता है।

प्रश्न 6.30
विरामावस्था में किसी मुक्त न्यूट्रॉन के क्षय पर विचार कीजिए –
n → p + e
प्रदर्शित कीजिए कि इस प्रकार के द्विपिंड क्षय से नियत ऊर्जा का कोई इलेक्ट्रॉन अवश्य उत्सर्जित होना चाहिए, और इसलिए यह किसी न्यूट्रॉन या किसी नाभिक के β – क्षय में प्रेक्षित सतत ऊर्जा वितरण का स्पष्टीकरण नहीं दे सकता (चित्र)।
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[नोट: इस अभ्यास का हल उन कई तर्कों में से एक है जिन्हें डब्ल्यू पॉली द्वारा क्षय के क्षय उत्पादों में किसी तीसरे कण के अस्तित्व का पूर्वानुमान करने के लिए दिया गया था। यह कण न्यूट्रिनो के नाम से जाना जाता है। अब हम जानते हैं कि यह निजी प्रचक्रण 1/2 (जैसे e, p तथा n) का कोई कण है। लेकिन यह उदासीन है या द्रव्यमानरहित या (इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान की तुलना में) इसका द्रव्यमान अत्यधिक कम है और जो द्रव्य के साथ दुर्बलता से परस्पर क्रिया करता है। न्यूट्रॉन की उचित क्षय-प्रक्रिया इस प्रकार है:
n → p + e + v]
उत्तर:
माना न्यूट्रॉन के प्रोट्रॉन तथा इलेक्ट्रॉन में क्षय होने पर अवनमन (disintegration) द्रव्यमान ∆m है।
उत्सर्जित ऊर्जा, E = ∆mc2
परन्तु ∆m = न्यूट्रॉन का द्रव्यमान – (प्रोटॉन व इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान)
Bihar Board Class 11 Physics Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति
पाजिट्रॉन का द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान के समान परन्तु आवेश इलेक्ट्रॉन का विपरीत होता है। जब इलेक्ट्रॉन तथा पाजिट्रॉन एक दूसरे के समीप आते हैं तो वे एक दूसरे को समाप्त कर देते हैं। इसके द्रव्यमान आइन्सटीन के समीकरण के अनुसार ऊर्जा में परिवर्तित हो जाते हैं। इस प्रकार प्राप्त ऊर्जा गामा किरणों के रूप में उत्सर्जित होती है जो कि निम्नवत् है –
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Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 5 गति के नियम

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 5 गति के नियम Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 5 गति के नियम

Bihar Board Class 11 Physics गति के नियम Text Book Questions and Answers

अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 5.1
निम्नलिखित पर कार्यरत नेट बल का परिमाण व उसकी दिशा लिखिए:

  1. एकसमान चाल से नीचे गिरती वर्षा की कोई बूंद
  2. जल में तैरता 10g संहति का कोई कार्क
  3. कुशलता से आकाश में स्थिर रोकी गई कोई पतंग
  4. 30 km h-1 के एकसमान वेग से ऊबड़-खाबड़ सड़क पर गतिशील कोई कार
  5. सभी गुरुत्वीय पिण्डों से दूर तथा वैद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों से मुक्त, अंतरिक्ष में तीव्र चाल वाला इलेक्ट्रॉन।

उत्तर:

  1. न्यूटन के प्रथम नियमानुसार कोई नेट बल नहीं लगता है।
  2. न्यूटन के प्रथम नियमानुसार कोई नेट बल नहीं लगता है।
  3. न्यूटन के प्रथम नियमानुसार कोई नेट बल नहीं लगता है।
  4. न्यूटन के प्रथम नियमानुसार कोई नेट बल नहीं लगता है।
  5. चूँकि यह वैद्युत चुम्बकीय एवम् गुरुत्वीय बल उत्पन्न करने वाली भौतिक एजेंसियों से काफी दूर है। अत: कोई बल कार्य नहीं करता है।

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प्रश्न 5.2
0.05 kg संहति का कोई कंकड़ ऊर्ध्वाधर ऊपर फेंका गया है। नीचे दी गई प्रत्येक परिस्थिति में कंकड़ पर लग रहे नेट बल का परिमाण व उसकी दिशा लिखिए:

  1. उपरिमुखी गति के समय।
  2. अधोमुखी गति के समय।
  3. उच्चतम बिंदु पर जहाँ क्षण भर के लिए यह विराम में रहता है।

यदि कंकड़ को क्षैतिज दिशा से 45° कोण पर फेंका जाए, तो क्या आपके उत्तर में कोई परिवर्तन होगा? वायु-प्रतिरोध को उपेक्षणीय मानिए।

उत्तर:
चूँकि उपरोक्त तीनों स्थितियों में, वायु के प्रभाव को नगण्य मानते हुए कंकड़ पर केवल एक ही बल (गुरुत्व बल) 0.5 न्यूटन ऊर्ध्वाधरतः, अधोमुखी लगता है यदि कंकड़ की गति ऊर्ध्वाधर की ओर नहीं है तब भी उत्तर अपरिवर्तित रहता है। कंकड़ उच्चतम बिन्दु पर विराम में नहीं है। इसकी समस्त गति की अवधि में इस पर वेग का एकसमान क्षैतिज घटक कार्यरत रहता है।

प्रश्न 5.3
0.1 kg संहति के पत्थर पर कार्यरत नेट बल का परिमाण व उसकी दिशा निम्नलिखित परिस्थितियों में ज्ञात कीजिए:

  1. पत्थर को स्थिर रेलगाड़ी की खिड़की से गिराने के तुरन्त पश्चात्,
  2. पत्थर को 36 km h-1 के एकसमान वेग से गतिशील किसी रेलगाड़ी की खिड़की से गिराने के तुरन्त पश्चात्,
  3. पत्थर को 1 ms-2 के त्वरण से गतिशील किसी रेलगाड़ी की खिड़की से गिराने के तुरंत पश्चात्,
  4. पत्थर 1 ms-2 के त्वरण से गतिशील किसी रेलगाड़ी के फर्श पर पड़ा है तथा वह रेलगाड़ी के सापेक्ष विराम में है। उपरोक्त सभी स्थितियों में वायु का प्रतिरोध उपेक्षणीय मानिए।

उत्तर:
1. स्थिर रेलगाड़ी की खिड़की से गिराने पर, पत्थर पर एक मात्र बल उसका भार नीचे की ओर कार्य करेगा। पत्थर पर बल (mg) = 0.1 × 10 = 1 न्यूटन नीचे की ओर।

2. इस स्थिति में गाड़ी से गिराने के पश्चात् गाड़ी की गति का उस पर कार्य करने वाले बल पर कोई प्रभाव नहीं होगा तथा पत्थर पर बल उसका भार नीचे की ओर कार्य करेगा। अत: पत्थर बल पर = 1 न्यूटन नीचे की ओर।

3. इस स्थिति में (b) के समान बल नीचे की ओर कार्य करेगा।

4. पत्थर रेलगाड़ी के सापेक्ष विरामावस्था में है।
∴ पत्थर पर त्वरण = रेलगाड़ी का त्वरण = 1 मीटर/सेकण्ड2
∴ पत्थर पर गाड़ी की त्वरित गति के कारण नेट बल
F = ma = 0.1 × 1 = 0.1 न्यूटन क्षैतिज दिशा में।

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प्रश्न 5.4
l लंबाई की एक डोरी का एक सिरा mसंहति के किसी कण से तथा दूसरा सिरा चिकनी क्षैतिज मेज पर लगी खूटी से बँधा है। यदि कण v चाल से वृत्त में गति करता है तो कण पर (केंद्र की ओर निर्देशित) नेट बल है:

  1. T
  2. T – \(\frac{m v^{2}}{l}\)
  3. T + \(\frac{m v^{2}}{l}\)
  4. 0

T डोरी में तनाव है। (सही विकल्प चुनिए)
उत्तर:
विकल्प (i) सही है।

प्रश्न 5.5
15 ms-1 की आरंभिक चाल से गतिशील 20 kg संहति के किसी पिण्ड पर 50 N का स्थाई मंदन बल आरोपित किया गया है। पिण्ड को रुकने में कितना समय लगेगा?
उत्तर:
दिया है:
u = 15 मीटर/सेकण्ड, m = 20 किग्रा, मंदन बल, F = 50 न्यूटन, v = 0, समय (t) = ?
गति के द्वितीय नियम से,
F = ma
∴ पिण्ड का मंदन,
a = \(\frac{F}{m}\) = \(\frac{50}{20}\) = 2.5 मीटर/सेकण्ड2
20 सूत्र, v = u + at से,
0 = 15 + (-2.5) × t
∴ t = \(\frac{15}{2.5}\)
= 6 सेकण्ड

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प्रश्न 5.6
3.0 kg संहति के किसी पिण्ड पर आरोपित कोई बल 25 s में उसकी चाल को 2.0 ms-1 से 3.5 ms-1 कर देता है। पिण्ड की गति की दिशा अपरिवर्तित रहती है। बल का परिमाण व दिशा क्या है?
उत्तर:
दिया है:
m = 3 किग्रा, µ = 2 मीटर/सेकण्ड, t = 25 सेकण्ड, v = 3.5 मीटर/सेकण्ड, बल का परिणाम F = ?, बल की दिशा = ?
न्यूटन के गति विषयक द्वितीय नियम से,
पिण्ड पर लगा बल, F = संवेग परिवर्तन की दर
= \(\frac{mv-mu}{t}\) = \(\frac{m(v-u)}{t}\)
= \(\frac{3(3.5 – 2)}{25}\) = \(\frac{3×1.5}{25}\)
= 1.8 न्यूटन
बल पिण्ड की गति की दिशा में ही लगेगा।

प्रश्न 5.7
5.0 kg संहति के किसी पिण्ड पर 8 N व 6 N के दो लंबवत् बल आरोपित हैं। पिण्ड के त्वरण का परिमाण व दिशा ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
m = 5 किग्रा,
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F1 = 6 न्यूटन
F2 = 8 न्यूटन
त्वरण = ?, त्वरण की दिशा = ?
बलों के समान्तर चतुर्भुज नियम से, पिण्ड पर लगने वाला परिणामी बल,
F = \(\sqrt{F_{1}^{2}+F_{2}^{2}}=\sqrt{8^{2}+6^{2}}\)
= 10 न्यूटन
परिणामी बल द्वारा F1 से बना कोण,
θ = tan-1 = \(\left(\frac{F^{2}}{F_{1}}\right)\)
= tan-1 = \(\frac{6}{8}\) = 37°
पिण्ड पर त्वरण,
a = \(\frac{F}{m}\) = \(\frac{10}{5}\) = 2 मीटर/सेकण्ड2

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प्रश्न 5.8
36 kmh-1 की चाल से गतिमान किसी ऑटो रिक्शा का चालक सड़क के बीच एक बच्चे को खड़ा देखकर अपने वाहन को ठीक 4.0s में रोककर उस बच्चे को बचा लेता हैं। यदि ऑटो रिक्शा बच्चे के ठीक निकट रुकता है, तो वाहन पर लगा औसत मंदन बल क्या है? ऑटो रिक्शा तथा चालक की संहतियाँ क्रमशः 400 kg और 65 kg हैं।
उत्तर:
दिया है:
ऑटो रिक्शा की प्रा० चाल, u = 36 किमी/घण्टा = 10 मीटर/सेकण्ड
ऑटो रिक्शा की अन्तिम चाल v = 0, t = 4 सेकण्ड औसत मंदन बल, F = ?
कुल द्रव्यमान = ऑटो रिक्शा का द्रव्यमान + चालक का द्रव्यमान
= 400 + 65 = 465 किग्रा
समी० u = y + at से,
θ = \(\frac{v-u}{t}\) = \(\frac{0-10}{4}\)
= -2.5 मीटर/सेकण्ड2
अतः मंदन बल, F = ma = 465 × 2.5
= 1.16 × 103 = 1.2 × 103 न्यूटन

प्रश्न 5.9
20,000 kg उत्थापन संहति के किसी रॉकेट में 5 ms-2 के आरंभिक त्वरण के साथ ऊपर की ओर स्फोट किया जाता है। स्फोट का आरंभिक प्रणोद (बल) परिकलित कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
रॉकेट का द्रव्यमान, m = 20,000 किग्रा
त्वरण, a = 5 मीटर/सेकण्ड2
माना रॉकेट पर ऊपर की ओर लगने वाला आरम्भिक प्रणोद F है।
यहाँ रॉकेट पर दो बल लगते हैं –

1. प्रणोद (F) ऊपर की ओर तथा
2. रॉकेट का भार (mg) नीचे की ओर

चूँकि रॉकेट ऊपर उठ रहा है। अतः रॉकेट पर ऊपर की ओर लगने वाला बल, F1 = F – mg, लेकिन F1 = ma
∴ ma = F – mg
∴ F = mg + ma
= m (g + a)
रॉकेट = 20,000 (10 + 5)
= 20,000 × 15
= 300,000 × 3 × 105 न्यूटन।
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प्रश्न 5.10
उत्तर की ओर 10 ms-1 की एकसमान आरंभिक चाल से गतिमान 0.40 kg MB संहति के किसी पिण्ड पर दक्षिण दिशा के अनुदिश 8.0N का स्थाई बल 30 s के लिए आरोपित किया गया है। जिस क्षण बल आरोपित किया गया उसे t = 0, तथा उस समय पिण्ड की स्थिति x = 0 लीजिए। t = -5s, 25 s, 100 s पर इस कण की स्थति क्या होगी?
उत्तर:
दिया है:
प्रारम्भिक वेग, u = 10 मीटर/सेकण्ड, उत्तर दिशा की ओर
आरोपित बल F = 8 न्यूटन, दक्षिण की ओर
m = 0.4 किग्रा, t = 30 सेकण्ड
t = 0 तथा x = 0 पर बल आरोपित किया जाता है।
t = -5 सेकण्ड पर,
चूँकि t = 0 से पूर्व पिण्ड पर कोई बल आरोपित नहीं था।
अतः इस समयान्तराल में पिण्ड एकसमान वेग से गतिशील होगा।
सूत्र
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= -50 मीटर
अत: t = -5 सेकण्ड पर पिण्ड x = -50 मीटर पर है।
t = 25 सेकण्ड पर,
चूँकि t = 0 से t = 30 सेकण्ड तक पिण्ड पर बल आरोपित है। अत: पिण्ड त्वरित गति में होगा।
चूँकि बल की दिशा प्रारम्भिक वेग से विपरीत है अतः यह मंदन, उत्पन्न करेगा।
सूत्र F = ma से,
मंदन, a = \(\frac{F}{m}\) = \(\frac{8}{0.4}\) = 20 मीटर/सेकण्ड2
x0 = 0, µx = 10 मीटर/सेकण्ड, t = 25 सेकण्ड
ax = -20 मीटर/सेकण्डर2
अतः (x)t = 25 = 0 + 10 × 25 × \(\frac{1}{2}\)(-20) × (25)
= – 6000 मीटर
= – 6 किमी
अतः t = 25 सेकण्ड पर पिण्ड x = -6 किमी पर है।
t = 100 सेकण्ड
xt=30 = 0 + 10 × 30 + \(\frac{1}{2}\) (-20) × 302
= -8700 मीटर
30 सेकण्ड पश्चात् वेग,
= u + at = 10 + (-20) × 30
= -590 मीटर/सेकण्ड
t = 30 सेकण्ड बाद F = 0 है। अतः t = 30 सेकण्ड बाद पिण्ड आगे के 70 सेकण्ड तक नियत चाल से चलेगा।
∴ S = vt = -590 × 70
= -41300 मीटर
∴ t = 100 सेकण्ड पर
x = (x)t=30 + xt = 70
= -8700 – 41300 = -50000
= -50 किमी।
अतः t = 100 सेकण्ड पर पिण्ड x = -50 किमी पर है।

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प्रश्न 5.11
कोई ट्रक विरामावस्था से गति आरंभ करके 2.0 ms-2 के समान त्वरण से गतिशील रहता है। t = 10s पर, ट्रक के ऊपर खड़ा एक व्यक्ति धरती से 6 m की ऊँचाई से कोई पत्थर बाहर गिराता है। t = 11s पर, पत्थर का (a) वेग, तथा (b) त्वरण क्या है? (वायु का प्रतिरोध उपेक्षणीय मानिए।)
उत्तर:
दिया है:
u = 0, a = 2 मीटर/सेकण्ड2
सूत्र v = u + at से,
vt=10 = 0 + 2 × 10 = 20 मीटर/सेकण्ड (क्षैतिज दिशा में)
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इसी समय व्यक्ति ट्रक पर पत्थर छोड़ता है। पत्थर छोड़ने के पश्चात् ट्रक का त्वरण पत्थर पर कोई प्रभाव नहीं डालता है। लेकिन इस क्षण तक ट्रक तथा पत्थर का वेग समान होगा। इस दशा में पत्थर गुरुत्वीय त्वरण के अधीन मुक्त गति करेगा। माना पत्थर बिन्दु P पर छोड़ते हैं। बिन्दु P से जाने वाली क्षैतिज एवम् ऊर्ध्वाधर रेखाओं को क्रमश: x व y – अक्ष माना, जबकि P मूल बिन्दु है।
∴ ux = 20 मीटर/सेकण्ड, ax = 0 व uy = 0, ay = -g मीटर/सेकण्ड2
∴ x – दिशा में त्वरण शून्य है। इस प्रकार 1 सेकण्ड पश्चात् x दिशा में वेग, ux = 20 मीटर/सेकण्ड
व vy + uy + ayt
= 0 + (-10) × 1 = -10 मीटर/सेकण्ड
∴ पत्थर छोड़ने के 1 सेकण्ड बाद वेग,
v = \(\sqrt{u_{x}^{2}+u_{y}^{2}}\)
= \(\sqrt{20^{2}+10^{2}}\) = \(\sqrt{500}\)
= 22.3 मीटर/सेकण्ड
अत:
(a) गति प्रारम्भ के बाद t = 11 सेकण्ड पर पत्थर का वेग = 22.3 मीटर/सेकण्ड
(b) 11 सेकण्ड पर पत्थर का त्वरण, a = g = 10 मीटर/सेकण्ड2

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प्रश्न 5.12
किसी कमरे की छत से 2 m लंबी डोरी द्वारा 0.1 kg संहति के गोलक को लटकाकर दोलन आरंभ किए गए। अपनी माध्य स्थिति पर गोलक की चाल 1ms-1 है। गोलक का प्रक्षेप-पथ क्या होगा यदि डोरी को उस समय काट दिया जाता है जब गोलक अपनी –

  1. चरम स्थितियों में से किसी एक पर है, तथा
  2. माध्य स्थिति पर है?

उत्तर:

  1. चरम स्थिति पर गोलक की चाल शून्य है। अब डोरी काट दी जाए तब वह ऊर्ध्वाधर अधोमुखी गिरेगा।
  2. माध्य स्थिति पर गोलक में क्षैतिज वेग होता है। जब डोरी काट दी जाए तब वह किसी परवलयिक पथ के अनुदिश गिरेगा।

प्रश्न 5.13
किसी व्यक्ति की संहति 70 kg है। वह एक गतिमान लिफ्ट में तुला पर खड़ा है जो –
(a) 10 ms-1 की एकसमान चाल से ऊपर जा रही है
(b) 5 ms-2 के एकसमान त्वरण से नीचे जा रही है
(c) 5 ms-2 के एकसमान त्वरण से ऊपर जा रही है, तो प्रत्येक प्रकरण में तुला के पैमाने का पाठ्यांक क्या होगा?
(d) यदि लिफ्ट की मशीन में खराबी आ जाए और वह गुरुत्वीय प्रभाव में मुक्त रूप से नीचे गिरे तो पाठ्यांक क्या होगा?
उत्तर:
दिया है:
m = 70 किग्रा
(a) चूँकि लिफ्ट एकसमान वेग से गतिमान है। अतः त्वरण a = 0
तुला के पैमाने का पाठ्यांक,
R = mg = 70 × 9.8 = 686 न्यूटन

(b) लिफ्ट का त्वरण, a = 5 मीटर/सेकण्ड2 (नीचे की ओर)
∴ तुला के पैमाने का पाठ्यांक,
R = m (g – a)
= 70 × (9.8 – 5)
= 336 न्यूटन

(c) लिफ्ट का त्वरण, a = 5 मीटर/सेकण्ड2 (ऊपर की ओर)
∴ तुला के पैमाने का पाठ्यांक,
R = m (g + a)
= 70 (9.8 + 5)
= 1036 न्यूटन

(d) चूँकि लिफ्ट गुरुत्वीय प्रभाव में मुक्त रूप से गिरती है।
∴ a = g
∴ तुला के पैमाने का पाठ्यांक,
R = m (g – a)
= 70 × 0 = 0

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प्रश्न 5.14
चित्र में 4 kg संहति के किसी पिण्ड का स्थिति-समय ग्राफ दर्शाया गया है।
(a) t < 0; t > 4s; 0 < t < 4s के लिए पिण्ड पर आरोपित बल क्या है?
(b) t = 0 तथा t = 4s पर आवेग क्या है?
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(केवल एकविमीय गति पर विचार कीजिए)
उत्तर:
(a) t < पर, स्थिति – समय (n – t) ग्राफ समय अक्ष के साथ सम्पाती है। अतः पिण्ड पर आरोपित बल शून्य है। t > 4 सेकण्ड के लिए, x – t ग्राफ समय अक्ष के समान्तर सरल रेखा है। अतः पिण्ड विरामावस्था में है तथा पिण्ड पर कार्यरत बल शून्य है। 0 < t < 4 सेकण्ड के लिए, x – t ग्राफ एक झुकी हुई सरल रेखा है अर्थात् इस काल में पिण्ड की मूल बिन्दु से दूरी नियत दर से लगातार बढ़ रही है अर्थात् इस दौरान नियत है व त्वरण शून्य है। अतः पिण्ड पर आरोपित बल शून्य है।

(b) t = 0 से पहले पिण्ड का वेग v1 = 0
t = 0 के पश्चात् पिण्ड का वेग
v2 = ग्राफ OA का ढाल
= \(\frac{3}{4}\) मीटर/सेकण्ड
अतः t = 0 पर, आवेग = संवेग परिवर्तन की दर
= mv2 – mv1
= 4 × \(\frac{3}{4}\) – 4 × 0
= 3 किग्रा मीटर/सेकण्ड
पुनः t = 4 सेकण्ड के ठीक पहले, वेग
v1 = \(\frac{3}{4}\) मीटर/सेकण्ड
t = 4 सेकण्ड के ठीक बाद, वेग v2 = 0
∴ t = 4 सेकण्ड दर, आवेग = संवेग परिवर्तन
= mv2 – mv1
= 4(0 – \(\frac{3}{4}\))
= -3 किग्रा मीटर/सेकण्ड

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प्रश्न 5.15
किसी घर्षणरहित मेज पर रखे 10 kg तथा 20 kg के दो पिण्ड किसी पतली डोरी द्वारा आपस में जुड़े हैं। 600 N का कोई क्षैतिज बल

  1. A पर
  2. B पर डोरी के अनुदिश लगाया जाता है। प्रत्येक स्थिति में डोरी में तनाव क्या है?

उत्तर:
दिया है:
F = 600 न्यूटन
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1. माना पिण्ड A पर बल आरोपित करने से दोनों पिण्ड त्वरण a, से चलना प्रारम्भ करते हैं एवम् डोरी में तनाव T है। पिण्ड A पर बल F आगे की ओर एवम् तनाव T पीछे की ओर लगेगा।
अतः इस पिण्ड पर नेट बल,
F = F – T
न्यूटन के गति विषयक द्वितीय नियम से,
F1 = m1a
∴ m1a = F – T
या 10a = 600 – T ……………. (1)
पिण्ड B पर एकमात्र बल, डोरी का तनाव (T) आगे की ओर लगेगा।
∴ T = m2a = 20a ………….. (2)
समी० (2) से T का मान समी० (1) में रखने पर,
10a = 600 – 20a
या 10a + 20a = 600
∴ 30a = 600 या।
a = \(\frac{600}{30}\) = 20 मी/सेकण्ड2
a का यह मान समी० (2) में रखने पर,
T = 20 × 20 = 400 न्यूटन

2. इस स्थिति में, पिण्ड B पर नेट बल F2 = F – T होगा।
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न्यूटन के गति विषयक द्वितीय नियम से,
F – T = m2a
या 600 – T = 20a ……………. (3)
पिण्ड A पर नेट बल T आगे की ओर होगा।
∴ T = m, a
= 10a …… (4)
समी० (4) से T का मान समी० (3) में रखने पर,
600 – 10a = 20a
∴ a = \(\frac{600}{30}\) = 20 मीटर/सेकण्ड2 ………….. (3)
a का यह मान समी० (4) में रखने पर
T = 10 × 20
= 200 न्यूटन

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प्रश्न 5.16.
8 kg तथा 12 kg के दो पिण्डों को किसी हल्की अवितान्य डोरी,जो घर्षणरहित घिरनी पर चढ़ी है, के दो सिरों से बाँधा गया है। पिण्डों को मुक्त छोड़ने पर उनके त्वरण तथा डोरी में तनाव ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
माना घर्षण रहित घिरनी पर हल्की अवितान्य डोरी से द्रव्यमान m1 व m2 लटकाएँ गए हैं।
∴ m1 = 8 किग्रा,
m2 = 12 किग्रा
माना डोरी में तनाव T व त्वरण a है। यह त्वरण m2 पर नीचे की ओर तथा m1 पर ऊपर की ओर है। m2 की गति की समी० निम्न होगी –
F = 12g – T (नीचे की ओर)
गति के नियम से,
F = m2a = 12a
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∴ 12g – T = 12a …………….. (2)
इसी प्रकार m1 के लिए,
8g – T = -8a [∴ a ऊपर की ओर है।]
∴ समी० (2) को (1) में से घटाने पर,
4g = 20a
∴ a = \(\frac{4×10}{20}\) = 2 मीटर/सेकण्ड2
∴ समी० (1) से डोरी में तनाव,
T = 12 (g – a) = 12 (10 – 2)
= 12 × 8
= 96 न्यूटन

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प्रश्न 5.17
प्रयोगशाला के निर्देश फ्रेम में कोई नाभिक विराम में है। यदि यह नाभिक दो छोटे नाभिकों में विघटित हो जाता है, तो यह दर्शाइए कि उत्पाद विपरीत दिशाओं में गति करने चाहिए।
उत्तर:
माना विरामावस्था में नाभिक का द्रव्यमान = m
विरामावस्था में नाभिक का प्रा० वेग, \(\vec{u}\) = 0
माना विघटित नाभिकों के द्रव्यमान m1 व m2 तथा इनके वेग क्रमश: \(\vec{v}_{1}\) व \(\vec{v}_{2}\) है।
माना विघटन से पूर्व तथा बाद में संवेग क्रमश: \(\vec{p}_{i}\) व \(\vec{p}_{t}\)
∴ \(\vec{p}_{i}\) = m\(\vec{u}\) = 0 …………… (1)
तथा \(\vec{p}_{t}\) = m1 \(\vec{v}_{1}\) + m2 \(\vec{v}_{2}\) परन्तु संवेग संरक्षण के नियम से,
\(\vec{p}_{i}\) = \(\vec{p}_{t}\)
∴ 0 = m1 \(\vec{v}_{1}\) + m2 \(\vec{v}_{2}\)
या \(\vec{v}_{2}\) = – \(\frac { m_{ 1 } }{ m_{ 2 } } \) \(\vec{v}_{1}\)
समीकरण (3) से स्पष्ट है कि \(\vec{v}_{1}\) तथा \(\vec{v}_{2}\) विपरीत दिशा में हैं। अतः विघटित नाभिक विपरीत दिशाओं में गति करेंगे।

प्रश्न 5.18
दो बिलियर्ड गेंद जिनमें प्रत्येक की संहति 0.05 kg है, 6 ms-1 की चाल से विपरीत दिशाओं में गति करती हई संघट्ट करती हैं और संघट्ट के पश्चात् उसी चाल से वापस लौटती हैं। प्रत्येक गेंद पर दूसरी गेंद कितना आवेग लगाती है?
उत्तर:
गेंदों का द्रव्यमान m1 = m2 = 0.05 किग्रा
माना पहली गेंद धनात्मक दिशा में चलती है।
∴ u1 = 6 मीटर/से
v1 = -6 मीटर/सेकण्ड
u2 = -6 मीटर/सेकण्ड
v2 = मीटर/सेकण्ड
सूत्र आवेग = संवेग परिवर्तन से, पहली गेंद का दूसरी गेंद पर आवेग,
= m1v1 – m1u1
= 0.05 × (-6) – 0.05 × 6
= -0.6 किग्रा मीटर/सेकण्ड
तथा दूसरी गेंद का पहली गेंद पर आवेग,
= m2v2 – m2u2
= 0.05 × 6 – 0.05 × – 6
= 0.6 किग्रा मीटर/सेकण्ड

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 5 गति के नियम

प्रश्न 5.19
100 kg संहति की किसी तोप द्वारा 0.020 kg का गोला दागा जाता है। यदि गोले की नालमुखी चाल 80 ms-1 है, तो तोप की प्रतिक्षेप चाल क्या है?
उत्तर:
दिया है: तोप का द्रव्यमान, m1 = 100 किग्रा
गोले का द्रव्यमान m2 = 0.02 किग्रा
गोले की नालमुखी चाल, v2 = 80 मीटर/सेकण्ड
तोप की प्रतिक्षेप चाल v1 = ?
प्रश्नानुसार विस्फोट से पूर्व तोप एवम् गोला दोनों विरामावस्था में थे।
∴ संवेग संरक्षण के निकाय से,
विस्फोट से पूर्व संवेग = विस्फोट के बाद संवेग
∴ m1v1 + m2v2 = 0
∴ v1 = \(\frac { -m_{ 2 }v_{ 2 } }{ m_{ 1 } } \)
= \(\frac{-0.02×80}{100}\) = – 0.016 मीटर/सेकण्ड

प्रश्न 5.20
कोई बल्लेबाज किसी गेंद को 45° के कोण पर विक्षेपित कर देता है। ऐसा करने में वह गेंद की आरंभिक चाल, जो 54 km/h-1 है, में कोई परिवर्तन नहीं करता। गेंद को कितना आवेग दिया जाता है? (गेंद की संहति 0.15 kg है)
उत्तर:
दिया है:
गेंद का द्रव्यमान, m1 = 0.15 किग्रा
प्रा० वेग, u = 54 किमी/घण्टा
= 54 × \(\frac{5}{18}\) = 15 मीटर/सेकण्ड
अन्तिम वेग, v = 15 मीटर/सेकण्ड जो कि u से 45° के कोण पर है।
माना प्रारम्भिक तथा अन्तिम संवेग क्रमश: \(\vec{p}_{i}\) व \(\vec{p}_{t}\) हैं।
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∴ सूत्र आवेग = संवेग परिवर्तन से,
\(\vec{I}\) = \(\vec{p}_{t}\) – \(\vec{p}_{i}\)
= \(\vec{p}_{t}\) + (-\(\vec{p}_{i}\))
अतः आवेग दोनों संवेगों का परिणामी है।
∴ \(\vec{I}\) का परिमाण
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= 1.72 किग्रा मीटर/सेकण्ड
= 172 न्यूटन सेकण्ड

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प्रश्न 5.21
किसी डोरी के एक सिरे से बँधा 0.25 kg संहति का कोई पत्थर क्षैतिज तल में 1.5 m त्रिज्या के वृत्त पर 40 rev/min की चाल से चक्कर लगाता है? डोरी में तनाव कितना है? यदि डोरी 200Nके अधिकतम तनाव को सहन कर सकती है तो अधिकतम चाल ज्ञात कीजिए जिससे पत्थर को घुमाया जा सकता है।
उत्तर:
दिया है:
पत्थर का द्रव्यमान, m = 0.25 किग्रा
पत्थर के पथ की त्रिज्या, r = 1.5 मीटर
पत्थर की घूर्णन आवृत्ति, u = 40 चक्कर/मिनट
= \(\frac{40}{60}\) = \(\frac{2}{3}\) चक्कर/सेकण्ड
∴ T = mrω2 = mr(2πv)2
= 0.25 × 1.5 × [2 × 3.14 × \(\frac{2}{3}\))2
= 6.6 न्यूटन
डोरी का अधिकतम तनाव, Tmax = 200 न्यूटन
पत्थर की अधिकतम चाल = ?
सूत्र
Bihar Board Class 11 Physics Chapter 5 गति के नियम
= 35 मीटर/सेकण्ड

प्रश्न 5.22
यदि अभ्यास 5.21 में पत्थर की चाल को अधिकतम निर्धारित सीमा से भी अधिक कर दिया जाए, तथा डोरी यकायकं टूट जाए, तो डोरी के टूटने के पश्चात् पत्थर के प्रक्षेप का वर्णन निम्नलिखित में से कौन करता है:
(a) वह पत्थर झटके के साथ त्रिज्यत: बाहर की ओर जाता है।
(b) डोरी टूटने के क्षण पत्थर स्पर्श रेखीय पथ पर उड़ जाता है।
(c) पत्थर स्पर्शी से किसी कोण पर, जिसका परिमाण पत्थर की चाल पर निर्भर करता है, उड़ जाता है।
उत्तर:
विकल्प (b) सही है।

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प्रश्न 5.23
स्पष्ट कीजिए कि क्यों:
(a) कोई घोड़ा रिक्त दिक्स्थान में किसी गाड़ी को खींचते हुए दौड़ नहीं सकता।
(b) किसी तीव्र गति से चल रही बस के यकायक रुकने पर यात्री आगे की ओर गिरते हैं।
(c) लान मूवर को धकेलने की तुलना में खींचना आसान होता है।
(d) क्रिकेट का खिलाड़ी गेंद को लपकते समय अपने हाथ गेंद के साथ पीछे को खींचता है।
उत्तर:
(a) चूँकि दिक्स्थान से घोड़ा-गाड़ी निकाय पर कोई बाह्य बल कार्यरत नहीं है। घोड़ा तथा गाड़ी के मध्य पारस्परिक बल (क्रिया प्रतिक्रिया के नियम से) निरस्त हो जाता है। अत: फर्श पर, निकाय व फर्श के बीच सम्पर्क बल (घर्षण बल) घोड़े व गाड़ी को विराम से गति में लाने का कारण होते हैं।

(b) यात्री के शरीर का जो भाग गद्दी के सीधे सम्पर्क में नहीं है वह जड़त्व के कारण गतिमान, बस के यकायक रुकने पर आगे की ओर हो जाता है परिणामस्वरूप यात्री गिर जाते हैं।

(c) घास मूवर को किसी कोण पर बल आरोपित करके खींचा या धकेला जाता है। जब हम धक्का देते हैं तब ऊर्ध्वाधर दिशा में सन्तुलन के लिए, अभिलम्ब बल उसके भार से अधिक होना चाहिए जिसके परिणामस्वरूप घर्षण बल बढ़ जाता है। इस प्रकार मूवर को चलाने के लिए अधिक बल आरोपित करना पड़ता है जबकि खींचते समय इसके विपरीत होता है। इसी कारण लॉन मूवर को खींचना आसान होता है।

(d) क्रिकेट का खिलाड़ी गेंद को लपकते समय, अपने हाथ को गेंद के साथ पीछे की ओर इस कारण खींचता है कि ताकि खिलाड़ी संवेग परिवर्तन की दर को घटा दे तथा इस प्रकार गेंद को रोकने के लिए आवश्यक बल को कम करने के लिए हाथ को पीछे की ओर खींचता है।

Bihar Board Class 11 Physics गति के नियम Additional Important Questions and Answers

अतिरिक्त अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 5.24
चित्र में 0.04 kg संहति के किसी पिण्ड का स्थिति-समय ग्राफ दर्शाया गया है। इस गति के लिए कोई उचित भौतिक संदर्भ प्रस्तावित कीजिए। पिण्ड द्वारा प्राप्त दो क्रमिक आवेगों के बीच समय-अंतराल क्या है? प्रत्येक आवेग का परिमाण क्या है?
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उत्तर:
दिया गया ग्राफ दो समान्तर ऊर्ध्वाधर दीवारों के मध्य एक समान चाल से क्षैतिज गति करती गेंद का ग्राफ हो सकता है जो बार-बार दीवार से टकराकर 2 सेकण्ड बाद दूसरी दीवार से टकराती है। यह प्रक्रिया निरन्तर चलती रहती है अर्थात् प्रत्येक 2 सेकण्ड के पश्चात् पिण्ड का वेग बदलता है।
∴ दो क्रमिक आवेगों के बीच समयान्तराल = 2 सेकण्ड
t = 2 सेकण्ड से पहले, वेग v1 = ग्राफ का ढाल
= \(\frac{2}{2}\) = 1 सेमी/सेकण्ड
t = 2 सेकण्ड के बाद वेग v2 = ग्राफ का ढाल
= \(\frac{-2}{2}\) = -1 सेमी/सेकण्ड
∴ सूत्र आवेग = संवेग परिवर्तन से,
आवेग = Pi = Pt = mv1 – m2
= m (v1 – v2) = 0.04 [1 – (-1)]
= 0.04 × 2 = 0.08 किग्रा सेमी/सेकण्ड
\(\frac{0.08}{100}\) किग्रा-मीटर/सेकण्ड
= 8 × 10-4 किग्रा-मीटर/सेकण्ड

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प्रश्न 5.25
चित्र में कोई व्यक्ति 1ms-2 त्वरण से गतिशील क्षैतिज संवाहक पट्टे पर स्थित खड़ा है। उस व्यक्ति पर आरोपित नेट बल क्या है? यदि व्यक्ति के जूतों और पट्टे के बीच स्थैतिक घर्षण गुणांक 0.2 है, तो पट्टे के कितने त्वरण तक वह व्यक्ति उस पट्टे के सापेक्ष स्थिर रह सकता है? (व्यक्ति की संहति = 65 kg)
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उत्तर:
दिया है:
पट्टे का त्वरण, a = 1 मीटर/सेकण्ड2
व्यक्ति का द्रव्यमान, m = 65 किग्रा।
चूँकि व्यक्ति पट्टे पर स्थिर खड़ा है। अत: व्यक्ति का त्वरण a = 1 मी/सेकण्ड2
सूत्र F = ma से,
व्यक्ति पर नेट बल, F = 65 × 1
= 65 न्यूटन।
पुनः µs = 0.2
चूँकि पट्टा क्षैतिज अवस्था में है। अत: व्यक्ति पर पट्टे की अभिलम्ब प्रतिक्रिया,
N = mg = 65 × 10 = 650 न्यूटन
माना पट्टे का अधिकतम त्वरण amax है। इस स्थिति में पट्टे के साथ गति करने के लिए व्यक्ति को mamax के बराबर बल की आवश्यकता होगी जो उसे स्थैतिक घर्षण से प्राप्त होगा।
∴ mamax ≤ µs N
∴ amax = \(\frac { \mu _{ s }N }{ m } \)
= \(\frac{0.2×650}{65}\) = 2 मीटर/सेकण्डर2

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प्रश्न 5.26
m संहति के पत्थर को किसी डोरी के एक सिरे से बाँधकर R त्रिज्या के ऊर्ध्वाधर वृत्त में घुमाया जाता है। वृत्त के निम्नतम तथा उच्चतम बिंदुओं पर ऊर्ध्वाधरतः अधोमुखी दिशा में नेट बल है। (सही विकल्प चुनिए)
Bihar Board Class 11 Physics Chapter 5 गति के नियम
यहाँ T1 तथा v1, निम्नतम बिन्दु पर तनाव तथा चाल दर्शाते हैं। T2 तथा v2 इनके उच्चतम बिन्दु पर तदनुरूपी मान हैं।
उत्तर:
अधोमुखी नेट बल = mg – T1
जहाँ T1 तनाव निम्नतम बिन्दु पर ऊपर की ओर तथा भार mg नीचे की ओर है।
तथा नेट अधोमुखी बल = mg + T2
जहाँ T2 तनाव उच्चतम बिन्दु पर तथा भार mg दोनों नीचे की ओर हैं।
अतः विकल्प (i) सही है।

प्रश्न 5.27
1000 kg संहति का कोई हेलीकॉप्टर 15 ms-2 के ऊर्ध्वाधर त्वरण से ऊपर उठता है। चालक दल तथा यात्रियों की संहति 300 kg है। निम्नलिखित बलों का परिमाण व दिशा लिखिए:
(a) चालक दल तथा यात्रियों द्वारा फर्श पर आरोपित बल,
(b) चारों ओर की वायु पर हेलीकॉप्टर के रोटर की क्रिया, तथा
(c) चारों ओर की वायु के कारण हेलीकॉप्टर पर आरोपित बल
उत्तर:
दिया है:
हेलीकॉप्टर का द्रव्यमान,
m1 = 1000 किग्रा।
चालक दल व यात्रियों का द्रव्यमान m2 = 300 किग्रा।
हेलीकॉप्टर का ऊर्ध्वाधर त्वरण, a = 15 मीटर/सेकण्ड2
गुरुत्व के कारण त्वरण, g = 10 मीटर/सेकण्ड2

(a) माना चालक व यात्रियों द्वारा फर्श पर आरोपित बल R1 है।
∴ R1 = m2(g + a) = 300 (10 + 15)
= 7500 न्यूटन। जोकि ऊपर की ओर होगा।

(b) माना कि रोटर के कारण वायु पर बल R2 है।
∴ R2 = (m1 + m2) (g + a)
= (1000 + 300) (15 + 10)
= 32500 न्यूटन
चूँकि हेलीकॉप्टर इस बल के प्रतिक्रिया स्वरूप ऊपर की ओर चलता है अत: यह बल भी ऊपर की ओर दिष्ट होगा।

(c) क्रिया प्रतिक्रिया के नियम से, वायु द्वारा हेलीकॉप्टर पर आरोपित बल भी 32500 न्यूटन होगा।

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प्रश्न 5.28
15 ms-1 की चाल से क्षैतिजतः प्रवाहित कोई जलधारा 10-2m2 अनुप्रस्थ काट की किसी नली से बाहर निकलती है तथा समीप की किसी ऊर्ध्वाधर दीवार से टकराती है। जल की टक्कर द्वारा, यह मानते हुए कि जलधारा टकराने पर वापस नहीं लौटती, दीवार पर आरोपित बल ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
नली का अनुप्रस्थ क्षेत्रफल, A = 10-2 मीटर2
जल का वेग, µ = 15 मीटर/सेकण्ड
जल का घनत्व, d = 103 किग्रा/मीटर3
जल के कारण दीवार पर लगने वाला बल F = ?
नली से प्रतिसेकण्ड निकलने वाले जल का आयतन
= a × v
= 15 × 10-2 मीटर/सेकण्ड
जल का घनत्व ∅ = 103 किग्रा/मीटर3
दीवार से प्रति सेकण्ड टकराने वाले जल का आयतन, m = ∅v
= 103 × 15 × 10-2
= 150 किग्रा/सेकण्ड
चूँकि दीवार से टकराकर जल वापस नहीं लौटता है।
अतः आरोपित बल = प्रति सेकण्ड निकलने वाले जल के संवेग में परिवर्तन
= 150 × 15
= 2250 न्यूटन

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प्रश्न 5.29
किसी मेज पर एक-एक रुपये के दस सिक्कों को एक के ऊपर एक करके रखा गया है। प्रत्येक सिक्के की संहति m है। निम्नलिखित प्रत्येक स्थिति में बल का परिमाण एवं दिशा लिखिए:
(a) सातवें सिक्के (नीचे से गिनने पर) पर उसके ऊपर रखे सभी सिक्कों के कारण बल,
(b) सातवें सिक्के पर आठवें सिक्के द्वारा आरोपित बल, तथा
(c) छठे सिक्के की सातवें सिक्के पर प्रतिक्रिया।
उत्तर:
(a) नीचे से सातवें सिक्के के ऊपर तीन सिक्के रखे हैं। अतः सातवें सिक्के पर तीनों सिक्कों के भार का अनुभव होगा।
∴ सातवें सिक्के के ऊपर के सिक्कों के कारण बल = 3mg न्यूटन

(b) आठवें सिक्के के ऊपर दो सिक्के रखे हैं। अत: सातवें व आठवें सिक्के के कारण बल, आठवें व इसके ऊपर रखे दो सिक्कों के भारों के योग के समान होगा।
अतः सातवें सिक्के पर आठवें सिक्के के कारण बल
= 3 × mg
= 3mg न्यूटन

(c) सातवाँ सिक्का स्वयं व ऊपर के तीन सिक्कों के भारों के योग के समान बल से छठवें सिक्के को दबाएगा।
अतः छठे सिक्के पर सातवें सिक्के के कारण बल = 4mg न्यूटन।
अतः छठे सिक्के की सातवें सिक्के पर प्रतिक्रिया
= 4mg न्यूटन

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प्रश्न 5.30
कोई वायुयान अपने पंखों को क्षैतिज से 15° के झुकाव पर रखते हुए 720 kmh-1 की चाल से एक क्षैतिज लूप पूरा करता है। लूप की त्रिज्या क्या है?
उत्तर:
दिया है:
वेग = 720 किमी/घण्टा
θ = 15°
लूप की त्रिज्या, r = ?
सूत्र
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= 14.8
= 15 किमी।

प्रश्न 5.31
कोई रेलगाड़ी बिना ढाल वाले 30 m त्रिज्या के वृत्तीय मोड़ पर 54 km h-1 चाल से चलती है। रेलगाड़ी की संहति 106 kg है। इस कार्य को करने के लिए आवश्यक अभिकेंद्र बल कौन प्रदान करता है? इंजन अथवा पटरियाँ? पटरियों को क्षतिग्रस्त होने से बचाने के लिए मोड़ का ढाल-कोण कितना होना चाहिए?
उत्तर:
दिया है:
v = 54 किमी/घण्टा
= 54 × \(\frac{5}{18}\) = 15 मीटर/सेकण्ड
r = 30 मीटर
m = 106 किग्रा, g = 10 मीटर/सेकण्ड2
सूत्र tan θ = \(\frac{v}{rg}\) से
tan θ = \(\frac { (15)^{ 2 } }{ 30\times 10 } \) = \(\frac{3}{4}\)
θ = tan-1 (\(\frac{3}{4}\)) = 40°
अर्थात् पटरियों को क्षतिग्रस्त होने से बचाने के लिए पटरियों का झुकाव 40° होना चाहिए।

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प्रश्न 5.32
चित्र में दर्शाए अनुसार 50 kg संहति का कोई व्यक्ति 25 kg संहति के किसी गटके को दो भिन्न ढंग से उठाता है। दोनों स्थितियों में उस व्यक्ति द्वारा फर्श पर आरोपित क्रिया-बल कितना है? यदि 700 N अभिलंब बल से फर्श धंसने लगता है, तो फर्श को धंसने से बचाने के लिए उस व्यक्ति को, गुटके को उठाने के लिए कौन-सा ढंग अपनाना चाहिए?
Bihar Board Class 11 Physics Chapter 5 गति के नियम
उत्तर:
दिया है:
व्यक्ति का द्रव्यमान m1 = 50 किग्रा,
गुटके का द्रव्यमान m2 = 25 किग्रा
प्रथम स्थिति (स्थिति – a) में,
व्यक्ति रस्सी पर 25 g न्यूटन का बल लगाकर ऊपर खींचता है तथा प्रतिक्रिया स्वरूप रस्सी भी व्यक्ति पर नीचे की ओर 25 g N का बल लगाती है।
∴ व्यक्ति पर नेट बल,
F = व्यक्ति का भार + गुटके का भार
= 50g + 25g = 75g = 75 × 10
= 750 न्यूटन।
चूँकि व्यक्ति फर्श पर खड़ा है अतः व्यक्ति फर्श पर यही बल आरोपित करेगा।
द्वितीय स्थिति (स्थिति – b) में, व्यक्ति गुटके को उठाने के लिए, रस्सी पर 25 g न्यूटन का बल नीचे की ओर लगाता है। अतः रस्सी भी इतना ही बल व्यक्ति पर ऊपर की ओर लगाएगी।
∴ व्यक्ति पर नेट बल
F = व्यक्ति का भार – रस्सी द्वारा लगाया गया बल
= 50g – 25g
= 25 g
= 250 न्यूटन।
यही बल व्यक्ति फर्श पर लगाता है। उपरोक्त वर्णन से स्पष्ट है कि स्थिति में फर्श धंस जाएगा। अतः इससे बचाने के लिए यह ढंग अनुप्रयुक्त है।

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प्रश्न 5.33
40 kg संहति का कोई बंदर 600 N का अधिकतम तनाव सह सकने योग्य किसी रस्सी पर चढ़ता है (चित्र)।नीचे दी गई स्थितियों में से किसमें रस्सी टूट जाएगी:
(a) बंदर 6 ms-2 त्वरण से ऊपर चढ़ता है,
(b) बंदर 4 ms-2 त्वरण से नीचे उतरता है,
(c) बंदर 5 ms-1 की एकसमान चाल से रस्सी पर चढ़ता है,
(d) बंदर लगभग मुक्त रूप से गुरुत्व बल के प्रभाव में रस्सी से गिरता है। (रस्सी की संहति उपेक्षणीय मानिए।)
Bihar Board Class 11 Physics Chapter 5 गति के नियम
उत्तर:
माना बन्दर रस्सी पर T बल नीचे की ओर लगाते हुए a त्वरण से ऊपर की ओर चलता है। अतः क्रिया प्रतिक्रिया के नियम से, रस्सी भी बन्दर पर T बल ऊपर की ओर लगाएगी।
∴ बन्दर पर नेट बल, F = T – mg (ऊपर की ओर)
पुनः सूत्र F = ma से,
ma = T – mg
∴ रस्सी पर तनाव, T = mg + ma ……. (1)

(a) दिया है:
a = 6 मीटर/सेकण्ड2, m = 40 किग्रा, g = 10 मीटर/सेकण्ड
∴ T = 40 × 10 + 40 × 6
= 640 न्यूटन
परन्तु रस्सी पर अधिकतम तनाव 600 न्यूटन है अतः रस्सी टूट जाएगी।

(b) दिया है:
a = -4 मीटर/सेकण्ड2
∴ तनाव T = 40 × 10 – 40 × 4
= 240 न्यूटन

(c) दिया है:
a = 0, चूँकि v = 5 मीटर/सेकण्ड नियत है।
∴ तनाव, T = 40 × 10 – 40 × 0
= 400 न्यूटना

(d) मुक्त रूप से गिरते हुए, a = – g
∴ तनाव, T = 40 × g – 40 × g
अतः रस्सी केवल प्रथम स्थिति में टूटेगी।

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प्रश्न 5.34
दो पिण्ड A तथा B, जिनकी संहति क्रमशः 5 kg तथा 10 kg है, एक दूसरे के संपर्क में एक मेज पर किसी दृढ़ विभाजक दीवार के सामने विराम में रखे हैं। (चित्र) पिण्डों तथा मेज के बीच घर्षण गुणांक 0.15 है। 200N का कोई बल क्षैतिजतः A पर आरोपित किया जाता है।
(a) विभाजक दीवार की प्रतिक्रिया, तथा
(b) A तथा B के बीच क्रिया-प्रतिक्रिया बल क्या हैं? विभाजक दीवार को हटाने पर क्या होता है? यदि पिण्ड गतिशील है तो क्या
(c) का उत्तर बदल जाएगा? µs तथा µk के बीच अंतर की उपेक्षा कीजिए।
Bihar Board Class 11 Physics Chapter 5 गति के नियम
उत्तर:
विभाजक दीवार होने पर, पिण्ड विरामावस्था में होंगे।
∴ पिण्डों का त्वरण, a = 0
माना कि पिण्ड A, B पर R1 बल आरोपित करता है जबकि पिण्ड B, A पर विपरीत दिशा में R2 बल आरोपित करता है।
चूँकि पिण्ड A स्थिर अवस्था में है। अतः इस पर नैट बल शून्य होगा।
Bihar Board Class 11 Physics Chapter 5 गति के नियम
∴ 200 न्यूटन – R1
R1 = 200 न्यूटन
पुनः माना पिण्ड B द्वारा दीवार पर आरोपित बल R2 है। क्रिया प्रतिक्रिया के नियम से, पिण्ड B पर दीवार समान बल विपरीत दिशा में आरोपित करेगी।
Bihar Board Class 11 Physics Chapter 5 गति के नियम
चूँकि पिण्ड B भी स्थिर अवस्था में है। अतः इस पर नेट बल, F = 0
∴ R1 – R2
∴ R2 = R1 = 200 न्यूटन
(a) अतः दीवार. की प्रतिक्रिया, R2 = 200 न्यूटन
(b) पिण्डों A तथा B के बीच क्रिया व प्रतिक्रिया,
R1 = 200 न्यटन
विभाजक दीवार हटाने पर पिण्ड गतिशील हो जाते हैं एवम् घर्षण बल कार्यशील हो जाते हैं।
इस दशा में पिण्ड A का बल आरेख चित्र में दिया गया है।
Bihar Board Class 11 Physics Chapter 5 गति के नियम
मेज की अभिलम्ब प्रतिक्रिया, R = 5g न्यूटन।
माना पिण्ड A, त्वरण a से चलना प्रारम्भ करता है तब पिण्ड का गति समीकरण निम्न होगा –
Bihar Board Class 11 Physics Chapter 5 गति के नियम
∴ R1 – R1 µg = 5a …………… (i)
पिण्ड B का बल आरेख चित्र के अनुसार है।
∴ अभिलम्ब प्रतिक्रिया, R’ = 10g
तथा गति का समीकरण
R1 – µR’ = 10a
∴ R1 – 10µg = 10a ……………. (ii)
समी० (i) व (ii) को जोड़ने पर,
200 – 15µg = 15a
त्वरण
a = \(\frac{200-15µg}{15}\)
= \(\frac{200-15×0.15×10}{15}\)
= 11.83 ~ 12 मीटर/सेकण्डर2
अर्थात् पिण्ड गतिशील हो जाएँगे।
a का मान समी० (2) में रखने पर,
R1 – 10 × 0.15 × 10 = 10 × 12
∴ R1 = 120 + 15
= 135 न्यूटन
अर्थात् पिण्डों के गतिशील होने पर भाग (b) का अन्तर परिवर्तित हो गया है।

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प्रश्न 5.35
15 kg संहति का कोई गुटका किसी लंबी ट्राली पर रखा है। गुटके तथा ट्राली के बीच स्थैतिक घर्षण गुणांक 0.18 है। ट्राली विरामावस्था से 20 s तक 0.5 ms-2 के त्वरण से त्वरित होकर एकसमान वेग से गति करने लगती है।
(a) धरती पर स्थिर खड़े किसी प्रेक्षक को, तथा
(b) ट्राली के साथ गतिमान किसी अन्य प्रेक्षक को, गुटके की गति कैसी प्रतीत होगी, इसकी विवेचना कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
गुटके का द्रव्यमान, m = 15 किग्रा,
स्थैतिक घर्षण गुणांक, µs = 0.18
t = 20 सेकण्ड के लिए, ट्राली का त्वरण,
a1 = 0.5 मीटर/सेकण्ड2
t = 20 सेकण्ड के पश्चात् ट्राली का वेग अचर है।
चूँकि प्रारम्भ में ट्राली त्वरित गति करती है। अतः यह एक अजड़त्वीय निर्देश तन्त्र का उदाहरण है।
अतः गुटके पर छद्द बल
F1 = ma = 15 × 0.5 = 7.5 न्यूटन बल पीछे की ओर कार्य करेगा।
ट्राली के फर्श द्वारा गुटके पर लगाया गया अग्रगामी घर्षण बल,
F2 = µN = 0.18 × (15 × 10) = 27 न्यूटन
चूँकि घर्षण बल पश्चगामी बल की तुलना में कम है अतः गुटका पीछे की ओर नहीं फिसलेगा व ट्राली के साथ-साथ गतिमान रहेगा।
(a) धरती पर स्थिर खड़े प्रेक्षक को गुटका ट्राली के साथ गति करता प्रतीत होगा।

प्रश्न 5.36
चित्र में दर्शाए अनुसार किसी ट्रक का पिछला भाग खुला है तथा 40 kg संहति का एक संदूक खुले सिरे से 5 m दूरी पर रखा है। ट्रक के फर्श तथा संदूक के बीच घर्षण गुणांक 0.15 है। किसी सीधी सड़क पर ट्रक विरामावस्था से
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गति प्रारंभ करके 2 ms-2 से त्वरित होता है। आरंभ बिंदु से कितनी दूर चलने पर वह संदूक ट्रक से नीचे गिर जाएगा? (संदूक के आमाप की उपेक्षा कीजिए।)
उत्तर:
दिया है:
घर्षण गुणांक, µ = 0.15
संदूक का द्रव्यमान = 40 किग्रा.
खुले सिरे से दूरी, s = 5 मीटर, ट्रक के लिए। µ = 0, त्वरण = 2 मीटर/सेकण्ड2 ट्रक द्वारा तय दूरी (जबकि संदूक गिर जाता है) = ?
चूँकि ट्रक की गति त्वरित है अत: यह एक अजड़त्वीय निर्देश तन्त्र होगा।
अतः ट्रक के पीछे रखे संदूक पर पीछे की ओर एक छद्म बल (F = ma) होगा।
F = 40 × 2 = 80 न्यूटन
संदूक पर स्थैतिक घर्षण बल (µsN) आगे की ओर लगेगा।
∴ संदूक पर नेट बल,
F1 = F – µsN
= 80 – 0.15 × 40 × 10
= 20 न्यूटन (पीछे की ओर)
अतः ट्रक के सापेक्ष संदूक का त्वरण
a1 = \(\frac { F_{ 1 } }{ m } \) = \(\frac{20}{40}\) = 0.5 मीटर/सेकण्ड2 (पीछे की ओर)
माना संदूक 5 मीटर चलने में t समय लेता है।
∴ सूत्र s = ut + \(\frac{1}{2}\) at2 से,
5 = 0 × t + \(\frac{1}{2}\) × 0.5 × t2
∴ t2 = 20
∴ इस समय में तय दूरी
s = ut + \(\frac{1}{2}\) at2
= 0 + \(\frac{1}{2}\) × 2 × 20 = 20 मीटर

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प्रश्न 5.37
15 cm त्रिज्या का कोई बड़ा ग्रामोफोन रिकॉर्ड 33 \(\frac{1}{3}\) rev/min की चाल से घूर्णन कर रहा है। रिकॉर्ड पर उसके केंद्र से 4 cm तथा 14 cm की दूरियों पर दो सिक्के रखे गए हैं। यदि सिक्के तथा रिकॉर्ड के बीच घर्षण गुणांक 0.15 है तो कौन-सा सिक्का रिकॉर्ड के साथ परिक्रमा करेगा?
उत्तर:
दिया है:
पथों की त्रिज्याएँ
r1 = 0.04 मीटर, r2 = 0.14 मीटर
घूर्णन आवृत्ति v = 33 \(\frac{1}{3}\) चक्र/मिनट
\(\frac{100/3}{60}\) = \(\frac{5}{9}\) चक्र/सेकण्ड
घर्षण गुणांक v = 0.15
सिक्कों को रिकॉर्ड पर घुमाने हेतु आवश्यक अभिकेन्द्र बल m1r1ω2 व m2r2ω2, स्थैतिक घर्षण बल से प्राप्त होगा।
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पहले सिक्के के लिए, r1 = 0.04 मीटर > 0.12
दूसरे सिक्के के लिए,
जबकि, r2 = 0.14 मीटर > 0.12 मीटर
अतः पहला सिक्का रिकॉर्ड के साथ परिक्रमा करेगा,
जबकि दूसरा सिक्का रिकॉर्ड से फिसलकर बाहर गिर जाएगा।

प्रश्न 5.38
आपने सरकस में ‘मौत के कुएँ’ (एक खोखला जालयुक्त गोलीय चैम्बर ताकि उसके भीतर के क्रियाकलापों को दर्शक देख सकें) में मोटरसाइकिल सवार को ऊर्ध्वाधर लूप में मोटरसाइकिल चलाते हुए देखा होगा। स्पष्ट कीजिए कि वह मोटरसाइकिल सवार नीचे से कोई सहारा न होने पर भी गोले के उच्चतम बिन्दु से नीचे क्यों नहीं गिरता? यदि चैम्बर की त्रिज्या 25 m है, तो ऊर्ध्वाधर लप को पूरा करने के लिए मोटरसाइकिल की न्यूनतम चाल कितनी होनी चाहिए?
उत्तर:
गोलीय चैम्बर के उच्चतम बिन्दु पर, मोटर साइकिल सवार चैम्बर को अपकेन्द्र बल के कारण बाहर की ओर दबाता है जिसके प्रतिक्रिया स्वरूप चैम्बर भी सवार पर गोले के केन्द्र की ओर प्रतिक्रिया R लगाता है। यहाँ मोटर साइकिल व सवार का भार (mg) भी गोले के केन्द्र की ओर कार्य करते हैं। सवार को वृत्तीय गति के लिए आवश्यक अभिकेन्द्र बल दोनों बल ही प्रदान करते हैं। इसी कारण सवार गिरता नहीं है।
∴ इस स्थिति में गति का समीकरण
R + mg = \(\frac { mv^{ 2 } }{ r } \)
परन्तु ऊर्ध्वाधर लूप को पूरा करने के लिए उच्चतम बिन्दु पर न्यूनतम चाल होगी।
∴ R = 0 होगा।
⇒ mg = \(\frac { mr^{ 2 } }{ r } \)
∴ v = \(\sqrt{gr}\) = \(\sqrt{10×25}\) = 15.8 मीटर/सेकण्ड

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प्रश्न 5.39
70 kg संहति का कोई व्यक्ति अपने ऊर्ध्वाधर अक्ष पर 200 rev/min की चाल से घूर्णन करती 3 m त्रिज्या की किसी बेलनाकार दीवार के साथ उसके संपर्क में खड़ा है। दीवार तथा उसके कपड़ों के बीच घर्षण गुणांक 0.15 है। दीवार की वह न्यूनतम घूर्णन चाल ज्ञात कीजिए, जिससे फर्श को यकायक हटा लेने पर भी, वह व्यक्ति बिना गिरे दीवार से चिपका रह सके।
उत्तर:
दिया है:
m = 70 किग्रा,
घूर्णन आवृत्ति, v = 200 चक्र/मिनट
= \(\frac{200}{60}\) = \(\frac{10}{3}\) चक्र/सेकण्ड
त्रिज्या, r = 3 मीटर
घर्षण गुणांक, µ = 0.15
घूर्णन करते समय, व्यक्ति दीवार को बाहर की ओर दबाता है तथा दीवार का अभिलम्ब प्रतिक्रिया आवश्यक अभिकेन्द्र बल प्रदान करती है जो कि केन्द्र की ओर दिष्ट होता है।
∴ Fc = mrω2 …………….. (1)
घर्षण बल, जोकि व्यक्ति के भार को सन्तुलित करता है,
F = mg = µFc ……………….. (2)
∴ ω2 = g
∴ mg = µ.mrω2
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= 4.72
= 5 रेडियन/सेकण्ड

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प्रश्न 5.40
R त्रिज्या का पतला वृत्तीय तार अपने ऊर्ध्वाधर व्यास के परितः कोणीय आवृत्ति ω से घूर्णन कर रहा है। यह दर्शाइए कि इस तार में डली कोई मणिका ω ≤ \(\sqrt{g/R}\) के लिए अपने निम्नतम बिंदु पर रहती है। ω = \(\sqrt{2g/R}\) के लिए, केंद्र से मनके को जोड़ने वाला त्रिज्य सदिश ऊर्ध्वाधर अधोमुखी दिशा से कितना कोण बनाता है। (घर्षण को उपेक्षणीय मानिए।)
उत्तर:
माना कि किसी समय मणिका R त्रिज्या के गोले में
A बिन्दु पर है। A बिन्दु पर, वृत्तीय तार की अभिलम्ब प्रतिक्रिया M नीचे की ओर AO के अनुदिश होगी जिससे ऊर्ध्वाधर तथा क्षैतिज
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घटकों को वियोजित कर सकते हैं। यहाँ N cos θ भार को सन्तुलित करता है जब N sin θ आवश्यक अभिकेन्द्र बल mrω2 प्रदान करता है।
जहाँ O = वृत्त का केन्द्र
θ = त्रिज्या सदिश द्वारा ऊर्ध्व AO से बना कोण
N cos θ = mg
तथा N sin θ = mRω2 sin θ …………….. (2)
समी० (1) से (2) से भाग देने पर
cos θ = \(\frac { g }{ R\omega ^{ 2 } } \)
मणिका को निम्नतम बिन्दु B पर रखने के लिए θ = 0 अतः cos θ = 1
\(\frac { g }{ R\omega ^{ 2 } } \) = 1
ω = \(\sqrt{g/R}\)
जब ω \(\sqrt{g/R}\) मणिका निम्नतम बिन्दु B से ऊपर उठ जाएगा।
अतः मणिका को B बिन्दु पर रखने के लिए,
ω = ≤ \(\sqrt{g/R}\) इति सिद्धम्
∴ जब = ω = ≤ \(\sqrt{2g/R}\)
समी० (3) से,
cos θ = \(\frac{g}{R.2g}\) × R = \(\frac{1}{2}\) = cos 60°
θ = 60°

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